रात और ज्यादा सर्द हो चली थी| बारिश और तेज़ हवा का शोर जैसे दिमाग पर नगाड़ों सी चोट कर रहा था| रात के अन्धकार में भी क्षितिज तक बिखरे हुए लाल वर्षामेघों से हर थोड़ी देर पर बिजली कौंध कर जैसे चेतावनी दे रही थी कि बारिश तूफानी रूप एख्तियार करने को आमादा है|
सर से पैर तक भीगी हुई वो लड़की सूखे पत्ते के सामान काँप रही थी| उसके भीगे हुए बाल लटों की सूरत में उसके चेहरे, लम्बी सुराहीदार गर्दन और कन्धों पर आए हुए थे| उसकी लटों से गिरती बारिश की बूँदें उसके जिस्म के उभारों और घाटियों से गुजरते हुए नीचे वेद के डोरमैट को भिगो रही थीं|
‘क्या मै बारिश रुकने तक यहाँ रुक सकती हूँ प्लीज़’?
वेद ने गौर किया कि बोलते वक्त लड़की के पंखुड़ियों जैसे होंठ काँप रहे थे| यकीनन उसे ठंड लग रही थी| पर वेद उसे अन्दर कैसे आने दे सकता था, उसे तो नीना की लाश ढूढनी थी|
वेद के चेहरे पर असमंजस के भाव उभरे| लड़की जैसे उसके मनोभाव समझ गई|
‘मुझे गलत मत समझिए...मेरी स्कूटी खराब हो गई है और यहाँ आस-पास आपके फार्महाउस के अलावा कोई दूसरी जगह नहीं है’| लड़की ने फ़ार्महाउस के आयरनगेट के पार खड़ी एक स्कूटी की तरफ इशारा करते हुए कहा|
वेद अब भी दुविधा में था| बात तो लड़की ठीक कह रही थी, उस फ़ार्महाउस के आस-पास क्या दूर-दूर तक कोई ऐसी जगह नहीं थी जहां मूसलाधार बारिश में शरण ली जा सके लेकिन वो उसे अन्दर कैसे आने दे सकता था| अभी उसे नीना की लाश की गुत्थी सुलझानी थी| वेद ने उस लड़की को मना करने के लिए मुंह लगभग खोला ही था कि अचानक उसके दिमाग में उसकी आवाज़ कौंधी|
‘ये क्या कर रहा है वेद! इस लड़की को यहाँ से दफ़ा कर के तू अपनी ताबूत में खुद ही कील ठोंक लेगा जबकि ये लड़की तेरे लिए तुरुप का इक्का बन सकती है| ज़रा सोच, अगर कल को नीना के केस की इन्वेस्टीगेशन करती हुई पुलिस इस लड़की तक पहुँच गई तो तेरा इसे घर के अन्दर ना आने देना इस बात की तस्दीक करेगा कि नीना की लाश घर पर होने की वजह से तूने ऐसा किया| मत भूल कि तू कीचड में सना हुआ है और संदिग्ध परिस्थितियों में इस लड़की के सामने आया है’|
‘अब मैं क्या करूं’? वेद खुद में बडबडाया|
‘प्लीज़ मुझे अंदर आने दीजिए| I promise, I won’t create any trouble’| लडकी को लगा कि वेद ये सवाल उससे कर रहा है इसलिए उसने कातर भाव से जवाब दिया|
‘इसे अंदर आने दे वेद| कल को ये लडकी तेरी विटनेस बन सकती है कि जिस रात नीना लापता हुई उस रात ये इस फार्महाउस में मौजूद थी’| वेद के दिमाग में उसकी आवाज़ फिर कौंधी, वो फ्रंट डोर से हट गया, लडकी चेहरे पर कृतज्ञता के भाव लिए हुए अंदर लिविंग हॉल में आ गई|
हॉल में आकर वो असमंजस के भाव चेहरे पर लिए खड़ी हुई थी| वहां रखे महंगे लेदर पॉलिश्ड कवर चढ़े सोफे और टिम्बर वुड फर्नीचर पर बैठकर वो उन्हें खराब नहीं करना चाहती थी| अचानक उसकी नज़र नीचे फर्श पर गई जहां एक बेहद कीमती पर्शियन कालीन बिछा हुआ था जोकि उसके जिस्म से टपकते पानी से भीग रहा था| लड़की हडबडा कर पीछे हट गई|
‘I..I’m sorry’| उसके चेहरे पर किसी स्कूली बच्ची जैसी घबराहट थी|
‘That’s alright miss...’ वेद शुष्क भाव से भीगे हुए पर्शियन कालीन को देखते हुए बोला| उसे खुद पर ही आश्चर्य हुआ कि ऐसी विषम परिस्थिति में भी उसे कालीन का अफ़सोस हो रहा है लेकिन साढ़े तीन लाख के ओरिजिनल पर्शियन कालीन के यूं किसी अजनबी द्वारा बर्बाद किया जाना उसे खल रहा था|
एक लेखक के तौर पर वेद का ये व्यक्तिगत अनुभव था कि हर इंसान अपनी प्रवृति के अनुरूप ही कार्य करता है, परिस्थितियाँ चाहे अनुकूल हों या प्रतिकूल इंसान अपनी प्रवृति नहीं बदल सकता| भौतिक सुख और संसाधनों से उसे जो लगाव था उस मोह का त्याग वो उस दुष्कर परिस्थिति में भी नहीं कर पा रहा था|
‘लतिका...लतिका सान्याल’|
वेद ने पर्शियन कालीन से अपनी नज़रें उठाई और लड़की की ओर प्रश्नवाचक दृष्टि से देखने लगा|
‘Myself Latika Sanyal’. लड़की ने झेंपते हुए कहा, जैसे उसे समझ ना आ रहा हो कि उसे ऐसी अजीबोगरीब स्थिति में self introduction देने की ज़रूरत ही क्या थी|
‘Ved Sabarwal. Make yourself comfortable latika, I’ll fetch you a towel’. वेद ने हडबडाहट में बोला| उसकी नज़रें पर्शियन कालीन के बेहद महीन मोटिफ्स से उठकर लतिका के बदन पर टिकी थीं| वास्तव में वो लतिका को देख नहीं रहा था, सिर्फ नज़रें उसपर थीं और दिमाग में नीना की लाश, मेहर का लॉकेट, पीछे गार्डन में खुदा हुआ गड्ढा, पकड़े जाने का डर और खुद की गूंजती हुई आवाज़ जो मार्गदर्शन से ज्यादा उलझन पैदा कर रही थी loop में चल रहे थे|
‘इस लड़की को दफा करना चाहिए था| इसे अंदर आने देकर गलती हो गई’|
‘दफा करके भी कुछ ना होना था, कल को पुलिस का शक ही मज़बूत होता’!
‘कल का हुआ काम आज ही तमाम करवा लिया है तूने! तेरा दिमाग खराब था जो तूने इसे अन्दर आने दिया| ज़रा सोच, इसके रहते तू अपनी मुर्दा बीवी की लापता लाश कैसे खोजेगा’!
वेद के अंतर्मन ने उससे जिरह की, वेद उस परिस्थिति में था जहां इंसान परिस्थिति के दबाव और व्यथिति हुए विचारों की अनिश्चितता में कोई कदम उठा तो ज़रूर लेता है लेकिन फिर पल प्रतिपल गुजरते समय के साथ उसका संशय बढ़ता जाता है कि उसने जो निर्णय लिया है वो सरासर गलत है जबकि उन परिस्थितियों में यदि इंसान उस निर्णय के इतर दूसरा निर्णय भी लेता तो भी वो इसी संशय में डूब रहा होता|
वेद यूं ही अपने ख्यालों में खोया हुआ वहीं खड़ा था, उसे यकीन हो चला था कि लतिका को अन्दर आने देकर उसने अपने ताबूत में लम्बी और चोखी कील पूरी तबियत से ठोंकी है| ना वो अपनी जगह से टॉवल लाने के लिए हिला ना ही उसकी नज़रें लतिका के बदन से ढलकी| वो तो अपने ही विचारों के दलदल में धंसा जा रहा था| दूसरी तरफ वेद के अंतर्मन में चल रहे द्वंद्व से पूर्णतः अनभिज्ञ लतिका यूं उसे अपने जिस्म को अपलक घूरता देख कर बुरी तरह असहज हुई जा रही थी| लतिका ने दोनों हाथों से अपने भीगे हुए जिस्म को छुपाने का असफल प्रयास किया|
वेद की जैसे तंत्रा भंग हुई उसने हडबडा कर झेंपती हुई लतिका पर से नज़रें हटाई और दूसरी तरफ घूम गया|
‘म..मैं टॉवल लेकर आता हूँ’| वेद कहते हुए तेज़ी से लिविंग रूम से निकल गया| लतिका लिविंग रूम के मेन डोर के पास ही कोने में संकुचाई खड़ी रही| उसके मुखमंडल पर तेज़ी से आते-जाते भावों से यह साफ़ पता चल रहा था कि उसे भी वेद से शरण मांगने के अपने निर्णय पर संशय हो रहा था| शायद यही कारण था कि वो एन मेन डोर के पास ही खड़ी हुई थी जैसे खुद को तैयार कर रही हो कि किसी भी गड़बड़ होने की आशंका में फ़ौरन वहां से भाग सके|
वेद ग्राउंड फ्लोर पर ही बने हुए मास्टर बेडरूम की तरफ बढ़ गया| अपने पहले फेरे में वेद नीना की लाश की तलाश में फार्महाउस का चप्पा-चप्पा छान चुका था| फार्म हाउस के ग्राउंड फ्लोर पर एक विशाल लिविंग हॉल था जिसके एक हिस्से में बैठक और दूसरे हिस्से में डाइनिंग स्पेस था| उस लिविंग हॉल को देखकर साफ़ पता चलता था कि फार्म हाउस में पार्टियों का आयोजन यहीं होता होगा| लिविंग हॉल में एक खूबसूरत बार काउंटर था जोकि महंगी ओकवुड का बना हुआ था और उससे भी कहीं महंगी और बेशकीमती शराब की वो विंटेज बॉटल्स थीं जो यूं सजाई गई थीं जैसे जौहरी अपने सबसे खूबसूरत और बेशकीमती जवाहरात डिस्प्ले पर सजाता है| Lagavulin 1875 single malt scotch, 1930 की Glenfiddich whisky, Breckenridge Bourbon, Hibiki जैसे बेहद दुर्लभ और कीमती नगीने बहुत शान से उस बार में अपनी चमक बिखेर रहे थे| लिविंग हॉल से लगकर एक दरवाज़ा था जोकि किचेन में खुलता था| किचेन ओपन मॉड्यूलर था और इतना बड़ा था जहां कम से कम चार आदमी एकसाथ काम करके चालीस-पचास लोगों का खाना आराम से बना सकें| किचेन में एक विशाल 984 लीटर का मल्टी-डोर रेफ्रीजिरेटर था, इसके अलावा माइक्रोवेव, बारबेक्यू ग्रिलर से लेकर आधुनिक किचेन की सारी वस्तुएं वहां मौजूद थी| किचेन में चार दरवाज़े थे, पहला फ्रंट हॉल से लगा हुआ था| फ्रंट के ठीक सामने जो बैकडोर था वो सीधे फार्महाउस के पीछे गार्डन में खुलता था| किचेन के दाहिनी तरफ का साइड डोर एक पैसेज से जुड़ा हुआ था| ये पैसेज सामने के हॉल से भी जुड़ा था और आगे ग्राउंडफ्लोर पर बने कमरों तक जाता था जहां एक मास्टर बेडरूम के अलावा दो गेस्ट बेडरूम थे, इनसे गुजरता हुआ पैसेज एक वरेंडा को जाता था जहां कुछ चेयर्स और स्विंग लगे हुए थे| वरेंडा के एक ओर स्विमिंग पूल था और दूसरी तरफ गार्डन| किचेन के बायीं तरफ का दरवाज़ा स्टोर का था| स्टोर इतना बड़ा था जहां चार-पांच लोगों के महीने भर का राशन आराम से रखा जा सके| इसके अलावा स्टोर में ही एक 500 लीटर का डीप फ्रीज़र चेस्ट रखा हुआ था, जो बीयर क्रेट्स, प्रोसेस्ड एंड पैकेज्ड फूड्स के पैकेट्स से भरा हुआ था| वेद इस डीप फ्रीजर चेस्ट को भी खोल कर चेक कर चुका था क्योंकि लाश छुपाने के लिए वो एक बेहद मुफीद जगह थी| चेस्ट के अंदर का सामान पहले की तरह यथावत था| 
