दहक

जिन्दगी कितनी अनमोल है, ये बात तो वही जनता है जो मौत के मुँह से बाहर आया हो। लेकिन दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी है, जो जिन्दगी को जुआ मानकर उसे दांव पर लगा देते है।
और कुछ लोग ऐसे भी जिन्हें मौत जिन्दगी से ज्यादा प्यारी होती है। और ऐसे लोग मौत को अपनाना पसन्द करते है....

कारण-  प्यार में धोखा खाना, कर्ज का बोझ सर पर, इज्जत चली जाना, इम्तिहान में फेल, बहुत से वजह है इस दुनिया में
जिन्दगी से हारकर मौत को गले लगाने के कारण।

रेलवे लाइन के पास खेतो में कुछ दुरी पर एक पेड़ के नीचे   एक औरत सुपर फ़ास्ट ट्रेन के इन्तजार में बैठी हुई है। चेहरे पर नफरत और गुस्सा साफ झलक रहा है। और दिल में एक मायूसी और गहरा दर्द है। बाल बिखरे हुवे, बिखरे हुवे बाल हवा के झोखों से ख़ूबसूरत चेहरे पर पड़ रही थी।
पास में एक चरवाहा अपनी भैंसे चरा रहा था। उसने जब उस औरत को देखा तो बोल पड़ा"     क्या बात है बहन जी आप परेशान हाल में बैठी यहाँ क्या कर रही है। उस औरत ने कोई जवाब नहीं दिया। इस पर उस चरवाहे को शक हुवा, मगर अनसुना करके चला गया।

कुछ ही देर में एक ट्रेन की आवाज सुनाई दी। ट्रेन की आवाज सुनकर वो औरत रेलवे लाइन की तरफ चल पड़ी।
जब उस चरवाहे ने उस औरत को रेलवे लाइन की तरफ जाते देखा तो सारा मामला समझ गया"   अरे बाप रे ये तो मरने निकली है..वो चिल्लाया"   ए ए क्या कर रही हो वहा से हट जाओ ट्रेन आ रही है। मगर वो तो जैसे बस मौत की ही राह देख रही थी।
ट्रेन पूरी रफ़्तार में चली आ रही थी। जब तक वो आदमी उस औरत को वहा से हटाता, धड़धड़ाती हुई ट्रेन आकर उस औरत को अपने अंदर समेट चुकी थी। इस तरह एक जिन्दगी मौत के आगोश में समा गई । ....ये नजारा देखकर उस आदमी के होश उड़ गए। शरीर थर थर कांपने लगा। किसी तरह अपनी भैंसो को हांककर वहा से निकल गया।

4 munth later

अच्छा जानू कब तक वापस आ जाओंगे" सीमा ने दिवाकर के सीने से लगकर कहा।

माय स्वीट डार्लिंग बस 2 दिनों की बात है। अगर जरुरी नहीं होता तो अपनी सीमा को छोड़कर कभी नहीं जाता" दिवाकर ने बड़े प्यार से कहा।

सीमा - लवली स्वीट, लेकिन तुम्हारे बिना मुझे यहाँ अच्छा नहीं लगेगा।

दिवाकर - मन को मना लो तो सब अच्छा लगेगा। अब ज्यादा बातें नहीं डार्लिंग, ज्यादा टाइम लगाउँगा तो ट्रेन छूट जायेगी।

सीमा - अच्छा जानू मुझे मिस करना मत भूलना।

दिवाकर -सब कुछ भूल सकता हूँ, मगर तुम्हे नहीं। अच्छा अपना ख्याल रखना।

रेलवे स्टेशन पर पहुँचते ही दिवाकर को ऐसा लगा जैसे कोई उसका पीछा कर रहा हो। बार बार पीछे मुड़कर देखता। और किसी तरह ट्रेन में सवार हुवा और सीट पर बैठ गया। खिड़की से देखा तो कोई नजर नहीं आया। पूरी ट्रेन में उसकी निगाहे चारो तरफ देख रही थी।.....थोड़ी देर में ट्रेन चल पड़ी और रेलवे प्लेटफॉर्म छोड़ गयी।

ट्रेन एक स्टेशन पर आकर रुकी। दिवाकर कोई काम से ट्रेन से नीचे उतरा। तभी उसकी नजर एक औरत पर पड़ी जो एक बेंच पर बैठी उसे घूर रही थी, बदन पर सफ़ेद साड़ी थी। उस औरत को देखते ही उसके होश उड़ गए दिमाग ने काम करना बंद कर दिया।

