दि ब्यूटिशियन - एक आत्मा की रहस्य कथा

Chapter - 1
कहानियों का मानव सभ्यता से अटूट नाता रहा है , कोई निश्चित रूप से नहीं बता सकता है कि पहली कहानी कब कही गई और किसने किसको सुनाई । शायद भगवान लक्ष्मी नारायण ने मां लक्ष्मी जी को सुनाई या किसी शहशांह ने अपनी बेगम को मनोरंजन के लिये किस्सा सुनाया या दादी मां ने बच्चों को सुलाने के लिये कोई प्यारी सी कहानी सुनाई हो । क्या पता ?

बहरहाल , मैं आपको अपनी एक नई कहानी बताता हूं,  जिसमें मेरी कहानी की मुख्य चरित्र है -  भोपाल शहर की सबसे फेमस और खूबसूरत (31) ब्यूटीशियन  और चैंपियन स्टोरी टेलर और दि गैलैक्सी लेडीज़ सलून की मालकिन, जिसे  लोगों की सुंदरता निखारने के अलावा कहानियां सुनने और सुनाने का बेइंतिहा शौक था ।

तारीख - 22 सितम्बर 2018
दिन - मंगलवार
शहर भोपाल (म.प्र.)
दोपहर - दो बजकर दस मिनट का वक्त ।

दस नबंर बस स्टैंड के पास वाले पॉश मार्केट में दोपहर का वक्त । मार्केट में दुकानदार भीड़भरी शाम के बिजनेस की व्यवस्थायें जमा रहे हैं। सड़कों और दुकानों में भीड़ ना के बराबर । तभी दि गैलेक्सी लेडी सलून की रिसेप्शनिस्ट - पुष्पा - सलून के बाहर बदहवास जोर जोर से चिल्लाते हुये भागी -

हेल्प ... हेल्प
मैडम को पता नहीं क्या हो गया .... हेल्प .. हेल्प ..

लोग तुरंत अंदर भागे तो देखा - शहर की फेमस ब्यूटीशियन नीलम सक्सेना,  सलून के अंदर सोफे पर पीछे की ओर टिकी बैठी हैं , हाथ में एक कोरा कागज फंसा हुआ है और नीलम पत्थर जैसी नजरें खुली अवस्था में मैनिक्विन को जैसे  टकटकी लगाये देख रही हों । बाजू में रेड कलर का वेडिंग इन्विटेशन टाईप सुंदर सा एनवेलप खुला पड़ा है ।

शी कॉर्नर की बूढ़ी मालकिन मिसेज़ मिमा जैस्वाल, नीलम को कंधे से पकड़ती हैं, नीलम का शरीर सोफे पर लूढ़क जाता है । नीलम सक्सेना मर चुकी हैं, किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा ।

सिर्फ रिसेप्शनिस्ट पुष्पा ही कुछ बता सकती है ।

रोती जा रही पुष्पा टुकड़ों टुकड़ों मे इतना ही बता पा रही है कि सूबह ग्यारह बजे एक सुंदर सी लड़की सलून में आई थी, लंबा काम था तो मैडम ने दोपहर एक बजे तक कोई भी बुकिंग नहीं लेने को बोला था, मैं मैडम के ऑर्डर से मैडम के नोट्स की सॉफ्ट कॉपी बना रही थी । मैडम हर्बल ट्रीटमेंट पर कोई बुक लिख रही थीं । सवा बजे मैडम वो लड़की को गेट तक छोड़ने आईं फिर अंदर गईं , दो मिनिट बाद फिर बाहर आईं, उनके हाथ में रेड एनवेलप था । मैडम ने मुझे कहा कि वो लड़की ये एनवेलप भूल गई है, देखो आसपास कहीं मिल जायेगी, अभी पास में ही कहीं होगी । मैं आसपास सब जगह ,दुकानों में , सड़कों पर , गलियों में ढूंडा पर वो कहीं नहीं मिली ।
मैंने लौटकर एनवेलप मैडम को दे दिया, मैडम एनवेलप लेकर अंदर गईं और स्लाईडिंग डोर बंद कर लिया । जब आधा घंटा होने को आया तब मैं अंदर गई तो देखा - मैडम मूर्ति बनी बैठी है ।