फार्महाउस की बाहरी बाउंड्री काफी नीची थी और मेन आयरन गेट भी हमेशा खुला रहता था, इसका मुख्य कारण ये था कि फार्महाउस के दोनों एंट्रेंस यानी लिविंग हॉल के फ्रंट डोर और किचेन के बैकडोर पर हाउस सिक्योरिटी सिस्टम इन्सटाल्ड था| दोनों दरवाज़े एक ख़ास कॉम्बिनेशन से ही खुलते और लॉक होते थे जो सिर्फ वेद और नीना जानते थे| अगर किसी ने गलत कोड सिक्योरिटी सिस्टम में डालने की या फिर दरवाज़ों को बलपूर्वक खोलने की कोशिश की तो सिक्योरिटी सिस्टम का अलार्म पूरे घर के साथ-साथ वेद और नीना के फोन्स पर इन्सटाल्ड सिक्योरिटी एप्प पर बजता, इसके साथ ही ये अलार्म उस प्राइवेट हाउस सिक्योरिटी कंपनी को भी आगाह करता जिसने ये हाउस सिक्योरिटी सिस्टम इनस्टॉल किया है और कंपनी के गार्ड्स महज़ दस मिनट में वहां पहुँच जाते| फ्रंट डोर और किचेन बैकडोर के अलावा फार्महाउस में प्रवेश करने का एकमात्र रास्ता वो वरेंडा था जो पैसेज से जुड़ा हुआ था| वहां एक मज़बूत चैनल गेट लगा था जिसे बंद कर लेने के बाद फार्महाउस की बिल्डिंग का हिस्सा गार्डन, लॉन और बाहरी हिस्से से पूरी तरह कट जाता था| सिक्योरिटी का ये बेहद खर्चीला लेकिन पुख्ता इंतजाम रखना वेद के लिए ज़रूरी था क्योंकि वो और नीना फार्महाउस पर हमेशा नहीं होते थे| उनके मुंबई स्थित अपने अपार्टमेंट में होने की स्थिति में भी फार्महाउस और अंदर का बेशकीमती सामान पूरी तरह सुरक्षित रहता था| इसके अलावा वेद ने एक केयरटेकर फार्महाउस की देखभाल के लिए रखा हुआ था जो उनकी अनुपस्थिति में फार्महाउस पर ही रहता था, वेद और नीना जब फार्महाउस पर आते थे तब वेद केयरटेकर को छुट्टी दे देता था| वेद, नीना और हाउस सिक्योरिटी कंपनी के अलावा केयरटेकर इकलौता वो शख्स था जिसके पास फार्महाउस के दरवाज़ों के पासकोड थे|  
परेशानहाल वेद मास्टर बेडरूम में पहुंचा|
‘पिछली बार भी टॉवल लेने आया था| तेरे उस टॉवल ने ही आज इतना बड़ा बखेड़ा खड़ा कर दिया है’| वेद के दिमाग में उसकी ही आवाज़ गूंजी|
वेद ने अपने सर को जोर से झटका दिया जैसे सारे अनर्गल विचारों को खुद से परे फटक देने की चेष्ठा कर रहा हो| उसने कबर्ड का अपना साइड खोला और एक टॉवल निकाला| उसी समय वेद को ऐसा लगा जैसे बैडरूम के दरवाज़े के बाहर से कोई साया गुज़रा हो|
‘कोई है...ज़रूर कोई है यहाँ पर| शायद ये लड़की भी उससे मिली हुई है’| वेद के विचार फिर बडबडाना शुरू कर चुके थे|
‘बंद करो अपनी बकवास!! तुम सिर्फ मुझे कंफ्यूज कर रहे हो| अगर मदद नहीं कर सकते तो दिमाग चाटना बंद करो’!! वेद झल्लाहट में जोर से चिल्लाया|
वेद की आवाज़ बाहर हॉल में खड़ी लतिका तक भी पहुंची| लतिका के चेहरे पर अनिश्चितता और असमंजस के भाव थे, उसके चेहरे से ही साफ़ ज़ाहिर था कि उसके अन्दर भी खुद से बहस चल रही है| अंततः उसके अंतर्मन की बहस में किसी एक पक्ष ने जीत हांसिल की, लतिका के चेहरे पर दृण भाव आए| उसने निश्चय कर लिया कि उसका वहां ठहरना मुनासिब नहीं है, वो बिना वेद को बताए चुपचाप वहां से निकल जाने के लिए वापस मुड़ी| लतिका ने हॉल के मेनडोर का नॉब घुमाया पर दरवाज़ा नहीं खुला|
अब लतिका की नजर डोर पर इन्सटाल्ड सिक्योरिटी लॉक पर गई| दरवाज़े के ठीक बगल में एक कैलकुलेटर के आकार का की-पैड लगा हुआ था जिसके डिस्प्ले पर Please enter the Passcode ब्लिंक कर रहा था| लतिका का दिल बैठ गया| वो फंस चुकी थी, चूहेदानी में फंसी चुहिया के सामान वो फंस चुकी थी|
इस दौरान वेद बैडरूम से बाहर निकल कर पैसेज में खड़ा था, अगर वाकई कोई वहां था तो वो उस पैसेज से वरेंडा की ओर बढ़ा था| मास्टर बैडरूम के आगे पैसेज में कतार से दो गेस्ट बैडरूम थे, वेद बेहद एहतियात से पहले गेस्ट बैडरूम की ओर बढ़ा|
लतिका की निगाहें अपने आस-पास की जगह को देखकर समझने की कोशिश कर रही थीं| इस प्रक्रिया में उसका ध्यान लिविंग रूम के उस दरवाज़े की ओर गया जो किचेन से लगा हुआ था| दरवाज़े की एक बाहुत ही बारीक सी झिर्री खुली थी| एक पल को लतिका को लगा कि उसने दरवाज़े की उस झिर्री के पीछे कुछ हिलता देखा है, जैसे वहां कोई खड़ा हो और उसे ही घूर रहा हो| लतिका के शरीर में सिहरन पैदा हो गई| छोटे कदमों से चलती हुई वो आहिस्ता, बेआवाज़ आगे बढ़ी, उस दरवाज़े की ओर|
लतिका का दिल पसलियों पर तेज़ी से चोट कर रहा था| सस्पेंस से उसकी साँसें धौंकनी बनी हुई थीं| थर्राती हुई उँगलियों के पोरों से उसने हौले से दरवाज़े को धक्का दिया| दरवाज़े ने बेआवाज़ अपनी झिर्री का दायरा बढ़ा दिया, लतिका अंदर प्रविष्ट हुई| किचेन खाली था, वहां उसे कोई दिखाई नहीं दिया| उसने देखा कि किचेन में चार दरवाज़े थे, जिस दरवाज़े से वो अन्दर आई थी उसके ठीक सामने वाला दरवाज़ा यकीनन फार्महाउस का बैकडोर था| लतिका भाग कर उस दरवाज़े तक पहुंची और उसका नॉब घुमाया, दरवाज़ा लॉक्ड था| उसकी नज़र दरवाज़े के बगल में लगे ठीक वैसे ही ऑटोमेटिक सिक्योरिटी लॉक पैनल पर पड़ी जैसा उसने लविंग रूम के फ्रंटडोर के पास देखा था, उसका चेहरा उतर गया| उसने फ़ौरन किचेन का साइड डोर खोला, वो एक स्टोर रूम था| वहां कोई भी खिड़की दरवाज़ा नहीं था जहां से बाहर निकलने की उम्मीद की जाए, अलबत्ता वहां रखे डीप फ्रीज़र चेस्ट पर उसकी नजर अवश्य पड़ी|
‘इतना बड़ा फ्रीज़र! इसमें तो पूरे इंसान को मार कर फिट किया जा सकता है’| अनायास ही लतिका के मन में विचार कौंधा| किसी अज्ञात भावना से प्रेरित होकर वो आगे बढ़ी और उसने फ्रीज़र का लिड उठाया| फ्रीजर बियर क्रेट्स और पैकेज्ड फूड्स से भरा हुआ था| लतिका वहां से बाहर निकली, अब सिर्फ एक दरवाज़ा बचा था| लतिका किचेन के उस दूसरे साइड डोर की तरफ बढ़ी|
पहला गेस्ट बैडरूम जिसमे वेद प्रविष्ट हुआ था वो बिलकुल खाली था| बाहर निकल कर वेद ने दूसरे गेस्ट बैडरूम का दरवाज़ा खोला, वो भी खाली था|
‘यानी जो कोई भी था वो वरेंडा की तरफ गया होगा’? मन ही मन सोचते हुए वेद एकबार फिर पैसेज में निकला|
इससे पहले कि वो पैसेज से वरेंडा की और बढ़ता उसे पैसेज के दूसरे कोने पर किचेन से कुछ हल्की आवाज़ सुनाई दी|
वेद के जबड़े कस गए, वो पैसेज से किचेन के लगे दरवाज़े की ओर बढ़ा|
किचेन में मौजूद लतिका का हाथ उस आखरी दरवाज़े की तरफ बढ़ा जो पैसेज में खुलता था| उसके दरवाज़े को छूने के ठीक पहले ही एक ज़ोरदार ‘भड़ाक’ की आवाज़ के साथ दरवाज़ा स्वतः ही खुल गया|
‘तुम वहां क्या कर रही हो’? एक तीखी आवाज़ बुरी तरह घबराई हुई लतिका के कानो में पड़ी| लतिका ने चौंक कर सामने देखा, हाथ में टॉवल लिए हुए आगभभूका हुआ हुआ वेद दरवाज़े पर खड़ा था|
‘प..पानी..मुझे पानी चाहिए था’| घबराई हुई लतिका ने जवाब दिया|
‘क्या ये लडकी वाकई सिर्फ पानी लेने यहाँ आई थी या फिर ये कुछ ढूंढ रही है? शक्ल-सूरत से तो अच्छी, शरीफ और मासूम दिखती है लेकिन लड़कियों के सबसे अचूक मारक हथियार भी उनकी मासूमियत होती है’| वेद के अंतर्मन ने उसे चेताया| 
‘म..मुझे पानी मिल सकता है’? वेद की विचारतंत्रा लतिका की आवाज़ से भंग हुई|
‘श्योर| जस्ट ऐ सेक’| वेद ने कहा और किचेन में रखे फ्रिज की तरफ बढ़ गया|
‘जब यहाँ तक आ ही गई थी तो पानी क्यों ना पिया’| वेद ने सवाल दागा|
लतिका ने किचेन में चारों तरफ नजर दौड़ाई| वो वेद को सश्क करने का कोई मौका नहीं देना चाहती थी|
‘ग...ग्लास नहीं मिला’| लतिका ने मासूमियत से जवाब दिया|
ग्लास और बाकी क्राकरी कबर्ड्स के अंदर थी| वेद ने एक कबर्ड खोलकर उसमे से कांच का ग्लास बरामद किया फिर उसने फ्रिज खोलकर एक पानी की बोतल निकाली और पानी ग्लास में ढाला|
लतिका एक ही सांस में पूरा पानी पी गयी| वेद को ये बात थोड़ी अजीब लगी कि लतिका इस तरह भीगी हुई थी कि उसे ठंड लग रही थी फिर भी वो इतनी प्यासी थी| आमतौर पर भीगने और ठंड लगने की स्थिति में प्यास का एहसास नहीं होता है| वेद को लतिका घबराई हुई तो शुरू से ही लग रही थी लेकिन अब वो उसे सशंकित दृष्टि से देख रहा था| लतिका की नज़रें वहां चारों तरफ व्यग्र भाव से भटक रही थीं, उसकी सांस अभी भी तेज़ थी और चेहरा तमतमाया हुआ था| वो दोनों किचेन से बाहर वापस लिविंग रूम में आ गए|
‘इस टॉवल से खुद को पोंछ लो लतिका’| वेद ने टॉवल लतिका की तरफ बढ़ाया|
‘थ..थैंक्स’| लतिका ने कांपते हाथों से वेद से टॉवल ले लिया|
‘तुम्हारे कपडे पूरी तरह भीगे हुए हैं, तुम चाहो तो अंदर मास्टर बेडरूम में चेंज कर सकती हो| मेरी वाइफ के कपडे तुम्हे सही फिट आ जाएंगे’| वेद बिना लतिका की तरफ नज़र डाले हुए बोला|
‘न..नो...थ...थैंक-यू, एक्चुअली मैं अब आपको और परेशान नहीं करना चाहती| I’ll take your leave now’. लतिका अपनी डर से कांपती आवाज़ को सुसंयमित रखने का भरसक प्रयास करते हुए बोली|
वेद ने हॉल की ग्लास विंडो से बाहर लॉन पर नजर डाली, बारिश अभी भी मूसलाधार हो रही थी| वेद का दिमाग ठनका, ऐसा क्या हो गया कि जो लडकी इस मूसलाधार बारिश में एक नितांत अजनबी के घर बिना जाने-बूझे शरण लेने को आतुर थी वो अचानक ही वापस उस बारिश में लौटने को आमादा हो गई? कहीं उसे शक तो नहीं हो गया? कहीं उसने कुछ ऐसा देख तो नहीं लिया जो वेद के गले में फांसी का फंदा पड़ने का सबब बने? क्यों विचलित नज़र आ रही थी लतिका?
