वो रात भाग 1

गांव से निकलकर खेतो की तरफ जाती हुई सड़को पे तीन दोस्त सायकिल से जाते हुए सांझ का वक़्त था उधर ही एक सरकारी स्वाश्थ्य केंद्र था जो अब खंडहर में बदल चुका है तीनो दोस्त सायकिल बगल में खड़ा करके बरामदे पे बैठ गए।
तीनो सायद रेस लगाकर आ रहे थे इसलिए हकम भी रहे थे।

"" देखा मैने कहा था ना मुझसे रेस मत लगाओ हार जाओगे""
महफूज़ ने कहा

आसिफ…""हाँ हाँ एक दिन जितने से नही होता है आज मेरी सायकिल खराब थी ना इसलिए तुम जीत गए""

   "" छोड़ो अब अब झगरना प्यास लग रही चलो पानी पीते हैं"" अफरीदी ने कहा।


तीनो पानी पीने वही चापाकल पे गए पानी पीने के बाद वही बैठ कर बाते करने लगे। तीनो थके हुए थे हवा भी ठंडी ठंडी चल रही थी तीनो की आंख लग गई।
""उठो उठो 9 बज रहे हैं"" घड़ी में समय देखते हुए महफूज़ ने कहा थोड़ी देर झिकझोरने के बाद दोनो भी उठ गए देखा तो सच मे रात हो चली थी दूर दूर तक कोई नही दिख रहा सईद सब घर जा चुके खेतो से घर जा चुके थे रह गई थी तो सिर्फ ये रात और उसके साथ वी तीनो।

""यार रात बहोत हो चुकी हमलोग को सभी घर पे होना चाहिए था"" अफरीदी ने बोला

""हाँ हाँ चलना चलना चाहिए मम्मी कहती है कि रात में खेतों में भूत रहते हैं"" आसिफ ने बोला और जोर जोर से हँसने लगा

महफुज़,"" तुम्हे ये सब मजाक लग रहा है"" डांटते हुए बोला

तीनो सायकिल घुड़काते हुए गांव की तरफ चल दिया अभी चले हुए पांच मिनिट ही हुआ था कि आसिफ अचानक से अजीब तरह से हँसने लगा और रोने लगा और अजीब अजीब तरह की हरकत करने लगा।

महफूज़,""मैंने मना किया था भूतो का मजाक मत बनाओ अब देखो भूत आ गया ना इसपे मेरी बात पहले सुन लेता तो अभी ये नही ना होता ""

""वो सब छोड़ो अभी क्या करना है"",टोकते हुए अफरीदी ने कहा
तभी फिर से जोर से हंसते हुए आसिफ ने बोला
""भी मैं मजाक कर रहा हूँ तुम लोग तो सच मे डर गए""

महफूज़,""देख आसिफ ऐसा मजाक तू फिर नही करेगा नही तो इस बार भूत आए या ना आए मैं भूत बन जाऊँगा समझा ना""

असुफ़,""माफ् करदो भाई मै तो सिर्फ ये कहना चाहता था कि भूत वुत कुछ नही होता है,ये सब अंधविस्वास है भाई ये 2014 है इसमें भूत नहीं है""

""हाँ हाँ चुपकर सायंटिस्ट बाबु ये सब कही और जा के बोलना कही भूत ने सुन लिया न तो लेने के देने पड़ जाएंगे"", महफूज़ थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए कहा।

अफरीदी,""अब चलो भी आपस मे लड़ना बंद करो और घर चलो""

आसिफ ,""हाँ यार अफरीदी सही बोल रहा घरवाले परेशान हो रहे होंगे""

फिर वो लोग आपस मे गप्पे मारते हुए चलने लगे। लगभग दो घंटे चलने के बाद

आसिफ,""यार हमलोग बहोत देर से चल रहे गांव इतना दूर तो नही है आज हो क्या गया है""

""हाँ यार 11 बज गए हैं अब तक हमलोग को घर पे होना चाहिए"" महफूज़ समय देखते हुए बोला तभी डरते हुए अफरीदी ने कहा

""भाई पीछे देखो हम स्वाश्थ्य केंद्र से बस थोड़ा ही दूर आये हैं""

आसिफ,""भाई मुझे भी बहोत डर लग रहा है ऐसा कैसे हो सकता है इतनी देर चलने के बाद भी हमलोग बस थोड़ी दूर ही पहुँचे""


महफूज़, ""तुमलोग वहां देखो एक झोपड़ी दिखाई दे रही है चल करके देखना चाहिए सायद वहां कोई हो""


आसिफ,"" यार हमलोग तो बचपन से यहां आते पहले तो वहां कोई झोपड़ी नही थी""


अफरीदी,"" यार हो सकता है किसी किसान की हो जो फसल की रखवाली के लिए रात में सोता हो हमे चल के देखना चाहिए""


महफूज़,"" अफरीदी सही कह रहा है चलो चलकर देखते हैं""


आसिफ,"" यार मुझे बहोत डर लग रहा है वहां खतरा भी हो सकता है

महफूज़,"" तुमने तो बोला तो की तू किसी से नही डरता अब क्या हुआ, निकल गई सारी हेकड़ी""