पुष्षा रोती जा रही है और बस इतना ही बता रही हैं।

गैलेक्सी सलून के सामने भीड़ बढ़ती जा  रही है, किसी ने पुलिस को तो किसी ने एम्बुलेंस को फोन कर दिया है ।

लोग ग्रुप बनाकर खड़े हैं और अपने अपने अनुमान लगा रहे हैं । नीलम सक्सेना की मौत पहेली बन गई, किसी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा कि उसकी डेथ कैसै हो गई ।

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तो आइये सबसे पहले नीलम सक्सेना के बारे में बताऊं ।
मिसेज नीलम सक्सेना उंची पूरी गोरे रंग की बहुत ही खूबसूरत 31 बरस की पढ़ी लिखी महिला थीं । उनके पति राज सक्सेना आर्मी में मेजर थे, छह फुट हाईट, कद्दावर शरीर, घनी मूछों वाली रौबदार पर्सनालिटी । गोल्फ के शौकीन , आखें ऐसी मानो आपसे कोई राज उगलवाना चाहती हों और खुद में कई राज समेटे हों, चेहरे पर तैरती बिंदास मुस्कुराहट , मानो हर पल जीना चाहती हो । ऐसा था मेजर राज सक्सेना का शानदार व्यक्तित्व । दूसरी तरफ मिसेज नीलम को एक खूबसूरत जादू कहें तो अतिश्योक्ति ना होगी, चाईल्ड साइकोलॉजी में दिल्ली यूनिवर्सिटी से एम.ए., आंखों में शरारती अदायें जो मेजर को दीवाना बना गई । एक्चुअली ये लव मैरिज थी । वे शिमला की रहने वाली थीं , पिताजी डिप्टी कलेक्टर , नीलम घर में बहुत लाड़ प्यार में पली बिटिया जिसे दादा, दादी, मां , पिताजी सबका बेहिसाब प्यार नसीब हुआ। बचपन में रात होने लगती तो नीलम दादी मां की गोदी में झूल जाती - दादी कहानी सुनाओ ना । दादी प्यार भरे गुस्से से कहतीं , अब तेरे लिये रोज रोज नई नई कहानियां कहां से लाऊं। फिर भी नीलम की जिद दादी मां के पिटारे से रोज कोई नई कहानी निकलवा ही लेती । कभी दादाजी को पकड़ती - कहानी सुनाने के लिये तो कभी बंगले के माली बिरजू काका से फरमाईश । ये ही एक ऐसा नशा था नीलम का,  जो जिंदगी भर साथ रहा ।

कॉलेज के दिनों में नीलम खुद कहानियों का अड्डा बन गई ।दिल्ली में गर्ल्स हॉस्टल में नीलम का कमरा आये दिन भूतों की कहानियां नीलम के मुंह से सुनने को बेताब लड़कियों से भरा रहता था । बचपन में सस्पेंस, थ्रिलर , हॉरर कहानियां सुन सुन कर बड़ी हो रही नीलम को कब भूत प्रेतों की कहानियों में मजा आने लगा, पता ही नहीं चला । धीरे धीरे नीलम में एक बेस्ट स्टोरी टेलर के सभी गुण आ गये । ख्याति ऐसी फैली कि हॉस्टल के उसके रूम से निकल कर कॉलेज तक पहुंच गई , फिर तो उसके क्लासमेट्स उसे घेरने का बहाना ढूंढने लगे । वह कहानियां खुद बनाने लगी थी । इस बीच राज साहब की एंट्री हो गई । फिर रोमांस की बयार में नीलम खो गई । जब भी राज दिल्ली अपने घर छुट्टियों पर आते , दोनो अधिक से अधिक साथ रहने का समय निकालते और बहुत सारी बातें चलतीं , कुछ ईशारों से तो कुछ आंखों से , जहां जैसी जरुरत पड़ जाये । बाद में मोबाईल तो था ही - दो दिलों के बीच संवाद बनाये रखने का बेहतरीन माध्यम ।  दो साल गुजर गये , नीलम का ग्रेजुएशन हो चुका था , राज की पोस्टिंग नॉर्थ ईस्ट में हो गई फिर पैरेंट्स को मनाने की कवायद, उसमें भी 3-4 महिने का समय निकला , यह समय तो किसी परीक्षा से कम ना था - क्योंकि राज के पैरेंट्स पुराने विचारों के थे , मामला इंटर कास्ट का जो ठहरा । बड़ी मुश्किल से दोनो परिवार इस शादी के लिये तैय्यार हुये ।

