भुतहा घर

बचपन के कुछ ऐसे किस्से और पल हैं जो जीवन भर नहीं भुलाते जा सकते, उनमें से शैतानियां और "डर के आगे जीत है" वाली हिमाकत तो बिल्कुल भी नहीं।
हमारेे घर के पास में एक ऐसा घर था जिसे मैंने कभी खुला नहीं देखा इस घर को लोग प्रेतबाधित बताते थे और कोई भी वहा जाने की हिम्मत नहीं करता था। इस घर के खिड़की दरवाजे सब टूटे हुए थे।
एक दिन स्कूल से आने के बाद दोस्तों के साथ खेलते हुए मैंने और मेरे दोस्तों ने मिलकर इस भूतहा घर में जाने का प्लान बनाया। मै बचपन में बहुत निडर था लेकिन मेरे दोस्त थोड़े डरपोक किस्म के थे उन्होंने पहले तो मना कर दिया कि उनके घर वालो को पता चलेगा तो अपनी चमड़ी उधेड़ देंगे लेकिन मेरे ज्यादा समझाने पर वो राजी हो गये।
हम टूटी दीवार से घर के आंगन में आये वहा पर एक टूटी खिड़की थी जहा से अंदर जाना आसान था हम वहा से अंदर चले गये पुरे घर में अँधेरा छाया हुआ था और उस घर से अजीब बदबू आ रही थी।
हम घर की चीजो को ध्यान से देख रहे थे तभी हमे एक दीवार पर कोयले से लिख रखा था “मुझे मार दिया गया है ” हम ये देखकर डर गये लेकिन फिर सोचा कोई मजाक करने के लिए लिख गया होगा अब हम उपर जाने वाली सीढियों के पास आये तो पहली सीढ़ी पर लिख रखा था “मै उपर कमरे में हु ” ये देखकर मेरे दोनों दोस्त घबरा गये लेकिन मै नहीं डरा और उनको उपर ले गया।
उपर तीन कमरे थे जिसमे से एक बंद पड़ा था हम उस कमरे में गये कमरे में घुसते ही सामने दीवार पर लिखा था “मुझे इस कमरे में ढूंढो” हम वहा की अलमारियो और बक्सों को देखने लगे जो पुरी तरह गल चुके थे तभी एक अलमारी के अंदर लिख रखा था “मेरा सिर दाए कमरे में और धड़ बाए कमरे में है ” ये देखते मेरे दोस्त बुरी तरह घबरा गये और वहा से भागने लगे लेकिन मैने उन्हें जकड़ लिया और जाने नहीं दिया।
 अब हम बांये कमरे में जाकर धड़ ढूंढने लगे और वहा पर एक बक्से में एक सडा गला शव पड़ा था इस बार तो मै भी डर गया लेकिन बिना पुरी तहकीकात किये वहा से नहीं जाने वाला था उस बक्से के पास चटाई पर लिखा था “तुम्हारे पीछे मेरा सिर दुसरे कमरे से आ रहा है ” अचानक हमे पीछे से कोई परछाई दिखाई दी और हमने देखा कि वो किसी लड़के का सिर था अब हम बुरी तरह घबरा गये और वहा से चीखते हुए निकल भागे।
मैंने ये बात घर वालो को बताई तो पहले तो उन्होंने मुझे खूब पीटा और डांटा लेकिन फिर उन्होंने पुलिस को फ़ोन लगाया | पुलिस ने उस घर में तहकीकात की तो उन्हें बक्से में बंद शरीर तो मिल गया लेकिन सिर कही नहीं मिला l सभी लोगों की सहमति से उस शव का अंतिम संस्कार कराया गया जिससे अतृप्त आत्मा को शान्ति मिल सके।
तबसे आज तक मै ऐसे भूतहा घरो में तहकीकात करने से डरता हु |
कुछ दिनों बाद पिता जी का तबादला हो जाने से हम सभी को दूसरे शहर शिफ्ट होना पड़ा। फिर कभी मैंने इस तरह की हिमाकत करने की सोची तक नहीं।आज भी वो एक डरावने सपने की तरह ज़ेहन के एक कोने में कैद है।
                                                             समाप्त

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