‘लेकिन बारिश अभी भी बहुत तेज़ हो रही है’| वेद ने सशंकित भाव से पूछा|
‘T..That’s alright. I’ll manage.’  लतिका ने टॉवल वापस वेद की तरफ बढाते हुए कहा| वो अपने बालों और जिस्म से टपकता पानी पोंछ चुकी थी| वेद ने टॉवल उससे लेने का उपक्रम ना किया|
‘इतनी बारिश में दोबारा भीगने का क्या मतलब है’? वेद अभी भी सशंकित था| यकीनन कुछ गड़बड़ थी| कहीं लतिका ने नीना की लाश तो नहीं देख ली! लतिका को अन्दर आने देकर उससे बहुत बड़ी गलती हो गई थी लेकिन उससे भी बड़ी गलती लतिका को वहां से इस तरह चले जाने देना होता| नहीं, वेद अब ये गलती करने के मूड में नहीं था|
‘अ...आपकी वाइफ...’ लतिका हिचकिचाते हुए बोली|
वेद के पूरे शरीर में जैसे करेंट की लहर दौड़ गई| उसने चौंक कर लतिका की नज़रों में देखा|
‘म..म..मेरी वाइफ!! कहाँ है मेरी वाइफ? तुमने कहाँ देखा उसे’?
‘मैंने नहीं देखा...व्..वो..मुझे लगा मेरे यहाँ रुकने से उन्हें प्रॉब्लम होगी’|
वेद का कलेजा मुंह को आने लगा, जुबान तालू से चिपक गई| उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या बोले|
‘ये आपकी वाइफ ही हैं ना? मैंने अभी भीतर आपदोनो को बहस करते सुना| वो शायद मेरे यहाँ रुकने से खुश नहीं हैं’| लतिका ने हॉल की एक दिवार पर लगे वेद और लतिका की ढेरों फ़ोटोज़ के कोलाज की तरफ इशारा करते हुए कहा|
वेद की जान में जान आई| लतिका ने हॉल में वेद और नीना की फोटोग्राफ्स देखीं, फिर वेद को बेडरूम में खुद से ही बहस करता सुनकर ये निष्कर्ष निकाल लिया कि वेद बेडरूम में नीना से बहस कर रहा है|
‘व्..वो तो मेरी खुद में ही बडबडाने की आदत है, मेरी वाइफ तुम्हारे आने से कुछ देर पहले ही निकल गई थी’|
‘ओह्ह! इसीलिए बाहर तक आवाज़ सिर्फ आपकी आ रही थी, मुझे लगा कि शायद आपकी वाइफ इतने धीरे बोल रही हैं कि मुझे उनकी आवाज़ सुनाई नहीं दे रही’|
‘अ...ऐसी कोई बात नहीं है| मैं तुम्हे पहले ही बता चुका हूँ कि तुम्हारे आने से कुछ देर पहले मेरी वाइफ यहाँ से निकल गई है’| वेद शुष्क भाव से बोला|
‘मुझे भी चलना चाहिए मिस्टर वेद, मैंने शायद गलत समय पर आपको डिस्टर्ब कर दिया| आप कहीं गिर गए थे क्या? आपकी बांह से खून भी बह रहा है’| लतिका वेद की दाईं बांह की ओर इशारा करते हुए बोली|
वेद को ध्यान आया कि वो अब भी पूरी तरह कीचड से सराबोर है| एकाएक नीना की लाश गायब होने और लतिका के आ जाने से उसका ध्यान अपनी स्थिति पर से पूरी तरह हट गया था| वेद की नज़रें अपनी बांह की ओर गईं, वहां कीचड के साथ वाकई काफी खून लगा हुआ था लेकिन वो खून उसका नहीं था| शायद नीना के बहते खून को रोकने के लिए उसके सर के नीचे तौलिया लगाते वक्त उसकी बांह पर खून लग गया जिसका उसे पता नहीं चला|
‘ह..हाँ, य..ये मेरा ही खून है| मैं पीछे गार्डन में गया था और बरसात से हुई कीचड पर फिसल गया| य...ये..चोट गिरने से लगी है’|
‘अब मुझे वाकई चलना चाहिए मिस्टर वेद’| लतिका फिर से हिचकिचाते हुए बोली|
वेद निश्चय नहीं कर पा रहा था कि एक अनजान पुरुष के साथ अकेले घर में अपनी उस अवस्था में होने की असहजता के कारण लतिका वहां से जाना चाहती थी या फिर उसने कुछ ऐसा देख लिया था जिससे वो इतना भयाक्रांत हो गई थी कि वहां एक पल भी और रुकना उसे गवारा ना हो रहा था|
‘मैं समझ सकता हूँ लतिका कि तुम यहाँ रुकने से क्यों झिझक रही हो| तुम्हें घबराने की ज़रूरत नहीं है, तुम यहाँ सुरक्षित हो’| वेद की आवाज़ में एक आंतरिक सच्चाई थी जिसे लतिका ने साफ़ महसूस किया| उसका सर स्वतः ही स्वीकृति मुद्रा में हिला और वो बंद दरवाज़े से परे हट गई| वेद ने झूठ कहा भी नहीं था, वो किसी मजबूर लड़की का फायदा उठाने वाला बदनीयत इंसान नहीं था| मेहर के व्यक्तित्व के आकर्षण ने कुछ पलों के लिए उसकी तर्कशक्ति पर पर्दा डाल दिया था जिसका खाम्याज़ा उसे अपनी खुशियों और नीना की जिंदगी से चुकाना पड़ा था| अगर अपनी गुजरी जिंदगी का कोई एक फैसला बदलने की शक्ति ऊपरवाला उसे देता तो यकीनन उस शाम की अपनी गलती सुधारता| आज वेद कोई नई गलती नहीं करना चाहता था|
‘मैं तुम्हारे लिए नीना के कपडे लेकर आता हूँ’| वेद ने लतिका से कहा और एकबार फिर पैसेज की तरफ बढ़ गया|
मास्टर बैडरूम पहुँच कर वेद को ध्यान आया कि नीना वहां से जाने की तैयारी में अपना सारा निजी सामान, कपडे वगैरह पैक कर चुकी थी जोकि बाहर गेराज में खड़ी उसकी हौंडा एकॉर्ड में रखा हुआ है| वेद ने नीना का वार्डरॉब खोला, वार्डरॉब वाकई खाली था| वो लतिका से कह चुका था कि नीना वहाँ से जा चुकी है इसलिए कार से सामान निकाले का तो सवाल ही नहीं उठता था| वेद ने अपना वार्डरॉब खोला, वहां से उसने दो टी-शर्ट और ट्रैकपैन्ट्स निकाले| वेद की शारीरिक संरचना और बिल्ट एथलेटिक था, उसके कपडे लतिका को काफी ढीले आने वाले थे लेकिन फिलहाल उसके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था|
‘नीना अपना सारा लगेज लेकर वापस हमारे मुंबई वाले अपार्टमेंट के लिए निकली है| ये तुम्हारे लिए थोड़े ओवर-साइज़ हैं पर इनसे ही काम चलाना पड़ेगा’|
वेद ने एक खेदपूर्ण फीकी मुस्कान चेहरे पर लिए हुए लतिका से कहा और एक जोड़ी टी-शर्ट और ट्रैकपैन्ट्स उसे सौंप दी| लतिका ने भी एक औपचारिक मुस्कान के साथ कपडे वेद से ले लिए|
‘तुम मास्टर बेडरूम चेंज करने के लिए यूज़ कर लो| मैं फ्रैशेन-अप होने के लिए ऊपर जा रहा हूँ’| वेद ने लतिका को मास्टर बेडरूम का रास्ता दिखाया और कपड़ों की दूसरी जोड़ी लेकर खुद सीढ़ियों से ऊपर की तरफ बढ़ गया| वेद चाहता तो नीचे ग्राउंड फ्लोर पर किसी गेस्ट बेडरूम्स में भी जा सकता था लेकिन वो एकबार फिर ऊपर स्टडी में जाना चाहता था|
लतिका बिना कुछ बोले मास्टर बैडरूम की तरफ बढ़ गई| वेद ऊपर पहुंचा| फार्म हाउस के फर्स्ट फ्लोर पर वेद की स्टडी थी जोकि अपनेआप में एक लाइब्रेरी थी और काफी बड़े हिस्से में बनी हुई थी| स्टडी से लग कर ही एक छोटा सा रेस्टरूम था जहां लिखते-पढ़ते हुए थक जाने पर वेद सो जाया करता था, इसके अलावा स्टडी से अटैच्ड एक वाशरूम था, एक बड़ा जिम एरिया और एक पोर्टिको था जिसे बैठक के रूप में डेवेलोप किया गया था, ये फार्महाउस के सामने के हिस्से वाले लॉन की तरफ था|
वेद ऊपर स्टडी में पहुंचा, सबकुछ वैसे ही यथावत था जैसा वो नीचे जाने से पहले छोड़कर गया था| फर्श पर जहां नीना की लाश थी वहां अब भी खून था जोकि अब सूखकर गाढ़ा हो रहा था| वेद घंटी बजने से पहले घर का चप्पा-चप्पा देख चुका था, उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि नीना की लाश अचानक कहाँ गायब हो गई| इस मुद्दे पर किसी भी निष्कर्ष पर ना पहुँच पाने पर वेद सबसे पहले वाशरूम में पहुंचा| उसे अपना हुलिया ठीक करना था| उसने अपने कीचड से सने हुए कपडे उतार कर लौंड्री बैग में डाले और शावर के नीचे खड़ा हो गया| जिस्म पर हल्का गुनगुना पानी पड़ते ही उसे सुकून मिलने लगा| वेद को ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे उसका पूरा जिस्म ज़ख्मों से भरा हुआ है और ये पानी किसी मरहम की भाँती उसे आराम पहुंचा रहा है| जाने कितनी ही देर आखें बंद किये यूं ही शावर के नीचे खड़ा रहा वेद, उसके शरीर की पीड़ा, तनाव और अकडन पानी के साथ बह कर निकल रहे थे लेकिन उसके दिमाग में अभी भी उथल-पुथल मची थी| आखिर नीना की लाश अपने-आप तो नहीं गायब हो सकती? दो ही बातें हो सकती हैं, या तो नीना मरी ही ना हो या फिर कोई दूसरा उसकी लाश ले गया हो| पहली बात वेद ने फ़ौरन ही खारिज कर दी, क्योंकि उसने नीना की धड़कन और नब्ज़ देखे थे| अगर चोट लगने से नीना मरने के बजाए बेहोश हुई होती और वेद ने उसे गलती से मरा समझ लिया होता तो भी होश में आने के बाद वो यूं गायब होने के बजाए वेद का ही सर फोड़ देती और ये तो संभव ही नहीं था कि इतना बखेड़ा होने के बाद नीना होश में आए और चुपचाप बिना कुछ कहे उस तूफानी बारिश में वहां से चली जाए| इसका मतलब हुआ कि सिर्फ दूसरी संभावना बचती है, वहां कोई था जोकि वेद के गार्डन में गड्ढा खोदने के दौरान मौके का फायदा उठाकर नीना की लाश ले गया|