तारीख  - 14 मार्च 2009 - शिमला -  जब धूमधाम से सात फेरों के साथ जीवन भर साथ रहने की कस्मों रस्मों के साथ नीलम राज की हो गई । फिर चार साल राज के अनिश्चित पोस्टिंग्स के कारण नीलम भी सेटल नहीं हो पा रही थी तो दोनों ने मिलकर तय किया कि भोपाल में फ्लैट ले लिया जाये । भोपाल में नीलम की बुआ रहती थीं, यहां उनका अच्छा होल्ड था । उन्होने भोपाल की सबसे पॉश कॉलोनी में थर्ड फ्लोर पर एक फ्लैट खरीदवा दिया । अब नीलम की जिंदगी कुछ आसान हो गई थी । यहां वहां  भटकने से मुक्ति मिली थी । इस बीच उसने ब्यूटीशियन का कोर्स कर दो साल एक सीनियर ब्यूटीशियन के अंडर काम कर अच्छा एक्सपीरिएंस ले लिया था सो वह भोपाल में काम आया । नीलम ने अरेरा कॉलोनी दस नबंर स्टॉप के पास एक शानदार लेडीज़ सेलून खोला - दि गैलेक्सी लेडीज़ सलून । भव्य इनाग्युरेशन , नीलम की पर्सनालिटी ऐसी थी कि उसे फेमस होने में टाईम नहीं लगा । इस मध्य कुछ लेडीज़ ग्रुप्स की सोशल एक्टिविटीज़ ने नीलम को बहुत ज्यादा पापुलर कर दिया ।
एक खास क्वालिटी जिसने नीलम को लाईम लाईट में लाया वह थी-  उसकी स्टोरी टेलिंग की प्रतिभा । भोपाल में स्टोरी टेलिंग के कॉन्टेस्ट्स अक्सर होते रहते थे, इन प्रतियोगिताओं में प्रतियोगियों को एक स्लिप उठानी पड़ती थी जिसमें एक या दो शब्द लिखे होते थे , उसमें पांच मिनिट्स के शॉर्ट पीरियड में कम से कम पन्द्रह मिनिट्स की स्टोरी डेवलप कर सुनाना होता था । कुछ ही समय में ब्यूटीशियन के साथ साथ नीलम की धाक और प्रसिद्धि एक बेहतरीन कहानी सुनाने वाली के रूप में बढ़ने लगी । रहस्य और रोमांच नीलम का फेवरेट जोनर था और वह उसमें आत्माओं का तड़का लगाने में शातिर हो चली थी। आत्माओं के कैरैक्टर उसकी कहानियों को रोचक तो बनाते ही थे अपितु कहानी सुनाने का अंदाज नीलम को एक अलग ही कैटेगरी में रखता था । नीलम की ख्याति धीरे धीरे भोपाल से बाहर निकलकर राजस्थान, बंगाल और उड़ीसा में फैलने लगी । नीलम एक राष्ट्रीय  स्तर पर फेमस नाम हो चला था - स्टोरी टेलिंग के फील्ड में ।  नीलम के दिन अच्छे कट रहे थे । नीलम ने अपने बेटे का एडमीशन देहरादून पब्लिक स्कूल में करा दिया था, इसलिये उसे अपने शौक के लिये समय की कोई कमी नहीं थी ।

तारीख - 18 सितम्बर 2018
सैलून के दोपहर तक की सारी कस्टमर्स जा चुकी थीं , नीलम सफाई में लग गई , मद्धम आवाज़ में गाने चल रहे थे। तभी पार्लर का डोर किसी ने नॉक किया ।
कुछ थकी आवाज़ में नीलम ने कहा - येस, प्लीज़ कम इन.

