मिशन जांबाज (हादसा सीरीज) १

चीफ ने मुझे और मोना को एक साथ डिनर पर इन्वाइट किया था। मोना नार्मल फिरोजी कलर के सूट में परम्परागत भारतीय लड़की के रूप में और मैं डेनिम की ब्लू जीन्स और व्हाइट शर्ट में हल्की दाढ़ी मूंछ, हाथों में ब्रीफकेस लिए कारपोरेट सेक्टर के एम्पलाई जैसा गले में स्फेस्फिक सर्विसेज का टैग डाले निकल पड़े।
मुझे बाहर इसी रूप में ही निकलने का आदेश था इसी वजह से मैंने हल्की दाढ़ी मूंछ रखनी शुरू कर दी थी।(मेरे बारे में पूरी डिटेल पढ़ने के लिए कृपया पूर्व प्रकाशित रचना "हादसा" पढ़े।)
कुछ शरारत का मूड था, मोना की आंखों में गहराई से झांकते जब होंडा सिटी मिनी का डोर खोल के ड्राईविंग सीट के बगल उसे बैठने का इशारा किया तो खटाक से पहला विचार उसके दिमाग में आया," आज तो बड़ा हैडसम लग रहा है लड़का।" फिर अचानक जैसे उसे याद आया कि आंखो में झांकते हुए कहीं माइंड तो नहीं रीड कर रहा।(माइंड रीडिंग पावर) काबिलियत मुझे मिलने का सौभाग्य जानने हेतु पढ़ें पूर्व प्रकाशित उपन्यास "हादसा"!
मुझे ड्राइविंग सीट पर लापरवाही में बैठते ध्यान से देखती मोना सोच रही थी,"नहीं, नहीं इस समय वो सब थोड़े ही करेगा, फिर भी सतर्क रहना होगा" सोचते हुए सारे विचारों को उसने झटक दिया।
मैं मुस्कराया भी नहीं कि कहीं वो ताड़ न ले। ड्राइविंग करते मैं उससे यूं ही बातें करने लगा कि आंटी बहुत ही घरेलू महिला हैं , खाना बहुत अच्छा पकाती हैं और हमेशा घर के कामों में लगी रहती है। तुम्हें घरेलू लड़की के रूप में सलवार सूट में देख के खुश होंगी।
उसके विचारों ने जैसे सरगोशी सी की," पटा रहा है मुझे नये स्टाईल में, हुंह...घरेलू लड़की" और मेरी ओर देखने लगी," आज रात जब तेरा शिकार करूंगी तब पता चलेगा बच्चू घरेलू या जंगली।" तभी उसके विचारों को जैसे थामता मैं बोल उठा,"वो क्या है सामने?, बैरियर लगा है।"
वो भी उधर ही देखने लगी तो मैंने कहा ,"मोना, डैशबोर्ड खोलो, सब यलो बटन से अन्दर लाॅक कर डैश बोर्ड हाइड कर दो। कार में सब कुछ डिजीटल और आॅटोमेटिक था।उसने तुरंत सब क्लीन कर दिया तब तक एक सिपाही ड्राईविंग शीशा खुलवाकर तल्ख लहजे में बोला ," ओय,कार को साईड में ले।
"जी" कहके मैंने साईड में कार लगा दी और सिपाही को बोला, "क्या हुआ दीवान जी।"
सिपाही अपने को दीवान जी सुनकर फूलकर कुप्पा हो गया और सब बकने लगा कि यहां पास में एक मर्डर हो गया है , सामने लाश पड़ी है साईड में और कार्रवाई चल रही है, तभी सब इंस्पेक्टर  पहुंच गया और गाड़ी के पेपर्स , आइडेंटिटी आदि चेक करने लगा। सब ठीक पाकर लीकर इंस्ट्रूमेंट से सांसों को चेक किया और क्लीन पाकर गाड़ी सहित निकलने को बोला।
मोना गाड़ी में बैठते मेरी ओर देखते सोच रही थी,"कूल गाई" और दरवाजा खोलकर अन्दर बैठ गई।
डिनर का टाइम ९ बजे का था , सिर्फ १० मिनट बाकी थे। होंडा सिटी की रफ्तार ने अपना कमाल दिखाया और दो मिनट पहले ही चीफ के घर तक पहुंचा दिया।
कार को पार्क करने तुरन्त अर्दली आया और ९ बजे हम ड्राइंग रूम में थे।
चीफ और उनकी पत्नी के आने पर हम दोनों झुककर उन्हें पैर छूकर प्रणाम किये तो दोनों ने दोनों को गले से लगा लिया।
खाना बहुत लज़ीज़ था, बहोत दिनों के बाद घर के खाने ने संतुष्ट कर दिया था।  हम, मोना और चीफ काॅफी के लिए उनके स्टडी रुम में आ गये।