पर कौन? नीना की लाश ले जाने में किसे दिलचस्पी हो सकती है? वेद ने शावर से निकल कर अपना बदन पोंछा और साफ़ कपड़े पहनने लगा| उसका दिमाग निरंतर चल रहा था|
अगर नीना की लाश कोई ले गया है तो वो ऐसा ही इंसान हो सकता है जो यहाँ पर पहले से मौजूद हो| वेद के दिमाग में एक ही नाम कौंधा...कपिल मोटवानी!! वेद वापस अंदर की तरफ बढ़ गया, उसके चेहरे पर सख्त भाव थे|
वेद भागते हुए वाशरूम से बाहर निकला और फर्स्ट फ्लोर के पोर्टिको पर पहुंचा| मूसलाधार बारिश का पानी खुले हुए पोर्टिको में आकर पूरी मार्बल फ्लोर पर फैला हुआ था अगर वेद सावधान नहीं होता तो पैर फिसल कर उसे गंभीर चोट आ सकती थी| वेद का ध्यान पोर्टिको से ठीक सामने नज़र आ रहे लॉन की बाउंड्री और आयरन गेट की तरफ गई| वर्षा तीरों के झिलमिलाते पर्दे के बीच आयरन गेट के पार खड़ी लतिका की स्कूटी अभी भी नज़र आ रही थी, वहां दूसरी कोई गाडी ना थी| वेद वापस लौटने के लिए मुड़ा फिर उसे अचानक कुछ ध्यान आया और वो पोर्टिको के बगल के हिस्से की तरफ बढ़ गया| पिछली बाउंड्री के पार ढ़लान के पास एक गहरे हरे रंग की लैंड क्रूजर खड़ी हुई थी जिसकी पार्किंग लाइट्स जल रही थीं| वेद ने वो गाड़ी साफ़ पहचानी, वो कपिल मोटवानी की गाडी थी|
कपिल जबतक फार्महाउस की बाउंड्री के पास पहुंचा साया बाउंड्री फांद चुका था| बाउंड्री छोटी होने की वजह से कपिल को भी उसे फांदने में कोई दिक्कत ना हुई| कपिल लॉन के बाएँ हिस्से में कूदा था जिधर आगे बढ़ने पर स्विमिंग पूल था| अँधेरे और बारिश की वजह से साफ़-साफ़ कुछ भी देख पाए में उसे दिक्कत महसूस हो रही थी| आखों में चुभते पानी के बावजूद उसने आखें फाड़-फाड़ कर चारों तरफ देखा, वो साया उसे कहीं भी दिखाई ना दिया| लॉन में चारों तरफ वेपर लाइट्स लगी हुई थीं लेकिन बरसात की तीव्रता के कारण उनका कोई ख़ास प्रभाव नहीं पड़ रहा था| बाउंड्री के पास ही क्रीपर्स को दिवार पर चढ़ने के लिए सहारा देने कोई कई वुड लॉग्स लगाए गए थे, कपिल ने उनमे से एक वुड लॉग निकाल लिया और उसे किसी बल्लम की भाँती पकड़ कर सावधानीपूर्वक स्विमिंग पूल की तरफ बढ़ा|
पानी से भरे स्विमिंग पूल में तीखी धार के सामान गिर रही बूँदें ज़बरदस्त शोर उत्पन्न कर रही थीं| कपिल ने पूरी जगह का मुआयना अच्छी तरह किया| वहां छुपने के लिए कोई जगह नहीं थी| कपिल लॉन के दाहिनी ओर बढ़ा| लॉन के दाएँ हिस्से में बड़ा गेराज था जिसका ऑटोमेटिक शटर मजबूती से बंद था| उससे आगे बढ़ने पर एक शेड था जहां गार्डनिंग का सामान और खाली गमलों के अलावा डंग पिट्स थे जिनमे नीना ऑर्गनिक खाद तैयार करती थी| ऑर्गनिक खाद तैयार करने के लिए नीना सब्जियों, फलों व अंडे के छिलके एक गहरे गड्ढे में डालती थी, गड्ढा ऊपर तक भर जाने पर उसे मिटटी से पाट देती थी और एक से डेढ़ महीने के लिए उस पाटे हुए गड्ढे को वैसे ही छोड़ देती थी| इतने समय में कचरा ऑर्गनिक खाद में तब्दील हो जाता था| उस शेड के अन्दर ऐसे कई गड्ढे थे, कुछ खुले हुए और कुछ पाटे हुए लेकिन कोई भी गड्ढा इतना गहरा नहीं था जिसमे कोई इंसान छुप सके|
कपिल शेड को पार करते हुए पीछे गार्डन की तरफ बढ़ा| बारिश और तेज़ हो रही थी| गार्डन में भी आगे लॉन की तरह ही वेपर लाइट्स जल रही थीं लेकिन लॉन के समान ही यहाँ भी भीषण बरसात में उनकी कोई ख़ास उपयोगिता नहीं थी, फिर भी वेपर लाइट की धूमिल रौशनी और रात की स्याह चादर पर सिलवटों की तरह पड़ती बारिश के आवरण के पार कपिल ने गार्डन में कुछ ऐसा देखा जो सामान्य नहीं था| उसके और गार्डन के बीच जो दूरी थी उसमे अनुमान लगा पाना मुश्किल था कि पानी के थपेड़ों की ओट में वो नाचते साए क्या थे जो कपिल का ध्यानाकर्षण कर रहे थे|
कपिल की उँगलियों का कसाव वुडेन लॉग पर बढ़ गया, कपिल एक-एक कदम शिकार करने को तैयार किसी घात लगाए चीते के मानिंद बढ़ा रहा था| किसी भी अप्रत्याशित हरकत के लिए वो बिलकुल चौकन्ना था|
बरसात में झूमते अजीबोगरीब साए धीरे-धीरे नज़दीक आ रहे थे| वो मिडनाईट लिली का समूह था जिसे वेद ने क्यारी से निकाला था| यूं पेड़ों के समूह को क्यारी से निकाल कर रखा देखकर और क्यारी की जगह बड़ा और बिलकुल ताज़ा गड्ढा खुदा देखकर कपिल भौंचक था| उसे समझ नहीं आ रहा था कि जो वो देख रहा है उसका क्या अर्थ निकाले| वो किसी बेवकूफ की तरह अपना सर खुजाते हुए उस गड्ढे में झाँक रहा था|
‘आखिर चल क्या रहा है यहाँ’? कपिल खुद में ही बडबडाया|
गड्ढे की गहराई देखने के लिए वो नीचे झुका ही था कि पीछे से उसकी खोपड़ी पर जैसे वज्रपात हुआ| उसकी आखों के सामने आसमान भर के तारे चौंधियाए और फिर उसकी चेतना समेत गहन अन्धकार में लोप हो गए| उसका शरीर आलू की बोरी के समान उस गड्ढे में लुढ़क गया|
लतिका ने बेडरूम का दरवाज़ा बंद करके चिटकनी चढ़ाई फिर दरवाज़े से अपनी पीठ टिका कर आखें बंद कर लीं| उसे लग रहा था की उसका दिल मुंह के रास्ते उछल कर बाहर निकलने को आमादा है| अपना काँपता हुआ दाहिना हाथ उसने गीली होकर जिस्म से चिपक चुकी जीन्स की पॉकेट में गया| अपना सेलफ़ोन निकाल कर उसने ऑन करने की कोशिश की, फ़ोन ऑन नहीं हुआ| यकीनन ये बरसात के पानी की करामात थी|
‘Shit!! फ़ोन भी गया, अब मैं क्या करूँ? मेरा उसे कॉल करना बहुत ज़रूरी है’| लतिका अपने आप में ही बडबडाई’|
उसके दिमाग में एक साथ अनगिनत विचार कौंध रहे थे, वो कोई भी निर्णय नहीं कर पा रही थी| लतिका को एहसास हुआ की वो ठंड से ठिठुर रही है और बदन से चिपके हुए गीले कपडे उसे काफी असहज कर रहे हैं| उसने फ़ौरन वो गीले कपड़े उतारे|
ठीक उसी समय कमरे में घुप्प अन्धकार छा गया| इस अप्रत्याशित घटना से लतिका की हल्की चीख निकल गयी| अन्धकार इतना गहरा था कि हाथ को हाथ सुझाई नहीं दे रहा था| शायद लाइट चली गयी थी| लतिका ने हाथ से दरवाज़े की चिटकनी टटोली, चिटकनी लगी हुई थी| उसने वेद के दिए सूखे कपडे अपने पास ही फर्श पर डाल दिए थे| लतिका नीचे झुककर अँधेरे में फर्श टटोलने लगी|
‘कपड़े कहाँ गए, यहीं तो डाले थे’| वो अपने आप में बुदबुदाते हुए झुंझलाई|
अँधेरा इतना गहन था की अबतक उसकी आखें उसमे देख पाने में अभ्यस्त नहीं हुई थीं| वो निर्वस्त्र अवस्था में ठंडे इटालियन मार्बल के फर्श को टटोल रही थी| उसे एहसास नहीं हो रहा था कि वो कमरे में किस तरफ, किस दिशा में और कितनी दूर जा रही है| फर्श पर सरकता हुआ उसका हाथ किसी चीज़ से स्पर्श हुआ| इंसानी त्वचा का स्पर्श उसने अँधेरे में भी साफ़-साफ़ पहचाना| वो किसी का हाथ था, बर्फ के सामान ठंडा हाथ|
लतिका के हलक से एक तीखी चीख उबल पड़ी| उसके होशोहवास फाख्ता हो गए| वो फ़ौरन फर्श से उठी और अँधेरे में गिरती पड़ती दरवाज़े तक पहुंची| बिजली की गति से चिटकनी खोल का उसने बाहर दौड़ लगा दी| पूरे फ़ार्महाउस में बेडरूम जैसा ही गहन अन्धकार काबिज़ था|
यूं पॉवर ट्रिप होने से वेद हतप्रभ था| पॉवर कट की स्थिति में फार्महाउस में ऑटोमेटिक पॉवर बैकअप फैसिलिटी इनस्टॉल्ड थी जोकि पॉवर कट होते ही फ़ौरन काम करने लगती थी| घर ऐसे अंधकारमय दो ही स्थितियों में हो सकता था, या तो पूरे घर का मेन फ्यूज उड़ गया या फिर किसी ने जानते-बूझते मेन पॉवर फ्यूज निकाल दिया हो| वेद के दिमाग में एकबार फिर कपिल मोटवानी का नाम कौंधा|
‘वही हरामजादा होगा! आखिर चाहता क्या है वो कमीना’!! वेद गुस्से में बिफरता हुआ फर्स्ट फ्लोर से सीढ़ियों की तरफ लपका|
घुप्प अन्धकार होने के बावजूद क्योंकि घर के हर कोने से वो वाकिफ था इसलिए उसे आगे बढने में अधिक दिक्कत नहीं हो रही थी| वेद अभी सीढ़ियों तक पहुंचा ही था कि उसे नीचे बेडरूम से लतिका के चीखने की आवाज़ सुनाई दी| ‘क्यों चीखी थी वो लड़की’? वेद की धड़कने तेज़ हो गईं| उस गहन अन्धकार में भी एक-बार में दो-दो सीढियां फांदता हुआ वो नीचे उतरा और बगुले की तरह पैसेज में लपका| पैसेज में आगे बढ़ते ही सामने से बेतहाशा भागती हुई लतिका वेद से टकराई| भय से कांपती लतिका उससे लिपट गयी|
‘क्या हुआ लतिका, तुम चीखी क्यों’? वेद का हाथ लतिका के जिस्म पर पड़ा, उसे एहसास हुआ की लतिका के जिस्म पर एक भी कपडा नहीं है|
