"नया दौर नयी सोच "

***नया दौर, नयी सोच **


***** "आज फिर से ये सवारी किधर चली बन -ठन के .......  ओहो ! अम्मा जी किसी को टोकते नहीं जब वो किसी जरूरी काम से जा रहा हो ।अम्मा जी ,व्यंग करते हुए बोली,जरूरी काम -अब तुम्हे क्या जरूरी काम है , तुम्हारे सारे काम तो तुम्हारे बच्चे कर देते हैं ,ऑनलाइन घर पर बैठे - बैठे ,तुम्हे  क्या काम है ,मै जानती हूं । क्या काम है,जरा  बताओ आप तो अन्तर्यामी हो अम्मा, मुझे पता है,आपको मेरा अच्छे से तैयार होने पर शंका होती है। अम्मा बोली नहीं बेटा शंका क्यों होगी ,तेरी बेटी की शादी हो गई,और चार पांच साल में बेटे की भी हो जाएगी ,तेरी बहू आएगी , बेटा बोला मैं समझ गया की आप क्या कहना चाहती हो की मेरी उम्र हो गई है , मैं बूढ़ा हो गया हूं ,नहीं अम्मा मैं बूढ़ा नहीं हुआ हूं और ना होंगा अभी मेरी उम्र ही क्या हुई है ..... हंसते हुए बोला ।अम्मा बोली जा जो तेरी मर्जी वो कर मेरा क्या ,जब बहू - बेटा हंसेंगे ना तब अक्ल आयेगी .....बेटा अम्मा के पास आकर बैठ गया ,और बोला अम्मा ,लोग क्या कहेंगे ,लोग तो कुछ होने पर भी कहेंगे और कुछ ना होने पर भी कहेंगे ।अम्मा नवीनता आव्यशक है ,नवीनता हमारे जीवन में नया उत्साह लाती है ,और हमें जीवन में आगे बढने को प्रेरित करती है ।और अम्मा मनुष्य का मन हमेशा जवान रहना चाहिए ,क्योंकि मन ही स्वस्थ जीवन का संदेश देता  है ,तन का क्या है।अम्मा मुझे नये- नये  कपड़े पहनने का शौंक है ,क्योंकि नवीनता हमारे जीवन से नीरसता को नहीं पनपने देती , हमें आगे बड़ने को प्रेरित करती है । जीवन में नया उत्साह और स्फूर्ति भरती है ।अम्मा रुकी हुई ,या एक जगह ठहरी हुई चीज में धूल, जंक और काई लग जाती है ।अम्मा मैं अपनी उम्र की आखिरी अवस्था तक आगे बड़ने का प्रयास करता रहूंगा ।अम्मा अब आप बताओ आपकी उम्र क्या होगी ,अम्मा बोली यही कोई सत्तर से तो ऊपर ही होगी ,अम्मा आपकी समय में लोग अपने को बूढ़ा मैंने लगते थे , बच्चों का ब्याह क्या हुआ,आप सब प र बुढ़ापे की मोहर लग गयी,अपने सारे शौंक आप लोग समर्पित कर देते थे उम्र हो गई कहकर..... ,क्यो ?अम्मा सही के रहा हूं मैं ,अम्मा बोली  तू कह तो सही रहा है ,परंतु हमारे जमाने में तो ऐसे ही होता था ,आखिर समाज दारी भी कोई चीज होती है ।अम्मा समाज तो हमेशा से" भेड़ चाल "चलता आया है ,समाज का क्या । अम्मा मैं तो कभी बूढ़ा नहीं होना चाहूंगा , भले ही मेरा शरीर बूढ़ा हो जाए,परंतु मैं अपने मन  कभी बूढ़ा नहीं होने दूंगा ।अम्मा हर रोज में बन-ठन के जो नया फैशन होगा वो करूंगा और कुछ नया अपनाने से नहीं डरूंगा ।अम्मा कुछ नया नया करते रहने  से नीरसता नहीं आती ,जीवन को सकारात्मक ऊर्जा मिलती रहती है । अम्मा नवीनता आविष्कारों को भी जन्म देती है ,और प्रग्रती का भी सूचक है ।

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