काश!गृहणी भी अपना टाइम टेबल बना पाती

         उम्र चालीस का आंकड़ा पार कर चुकी थी तो वजन कुछ बढ़ गया था। गोरा रंग,काली-काली,गोल -गोल ,बड़ी-बड़ी आँखें ,कंधे तक कटे हुए बाल,कुल मिलाकर आकर्षक व्यक्तित्व की धनी, सत्रह वर्षों के विवाहित जीवन में, दो बच्चों की माँ, बिन्दु ....अब तक पूरी तरह गृहणी बन चुकी थी।
           सुबह साढ़े पांच बजे के अलार्म के साथ शुरू होने वाली दिनचर्या में , सुई के कांटें की तरह, समय के साथ बिन्दु के शरीर रूपी मशीन निरंतर चलती रहती।
          हर काम समय पर करने के लिए कभी वो मेज - कुर्सियों से टकराती तो कभी, अपना ही हाथ रसोई में जला लेती। कभी कोई गिलास गिरकर टूट जाता तो कभी , दूध उबल कर गिर जाता...... वो थोड़ा चिढ़चिढ़ाती , थोड़ा बड़बड़ाती, पर उसके हाथ नहीं रुकते। अपने स्लीपर को घिसटते हुए पूरे घर में घूम - घूम कर काम करती रहती।
           बच्चों को तैयार कर के स्कूल भेजती तो ,उसके पति की आवाज आ जाती " बिन्दु डार्लिंग, चाय ! बच्चों के साथ यशोदा मैया का रूप धारण करने वाली बिन्दु झट से राधा रानी बन के चाय ले कर बेडरूम में पहुँच जाती।चाय की चुस्कियों के साथ पति के साथ बिताये पल उसमें नयी ऊर्जा भर देते।
         पति के ऑफिस जाने के बाद बाजार जाती ,कोई मावाली उसे घूरता या छेड़छाड़ करता तो दुर्गा देवी का रूप धरना उसे आता था।ऐसी खरी-खोटी सुनाती कि उसे क्या किसी भी लड़की को छेड़ने की हिमाकत ना कर पाता।
        फिर दोपहर का खाना ... शाम को बच्चों का होमवर्क ... फिर रात का खाना...उफ्फ्फ .......।ब्रेक तो मिलता ही नहीं था।
          दोपहर में थोड़ा आराम करना चाहती तो कभी फोन की घंटी , कभी दरवाजे घंटी,कभी कोई पड़ोसन आ जाती तो कभी कोई सेल्स मैन आ के उसके आराम में बाधा उत्पन्न कर देता। सुबह -सुबह सबके  लिए टिफिन और नाश्ता बना के चक्कर में प्रकृति की पुकार को भी अनसुना करना पड़ता। सबके जाने के बाद ही बाथरूम का उपयोग कर पाती ... बेचारी बिन्दु।
        इतना ही कम था कि आज बच्चों ने लाकर परीक्षा का टाइम टेबल पकड़ा दिया। ऐसे समय जी चाहता है काश ! दिन के चौबीस घंटों की सीमा कुछ बढ़ा दी जाय।खैर ...... ! नये सिरे से बिन्दु ने बच्चों के सोने , खाने , और विषय के अनुसार पढ़ने का टाइम टेबल बनाया।
        तभी उसके दिमाग में विचार आया कि ...
"काश गृहणी भी अपना टाइम टेबल बना पाती जिसमें उसके खाने, सोने और अपने लिए कुछ फुर्सत के पलों का निश्चित समय होता ....काश!...।

वन्दना वर्मा 'बिंदु '

hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.