वेद का स्पर्श पड़ते ही लतिका को भी अपनी नग्नता का ख्याल आया| डर से भागने की बौखलाहट में वो ये भूल ही गई थी उसने कुछ पहना हुआ नहीं है| वो फ़ौरन वेद से अलग हुई| ये तो गनीमत थी की उस घड़ी नीम अँधेरे ने उसकी लाज रख ली थी|
‘व्..वो..वहां..बेडरूम में कोई है...फर्श पर...म..मर हुआ’| लतिका ने बड़ी मुश्किल से थरथराते अल्फाजों में बयान किया|
‘नीना’!! वेद के दिमाग में बिजली कौंधी| ‘लेकिन नीना की लाश ऊपर स्टडी से नीचे बेडरूम में कैसे आई’? वेद का दिमाग उससे ऐसे सवाल कर रहा था जिसके जवाब उसके पास नहीं थे| अँधेरे में ही वेद बेडरूम की तरफ बढ़ गया, लतिका भी उसके पीछे हो ली| बेडरूम का दरवाज़ा खुला ही हुआ था| वेद पूर्णतः चौकन्ना और बेहद एह्तियात्पूर्ण ढंग से आगे बढ़ा| कमरे में कबर्ड खोलकर वेद ने एक इमरजेंसी लाइट निकाल कर जलाई, वेद के लतिका को दिए हुए सूखे कपडे दरवाज़े के पिछली तरफ फर्श पर पड़े नजर आए जो शायद अँधेरे में लतिका का पैर लगने से ही उधर कोने में चले गए थे और उसे ढूंढें नहीं मिल रहे थे| वेद ने वो कपड़े उठा कर दरवाज़े के पीछे सकुचाई सी खड़ी, खुद को छुपाने का असफल प्रयास करती लतिका की तरफ बढ़ा दिए| वेद ने चेहरा उससे दूसरी तरफ घुमा लिया तो लतिका ने झिझकते हुए अपना हाथ बढ़ाया और कपडे उससे ले लिए|
वेद नीचे फर्श पर लेट गया और इमरजेंसी लाइट की रौशनी उसे सामने रखे डबल बेड के नीचे डाली, हालांकि इससे पहले जब वो कमरे में आया था तब उसने कमरे का हर कोना अच्छे से चेक किया था लेकिन लतिका का यूं भयाक्रांत होना बेवजह नहीं हो सकता| बेड के नीचे कोई नहीं था|
‘मैं फर्श टटोलते हुए सामने की तरफ ही आगे बढ़ रही थी, यकीन वो जो कुछ भी था इस बेड के नीचे ही था’| लतिका ने दरवाज़े के पीछे से निकलते हुए कहा, वो कपड़े पहन चुकी थी| वेद ने एकबार फिर बेड के नीचे फर्श पर इमरजेंसी लाइट की रौशनी डाली, इसबार वहां उसे कुछ दिखाई दिया| बेड के नीचे फर्श पर अच्छा-ख़ासा पानी था| वेद ने हाथ बढ़ा कर पानी को छुआ, पानी बर्फीला ठंडा था जैसे वहां बर्फ रखे-रखे पिघल गई हो| वो पानी वहां लतिका से तो यकीनन नहीं आया था क्योंकि लतिका बेडरूम में आने से पहले ही खुद को टॉवल से सुखा चुकी थी, उसके कपडे बेशक गीले थे लेकिन उनसे इतना पानी नहीं निकल सकता था, वो भी बर्फीला ठंडा| क्या वहां बर्फ रख कर पिघली थी?
‘ईssss’!! ठीक उसी समय लतिका एकबार फिर चीखी| इसबार पहले से भी तेज़|
वेद का ध्यान लतिका की तरफ गया जोकि बैडरूम की विंडो के बाहर देख रही थी और उसकी आखों में ऐसे भाव थे जैसे उसने बाहर गार्डन में उड़नतश्तरी उतारते देख ली हो| वेद की निगाहों ने भी लतिका की नज़रों का अनुसरण किया| बैडरूम की खिड़की के स्टेनग्लास पैनल लगे हुए थे जिनपर बाहर से किसी साए की आकृति पड़ रही थी जोकि अंदर झाँकने की कोशिश कर रहा था| अंदर बंद कमरे की अपेक्षा क्योंकि बाहर अँधेरा उतना घनघोर नहीं था और रह-रह कर आसमान में बिजली कौंध रही थी इसलिए वो इंसानी साया उन्हें साफ़ दिखाई दिया|
‘कौन है वहां’!! वेद दिलेरी से चिल्लाता हुआ खिड़की की तरफ लपका लेकिन वो साया तबतक अन्धकार में लोप हो गया| वेद ने खिड़की के स्टेनग्लास पैनल खोले तो बारिश की बौछार उसे भिगोते हुए कमरे में प्रवेश करने लगी| उसने आखें सिकोड़ कर बाहर देखने का भरसक प्रयास किया लेकिन उसे कुछ भी नजर ना आया|
वेद को दरवाज़ों के सिक्योरिटी लॉक्स का ध्यान आया| वो आंधी-तूफ़ान सा भागता हुआ लिविंग रूम में पहुंचा लतिका भी उसके पीछे ही थी, दरवाज़ा बंद था| ऑटोमेटिक सिक्योरिटी लॉक्स में तीन घंटे का अतिरिक्त बैटरी बैकअप था जोकि पॉवर ट्रिप होने की वैसी सूरत में जैसे उस वक्त पेश आई थी दरवाज़ों की सिक्योरिटी चौकस रखता था| लिविंग रूम से वेद किचेन में गया, वहां भी बाहर का पिछला दरवाज़ा बंद था और ऑटोमेटिक सिक्योरिटी लॉक बैटरी मोड पर काम कर रहा था| उसने थोड़ी राहत की सांस ली| बाहर जो कोई भी था वो फार्महाउस के अंदर प्रवेश नहीं कर सकता था...या कर सकता था!! उसे अचानक वरेंडा के चैनल गेट का ध्यान आया| पीछे गार्डन में गड्ढा खोदने के लिए वेद उधर से ही चैनल गेट का ताला खोलकर बाहर गया था और उसे बिलकुल याद नहीं आ रहा था की लौटती दफे उसने चैनल गेट का ताला लगाया हो| अँधेरे में इमरजेंसी लाइट लिए वेद पागलों की तरह वापस पैसेज की ओर भागा| वरेंडा का चैनल गेट खुला हुआ था| फार्महाउस के लिविंगरूम वाले मुख्य द्वार और किचेन वाले पिछले दरवाज़े के बंद रहने का कोई मतलब नहीं रह जाता है जब खुले हुए चैनल गेट के रास्ते कोई भी आसानी से अन्दर प्रवेश कर सकता हो| वेद ने मन ही मन खुद को कोसा, इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो गई उससे|
लतिका भी खुद को कम नहीं कोस रही थी, साथ ही वो कोस रही थी उस पल को जब उसने फार्महाउस में आने का इरादा किया था| वो फिलहाल हतप्रभ सी लिविंगरूम में खड़ी हुई थी जहां वो वेद के पीछे-पीछे ही आई थी लेकिन वहीं रुक गई| इसका कारण वो लैंडलाइन कॉर्डलेस था जो उसे वेद की इमरजेंसी लाइट की रौशनी में दिखाई दे गया था| यकीनन ये उसके डर और बौखलाहट का ही नतीजा था कि जब वो वहां आई थी तब भरपूर रौशनी में भी उसका ध्यान कॉर्डलेस पर नहीं गया था, या फिर ये सिर्फ इंसानी मनोवृति थी कि चीज़ें भले ही हमारी आखों के सामने ही क्यों ना हो लेकिन उनपर ध्यान तभी जाता है जब अंतर्मन उनकी आवश्यकता महसूस करता है|
वेद के वहां से जाते ही लतिका अँधेरे में टटोलते हुए फ़ोन तक पहुंची| उसने कॉर्डलेस उठाकर कान से लगाया, बिजली की तरह फोनलाइन कटी हुई नहीं थी, उसे डायल टोन साफ़ सुनाई दिया| कॉर्डलेस पर लतिका तेज़ी से एक नम्बर डायल करने लगी|
वेद एकबार फिर मूसलाधार बारिश में भीग रहा था| उस घड़ी वो गेराज और शेड की ओर से होता हुआ पीछे की तरफ बढ़ रहा था, उस साए की तलाश में जो उसे बेडरूम की खिड़की पर नजर आया था| उसके हाथ में इमरजेंसी लाइट थी जिसे वो चारों तरफ घुमा रहा था| बारिश के साथ तेज़ सर्द हवाओं का शोर उसे बेहद अप्रिय लग रहा था, वो वापस अन्दर चला जाना चाहता था लेकिन उस साए का ख्याल जोकि उसके हिसाब से कपिल मोटवानी का था उसे ऐसा नहीं करने दे रहा था| अचानक बारिश और हवा के शोर के बीच दबी हुई एक और आवाज़ वेद को सुनाई दी, आवाज़ हालांकि काफी धीमी थी लेकिन यकीनन कहीं पास से ही आ रही थी| ये आवाज़ किसी के सेलफोन के बजने की थी| वेद कानो पर ज़ोर डालकर ये समझने की कोशिश करने लगा कि वो आवाज़ किस ओर से आ रही है लेकिन प्राकृतिक शोर में ऐसा कर पाना संभव ना हुआ, उसे अंदाज़न ही आगे बढ़ने पर विवश होना पड़ा|
वेद बाहर से बैडरूम की खिड़की के सामने पहुंचा| अब वो ठीक उस जगह खड़ा था जहां पर खड़ा वो साया उसने बैडरूम के अन्दर से देखा था| उसने चारों ओर इमरजेंसी लाइट की रौशनी डालते हुए नजर घुमाई, कहीं कुछ भी नहीं था| शायद वो साया पीछे गार्डन की तरफ गया हो? वेद ने गार्डन की तरफ बढ़ने को कदम उठाया ही था कि उसके पैर अपनी जगह जड़ हो गए| उसकी नज़रें बैडरूम विंडो पर गड़ी हुई थी| बैडरूम का दरवाज़ा खुला हुआ था, उस दरवाज़े के बाहर पैसेज में एक हल्की, लपलपाती हुई रौशनी नजर आ रही थी जैसी किसी मोमबत्ती की होती है| वो रौशनी एक जगह स्थिर नहीं बल्कि चलायमान थी जिसे एक साया थामे हुए था| ये साया किसी लड़की का था जोकि स्टेन ग्लासेज के कारण स्पष्ट नजर नहीं आ रहा था| वेद ने भाग कर अपना चेहरा खिड़की पर लगे स्टेन ग्लास की बाहरी सतह से लगाया ताकि वो उस जनाना साए की बेहतर झलक पा सके| वो साया लतिका का नहीं हो सकता था क्योंकि उसका कद लतिका से कुछ इंच ऊपर था| वेद ने दोनों आखें फटने की हद तक खोल कर ग्लास से चिपकाई और इमरजेंसी लाइट की रौशनी का रुख उस दिशा में किया| शक की कोई गुंजाइश नहीं थी, वो साया नीना का था| हालांकि अब भी गीले स्टेन ग्लास की वजह से वेद उस साए को साफ़-साफ़ नहीं देख पा रहा था लेकिन नीना की धूमिल छवि भी वो हज़ारों के बीच पहचान सकता था, वो नीना ही थी!साया खुले दरवाज़े के पार पैसेज में आगे बढ़ गया|
‘नीना’!!
