तुम परेशान मत होना

परिधि चौंक के नींद से जागी । एक अजीब सा गहरा डर या नकारात्मक भाव उसके दिल को घेरे जा रहा था ।

उसका बीपी हाई हो रहा था । उसने तुरंत गहरी सांसे लेना शुरू की और किचेन में जाके पानी पीने लगी ।

वापिस आके बेड पे बैठी । पर कोई फायदा नहीं हुआ । बीपी हाई होता जा रहा था । हार्ट बीट बढ़ती जा रही थी ।

घबराहट पैदा करने वाला जैसे कोई काला धुवां उसके दिल को दबाए जा रहा था । वो महसूस करने लगी जैसे उसका दम घुट जाएगा । वो गहरी सांसे लेने लगी ।

परिधि याद करने लगी कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा था । जिस दिन से उसने रुद्रेश से बात करना शुरू की थी । उसी दिन से हर सुबह उठते ही उसे ऐसा ही लगता था ।

इस पैनिक फीलिंग के बाद उसे बहुत नेगेटिव ख्याल आते थे ।

" मुझे उससे बात नहीं करनी चाहिए । कुछ ठीक नहीं हो रहा है । मैं गलत दिशा में बढ़ रहीं हूं ।

डर लग रहा है । कुछ बुरा हो सकता है । वो मेरे लिए ठीक नहीं है । मुझे यहीं रुक जाना चाहिए । "

परिधि खुद से सवाल करने लगी थी कि ये उसका इंट्यूशन है या बेकार का डर । आखिर रुद्रेश ने उसके साथ कुछ भी गलत नहीं किया है कभी भी ।

जैसे जैसे दिन चढ़ता । वो कॉलेज जाती । रुद्रेश के एसएमएस आते । वो दोनो चैटिंग करते । और रात होते होते वो उसको फिर अपना मानने लगती ।  लेकिन अगली सुबह फिर वैसी ही फीलिंग ।

दिन में अपनी उन फीलिंग्स का जब परिधि को ख्याल आता । तो उसे एक तरफ रुद्रेश से डर लगने की सुबह की फीलिंग याद आती ।

दूसरी ओर रुद्रेश से अगर उसने बात करनी बंद कर दी तो उसका क्या होगा। क्या वो सेह पाएगा। कहीं टूट तो नहीं जाएगा । इस खयाल से भी डर जाती ।

जब तक परिधि ने रुद्रेश से अपने प्यार का  इजहार नहीं किया था । वो अक्सर उससे कहा करती थी ।

" देखो, शायद मैं तुमसे हमेशा बात ना कर पाऊं। शायद हमारी बात होना बंद हो जाए । लेकिन तुम परेशान मत होना । शायद मैं तुममें अपना हमसफर या पति ना देख पाऊं।

अगर मैं तुम्हे ना चुनूं। तुमसे बात करना बंद कर दूं। तो तुम दुखी मत होना । लाइफ में आगे बढ़ना । स्ट्रॉन्ग बनना। "

ये सब रुद्रेश को कहकर परिधि खुद ही रुद्रेश का दुख इमेजिन करके घबरा जाती । और खुद को रुद्रेश से बात करने से भी रोक नहीं पाती ।

रुद्रेश शुरू में तो ये सुन के सीरियस हो जाता था । पर धीरे धीरे उसने परिधि की ऐसी बातों पे हस्ना शुरू कर दिया ।

वो हस्ते हुए हर बार कहता । " अच्छा बाबा, नहीं होऊंगा परेशान , अगर तुमने मुझे नहीं भी चुना तो।" । परिधि को यह सुन कर चैन पड़ता । और दोनों फिर से चैटिंग करने लगते ।

परिधि ने कई बार रुद्रेश से कहा भी था कि अब बात नहीं होगी । पर रुद्रेश परेशान तो नहीं हो रहा होगा । ऐसा सोच के वो खुद ही कॉल मिला देती ।

आखिर इस रोज़ रोज़ की कशमकश से तंग आकर परिधि ने फैसला किया कि वो अब डरेगी नहीं। इस डर का सामना करेगी ।

अब रोज सुबह उठते ही जब उसे ऐसे ख्याल आते तो वो पानी पी के गहरी सांस लेती और खुद से कहती - " मैं डरूंगी नहीं, जब मैं कुछ गलत नहीं कर रही तो मेरे साथ कभी कुछ ग़लत नहीं होगा ।"

वो ऐसा मन में दोहराती और दिल की गहराइयों में उठने वाला वो नकारात्मक तूफान थम जाता ।

ऐसा ही एक किस्सा परिधि को याद आने लगा जब उसने रुद्रेश से एक बार कहा था । अब हमें बात बंद कर देनी चाहिए । रुद्रेश भी क्या करता । कुछ रिक्वेस्ट की फिर बेमन से  मान गया ।

रुद्रेश ने अपनी ओर से कॉल मैसेज बंद कर दिए । पर परिधि उसके बारे में सोचती रही । परिधि का अकेलापन और रुद्रेश से मिल सकने वाले प्यार की कल्पना परिधि के जहन में रोज़ दस्तक देने लगी ।

परिधि ने खुद ही अपनी बात काट कर रुद्रेश को कॉल मिलाई और उससे पूछा कि वो क्या कर रहा है ।

उसने बताया कि वो मंदिर जा रहा है ।

परिधि ने जब उससे पूछा कि आज बड़े मंदिर क्यों जा रहा है ।

" भगवान से तुम्हे मांगने ।" रुद्रेश का जवाब सुनकर परिधि का सारा संकल्प एक किनारे लग गया था । और वो उससे मिलने को बेताब हो गई थी ।

" मै भी कॉलेज के लिए निकल रही हूं, साथ में मंदिर चलते है ।" परिधि ने रुद्रेश को कॉल करके कहा था ।

मंदिर में दोनों भगवान की मूरत के सामने हाथ जोड़े खड़े थे । वो रुद्रेश को देख रही थी । मगर रुद्रेश उससे गुस्सा था ।

वो भगवान की तरफ ही देखे जा रहा था । रुद्रेश का चेहरा उसकी आंखे , उसके होंठ परिधि ने उस दिन पहली बार गौर से देखे थे । और वो उसे दुनिया की सबसे सुंदर आंखे और होंठ लगे थे ।

" इसकी हर इच्छा पूरी करना देवी मां। " आंख बंद करके परिधि ने यही प्रार्थना करी थी ।...

hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.