दरवाजा खोलकर चंचल बैनर्जी अंदर आई -
दीदी नमस्कार,
क्या बात है , बड़ी शांति है । चंचल ने मुस्कुरा कर पूछा ।
नहीं, अभी पांच मिनट पहले ही कस्टमर्स गईं हैं । नीलम ने जवाब दिया ।
चंचल, सोफे पर अपने कुछ भारी हो चले शरीर को टिकाने के साथ साथ अपनी साड़ी ठीक करने का उपक्रम करते बोली - अरे दीदी, दो तीन दिन से आपके यहां आने का सोच रही थी - थ्रेडिंग करवाना है पर झिलमिल और मॉन्टू के चक्कर में आपके पास आने का रोज सोचती रही ।

चंचल बैनर्जी हाउस वाईफ थी , बाजू वाली कॉलोनी में रहती थी । नीलम की पुरानी कस्टमर थी । पहली मुलाकात में ही सामने वाले के दिल दिमाग पर कब्जा करने के जबरदस्त हुनर वाली चंचल नीलम की बेस्ट फ्रेंड भी हो गई थी ।

नीलम ने चंचल को वर्किंग चेयर पर आने का इशारा किया और उसके हुनरमन्द हाथों ने चार मिनट के अंदर ही चंचल को निपटा दिया । चंचल अपने आपको मिरर में गौर से देखने लगी और खुश होते हुये बोली - दीदी मेरे चेहरा फेस ब्लेमिश हो रहा है , मैं नेक्स्ट टाईम जल्दी ही आऊगीं - फेशियल करवाने ।

कुछ देर हंसी मजाक करते करते अचानक जैसै उसे कुछ याद आया - अरे हां दीदी, कोलकाता में मेरे घर के पड़ोस में रहने वाले मुजूमदार अंकल की बेटी चारू इंन्टर्नशिप के लिये भोपाल आई है , पिछले हफ्ते ही उसने इसी एरिये में मकान किराये पर लिया है । उसने मुझसे किसी अच्छे पार्लर की जानकारी मांगी तो मैंनै आपके बारे में बताया है , वो आयेगी आपके पास , ऐसा कह चंचल चली गई ।

तीन दिन बाद की बात है - रात्रि के आठ बजने में चंद मिनट बाकी थे, बाहर सड़क पर भी ज्यादा शोरगुल नहीं था, शादी ब्याह का सीजन ना होने से शहर के लेडीज़ सेलून ठंडे पड़े थे । नीलम ने भी अंदाज लगाया कि अब कस्टमर के आने की उम्मीद कम है तो अब बंद किया जाये यह सोचकर जैसै ही नीलम कैश बॉक्स से कैश कलेक्ट करने बढ़ी इतने डोर पर आहट हुई फिर बेल बजी । नीलम ने दरवाजा खोलकर देखा  तो एक क्षण के लिये नीलम स्तब्ध रह गई - सामने अकेली श्वेत वर्णी , बहुत ही खूबसूरत बाईस तेईस साल की मासूम चेहरे और तीखे नैन नक्श वाली अनिंद्य सुंदरी खड़ी है । मुस्कान इतनी मोहक कि नीलम की नजरें उसके चेहरे हटने का नाम ही नहीं ले रहीं थी । नीलम भूल चुकी थी वो एक लड़की थी , सामने खड़ी खूबसूरत मूरत को देख नीलम के अंदर छुपा मर्द जागने लगा था तभी मीठी आवाज में पूछा गया - क्लोज़ कर रहीं हैं क्या आप ?

नहीं .. नहीं..  चौंकते हुये नीलम के मुंह से निकला  - आइये । क्या करवाना है ?

उस हसीना ने कहा - करवाना तो फेशियल और वैक्सिंग वगैरह है पर मुझे लग रहा है कि मैं काफी लेट हो गई हूं ।

नीलम जो अपनी नई और बेहद हसीन कस्टमर को यूं ही जाने नहीं देना चाहती थी तो बोली - नो नो , नॉट एट ऑल, इट्स जस्ट क्वार्टर पास्ट एट.    नो इश्यू ।

हसीना चेहरे पर सुंदर सी मुस्कुराहट के साथ बोली - एक्चुअली मैं ही लेट हो गई हूं , इधर से निकलते हुये सोचा कि आपसे कल का एपॉईंटमेंट लेते चलूं । कल मैं कब आ जाऊं ? नीलम कुछ सुकून के साथ बोली - आप कल सुबह टेन थर्टी ऑर इलेवन आ सकती हैं क्या । कल सुबह कोई बुकिंग भी नहीं थी सो नीलम ने सोचा कि फुर्सत से पता करेंगें कि यह ड्रीम गर्ल है कौन ?