काफी के साथ ही चीफ ने कबर्ड से एक फाईल निकाली और कहा," ये मिशन जांबाज की फाइल है,आज रात भर का समय है तुम दोनों के पास।
आज शाम का वायरलेस मैसेज है कि हमारे पांच स्पाई जो महीने भर से लगे थे एक एक कर मार दिए गए हैं।अब वहां कोई नहीं बचा है।बर्धमान के रूप में एक ही सूत्र है जो किसी खास मौके पर तुम्हारी सहायता कर सकता है, संपर्क कोड स्पाई ००१ तुम्हारा बैज नम्बर होगा।
सारे पेपर्स और टिकट्स फाईल में हैं।
आर्म्स डिपार्टमेंट सारी रात खुला रहेगा तुम्हारे लिए।
रकम आॅनलाइन ट्रांसफर होती रहेगी, मास्टर कार्ड यूज करते रहना।
पन्द्रह दिन के अन्दर युगांडा की सरकार बदल जायेगी अगर तुम सफल ना हुए, और हमारी मुसीबतें दस गुना बढ़ जायेंगी। हमें भरोसा है कि तुम दोनों सफल होके लौटोगे।
तुम्हारी जान की कीमत पर मिशन की सफलता हमें नहीं चाहिए, आखिरी लफ्ज पर उनकी आवाज भर्रा गयी।
रूंधे गले से जीत का आशीर्वाद दिया चीफ ने और हम वहां से लौट आए।
मोना सोच रही थी,"आज प्यार की उन गहराईयों में डूबने का वक्त आ गया है जिससे निकल के हम ना भी बचें तो अफसोस ना हो" और ये जानकर मैं विस्मय बोध से घिर गया और मैंने कार समुद्र की ओर मोड़ दी।
अपने यारों और चांद मामा(चांदू) से मशविरे का समय आ गया था। समुद्र की उफनती लहरों पर नजर मारते मोना बोली,"हम यहां क्यूं आये हैं इस वक्त।"
मैंने कहा बस रुको चलते हैं और वहीं बालू पर आसमान की ओर सर किये पीठ के बल लेट गया, मोना भी मेरे बगल ही लेट गयी पीठ के बल।
आसमान में सब खिलखिला पड़े मुझे पाकर, चांद अपने पूरे आकार में सरकता सरसराते हुए बोला," तेरी नई मुहब्बत?"
मैंने कहा," नई पुरानी सब यही है अब तो।"
तारे सब एक साथ बोल पड़े,"मस्त है भाऊ।" "चुप कर सालों" मैं गुर्राया। (चांद मामू यानी चांदू और तारों से मेरी बातचीत, मसखरी, उलाहने, ताने और सलाह के जज्बातों को जानने के लिए जरूर पढ़ें ,"हादसा"!
मोना सब आश्चर्यमिश्रित होकर सुन और देख रही थी।
मैंने चांदू से पूछा," हम फिर मिल रहे हैं ना।"
चांदू बोले," हां, तू निश्चिंत हो जा।"
हम वहां से चांदू और तारे दोस्तों से विदा लेके वापस आ गये।
रास्ते में मोना ने पूछा," हमेशा बातें करते हो इन चांद तारों से?"
मैंने कहा," हां,बचपन से।" "ओह" कहकर वो कुछ सोचने लगी जिस पर मैंने ध्यान नहीं दिया।
पहुंच कर सबसे पहले हमने सारी तैयारियां की जो कल निकलने से पहले करनी थीं, फिर हम एक ही बिस्तर पर रात २ बजे सोने आ गये।
उसने आवेश में मेरे चेहरे को अपनी हथेलियों में भर लिया और चूमने लगी। आवेश से हम दोनों के बदन में थरथराहट सी हो रही थी। दोनों के हाथ एक दूसरे के कपड़े उतारने में व्यस्त हो गए तो मैंने उसके कानों की लौ को चुभलाते सरगोशी सी की," मैं अभी तक कुंवारा हूं।" बस तो कमाल कर दिया इन शब्दों ने,वो दांतों से मेरे होंठों को चुभलाती हुई फुंफकारी,"तू रूक, तेरी कुवारेपन की ऐसी-तैसी आज मैं करती हूं, और वो मुझपे छाती चली गयी। धमा चौकड़ी ऐसी मची की दोनों की सांसें फूल गयीं और एसी में भी दोनों पसीने से ऐसे भींगे की नींद की बेहोशी कब हावी हो गयी पता ही न चला और एक दूसरे की बाहों में ही सो गये।
                                                          क्रमशः        
                               

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