वेद बाहर से ही गला फाड़ कर चिल्लाया, ठीक उसी समय आसमान में बिजली कौंधी जिसमे वेद की आवाज़ दब गई|
नीना का साया स्थिर गति से उस अन्धकार में नृत्य करती लपलपाती रौशनी के साथ दूर हो गया, कमरे में सिर्फ गहन और घुप्प अन्धकार बचा| वेद बदहवास सा भागा| कुछ पल के लिए वो उस साए को भूल ही गया जिसके पीछे वो बाहर आया था, उसके दिमाग में सिर्फ और सिर्फ नीना थी|
लतिका के झुंझलाकर कॉर्डलेस वापस रख दिया, जिसे भी वो कॉल कर रही थी उसने पूरी रिंग जाने के बावजूद उसकी कॉल नहीं ली थी| उसने मन ही मन फैसला किया की वो अब एक पल भी वहां नहीं रुकेगी| दरवाज़ों के सिक्योरिटी लॉक अब भी बैटरी बैकअप पर चल रहे थे, अगर लतिका को पीछे वरेंडा वाले चैनल गेट के बारे में जानकारी होती तो अबतक वो बाहर आए आंधी-तूफ़ान को भी मात देकर वहां से निकल चुकी होती| उस अँधेरे में अब लतिका को डर से कंपकपी छूट रही थी| अचानक उसे पैसेज के परली तरफ कहीं एक बहुत ही महीन लौ के नाचने का आभास हुआ| क्या वो वेद था? कहीं ये वो साया तो नहीं था जो उसे खिड़की के बाहर नजर आया था?
उस घड़ी अचानक लतिका को ख्याल आया कि अगर वेद फ्रंट डोर और किचेन का बैकडोर खोलकर बाहर नहीं गया है तो ज़रूर उस फार्महाउस में अन्य एग्जिट-वे ज़रूर होंगे| उसे अपनी बेवकूफी पर खुन्नस आई कि ये बात उसके ज़हन में पहले क्यों ना आई| लतिका पैसेज की तरफ भागी जहां उसे हल्की रौशनी की झलक मिली थी जोकि अब लोप हो चुकी थी, पैसेज में एकबार फिर नीम अँधेरा छाया हुआ था| लतिका उस अँधेरे गलियारे में बेतहाशा भाग रही थी| अचानक सामने दूर कहीं से अँधेरे को चीरती हुई एक लाइट बीम यूं उसकी तरफ बढ़ी जैसे किसी अँधेरे संकरे रास्ते पर अचानक सामने से किसी तेज़ रफ़्तार से बढती गाड़ी की हेडलाइट नज़र आ जाए| वो तेज़ रौशनी का स्रोत किसी तेज़ रफ़्तार गाडी के समान ही उसकी तरफ बढ़ रहा था| लतिका के सतर्क होने या कुछ समझ पाने से पहले ही सामने से आता वो रेला उससे टकराया| टक्कर इतनी ज़बरदस्त थी कि लतिका अपना संतुलन बनाए ना रख पाई और फर्श पर जा गिरी| अँधेरे में अचानक आई उस तीव्र रौशनी और उस टक्कर के शॉक से लतिका का दिमाग कुछ पलों के लिए जैसे शून्य में चला गया था| सामने जो भी था अब पीठ के बल गिरी हुई लतिका के ऊपर सवार था| 
‘बता क्या खेल खेल रही है तू’?
लतिका को बहुत दूर से आती हुई आवाज़ सुनाई दी जैसे कोई एक लम्बी, अँधेरी सुरंग के पार से बोल रहा हो| सुरंग के पार से आती ये आवाज़ धीरे-धीरे साफ़, स्पष्ट और तीखी हो रही थी, अब लतिका इस आवाज़ को पहचान सकती थी, ये आवाज़ वेद की थी|
तेज़ बारिश से गार्डन में खुदे हुए गड्ढे में तेज़ी से पानी भर रहा था| बारिश की धारदार बूँदें किसी कटार की भाँती गड्ढे की भुरभुरी मिट्टी को काट कर कीचड़ में तब्दील कर रही थीं जोकि गड्ढ़े में बेहोश पड़े कपिल के ऊपर एक दलदली परत का रूप इख्तियार कर रहा था| नाक और मुंह में इस कीचड़ के प्रवेश से कपिल की मूर्छा भंग हुई| वो हडबडा कर उठ बैठा| खाँसता, खखारता जाने कितनी ही देर वो अपनी नासिकाओं और श्वासनली में घुसे कीचड़ युक्त पानी को निकालने और जीभ निकाल कर अपने फटने पर उतारू फेफड़ों में ऑक्सीजन भरने का प्रयास करता रहा| कुछ समय बाद अपने आप पर काबू पाने में वो कामयाब हुआ| कीचड से माथे पर गिरे बालों को उसने पीछे किया और अपना चेहरा ऊपर आसमान की ओर उठा दिया| बारिश का पानी उसके चेहरे के कीचड को धीरे-धीरे धुल रहा था| कपिल को एहसास हुआ की वो मौत के कितने करीब था|
लतिका के जिस्म में दर्द की एक तीखी लहर दौड़ गई| उस घड़ी वो थड़े इटालियन मार्बल के फर्श पर औंधी गिरी हुई थी, वेद उसकी पीठ पर सवार था और उसने लतिका की दाहिनी कलाई पीछे पीठ की तरफ लाकर उमेठी हुई थी| दर्द इतना तीव्र था कि लतिका की आखों के पोरों से आंसू छलछला आए|
‘एक हल्का सा झटका और तेरी कलाई का जोड़ खुल जाएगा लड़की’| वेद अपना मुंह लतिका के कान के पास लाते हुए बोला|
‘पहली बार तो मुझे तुझपर सिर्फ शक हुआ था लेकिन अब मुझे यकीन है कि तेरा यहाँ आना महज़ इत्तेफ़ाक नहीं है| क्यों आई है तू यहाँ, बता’?
‘बताती हूँ...तुम ज..जो बोलोगे सब...बताती हूँ...पहले मुझे छोडो’| लतिका लगभग गिडगिडाते हुए बोली|
‘छोड़ दूंगा...पहले ये बता इस सेट-अप में तेरा साथी कौन है’? वेद हिंसक भाव से बोला|
तभी एक ज़ोरदार आवाज़ हुई, वेद को ऐसा लगा जैसे उसके सर के पीछे पूरी इमारत गिर पड़ी हो| किसी ने उसके सर पर पीछे से वार किया था, उसकी चेतना लोप होने लगी, जिस्म भहरा कर लतिका के ऊपर गिरने लगा| अपने होशोहवास खोने से पहले जो अंतिम हल्की सी, धुंधली झलक उसने देखी वो हाथ में वुडेन लॉग लिए कपिल मोटवानी की थी|
‘अह्ह्ह...’! वेद ने कराहते हुए आखें खोलीं, जाने कितनी ही देर बेहोश रहा था वो| उसका सर बुरी तरह दर्द कर रहा था, आखों ने आगे धुंधलका छाया हुआ था| उसने अपनी आखों पर जोर डालने की कोशिश की, धीरे-धीरे उसके सामने का दृश्य साफ़ हुआ|
उस घड़ी वो अपने फार्महाउस के लिविंग रूम के सोफे पर ढेर था| कमरे में मध्यम प्रकाश था जिसका स्रोत वहां जल रही मोमबत्तियां थीं| जिस सोफे पर वेद ढेर था उसके ठीक सामने के सोफे पर कपिल मोटवानी बैठा हुआ था| वो बिलकुल चौकन्ना नजर आ रहा था, उस घड़ी वुडेन लॉग उसके घुटने के सहारे टिका हुआ था और उसकी उँगलियों में एक जलता सिगरेट झूल रहा था| वेद को होश में आता देख कपिल ने नथुनों से धुंआ छोड़ा| सामने के ही सोफे पर एक कोने में लतिका बैठी हुई थी, वो अब भी बुरी तरह भयभीत नजर आ रही थी| कपिल ने बिना कुछ बोले वेद की तरफ जलता सिगरेट बढ़ा दिया| उस घड़ी वेद को सिगरेट की वाकई बहुत सख्त ज़रूरत थी| उसने हाथ बढ़ा कर सिगरेट थाम लिया, वेद का ध्यान अपनी उँगलियों पर गया| उसके हाथ, उसकी उंगलियाँ काँप रहे थे| वेद ने एक अदद लम्बा कश खींचा, उसे कुछ चैन आया|
‘मुझे शुरुआत से ही तुझपर शक था कपिल...तेरे अलावा दूसरा कोई हो ही नहीं सकता था’! वेद सिगरेट का धुंआ उगलते हुए बोला|
‘मैंने सुना था कि राइटर लोग...ये ज्यादा थ्रिलर-विलर लिखने वाले पगला जाते हैं साले! उन्हें हर कोई खूनी, हर घटना संदेहास्पद और हर बात सस्पेंसफुल लगती है...आज अपनी आखों से देख भी लिया’| कपिल वेद पर तंज कसते हुए बोला|
‘नीना कहाँ है’? वेद कपिल को घूरते हुए बोला|
कपिल बेवकूफों की तरह वेद का चेहरा निहार रहा था, जैसे समझने की कोशिश कर रहा हो कि सर  पर मार लगने की वजह से वेद बहक गया था या कपिल को बहकाने की कोशिश कर रहा था|
‘मुझे क्या पता नीना कहाँ है! मैं तो उसकी ही तलाश में यहाँ आया था और अपनी मिट्टी पलीद करवा बैठा| तुम बताओ कि नीना कहाँ है और ये लड़की कौन है’? कपिल लतिका को घूरते हुए बोला|
अब वेद कपिल को ठीक वैसी ही नज़रों और मनोभाव से देख रहा था जैसे दो क्षण पहले कपिल उसे देख रहा था|
‘बकवास मत करो कपिल! ये तुम्हारी ही साथी है जिसे तुमने यहाँ मुझे फंसाने के लिए भेजा है’| वेद कठोर शब्दों में बोला|
‘मैंने कहा ना, तुम साले राइटरों के दिमाग की बनावट में ही नुक्स है| हर चीज़ में षड्यंत्र दिखाई देता है तुमको’!