उसके मुँह से निकला"   पारुल तुम जिन्दा हो।...नहीं ये नहीं हो सकता।  हड़बड़ाहट में जल्दी जल्दी ट्रेन में चढ़ा और अपनी सीट पर जाकर बैठ गया। उसके पसीने छूट रहे थे। धड़कने सांसो को तेज कर रही थी। पास में बैठे एक युवक ने पुछा"   क्या हुवा भाई साहब आप ठीक तो है। ....अ हा हा मैं बिलकुल ठीक हूँ प्लीज़ पानी की बॉटल है।  उस आदमी ने दिवाकर को पानी की बॉटल थमाई, दिवाकर ने गले को तर किया। लेकिन उसके दिमाग में सवालो की खलबली मची थी। "ये कैसे हो सकता है। क्या वो पारुल ही थी। ये मेरा वहम, अगर वो पारुल ही है तो जिन्दा कैसे, उसे मरे तो 4 महीने हो गए। पुरे सफ़र में दिवाकर पारुल के बारे में सोचता रहा।


जब अपने हमसे जुदा होते है, या कही हमेशा के लिए खो जाते है। तो उसके अपनों पर क्या बीतती है, ये सिर्फ वही जनता है। और ये दर्द जीवन भर के लिए अभिसाप बन जाती है। और इस अभिसाप का काट सिर्फ उस इंसान की मौत होती है, जिसके लिए कोई अपना हमसे हमेशा के लिए खो जाता है।

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मेज पर पड़े हुवे मोबाइल की ringtoon बजने लगी। मोबाइल फ़ोन riceve हुवा, उधर से एक आवाज आयीं" हेल्लो पूजा कैसी हो मै सुमन बोल रही हूँ ।  उधर हल्की दर्दभरी आवाज आयी"   बस सुमन अपने आप को गम के सागर से निकलने की कोशिश कर रही हूँ।

"मै तुम्हारे दुख़ को समझती हूँ पूजा, मगर जो एक बार हमारी जिंदगी से दूर चले जाते है वो दुबारा लौट कर नहीं आते।
आज पारुल को गुजरे 4 महीने हो गए हैं। अगर इस तरह तुम आंसू बहाती रहोंगी तो पारुल की आत्मा को बहुत तकलीफ होगी। अब तुम्हे इस गम से उभरकर जीना होगा, अपने लिए,निखिल के लिए, अपने सुनहरे फ्यूचर के लिए।

"कोशिश करुँगी सुमन.....उसके बाद पूजा कुछ न कह पायी
बस फ़ोन काट दिया।

उसके बाद पूजा पारुल की तस्वीर के सामने आई।

पारुल की तस्वीर के आगे पूजा फुट फुट कर रो पड़ी"   दीदी तुम्हारी याद मुझे खाये जा रही है। क्यों मुझे छोड़कर चली गयी। एक बार अपनी इस बहन के बारे सोच लिया होता। आंसुओ को पोंछते हुवे पूजा ने कहा" ईश्वर से यही प्राथना है तुम्हारे कातिल को भयानक सजा मिले। दुःख दर्द से पूजा का हाल बेहाल था। रह रहकर पूजा को पारुल की याद सता रही थी। इतनी सहनशक्ति नहीं थी पूजा में के वो पारुल की याद को दिल से निकाल दे।

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रात के 12 बज रहे थे। सीमा अपने कमरे में सो रही थी, एक आहट हुई, और अजीब आवाजे निकलने लगी।  सीमा उठकर बैठ गयी। एक डर उसके दिमाग पर हावी हुवा। उसने आवाज दी"  कौन है..  मैं कहती हूँ कौन है...
रात के अँधेरे को चीरती, एक भयानक आवाज आई"   तेरी जिन्दगी में जितनी ख़ुशी थी वो अब सब ख़त्म हो जाएँगी। और तू लाचार होकर अपना सर पिटेगी। तुम्हारी खुशहाल जिन्दगी में मौत ने अपना डेरा दाल दिया है।

" क्या बकवास है कौन हो तुम" सीमा ने डरते हुवे पुछा" सीमा ने देखा सफ़ेद वस्त्र में एक नारी सामने खड़ी है। अँधेरे में चेहरा नहीं दिख रहा था।

"एक आत्मा का कोई अस्तिव्य नहीं होता। और जिसे तू अपनी जिन्दगी कह रही है। उसी की वजह से मेरी जिन्दगी जहन्नुम हुई है। अब तेरी बारी है, वो तुझे भी नोच कर अपनी जिन्दगी दूर कर देगा।

