डर के आगे मौत है

डर सदा से इन्सान का पीछा करता रहा है..सदियां बीत जाने पर भी यह अलग अलग तरह से अपना रूप दिखाता रहा है..  यह छोटी सी कहानी भी डर और रोमांच का मिश्रण है..जिसे कई बार मैंने मेरे गाँव के अनेक बुजुर्गों से सुना था..
यह कहानी हमारे गाँव मे हर कोई जानता है. कहानी सुनने पर जो मेरे सामने आया वह मैं आप सब तक पहुंचा रहा हूँ.  जो कहानी मैंने सुनी वह कुछ इस प्रकार थी..

बलदेव नाम का एक बहुत बलिष्ठ पहलवान युवक हमारे गाँव मे रहता था..उसकी उम्र पच्चीस या छब्बीस वर्ष की रही होगी..पहलवान ऐसा कि हर दंगल वही जीतता था..आसपास के गांव मे उसका मुकाबला करने वाला दूसरा कोई पहलवान और नहीं था..दिलेर भी ऐसा कि आधी रात को अकेला ही शमशान मे भी चला जाए..

एक बार उसने अपने खेत मे खरबूजे की फसल लगा रखी थी..आवारा पशु और नील गाय खेती को उजाड देते थे..
इसलिए वह दिन रात खेतों मे रहकर अपनी फसल की
रखवाली करता था..फसल काफी अच्छी लगी थी.. इसलिए बलदेव को इस बार अच्छे दाम मिल जाने की उम्मीद थी..
वह सुबह शाम खेतों मे ही रहकर कसरत कर लेता था..कभी कभार जब उसका बूढा पिता खेत मे चला आता था..तभी वह कुछ समय के लिए गांव आता था..
गाँव से खेत की दूरी कोई दो तीन किलोमीटर के आसपास थी..

  एक बार अमावस्या की काली अँधेरी रात थी।
   सर्वत्र भयानक सन्नाटा छाया  हुआ था.. बलदेव अपने खेत मे मौजूद एक घास फूस की झोपडी के बाहर एक खटिया पर लेटा हुआ था..हवा के हल्के हल्के झोंके आ रहे थे..
खेत मे काम करके दिन भर के थके बलदेव को जल्दी ही नींद ने अपने आगोश मे ले लिया..
रात मे ही किसी समय उसे एक स्वप्न आया कि एक बहुत लम्बा और तगडा पहलवान उससे कुश्ती के लिए ललकार रहा है..जिसका रंग बहुत काला है..आँखे अंगारों सी लाल हैं.. दोनों के बीच कडा मुकाबला होता है..पता नहीं कितनी देर तक..दोनों ही थक कर चूर हो गए थे.. मगर कोई भी हार मानने को तैयार नहीं था..
परंतु अचानक ही काले पहलवान के एक दाँव मे फँस
कर बलदेव हारने की कगार पर पहुंच गया..
और ठीक उसी पल उसकी आँखे खुल गई..
उसका शरीर पसीने से लथपथ था..
उसने उठकर ...खटिया के पास रखे मिटटी के बर्तन
से पानी पीया..और उस सपने के बारे मे सोचने लगा..
क्या सच मुच आसपास के गांव मे कोई ऐसा है  जो उसे
दंगल मे पछाड़ सके..
रात आधी से ज्यादा बीत चुकी थी..वह दोबारा खटिया
पर लेटकर सोने का प्रयत्न करने लगा..
सहसा उसे लगा कि उसके खेत मे कोई घुस आया है..
क्योंकि उसे कदमो की आवाजे सी आ रही थी..
उसने उठकर देखने का निर्णय लिया..क्योंकि अँधेरा  होने
के कारण उसे वहां से कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था..