‘तुम तो अब ऐसा बोलोगे ही, आखिर तुम्हारे प्लान का भांडाफोड़ जो हो गया’|
‘क्या मैं तुम्हे जानता हूँ? क्या तुम और मैं किसी सो-कॉल्ड षड्यंत्र में पार्टनर्स इन क्राइम हैं’? कपिल मोटवानी असहाय भाव से लतिका की तरफ देखते हुए बोला| लतिका ने बिना कुछ कहे इनकार में सर हिलाया|
‘हुंह! ये तो बोलेगी ही कि ये तुम्हारे साथ नहीं है| अगर तुमदोनो पार्टनर्स इन क्राइम नहीं हो तो फिर इस लडकी को बचाने के लिए तुमने मुझपर वार क्यों किया’| वेद सिगरेट का एक और कश खींचता हुआ बोला|
‘वो इसलिए बेवकूफ़ आदमी क्योंकि मुझे लगा कि तुम नीना पर अटैक कर रहे हो’!! कपिल बिफरते हुए बोला|   
‘तुम्हे लगा कि मैं नीना पर अटैक कर रहा हूँ....मतलब तुमने नीना की लाश नहीं हटाई’! वेद कपिल से बोलने के बजाए अपने आप में ही बडबडाया|
‘क्या बडबडा रहे हो वेद? आखिर कुछ तो फूटो माजरा क्या है’!! कपिल झुंझलाते हुए बोला|
‘कपिल...तुम मेरे दोस्त भी हो और लीगल एडवाइजर भी, मैं चाहता हूँ कि मेरे बिहाफ पर तुम पुलिस को कॉल कर के यहाँ बुलाओ और मेरे हाथों नीना की मौत हो जाने की खबर दो’| वेद अपना सर हाथ में पकडे हुए बोला, उस घड़ी उसका चेहरा यूं सफ़ेद पड़ा हुआ था जैसे उसका पूरा खून निचुड़ गया हो|
‘क्या!!...ये क्या बक रहे हो तुम वेद! होश ठिकाने नहीं हैं क्या तुम्हारे’? कपिल बुरी तरह चौंका| उसके बगल में बैठी लतिका भी आवाक थी|
‘होश ठिकाने नहीं थे, तभी तो अपना गुनाह छुपाने के लिए उल-जलूल करतब कर रहा था लेकिन अब होश बिलकुल ठिकाने आ गए हैं| अब मैं अपना अपराध स्वीकार करना चाहता हूँ भले ही उसके लिए मुझे मौत की सजा भी क्यों ना सुना दी जाए’| वेद दृण भाव से बोला|
‘त...तुमने वाकई नीना को मार डाला है’? कपिल को अब भी विश्वास नहीं हो रहा था|
‘जानबूझकर नहीं| जो कुछ भी हुआ वो हीट ऑफ़ द मोमेंट में घटित हो गया’| वेद कपिल और लतिका को शाम का सारा घटनाक्रम बताता चला गया|
‘हुम्म’! पूरा घटनाक्रम सुनने के बाद कपिल ने एक गहरी हुंकार भरी, उसने दो और सिगरेट जलाए| ये सिगरेट उसने फार्महाउस के लिविंग रूम में बने बार काउंटर से हांसिल किये थे| फार्महाउस में आना-जाना होने की वजह से कपिल जानता था कि वेद सिगरेट कहाँ रखता है| कीचड़ और पानी से लबरेज कपिल की हालत ऐसी थी कि उसके कोट की अंदरूनी जेब में रखे महंगे सिगार भी लुगदी हो गए थे| कपिल ने एक सिगरेट अपने लबों से लगाया और दूसरा वेद की तरफ बढ़ा दिया| वेद ने उससे चुपचाप सिगरेट ले लिए और गहरे कश ले कर फेफड़े जलाने लगा|
‘नीना की लाश कहाँ गई’? कपिल ने सोचपूर्ण मुद्रा में सवाल किया, जलता हुआ सिगरेट उसके अधरों के बीच झूल रहा था|
‘मैं नहीं जानता! मैं जब ऊपर स्टडी में आया था तब लाश वहां नहीं थी, मैंने पूरा फार्महाउस छान मारा...लाश कहीं भी नहीं थी’| परेशानहाल वेद अपने बालों में उंगलियाँ फिराते हुए बोला| उसका सर बुरी तरह दर्द कर रहा था|
कुछ देर तक वहां एक बोझिल, असहज सन्नाटा व्याप्त रहा|
‘सारे तथ्य तुम्हारे विरुद्ध हैं वेद| तुम्हारा इरादा नीना के डेलिब्रेट मर्डर का नहीं था ये साबित करना इम्पॉसिबल है| तुम्हारे बैकयार्ड में खुदा हुआ आदमकद गड्ढा, नीना की लाश का गायब होना हर एक बात, हर एक चीज़ तुम्हारे खिलाफ़ है| प्रासीक्यूटर के सामने दो मिनट भी नहीं टिकेगा तुम्हारा केस’| कपिल गंभीर भाव से बोला|
‘मुझे कोई केस नहीं लड़ना| मैं नीना की हत्या का जुर्म क़ुबूल करना चाहता हूँ और अपने लिए कोर्ट से मृत्युदंड की दरख्वास्त करूँगा’| वेद का गला रुंध रहा था|
‘लेकिन तुमने ही तो कहा कि नीना की डेथ एक्सीडेंटल थी...’
‘क्या फर्क पड़ता है? फर्क सिर्फ इस बात से पड़ता है कि नीना अब मेरे पास, मेरे साथ नहीं है| फर्क इस बात से पड़ता है कि मैं अपनी सेक्शुअल अर्ज को उस रात दबा नहीं पाया, उस रात की एक गलती ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी! भावावेग और उन्माद का तूफ़ान जिसे मैंने उस रात बेलगाम होने की छूट दी थी वो मेरा ही घर तिनका-तिनका कर के बिखेर देगा ये सच मैं नहीं देख पाया क्योंकि मेरी आखों पर वासना का रुपहला पर्दा पड़ गया था’|
वेद ने एक लम्बा कश और खींचा, धुंआ उसके फेफड़ों से बाहर नहीं निकला, उस ज़हर को भी अपने दर्द के साथ अपने अन्दर दफ़न करना चाहता था वेद|
‘खुद को संभालो वेद| मैं अब भी तुम्हारा दोस्त हूँ, जानता हूँ कि तुम चू****या हो लेकिन खूनी नहीं हो और अदालत में अपराध तबतक सिद्ध नहीं किया जा सकता जबतक डेडबॉडी ना बरामद हो जाए, अगर तुम ये आत्मसमर्पण और प्लीड गिल्टी वाला राग छोड़ते हो तो कोई रास्ता निकाला जा सकता...’ कपिल वेद को समझाने की कोशिश कर रहा था, वेद ने उसकी बात बीच में ही काट दी|
‘तुम समझने की कोशिश क्यों नहीं करते कपिल! मुझे कोई रास्ता नहीं निकालना...मुझे मेरी मंजिल चाहिए जो मेरी नीना है’! पागलों की भाँती चिल्लाया वेद|
‘अपनी नज़रों में गिर तो मैं बहुत पहले ही गया था, आज जो मैं करने जा रहा था उसके बाद तो मुझे खुद से घृणा हो रही है| इसे मेरा पश्चाताप कहो या प्रायश्चित लेकिन अब मैं अपनी नज़रों में गिर कर और नहीं जीना चाहता| बस मेरी आखरी इच्छा यही है कि नीना का विधिवत अंतिम संस्कार अपने हाथों से कर सकूं’| अपने आंसुओं को इसबार ना रोक पाया वेद|
‘तुमने कहा था कि तुमने नीना को बैडरूम के अन्दर देखा था जब तुम बाहर खिड़की पर थे’? कपिल ने सशंकित भाव से कहा|
‘यकीनन वो मेरी आखों का धोखा था, मेरे दिमाग का वहम था| मैंने नीना की जगह लतिका की छाया देखकर उसे नीना समझ लिया था| इस बेचारी के साथ भी मैंने बहुत बुरा सुलूक किया’|
‘त...तुमने मुझे बैडरूम में कैसे देखा हो सकता है...म..मैं तो यहाँ लिविंग रूम में ही थी पूरे समय’| अब तक शांत बैठी लतिका आंदोलित भाव से बोली|
‘लेकिन...लेकिन तुम ही तो पैसेज से बाहर की तरफ भागी आ रही थी’?
‘वो तो..वो तो मैं बाहर निकलने का रास्ता तलाश रही थी जब तुम किसी वहशी पागल की तरह मुझपर टूट पड़े’! 
‘एक मिनट...एक मिनट! यहाँ कुछ तो गडबड है’| कपिल दोनों को शांत कराते हुए बोला|
‘देखो मैंने किसी को तुम्हारे फार्महाउस की आउटर बाउंड्री फांद कर अंदर आते देखा था, मैं उसके पीछे ही अंदर आया| अब मुझे ये बात क्लियर हो गई है कि वो जो कोई भी था उसने ही मुझपर वार किया था...जोकि शुरू में मुझे लगा था कि तुम थे’| कपिल ने वेद से कहा| वेद शान्ति से उसकी बात सुन रहा था|
‘तुम्हारे मुताबिक़ तुमने और लतिका ने बेडरूम की खिड़की के बाहर एक साया देखा जोकि तुम्हे लगा कि मैं हूँ...लेकिन वो मैं हो ही नहीं सकता था क्योंकि मैं तो तुम्हारे खोदे गड्ढे में बेहोश पड़ा था| यानी तुमने जिसे खिड़की के बाहर देखा वो साया वही था जिसने मुझपर वार किया था’| कपिल ने अपनी बात खत्म की|
‘इसका मतलब ये तो साफ़ है कि हम तीनो के अलावा इस फार्महाउस में कोई और मौजूद है और वो जो कोई भी है उसके पास ही नीना की लाश है’| वेद सोचपूर्ण ढंग से बुदबुदाया| दोनों ने अपने-अपने सिगरेट के कश खींचे| लतिका साफ़-साफ़ परेशान और आतंकित नज़र आ रही थी, कपिल उसकी ओर मुखातिब हुआ|
‘तुम्हारी क्या कहानी है’?
