गुलदार

शाम का धुँधलका छाने लगा था, वैसे भी बारिश के मौसम में पहाड़ो पर शाम जल्दी गहराने लगती है। हरिद्वार से ऋषिकेश जाने वाली सड़क में दोनों तरफ  दूर दूर तक फैला जंगल  वातावरण की भयावता को और बढ़ा रहा था। .....वो तेज तेज कदमो से  घर की ओर चली जा रही थी या यूं कहें कि भाग रही थी..... तभी उसने एक बोर्ड लगा देखा..... "हाथी और गुलदार बाहुल्य क्षेत्र", उसके बदन मे झुरझुरी सी दौड़ गयी,....पहली बार जब उसने यह बोर्ड देखा था तो अपने पिता से पूछा था,"पापा यह गुलदार कौन सा जानवर होता है??.. तब उसके पिता जो एक वन्य अधिकारी थे, उन्होंने बताया की यहाँ की स्थानीय भाषा में तेंदुए को गुलदार कहते है,..... उसके बाद से हरिद्वार कोचिंग जाते समय अनेको बार उसने यह बोर्ड देखा पर गुलदार कभी नही दिखा।..…
    ....आज अचानक कोचिंग से लौटते समय उसको देर हो गयी और  फिर  उसकी स्कूटी भी रास्ते में बिगड़ गयी...वो जल्दी जल्दी स्कूटी गसिटते हुए घर की ओर चली जा रही थी।उसका घर वहाँ से लगभग 700मीटर की दूरी पर रह गया था, उसने अपनी चल और तेज़ कर दी,वो जल्द से जल्द घर पहुंचना चाहती थी....तभी अचानक....

      बगल की झाड़ियों में सरसराहट हुई और जब तक वह क़ुछ समझ पाती, किसी ने उसे झाड़ियों में घसीट लिया,उसकी घुटी घुटी सी चीख़ निकल गयी...वह मदद के लिए चिल्लाती इसके पहले ही किसी ने उसका मुँह बंद कर दिया,कुछ हाँथ उसके शरीर पर इधर उधर रेंग रहे थे,...
उसने छुड़ाने की पुरज़ोर कोशिश कोशिश की पर हाँथो का दबाव बढ़ता जा रहा था और वो निढाल होती जा रही थी,...
      तभी  संन्नाटे को चीरती एक भयंकर दहाड़ सुनाई दी,...
शरीर पर रेंगते हाँथ एक झटके में रुक गए और आवाज़ें सुनाए पड़ीं,"अबे भाग!लगता है गुलदार आ गया", पकड़ ढीली होते ही वह पूरी ताकत से सड़क की ओर भागी, पीछे पीछे लड़के भी झाड़ियों से बाहर निकल आए,सड़क के बीचोंबीच पहुंचते ही उसका खून जम गया, दूसरी ओर गुलदार खड़ा था।
      उधर सभी लड़के अपनी कर में बैठ चुके थे, वो चिल्लाये, "आजा आजा! हमारे साथ आजा, यहां रही तो गुलदार खा जायेगा, साथ चल मिलके ऐश करेंगे।"..
     उसने नफरत से उनकी ओर देखा,उसके दोनो ओर मौत थी,...एक तरफ शरीर की और दूसरी तरफ आत्मा की...
जानवर तो दोनो ही तरफ थे,एक सिर्फ अपनी पेट की भूख मिटाना चाहता तो दूसरा शरीर की,...उसने एक पल में फैसला ले लिया,एक खतरनाक फैसला.....लड़के अभी भी चिल्ला रहे थे,.. उसने अपनी आँखें बंद कर लीं......और फिर...
     .......अगले दिन सुबह अखबार में ख़बर छपी थी,"नरभक्षी गुलदार का आतंक बढ़ा, सरकार ने जान से मारने के आदेश दिए,..उधर लड़के पेपर पढ़के बोले..
........."क्या यार! हमारा शिकार छीन लिया था न, अब मारा जाएगा साला।"










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