"नहीं ये नहीं हो सकता, देखो एक लफ्ज़ भी मत कहना मेरे दिवाकर के बारे में वो मेरा प्यार है।

"नादान हो तुम जो एक इंसान के खाल में छुपे हुवे भेड़िये को नहीं पहचान पायी। एक ऐसा दरिंदा जिसने मेरी जिन्दगी को
मौत के काले अँधेरे में झोंक दिया। लेकिन अब उसे मौत से कोई नहीं बचा सकता, इतनी दर्दनाक मौत दूँगी उसे के एक मिसाल बन जाये।...उसके बाद जोरो की हवा चली और एक धुंए का गुबार उठा, ए देखकर सीमा डर से कांपने लगी। जब
धुँआ छठा तो वो आत्मा गायब थी। ये देखकर सीमा बेहोस हो गयी। दूसरे दिन उसने  दिवाकर को फोन पर सारी बात बतायी। ये सुनकर दिवाकर के रोंये खड़े हो गए।
उसने सीमा को समझाया"  देखो डार्लिंग, लगता है कोई तुम्हारे साथ गन्दा मजाक कर रहा। देखो हो सकता है ये तुम्हारा वहम हो, तुम इस पर ध्यान मत दो।   इस पर रोते हुवे सीमा ने कहा  "ये कोई मजाक नहीं है दिवाकर, वो सचमुच एक प्रेतात्मा ही है,वो हमें मार देंगी। मुझे बहुत डर लग रहा है प्लीज़ तुम जल्दी घर आ जाओ।

ठीक है सीमा मैं कल ही आ रहा हूँ "    दिवाकर ने कहा।

अब दिवाकर को पूरा यकीन हो गया वो पारुल की आत्मा ही है। जो मरकर वापस आ गयी है।

दिवाकर ने सीमा को तो संतुष्टी दे दी, मगर उस काले सच का क्या होगा, जो दिवाकर के पापो की डोर पारुल के  साथ बंधी हुई है। दिवाकर को वो दिन याद आने लगे जब उसने पारुल से अपना रिश्ता कायम किया था। जब दिवाकर ने पारुल को पहली नजर में देखा तो वो उसका दीवाना हो गया। ख़ूबसूरत सा मुखड़ा, प्यारी आँखे, रंग रूप में तो जैसे कोई सुंदरता की देवी हो। धीरे धीरे पारुल दिवाकर के करीब आयी। दोस्ती हुई और प्यार के फूल खिलने लगे। कहने को तो दिवाकर पारुल को प्यार करता था, मगर वो फूल सी नाजुक सुन्दर पारुल के जिस्म का भूखा था। दिवाकर पारुल को सिर्फ अपनी हवस और अय्यासी के लिए इस्तेमाल करता था। जब भी पारुल शादी के लिए कहती, वो बात को सुन्दर ढंग से टाल देता। एक दिन तो दिवाकर को आघात सा लगा जब पारुल ने नाजायज सम्बन्ध में होने वाले सच को सामने रखा।

पारुल -   "दिवाकर होने वाले होनी के अधीन सच को उजगार करना चाहती हो। अब हमें विवाह के बंधन में बंधना ही होगा। क्योंकि मेरे गर्भ में तुम्हारा प्यार पल रहा है।.......इतना सुनना था के दिवाकर के पैरो तले जमीन खिसक गयी। वो समझ नहीं पाया क्या करे...चेहरे पर ख़ुशी लेकर वो पारुल से बोला"    तुम सच कह रही हो पारुल

पारुल ने हा में सर हिलाया।

दिवाकर अंदर से पूरी हिल गया था, लेकिन बाहर से वो खुश होने का नाटक करने लगा। और उसने पारुल से शादी करने की बात भी कही।