वह लड़की भी गुडनाईट बोलकर सलून को वीरान कर गई ।

तारीख - 22 सितम्बर 2018 -  ठीक सुबह 11 बजे, वही लड़की चेहरे पर से फिसलती काली जुल्फें, दाहिने हाथ में पतला डिज़ाइनर गोल्डन बैंगल, स्पार्क व्हाईट चिकन कारी की कुर्ती , चूड़ीदार पैजामा, पिंक सैंडल , वही दिल पर दस्तक देने वाली मुस्कुराहट के साथ ,दाहिने हाथ में छोटा पर्पल कलर का हैंड पर्स और साथ में एक ब्लड रेड कलर का वेडिंग कार्ड समेटे  सलून में एंटर करती है ।           . 

नीलम उसका इंतज़ार सुबह से कर रही थी यह मालूम होते हुये भी कि उसने साढ़े दस का वक्त दिया है । इंतज़ार खत्म होने की खुशी नीलम के चेहरे पर छाई हुई थी, नीलम ने स्माईल के साथ उसका स्वागत किया , वो लड़की बिंदास नीलम के वेलकम जेस्चर के प्रति रिस्पॉंड करते हूये सोफे में धंस जाती है । सोफे के बाजू में साईड टेबल पर बेफिक्री से अपना पर्स और वेडिंग कार्ड टाइप एनवेलप ऐसै फेंकती है जैसे अपने घर में बैठी हो । वो साईड टेबल पर नजर मारती है जैसै उसके वैल्यूएबल्स सुरक्षित हो गये हों । साईड टेबल के दूसरी तरफ खड़े और बहुत नफासत से सजाये मैनिक्विन (प्लास्टिक फाइबर का लाईफ साइज़ मॉडल - सलून में फीमेल मॉडल) को दो सेकेंड देखती है, उसके चेहरे पर रहस्यमयी मुस्कान तैर जाती है जिसे नीलम नहीं समझ सकी । कस्टमर मैनिक्विन को गंभीरता से देखती हुई बोली - आपने इसे बड़ी मेहनत से डेकोरेट किया है । नीलम ने जवाब दिया कि इसे मैं लगभग तीन साल पहले लाई थी तबसे रोज इसे नया लुक देती हूं ।
तभी ये लाईव लुक दे रही है - लड़की ने कहा ।

बताईये कहां से शुरू करूं -  नीलम ने पूछा । इसके साथ ही नीलम ने असिस्टेंट पुष्पा को आवाज़ दी जो बाहर रिसेप्शन अटेंड कर रही थी ।
जी मैडम - पुष्पा अंदर आई ।
पुष्पा, एक बजे के पहले कोई एपॉंईंटमेंट मत लेना । और मैनें जो मेरे नोट्स दिये हैं उनको सॉफ्ट कॉपी में कन्वर्ट कर लो ।
जी मैडम - कहकर पुष्पा रिसेप्शन में बैठ गई ।

नीलम की आदत थी कि वो कस्टमर से मुलाकात के समय नाम पता नहीं पूछती थी , वर्किंग के दौरान सब जानकारियां लेना , मनपसंद बातें करना उसकी आदत थी । वैक्सिंग करते करते नीलम ने उस नाज़नीन का नाम पूछा तो वह लड़की चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान के साथ बोली -

मैं चारू मुजूमदार . शायद मिसेज चंचल बैनर्जी ने आपसे जिक्र किया होगा ।

हां..हां..  चंचल ने बताया था तुम्हारे बारे में । नीलम ने जवाब दिया । फिर परिचय की बातों का लंबा दौर प्रारंभ हुआ । इस बीच चारू ने काफी काम करवाये, वैक्सिंग, पैडिक्योर, मैनिक्योर, फेशियल इत्यादि । नीलम ने पूछा कि ना जाने ऐसा लग रहा है कि तुम ये सब बहुत अंतराल के बाद करवा रही हो , चारू ने बताया कि हांँ - समय नहीं मिला ।

