पढ़ा हुआ याद कैसे रखे




पढ़ा हुआ  याद रखने के  कारगर टिप्‍स

परीक्षाऐ अब ज्यों ज्यों नजदीक आ रही है त्यों त्यों ऐसा लगता है कि हमने जो भी याद किया जो कुछ भी रटा है वो भुलता जा रहा हूं।

एक बार बैठकर ढेर सारा रट लेने से आपको तात्कालिक लाभ हो सकता है लेकिन यदि लंबे समय तक कुछ याद रखना है, तो यह तरीका काम नहीं आएगा। इसके लिए आपको अलग रणनीति अपनानी होगी।

पढ़ना मतलब परीक्षा की तैयारी करना और परीक्षा की तैयारी करना मतलब याद करना"। कुल मिलाकर यही है हमारे एजुकेशन सिस्टम का निचोड़। जो बेहतर याद रख पाते हैं, वे परीक्षाओं में बेहतर अंक पा जाते हैं और आगे अपने मनपसंद कोर्स में प्रवेश भी पा लेते हैं। ऐसे में यह एक बहुत बड़ा सवाल बन जाता है कि पढ़ने का वह कौन-सा तरीका है, जिससे आप कोर्स मटेरियल बेहतर तरीके से याद कर सकते हैं।

समझ‍िए  एग्‍जाम पैटर्न

दरअसल यह व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर करता है। कुछ लोगों में यह जन्मजात क्षमता होती है कि वे झटपट कुछ पढ़कर याद कर लेते हैं। आपमें से कई ऐसे होंगे जो बड़े फख्र से कहते हैं कि मैंने तो पेपर से एक दिन पहले जमकर पढ़ाई की और अगले दिन पेपर शानदार गया। चलिए, मान लिया कि कल का पढ़ा आज आपको बहुत अच्छी तरह याद रहा लेकिन क्या कुछ महीनों या सालों बाद भी वह आपको याद रहेगा? आखिर करियर बनाने के लिए केवल एक परीक्षा पास कर लेना ही काफी नहीं है। कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जो आपको लंबे समय तक याद रखनी ही होती हैं। परीक्षा निपट जाने के बाद भी। विषय के ये बेसिक्स कल याद कर आज परीक्षा में लिखकर कल फिर भूल जाने से काम नहीं चलेगा।

दिमाग बनाम सूटकेस

वैज्ञानिक भी मानते हैं कि रटकर आप परीक्षा में अच्छे अंक तो ला सकते हैं लेकिन इस प्रकार झटपट रटना वैसा ही है, जैसे कि आप किसी सस्ते सूटकेस में जल्दबाजी में ठूंस-ठूंसकर सामान भरते हैं। कुछ समय के लिए तो सूटकेस वह सामान ढो लेगा लेकिन फिर अचानक वह खुलकर सारा सामान बाहर फेंक देगा। इसी तरह हमारा दिमाग कुछ समय तक तो रटा हुआ (या कहें ठूंसा हुआ) याद रख लेता है लेकिन फिर किसी दिन दिमाग में ठूंसी वह सारी जानकारी बाहर फिंक जाती है और दिमाग कोरा हो जाता है। फिर जब आपको वह चीज याद करनी हो,

तो भला वह याद आएगी कैसे? वह तो अब दिमाग में रही ही नहीं! इसके विपरीत, यदि हम सूटकेस में शांति से, धीरे-धीरे, जमा-जमाकर सामान रखें, तो वह बेहतर ढंग से और लंबे समय तक जमा रहेगा।

इसी तरह दिमाग में भी अगर हम धीरे-धीरे, व्यवस्थित ढंग से जानकारी भरते जाएंगे, तो वह कहीं अध‍िक समय

तक दिमाग में सुरक्षित रहेगी। यानी एक बार बैठकर ढेर सारा पढ़ने के बजाए एक घंटा आज, एक घंटा संडे को, फिर एकाध घंटा अगले सप्ताह पढ़ें। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह गैप दे-देकर पढ़ने से यह फायदा

होता है कि बाद में जब आप पढ़ा हुआ याद करने की कोशिश करते हैं, तो वह आपको बेहतर याद आता है। याद रखने का यह तरीका इतना कारगर है कि इसे अपनाने पर आपको परीक्षा के समय ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी।

कारगर हैं प्रैक्टिस टेस्ट

एक बार बैठकर थोक में रट डालने के बजाए क्रमिक रूप से पढ़ने की इसी विध‍ि का एक रूप है प्रैक्टिस टेस्ट देना। वैज्ञानिकों ने पाया है कि प्रैक्टिस टेस्ट देते रहने से दिमाग में सूचनाएं एक अलग तरीके से स्टोर हो जाती हैं, जो लंबे समय तक बनी रहती हैं। वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिक डॉ हेनरी रोडिगर ने एक प्रयोग

किया। उन्होंने कॉलेज के कुछ विद्यार्थियों को रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन टेस्ट के लिए साइंस के पैसेज पढ़ने को दिए। विद्यार्थियों को इन्हें संक्षिप्त समय में पढ़ डालना था। जब विद्यार्थियों ने लगातार दो सेशन में एक ही पैसेज दो बार पढ़ा और इसके तुरंत बाद टेस्ट दी, तो उन्हें बेहतरीन अंक प्राप्त हुए। मगर फिर वे उस जानकारी को भूलने लगे।

दूसरी तरफ जब विद्यार्थियों ने एक सेशन में पैसेज पढ़ा और दूसरे सेशन में प्रैक्टिस टेस्ट दी, तो फिर उन्होंने दो दिन बाद और फिर एक सप्ताह बाद हुई टेस्ट में भी बढ़िया परफॉर्म किया। यानी एक बार पढ़कर प्रैक्टिस टेस्ट देने से उन्हें वह जानकारी बेहतर ढंग से याद रही।

याद करना मुश्किल, तो भूलना भी

स्टडी मटेरियल याद करने के मामले में एक बात गौरतलब है कि जिसे याद करने में ज्यादा मेहनत लगती है, उसे भुलाना भी उतना ही मुश्किल होता है। इसलिए जब भी आप पढ़ने बैठें और उसे याद करने में मुश्किल पेश आए, तो घबराएं नहीं। यह तो इस बात की निशानी है कि यह मटेरियल आपको लंबे समय तक याद रहने वाला है।

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