मगर जी नहीं सकते तुम्हारे बिना

निशा को आज अस्पताल से छुट्टी मिल रही थी,पिछले कुछ महीने ऐसे थे,जैसे कोई तूफान आकर गुजरा हो,आइने में खुद को देखकर मानो खुद में पुरानी निशा को ढूंढ रही थी,ब्रेस्ट कैंसर था उसे.औरत की संपूर्णता की निशानी को ही निकाल दिया गया था.कीमो की वजह से शरीर में कहीं बाल नहीं बचे थे.कुछ खाली खाली सा लग रहा था.शरीर में और मन में भी,आज अस्पताल से छुट्टी मिल रही है,और अविनाश और दोनों बेटों का कहीं अता पता नहीं है,भैया आए हैं लेने.

अविनाश तो शुरु से ऐसे ही हैं,जब तक बिस्तर पर पड़ नहीं जाती तब तक कोई मदद नहीं करते और जैसे ही थोड़ा ठीक होती हूँ.वापस पूरी जिम्मेदारी उस पर डाल निश्चिंत हो जाते हैं,लेकिन इस बार तो मौत से साक्षात्कार कर के आ रही हूँ.इस बार भी इतनी लापरवाही, और दोनों बेटे आरव और आशीष जानती हूँ कितने लापरवाह हैं 18 और 20 साल के हो गए है,लेकिन अब भी हर बात पर मुझपर ही निर्भर रहते हैं.

हर चीज ले जाकर हाथ में दो,घर पूरा बिखराकर कर रखते हैं.हमेशा मोबाइल में घुसे रहते हैं.या फिर दोस्तों के साथ घूमने निकल जाते हैं.कुछ कहो तो "चिल माँ " बोलकर चुप करा देते है,इसलिए तो लगता है काश कि एक प्यारी सी बेटी होती,तो ऐसे समय पर मेरा कितना ख्याल रखती,घर भी संभाल लेती.कभी-कभी तो कह भी देती हूँ ,तुम तीनों तो बिल्कुल भी मुझे नहीं समझते,काश कि मेरी एक बेटी होती,तो ऐसा होता,बेटी होती तो वैसा होता.लेकिन इन तीनों के तो कान में जूँ भी नहीं रेंगती.देखो अब आज भी कोई नहीं आया मुझे लेने,सब व्यस्त होंगे अपनी दुनिया में।कोई मुझे प्यार नहीं करता.सच है बीमार बीवी या माँ किस काम की.जब इंसान बीमार होता है,तब न जाने क्यों सारे नकारात्मक विचार ही मन में आते है.          

घर आ गया था,भैया हाथ पकड़ कर घर तक लेकर आए.दरवाजा खुला और ये क्या आँखें एक सुखद आश्चर्य से खुली की खुली रह गई थी.घर साफ सुथरा और सुरूचिपूर्ण ढंग से सजाया गया था,और जगह जगह स्लोगन्स लगे हुए

"आप अकेले नहीं ,हम आपके साथ है."

"वी मिस यू मौम,वी लव यू अलौट."

"आप जैसे भी हो,हमारे लिए सबसे खूबसूरत हो",

"आई लव यू निशा,तुम हमारी दुनिया हो"...ऐसे स्लोगन जगह जगह लगे थे, उसने देखा अविनाश ,आरव और आषीश तीनों हाथ में बुके लिए नम आँखों से खड़े हैं और तीनों के ही सर पर बाल नहीं है" ये क्या बाल कहाँ गए तुम्हारे?"

माँ आपकी इस लडाई में हम सब आपके साथ है,आप किसी भी तरह से अकेले नहीं हो..बस माँ अब आप कभी ऐसे बीमार मत पड़ना कहकर तीनों उसके गले लग गए.           

बहुत कमजोर हो गई थी निशा ,खुद से उठना बैठना भी मुश्किल था तीनों ने मिलकर एक छोटे बच्चे की तरह उसका खयाल रखा,कोई ना कोई हर वक्तत उसके पास रहता,जो घर उसके इतनी बार समेटने पर भी बिखरा रहता था,वो घर बिल्कुल साफसुथरा रहता था.खाना बनाने के लिए बाई रखी थी,लेकिन वो भी दो तीन दिन में एक दिन गायब हो जाती थी,ऐसे में अविनाश ऑफिस से आकर खाना बनाते तब तक बच्चे कटिंग और चौपिंग करके रखते.

जिन बच्चों ने आज तक किचन में पांव तक नहीं रखा था,आज वो इतने अच्छे से पूरा घर संभाल रहे थे,जो अविनाश थोड़ी-थोड़ी बात पर चिडचिडा जाते थे ,वो कितने प्यार से उसकी हर बात सुन रहे थे.

उस दिन अविनाश को आने में देर हो रही थी,उसकी दवा का समय हो रहा था तो दोनों बेटों ने मिलकर खाना बनाया,और बड़े प्यार से खिलाते हुए कहा "माँ अगर आपकी बेटी होती,तो आपको ऐसी तेढी मेढी रोटी नहीं खानी पड़ती ना?"

निशा नें रूधे गले से कहा, "बेटी ही क्या दुनिया में कोई भी मेरा इतना ख्याल नहीं रख पता जितना तुम तीनों ने रखा"कहकर फूट फूट कर रोने लगी" तभी पीछे से अविनाश की आवाज़ आई"हमें तुमसे प्यार कितना ये हम नहीं जानते मगर जी नहीं सकते तुम्हारे बिना."बस करिए बहुत बेसुरा गाते हैं आप,निशा ने कहा तो चारो खिलखिला कर हंस पडे।



©मंजुला

       

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