कैसे दो घंटे बीत गये , पता ही नहीं चला । कस्टमर चारू के चेहरे पर ग्लो तो पहले ही से था पर कहते हैं ना कि कितना ही बढ़िया हीरा हो - निखरता तो तराशने वाले हाथों में आने के बाद ही । चारू ने बताया कि एम.बी.बी.एस. करने के बाद इंटर्न के लिये भोपाल आई है । नीलम ने कहा कि जब भी बोर हो तो यहां आ जाना , अच्छा लगेगा । चारू अब जाने के लिये तैय्यार हो रही है, साईड टेबल से पर्स उठाते हुये उसने पूछा कितना हुआ ।

नीलम ने जवाब दिया कि हुये तो थ्री थाउज़ेंड सेवंटी फाईव हैं पर तूम  थ्री थाउज़ेंड ही दो, क्योंकि तुम चंचल की रिफरेंस हो । चारू के चेहरे पर कृतज्ञता के भाव उभरे, उसने अपने हैंड पर्स से पांच पांच सौ रूपयों के छह नये करारे नोट पकड़ाये, जिन्हे देख नीलम अच्छा फील कर रही थी , उसने नोट लिये और साईड टेबल के टॉप पर रखकर चारू को छोड़ने सलून के बाहर वाले गेट तक आई । नीलम सिर्फ खास कस्टमर्स को छोड़ने ही गेट तक आती थी । नीलम चारू को विदा कर पलटी तो देखा - पुष्पा कम्प्यूटर पर व्यस्त है और वेटिंग लॉउंज में कोई भी कस्टमर नहीं थी । पुष्पा ने बताया कि तीन बजे से काफी एपॉईंटमेंट है आज आप काफी लेट हो सकती हैं । इसलिये जल्दी लंच ले लीजीये ।
नीलम पुष्पा को इंस्ट्रक्शन्स देकर अंदर गई तो देखा कि चारू अपना रेड एनवेलप भूल गई है, नीलम तुरंत लिफाफा लेकर बाहर आई और पुष्पा को लिफाफा लेकर दौड़ाया कि बाहर मार्केट में वो लड़की को देख लिफाफा दे दे । पांच सात मिनट्स के बाद पुष्पा लौट आई , उसने कहा कि सब तरफ देखा पर मैडम पर वो लड़की कहीं नहीं मिली । नीलम सोच रही थी कि चारू का नबंर ले लेती तो अच्छा रहता । ये सोचते सोचते वो एनवेलप लेकर अंदर आ गई स्लाईडिंग डोर बंद कर सोफे पर बैठ गई , अचानक उसका ध्यान गया कि चारू के रूपये टेबल पर होंगें - उसने देखा कि टेबल पर कुछ सूखे बरगद के पत्ते पड़े थे । उसने आसपास देखा , जमीन पर देखा - तीन हजार रूपये कहीं भी नजर नहीं आ रहे थे, नीलम बैचेनी से चारू के दिये नोट ढुंढने लगी । नीलम, हैरान परेशान, कोई अंदर आया नहीं फिर नोट गये कहां ?

नीलम ने सोचा कि रेड एनवेलप में भी चैक कर लिया जाये । उसमें एक सफेद कागज़ पर लिखा किसी के नाम लैटर था और कुछ नहीं । नीलम ने उत्सुकतावश लैटर बाहर निकाल कर खोला तो देखते ही घबरा गई, वो लैटर उसी के नाम किसी मिस वॉयलेट फर्नांडीज़ ने लिखा है और आज 22 सितम्बर 2018 की ही तारीख का है । नीलम के चेहरे पर कई तरह के भाव आ जा रहे थे । नीलम लैटर लेकर सोफे पर बैठ बैचेनी से लैटर पढ़ने लगी , मजमून कुछ यूं था -

दिनांक :- 22.09.2018

प्रिय नीलम जी नमस्ते, मेरा नाम वायलेट है, पूरा नाम मिस वॉयलेट फर्नांडीज़, मैं मूम्बई की हूंँ और आपको तबसे  जानती हूंँ जब आप तीन साल पहले एक नेशनल स्टोरी टेलिंग कॉम्पीटिशन में मुम्बई आईं थीं । आप मुझे भले ही नहीं जानती पर मैं तबसे आपके साथ हूंँ । आपको घोस्ट स्टोरीज़ बनाने में बहुत मजा आता है । आपको अपनी स्टोरी में भूतों को सेंट्रल कैरेक्टर बनाकर रोमांच पैदा करने में बहुत मजा आता है , है ना नीलम ?