आसिफ ,"" यार वो तो मैं सिर्फ फेकता था ""


अफरीदी,"" चलो भाई अब वही एक सहारा है इस रात में""

वो लोग फिर उस झोपड़ी के ओर चलने लगे

वो तीनो उस झोपड़ी की तरफ जाने लगते हैं तभी अचानक मौसम खराब हो जाती है बिजलियाँ कड़कने लगती मानो ऐसा लग रहा हो कि कोई पहाड़ टूट कर गिर रहा है।
तीनो का डर से हाल खराब हो रहा था उसे समझ नही आ रहा था के ये सब हो क्या रहा वो जल्दी से उस झोपड़ी के जा रहे थे। तभी उन लोगो को उस झोपड़ी से लालटेन की रोशनी नजर आने लगी। झोपड़ी के पास पहुँच कर महफूज़ ने आवाज लगाई


""कोई है यहां पे""

तभी अंदर से एक बूढ़ा आदमी निकल कर आता है और कहता,""कौन हो बाबू तुमलोग और इतनी रात गए यहाँ क्या कर रहे हो""

अफरीदी,"" बाबा हमलोग पास के गांव से हैं""

महुफज़,""बाबा हमलोग स्वाश्थ्य केंद्र के पास बैठे बात कर रहे थे तभी नींद आ गई। जब आंख खुली तो रात हो चुकी थी और गांव जाने के लिए तो रास्ता भटक गए हैं अचानक से मौसम भी खराब हो गई तो हमे ये झोपड़ी दिखा तो हमलोग यहां आ गए""


""अच्छा किया जो यहां आ गए चलो अंदर चलो लगता है बारिश होने वाली है"",बूढ़े आदमी ने कहा और वो लोग अंदर आ गए महफूज़ ने समय देखा तो 12:30 हो चुका था उन लोगो ने सोचा क्यों न आज की रात यहां बिताया जाए।
सबने सहमती दे दी ।

बूढ़े आदमी ने एक चारपाई लगा वो लोग उसी पे बैठ गए। इतना सब होने के बाद वो लोग थक चुके थे तो कब आँख लग गई पता ही नही चला। करीब 3 बजे महफूज़ की नींद कुछ गुर्राने की आवाज से तो सामने देखा कि एक विशाल दानव उसके सामने खड़ा है। अब तो उसकी डर से हालत खराब ही चुकी थी फिर भी काँपते हुए आसिफ और अफरीदी को जगाया उन दोनों की भी हालत खराब ही गई।
वो लोग समझ नही पा रहे थे कि क्या करे।


आसिफ,``भाई अब क्या करे ये हमे मार डालेगा``

अफरीदी,""वो देखो अगर हमें मिल जाये तो काम बन सकती है""(एक लोहे की रॉड की तरफ इशारा करते हुए कहा जो चारपाई के पास ही पड़ी थी)

तभी आसिफ हिम्मत दिखाते हुए रॉड को उठता है और उस मॉन्स्टर के सर पे मारता है जिससे वो कुछ समय के लिए मूर्क्षित है। फिर वो लोग वहाँ से भागना शुरू कर देते हैं और तब तक भागता रहता है जब तक के वो थक ना जाये। भागते-भागते वो लोग एक जंगल मे पहुँच जाता जी उसने पहले कभी नही देखी थी।


महफूज़,""यार पहले तो हमने कभी इस जंगल को नही देखा था""


आसिफ,"" हाँ भाई हम तो इस एरिया के चप्पे चप्पे से वाकिफ हैं आज से पहले तो हमने कभी इसे नही देखा।""


अफरीदी,,""चुपकरो तुम दोनो हमारे साथ जो अभी हो रहा है वो कभी हुआ था क्या?""

आसिफ,""हमलोगों को चलते रहना चाहिए। पता नही कब और किधर से कोई खतरा आ जाए पता नही है""

और फिर वो लोग चलने लगते है। लगभग 5 बज चुके थे।

आसिफ,""लगता है सुबह होने वाली है""।

महुफज़,""हैं पांच बजे चुके हैं। हमे थोडी देर और चलते रहना शायद हम कोई गांव पहुच पाए। वहां कुछ पता चले कि आखिर हुआ क्या था हमारे साथ।""


अफरीदी,"" यार मुझे कुछ ठीक नही लग रहा। चक्कर आ रहे हैं(कहते हुए वो गिर पड़ा)।


आसिफ,""यार मुझे...........।(अपनी बात पूरी भी नही कर पाया और महफूज़ भी वहीं गिर पड़ा)


जब उन लोगो की आँख खुली तो वो लोग उसी स्वाश्थ्य केंद्र पे उसी हालत में थे जिस हालात में वो कल शाम को बैठे थे।
उसे ये समझ नही आ रहा था ये सब क्या है सायकल जो उस झोपड़ी के पास राह गई थी वो भी वही जहा उसने खड़ी की थी और दूर दूर तक न तो कोई झोपड़ी थी और ना ही कोई जंगल जिसे उसने काल रात में देखा था।

वो लोग समझ नही पा रहे थे कि ये सब क्या हो रहा है। उसके साथ कल रात क्या हुआ था। ये सब सोचते हुए घर की तरफ चल दिये।।


continue in next part

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