एक प्लान के तहत दिवाकर पारुल को लेकर एक वीरान जगह पर एक मंदिर में शादी करने निकल पड़ा। दिवाकर ने पारुल से कहा"   पारुल तुम यही मेरा वेट करना मै कुछ जरुरी सामान लेकर फ़ौरन आ रहा हूँ। ....लेकिन पारुल क्या जानती थी दिवाकर के शैतानी दिमाग में क्या योजना चल रही है। वो वहा से गया जरूर, मगर लौटकर नहीं आया। अपने प्यार के सपनो में खोई और दिवाकर के इन्तजार में कब शाम हो गयी, पता ही नही चला। इन्तजार करते करते रात हो चली। पारुल समझ गयी दिवाकर ने उसे बहुत बड़ा धोखा दिया है। पारुल की आँखों से आंसू टपकने लगे। अपने नसीब को लेकर रोने लगी। दिवाकर ने पारुल को एक ऐसी अंजान जगह ले जाकर छोड़ा था। जहां से वापस शहर लौटना बहुत ही कठिन। रात के ही समय में पारुल किसी तरह भटकते भटकते अंजानी रहो की और निकल पड़ी।....जिस वक़्त पारुल ट्रेन हादसे में अपनी जान गँवाई थी, दिवाकर को इस बात का पता चल गया था। मन ही मन उसने अपनी जीत को सलाम किया। उसके ठरकी पन ने कई लड़कियो को अपने प्रेमजाल में फंसाया और अपनी हसरत को पूरा करके छोड़ दिया। सीमा आयी उसकी जिन्दगी में तो पारुल को निकाल फेंका। आज वही पारुल रूहानी शक्ति बनकर उसका गला दबोचने आ गयी है। क्या होगा जब सीमा सच्चाई से वाकिफ होगी।

दिवाकर दूसरे दिन वापस आ गया। उसने सीमा को सम्भावना दी। उसे कुछ नहीं होगा। लेकिन पारुल की आत्मा उसे हर वक़्त नजर आती। दिन के उजाले में, रात के अँधेरे में, ट्रेन में, चलती राह पर, सपने में, खुली आँखों से, इतना ज्यादा डर पैदा हो गया के दिवाकर की हालात पागलो जैसी हो गयी। इस आत्मा से निजात पाने के लिए सीमा उसे एक तांत्रिक के पास ले गयी। तांत्रिक ने कहा इस आत्मा से निजात पाने का आसान तरीका नहीं है, बहुत कठिन परिश्रम और मन्त्र जाप करने होंगे।  "आप कुछ भी करके मेरे मंगेतर के सर से उस बुरी आत्मा का साया दूर कर दे, इसके लिए हम कुछ भी करने को तैयार है"  सीमा बोली।
ठीक है मैं जैसा कहता हूँ, वैसा करो.....

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पारुल की आत्मा के ख़ौफ़ ने दिवाकर को अंदर तक हिला डाला।      "मेरी जान की दुश्मन बन बैठी है वो प्रेतात्मा, सोते जागते हर समय वो मेरे आस पास मंडराती रहती है। पागलो जैसी हालात हो गई मेरी, समझ में नहीं आता क्या करू"  दिवाकर ने अपने दोस्त निरंजन से कहा।

रिलेक्स दिवाकर सब ठीक हो जायेगा। तुम अपने दिमाग पर ज्यादा जोर मत डालो"  दिवाकर के दोस्त निरंजन ने कहा।

उस रात सीमा के घर में पारुल की आत्मा ने फिर दस्तक दी
सीमा ने कांपते हुवे कहा"   प्लीज़ देखो मेरे दिवाकर को छोड़ दो। मै तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ।    " मौत तो उसकी निश्चित है। और उसकी मौत वही होगी जहा पर मेरी मौत हुई थी। आज के बाद उस कमीने दिवाकर चेहरा नहीं देख पयोंगी"   पारुल की आत्मा में एक क्रोध की तपिश थी।