कल और आज आप जिस चारू मुजूमदार से मिलीं वह मैं ही थी ।
(नीलम का ब्लड प्रेशर बढ़ने लगा , उसका गला सूखने लगा था, उसे आभास होने लगा था कि वह किसी दुश्चक्र में या तो फंसने वाली है या फंस चुकी है । )

नीलम, मेरी मृत्यु हुये तेईस साल से उपर हो चुके है, मुम्बई में जिस सभागृह में तुम्हारा कॉम्पिटिशन था उसी से थोड़ी ही दूर एक क्रिश्चियन ग्रेवयार्ड है, वहीं मुझे दफ़न किया गया था । मैं तबसे वहीं घूम रही थी । यह एक संयोग ही था कि तुम्हारे प्रेज़ेंटेशन के दौरान मैं भी उसी हॉल में थी, अपनी स्टोरी की सेंट्रल कैरैक्टर जो एक चुड़ैल जो बहुत बददिमाग और बुरे विचारों वाली तुमने प्रेज़ेंट की । यह एक दुखद संयोग रहा कि तुमने अपनी कल्पना में जो नाम सोचा - वॉयलेट फर्नांडीज़ , वह मेरा नाम था , मुझे उस समय बहुत कष्ट हो रहा था जब तुम मेरे कैरेक्टर का विकृत विवरण देकर लोगों को डरा रहीं थीं । मैं तुम्हारे कैरेक्टर को समझने तुम्हारे साथ चली आई और तबसे मैं हर जगह तुम्हारे साथ रह रही हूंँ । कभी तुम्हारे पर्स में, कभी सामने वाले मैनिक्विन में । पिछले तीन सालों में मैने तुम्हारी गढ़ी हुई सौ से ज्यादा भूत , प्रेत और चुड़ैलों की कहानियां सुनी , सच कहूं तो मुझे तुम्हारे साथ मजा आने लगा था । पर मेरा जाने का समय आ गया था तो मैने सोचा कि चलो - एक कहानी मन से मैं बनाती हूंँ , जिसकी सेंट्रल कैरैक्टर - नीलम , तुम रहोगी ।

(नीलम हिप्नोटाईज़्ड स्थिति में लैटर पढ़ रही थी वह अपने हाथ पैरों को हिलाने डुलाने में असमर्थ हो चुकी थी ।)

तुम्हारी स्टोरी तो नीलम , उसी दिन चालू हो गई थी, जिस दिन मिसेज चंचल बैनर्जी ने तुम्हें , मेरा मतलब चारू मुजूमदार का परिचय दिया था । चंचल की मेरी स्टोरी में कोई भूमिका नहीं है। रियलिटी मे मैने उस दिन सिर्फ उसकी छवि इस्तेमाल की थी, वह तो बेचारी दो दिन पहले ही अपनी फैमिली के साथ दस दिन के गोवा ट्रिप पर निकल चुकी है । चंचल बैनर्जी के कोलकाता वाले घर के बाजू में कोई मुजूमदार फैमिली नहीं रहती । मैं खूबसूरत थी, तन से भी और मन से भी । मेरा वही रूप था जो तुमने चारू का देखा । तो नीलम , कैसी लगी मेरी कहानी । दुख है कि मेरी कहानी तुम किसी को सुना नहीं पाओगी ।
             तो, अलविदा नीलम , अलविदा
                                                        वॉयलेट फर्नांडीज़

और धीरे धीरे लैटर के शब्द हल्के पड़ने लगते हैं और अंत में नीलम के हाथ सिर्फ सफेद कागज़ रह जाता है ।

नीलम जड़ होचुकी थी । दिमाग जैसै फ्रीज़ हो गया , उसने डरते डरते मैनिक्विन पर नजर डाली तो उस जगह चारू मुजूमदार उर्फ वॉयलेट फर्नांडीज़ नीलम की ओर मुखातिब हो ठहाके लगा रही थी । नीलम का हार्ट एक झटके के साथ रुक गया, खूली आंखों सहित उसका निर्जीव शरीर सोफे पर जा टिका था ।
उसी समय पुष्पा स्लाईडिंग डोर सरकाकर अंदर घुसती है । और एक हल्का बदबूदार झोंका बाहर निकल जाता है ।

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हेमंत झा
04.12.2018


                                         

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