जब वह आवाजों की दिशा मे आगे बढा तो उसे एक काली  परछाई सी एक स्थान पर खडी दिखाई दी..
और कोई होता तो यह देख कर डर गया होता..
मगर बलदेव बलिष्ठ होने के साथ साथ दिलेर भी था..
उसने आवाज लगाई.."कौन है.."..?
मगर कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई.. अब वह परछाई के बिल्कुल
समीप पहुंच चुका था..
  अँधेरे मे देखने की कोशिश करते हुए बलदेव को लगा कि वह कोई काला सा आदमी है..लाल अँगारो सी आँखे ..लम्बा तगडा शरीर..अचानक उछल पडा बलदेव
क्योंकि जिसके साथ वह सपने मे कुश्ती लड रहा था..
यह आदमी हूबहू वैसा ही दिखाई दे रहा था..
यह कैसे संभव है..?
क्या उसे कुछ धोखा हुआ है...?
ऐसे कई सवाल अभी वह सोच ही रहा था कि उस  काले आदमी ने अपनी जंघाओं पर हाथ मारते हुए..
चुनौती प्रस्तुत कर दी..उसके शरीर पर कपडे के नाम पर लाल लंगोटी सी अँधेरे मे चमक रही थी..
  अब बलदेव आगे कुछ ना सोच पाया..क्योंकि उसको कोई कुश्ती के लिए ललकार रहा था..
उसने भी अपने कपडे एक ओर निकाल कर रख दिए..
और उससे भिडने को तैयार हो गया..
अब दंगल शुरू हो गया था..और वह भी खेत के भीतर ही..
जल्दी ही बलदेव को उसकी ताकत का अहसास हो गया था.
क्योंकि इतनी देर तक उसके सामने टिक पाना हर किसी के वश की बात नहीं थी..वह हर तरह से बलदेव को टक्कर दे
रहा था..मुकाबला बराबरी का चल रहा था..
यहां तक की खरबूजे की फसल भी उनके पैरो तले कुचल
कर बरबाद हो रही थी..मगर बलदेव को तो जैसे कुशती के
सिवा कुछ होश ही नहीं रहा था..
मुकाबला लम्बा खिंचता जा रहा था..दोनो थक कर चूर हो
गए थे.. मगर हार मानने को कोई भी तैयार नहीं दिख
रहा था..यहां तक की सुबह होने वाली थी..
तभी बलदेव के एक दाँव से धोखा खाकर वह काला आदमी
चारों खाने चित हो गया..
अपने नाम के अनुसार बलदेव अपराजेय रहा था..
हराने पर पहली बार ध्यान से बलदेव ने उसे देखा..वह शत प्रतिशत  वही था जिसे उसने सपने मे देखा था..
अचानक बलदेव की नजर  उसके पैरों पर गई..
और वह दहल उठा..
क्योंकि उसके पैरों के पंजे उल्टे थे..
क्या वह इन्सान नहीं था..?
क्या वह इतनी देर से जिससे कुशती लड रहा है..
वह कोई शैतान है..?
बलदेव के जिस्म मे झुरझुरी सी दौड गई..
कभी ना डरने वाले बलदेव को आज पहली बार डर
का अहसास हो रहा था..
इतनी देर मे वह उल्टे पंजो वाला भी उठ गया।.और  असावधान और हैरानी मे उलझे हुए बलदेव की गरदन मरोड दी..
सहसा हुए इस  हमले के  लिए वह बिल्कुल भी तैयार नहीं था
उसकी गर्दन की हड्डी के टूटने की आवाज और उसकी चीखें
दोनों एक साथ सुनाई दे रही थी..

सुबह जब गाँव के लोग खेतों मे पहुंचे तो भयानक मंजर
उनकी आँखों के सामने था..बलदेव का सारा खेत उजडा
पडा था..खरबूजे की फसल पूरी तरह तबाह हो गई थीं..
और उनके बीच मे बलदेव पडा था..जो अंतिम सांसे गिन रहा था..उसने रात को हुई घटना  टूटे फूटे शब्दों मे बताई और दम तोड दिया..
पूरे गाँव मे खबर फैल गई थी कि बलदेव को मारने वाला
कोई इन्सान नहीं बल्कि कोई शैतान या जिन्न था..
जिसने भी यह सुना थरथरा कर रह गया..

                 
                       समाप्त

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