इसी के साथ सीमा चीख पड़ी"     नहींइइइइ


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उसी सुबह दिवाकर के दोस्त निरंजन ने उसे एक रहस्य से अवगत कराया। सीमा को बिना बताये दिवाकर
उसी जगह पहुंचा जहा पारुल ने आत्महत्या की थी। वही जगह रेलवे लाइन, और दूसरी तरफ झाड़िया। झाड़ियो के पास उसे वही पारुल की आत्मा नजर आयी, सफ़ेद साड़ी में, बाल बिखरे हुवे, लेकिन दिवाकर डरा नहीं, दबे पाँव, चुपके चुपके जाकर पीछे से पारुल की आत्मा की दोनों हाथ जकड़ लिए और बोला"   बस बहुत हो गया ये आत्मा का खेल पूजा जी। जुड़वाँ होने का बहुत बड़ा फायदा उठाया तुमने। पारुल की हमशक्ल जुड़वाँ बहन पूजा, बहुत तड़पाया तुमने हमें, लेकिन अब तुम अपने जाल में फंस चुकी हो। क्या समझती हो अपने आप को, मुझे डराकर तुम अपनी बहन का बदला ले लोगी मुझे मार दोगी" इसी के साथ दिवाकर ने पूजा को एक जोरदार थप्पड़ मारा, पूजा गिर पड़ी
बहुत ज्यादा तकलीफ दी है तूने मुझे, हा ये सच है के मैंने तेरी जुड़वाँ बहन पारुल की जिन्दगी बर्बाद की है। और आज तेरी भी इज्जत को तार तार कर दूँगा। इसे के साथ दिवाकर पूजा के साथ गन्दा व्यवहार करने लगा। छीना झपटी में पूजा ने वो गन निकाल ली, जो दिवाकर अपने साथ लाया था। और दिवाकर पर तान दी। शेरनी सी गुर्राहट थी पूजा के शब्दों में"    तेरी मौत ही तुझे यहाँ खींचकर लायी है वहसी दरिंदे। दीदी की आत्मा को तब तक शांति नहीं मिलेगी जब तक तू जिन्दा रहेगा। बहुत जुल्म किये है तूने मासूम लड़कियों पर, आज तेरे पापो का अंत होगा। दिवाकर स्तब्ध खड़ा रहा वो सोच रहा था क्या करे। हवस की आग ने उसे अँधा कर दिया था। अब कोई चारा नहीं था। पूजा ने कहा"   हिलने की कोशिश मत करना, वर्ना भेजा उड़ा दूँगी
तेरी मौत इसी रेलवे लाइन पर होगी, जहाँ दीदी ने अपनी जान ली। यही ट्रेन से कटकर ....पूजा ने गन के सहारे दिवाकर को रेलवे लाइन पर खड़ा कर दिया। और दिवाकर दया की भीख मांगने लगा। इससे पहले कोई ट्रेन आती और दिवाकर को उड़ा देती, एक आवाज ने दोनों का ध्यान आवाज की तरफ खींचा"    रुक जाओ पूजा, ये क्या कर रही हो, किसी की जान लेना तुम्हारा काम नहीं है, ये गन फैंक दो और दिवाकर को छोड़ दो। पूजा को रोकने वाले पूजा के पति थे"   पूजा ने गुस्से में कहा"   नहीं निखिल आज अगर ये हवस का पुजारी जिन्दा बच गया तो न जाने कितनी लड़किया बर्बाद होती रहेंगी, इस शैतान का मरना बहुत जरुरी है।

"मै जनता हूँ पूजा तुम अपनी बहन का बदला लेना चाहती हो
लेकिन मै नहीं चाहता के मेरी पूजा के हाथ खून से रंगे। देखो ऐसा मत करो" निखिल ने पूजा को समझाया।

मेरे बीच में मत आओ निखिल, मेरा इंतकाम अभी पूरा नहीं हुवा है। और ये इसकी मौत से होगा"  पूजा ने कहा।

"ये पागलपन छोड़ो पूजा, और इस गन को फैक दो"  निखिल जबरदस्ती पूजा से गन छीनने लगा, और दिवाकर से बोला"   दिवाकर वहा से है हट जाओ,ट्रेन किसी भी वक़्त आ सकती है। दिवाकर हड़बड़ाहट में रेलवे लाइन से हट गया।...और छीना झपटी में गन पूजा के हाथ से छुटकर जमीन पर गिर गयी। पूजा जमीन पर बैठकर रोने लगी। ....उसे ज्ञात हुवा के अगर पापी के लिए हथियार डाल दिए जाये, तो ये सबसे बड़ा पाप है। उसने पड़ी हुई गन उठाई और एक के बाद कई फायर दिवाकर पर झोंक दिए। दिवाकर परकटे पंछी की तरह फड़फड़ाकर रेलवे लाइन पर गिर पड़ा, और कुछ पलो के बाद सांत हो गया।.... निखिल ये देखकर आश्चर्यचकित रह गया। आज जाकर पूजा के सीने में दहक रही अग्नि शांत हुई

निखिल ने अपनी पत्नी पूजा से कहा"  पूजा आज तुम्हारे हाथो एक गुनाह हो गया है। देखो पूजा मैं ओरो की तरह नहीं जो इस गुनाह को नजर अंदाज कर दे। तुम्हे कानून के सुपुर्द जाना ही होगा।
" मुझे तुमसे यही उम्मीद थी निखिल"  पूजा ने निखिल की बात पर सहमति दी।

निखिल को अपनी बीवी पूजा की हिम्मत पर गर्व महसूस हो रहा था।



            (   The End  )



  

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