‘क..क्या मतलब’? कपिल के इस अप्रत्याशित सवाल से लतिका और आतंकित नज़र आने लगी|
‘मतलब ये कि पुलिस के सामने तुम्हारी ये डैमसेल इन डिस्ट्रेस वाली कहानी दो मिनट भी नहीं टिकेगी’| कपिल के अन्दर का वकील जैसे पूरी तरह जाग गया था| उसने सर से पैर तक लतिका को यूं घूरा कि लतिका सिहर उठी|
‘जेंडर इक्वलिटी को सबसे सीरियसली इन्डियन पुलिस ने लिया है, थर्ड डिग्री अप्लाई करते वक्त लड़का-लड़की कुछ नहीं देखते...’ कपिल बेहद सर्द आवाज़ में बोला| इस काम में उसे महारथ हांसिल थी| लतिका के कसबल ढीले हो गए|
‘थर्ड डिग्री! म...मुझपे किस बात की थर्ड डिग्री अप्लाई करेगी पुलिस...मैंने क्या किया है’| लतिका खड़ी हो गई, उसका पूरा शरीर बुरी तरह काँप रहा था|
‘मुझे इस काम के लिए हाँ बोलना ही नहीं चाहिए था! कबीर ने मुझे समझाने की कितनी कोशिश की थी, मैंने ही उसकी बात नहीं मानी’| अब तक रुआंसी हो चुकी लतिका खुद में ही बडबडाते हुए बोली|
कपिल के चेहरे पर विजयी मुस्कान उभरी, उसने यूं वेद की ओर देखा जैसे वो कोर्टरूम में केस जीतने के बाद ‘आय रेस्ट माय केस योर हॉनर’ बोलते हुए जज से शाबाशी की उम्मीद कर रहा हो|
‘सबकुछ साफ़-साफ़ बताओ लड़की, क्या माजरा है’! कपिल ने फटकार लगाने के अंदाज़ में कहा|
‘म..मुझे यहाँ आने के लिए नीना मैम ने पैसे दिए थे’| लतिका चाभी लगी गुड़िया की तरह बोली|
कपिल और वेद दोनों चौंक कर अपनी-अपनी जगह पर सीधे बैठ गए|
‘नीना ने तुम्हे पैसे दिए थे? कब और किस चीज़ के लिए पैसे दिए थे? साफ़-साफ़ बताओ’! वेद अधीरतापूर्वक बोला|
‘मैं मुंबई में रहती हूँ और छोटे-मोटे मॉडलिंग असाइनमेंट्स करती...’ लतिका बोल रही थी कि कपिल ने उसकी बात बीच में ही काट दी|
‘ओ मैडम...यहाँ कोई ऑडिशन इंट्रो नहीं चल रहा! मुद्दे की बात पर आओ सीधे-सीधे’!! कपिल उसे घूरते हुए बोला|
उस संकट की घड़ी में भी वेद के दिमाग में ये विचार उभरा कि कपिल को वकील के बजाए पुलिस वाला बनना चाहिए था|
‘नीना मैम ने मुझसे कॉनटेक्ट किया था और मुझे आजरात 8 बजे यहाँ आने को कहा था’|
‘8 बजे? लेकिन नीना तो मेरे साथ यहाँ से मुम्बई निकलने वाली थी, वो भी 8 बजे तक, फिर उसने तुम्हे 8 बजे क्यों बुलाया’? कपिल असमंजसपूर्ण भाव से बोला|
‘मुझे यहाँ नीना मैम के चले जाने के बाद ही आना था’| लतिका झिझकते हुए बोली|
कपिल और वेद एक-दूसरे का मुंह देख रहे थे|
‘मुझे यहाँ आकर नीना मैम की गैरमौजूदगी में वेद को रिझाने की कोशिश करना था..उ...उन्हें सिड्यूस करना था| नीना मैम ने इस काम के लिए ही मुझे हायर किया था| मेरे वेद को सिड्यूस करने पर इनकी जो भी प्रतिक्रिया होती वो मुझे नीना मैम को रिपोर्ट करके बतानी थी’|
वेद का मुंह खुला का खुला हुआ था, उसे अपने कानो पर यकीन नहीं हो रहा था, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि नीना ऐसा कर सकती थी| कपिल भी अपना सर खुजा रहा था, उसने दो और सिगरेट जलाए और बार से एक Redbreast Irish whisky की बौटल ले आया| उसने बोतल खोल कर नीट ही घूँट लगाया, जैसे उसके गले में कुछ अटक गया हो और अगर वो फ़ौरन घूँट नहीं लगाता तो सांस रुकने से उसकी जान भी जा सकती थी| घूँट लगाकर बोतल उसने वेद की तरफ बढ़ा दी|
‘मतलब नीना ने वेद का स्टिंग ऑपरेशन प्लान किया था, लेकिन बिना कैमरे के प्रूफ कहाँ से लाती तुम’? कपिल सोचपूर्ण मुद्रा में बोला|
‘मैं अपने सेलफोन पर विडियो रिकॉर्ड करने वाली थी लेकिन आज इतनी बेतहाशा बारिश हुई कि मेरा फोन भीग कर खराब हो गया| यहाँ आने पर तो अलग ही सीन चल रहा था’|
‘एक बात बताओ, तुम नीना के कहने पर ये काम करने को तैयार हो गई, तुमने ये नहीं सोचा कि अगर तुम्हारे सिड्यूस करने से सामने वाले के अन्दर का ठरक का देवता जाग गया तो तुम्हे कौन बचाएगा’| कपिल फिर से लतिका की बात बीच में ही काटते हुए बोला| उसकी बात पर वेद ने यूं उसे घूरा जैसे अभी ही भस्म कर डालेगा| फिर आयरिश व्हिस्की में अपने गुस्से की आग को बुझाने की कोशिश करने लगा|
‘मुझे पैसों की बहुत सख्त ज़रूरत थी और नीना मैम इस काम के खासे अच्छे पैसे ऑफर कर रही थीं और उन्होंने कहा था कि वेद वो इंसान नहीं जो किसी लड़की की मर्ज़ी, उसकी रजामंदी के बिना उससे जोर-ज़बरदस्ती करे| मेरा काम सिर्फ यहाँ आकर नीना मैम की गैरमौजूदगी में वेद को रिझाना और इनकी प्रतिक्रिया का स्टिंग विडियो बनाना था| अगर ये मेरे एडवांसेज को रिजेक्ट कर देते तो कोई बात ही नहीं थी और अगर मेरे उकसाने पर ये आगे बढ़ने की कोशिश करते तो इनसे किसी तरह पल्ला छुड़ा कर मुझे यहाँ से निकल जाना था लेकिन सारा मामला ही उल्टा पड़ गया| पहले तो ये तूफानी बारिश एन वक्त पर सर आ पड़ी उसपर से यहाँ कदम रखते ही मुझे महसूस होने लगा कि यहाँ ज़रूर कोई गडबड है| पर मुझे क्या पता था कि ये यहाँ अपनी बीवी का खून किए बैठा है’! लतिका वेद को यूं घूरते हुए बोली जैसे जू के पिंजरे में बंद किसी खूंखार जानवर को देख रही हो और उसे डर हो कि पिंजरा अभी खुलेगा और वो खूंखार जानवर उसपर झपट पड़ेगा|
‘वेद तुम्हारे खुद सामने से आकर सिड्यूस करने या यूं कह लो खुद को चांदी का वर्क लगा कर सोने की थाल में इसके सामने परोसने पर भी तुम्हारी मर्ज़ी के बिना तुमसे ज़बरदस्ती नहीं करेगा ये बात तुमने सिर्फ नीना के कहने मात्र से मान ली...उस औरत के कहने मात्र से जो खुद तुम्हारे पास अपने पति के करैक्टर का लिटमस टेस्ट करवाने की मंशा से आई थी...वाह! क्या कहने’!! कपिल ने व्यंगात्मक अंदाज़ में लतिका के लिए स्लो-क्लैप किया| वेद ने व्हिस्की की बोतल से एक तगड़ा घूँट भर कर एकबार फिर अपने सीने में उबल रहे क्रोध के लावे को दबाने की भरसक कोशिश की...उसका जी चाह रहा था कि व्हिस्की की बोतल वो कपिल के सर पर फोड़ दे लेकिन उस महंगी व्हिस्की को यो यूं बर्बाद नहीं करना चाहता था, उसे वैसे भी खुन्नस आ रही थी कि उससे बिना पूछे ही कपिल ने उसकी इतनी महंगी और रेयर आयरिश व्हिस्की खोल दी थी| वेद ने उस बोतल को किसी ख़ास मौके के लिए बचा कर रखा था जब वो अपनी आगामी किसी नॉवेल की ग्रैंड सक्सेस पार्टी में अपने अतिविशिष्ट मेहमानों के बीच नुमायशी अंदाज़ में उस बोतल को खोलता और बिलकुल उस अंदाज़ में व्हिस्की हर मेहमान को चखने को मिलती जैसे देवराज इंद्र अपने दरबार में सोमरस अन्य देवताओं में बाँट रहे हों | वेद ने उस ख्याल की छवि अपने मन के दृश्यपटल पर उभरते ही दोगुनी घृणा की दृष्टि का निशाना एकबार फिर कपिल को बनाया|
वेद का चेहरा देखकर कपिल शायद उसके मनोभाव समझ गया, उसने झट से वेद के हाथ से व्हिस्की की बोतल खींच ली और खुद भी एक घूँट लगाया, शायद उसे डर था कि वेद वाकई व्हिस्की की बोतल उसके सर पर दे मारेगा| उसने देखा कि लतिका की नज़रें भी उसकी हाथ में थमी बोतल पर थी, उसने बिना कुछ बोले लतिका की ओर बोतल बढ़ा दी| उन दोनों का अनुसरण करते हुए लतिका ने भी एक घूँट नीट व्हिस्की का लगाया| इसका स्वाद बढ़िया था, आम सस्ती व्हिस्की की तरह ये कसैली और जलन पैदा करने वाली नहीं थी, बल्कि बहुत ही स्मूद थी| लतिका ने एक और घूँट भरा|
‘डाउट तो मुझे भी था कि कुछ गड़बड़ हो सकती है| कबीर...मेरे बॉयफ्रेंड ने तो मुझे इस काम को करने के लिए साफ़-साफ़ मना किया था, लेकिन मैंने उसकी बात नहीं मानी| फिर हम दोनों में ये तय हुआ कि मैं सामने से फार्महाउस में एंटर करुँगी और कबीर पीछे से दिवार फांद कर आएगा और बाहर कहीं छुपा रहेगा| अगर वेद मुझसे जोर-ज़बरदस्ती करता तो मैं चिल्लाती जिस केस में कबीर आकर मुझे बचा लेता’|
‘यानी मैंने जिसे दिवार फांद कर फार्महाउस में दाखिल होते देखा था और जिसने मुझपर हमला किया था वो तुम्हारा बॉयफ्रेंड था’!! कपिल आंदोलित भाव से बोला|
‘मैं नहीं जानती, यहाँ की स्थिति देखकर मैंने फ़ौरन वापस लौटने का फैसला कर लिया था लेकिन वेद तबतक ऑटोमेटिक डोर लॉक युक्त दरवाज़े बंद कर चुका था और मेरे लाख कहने पर भी मुझे जाने नहीं दे रहा था| उसके अजीब से बिहेवियर को देखकर मैं और ज्यादा घबरा गई| ये जब टॉवल लेने बैडरूम में गया तब इसके बात करने की आवाज़ सुनकर मुझे वाकई लगा कि नीना यहीं है और ये दोनों कोई खेल कल रहे हैं, लेकिन जल्द ही मुझे समझ में आ गया कि माजरा कुछ और ही है| जब इसने मुझे बैडरूम में चेंज करने भेजा तब मैंने कबीर को बुलाने के लिए फोन निकाला लेकिन फोन खराब हो चुका था’|  
‘यानी बैडरूम की खिड़की पर जब तुमने वो साया देखा था तब तुम डर से नहीं चीखी थी, बल्कि वो कबीर के लिए सिग्नल था कि वो आकर तुम्हे बचाए’| वेद लतिका को घूरते हुए बोला| लतिका ने सहमती में सर हिलाया|
‘तो फिर वो गया कहाँ’?
‘पता नहीं! जब वेद उसके पीछे बाहर गया तब मैंने यहाँ लिविंग रूम में रखे कॉर्डलेस से कबीर को कॉल भी लगाने की कोशिश की ताकि उसे आगाह कर सकूं कि वेद उसपर अटैक कर सकता है लेकिन पूरी रिंग जाने पर भी उसने कॉल नहीं पिक की’|
‘एक मिनट! मैं जब बाहर गया था तब तुमने कबीर को कॉल लगाया था’?
‘ह...हाँ’!
‘बाहर मुझे मोबाइल की रिंग सुनाई दी थी लेकिन इससे पहले कि मैं समझ पाता कि वो आवाज़ कहाँ से आ रही है आवाज़ आना बंद हो गई’| वेद अपनी जगह से उठते हुए बोला|
वेद ने कॉर्डलेस फ़ोन उठाया और रीडायल दबा दिया| घर के अंदर कहीं से मोबाइल की हल्की रिंग टोन सुनाई दी, तीनो सन्न रह गए| आवाज़ किचेन से आ रही थी| वेद लिविंग रूम से जुड़े किचेन के दरवाज़े की ओर बढ़ा, कपिल और लतिका भी उसके पीछे हो लिए|
किचेन खाली था, फिर भी कहीं से मोबाइल के बजने की हल्की आवाज़ आ रही थी|
‘आवाज़ कहाँ से आ रही है’| लतिका ने चारों ओर नजर घुमाई, उसकी आवाज़ में घबराहट साफ़ झलक रही थी|
‘उधर स्टोर रूम से’! वेद स्टोर रूम के बंद दरवाज़े की तरफ इशारा करते हुए बोला| तीनो स्टोर रूम में प्रविष्ट हुए|
वेद का ध्यान अचनाक वहां रखे डीप फ्रीजर चेस्ट पर गया| फ्रीज़र के ऊपर एक आकृति औंधी पड़ी थी, आकृति पुरुष की थी| वेद ने उसे पलटा|
‘कबीरsss’ लतिका की चीख निकल गई| डीप फ्रीज़र चेस्ट के ऊपर पड़ा शख्स कबीर था| उसकी आखें बंद थीं और शरीर में कोई हरकत नहीं हो रही थी| उसके सर पर चोट का निशान था जिससे बहता खून अब सूख कर जम चुका था| उसकी जेब में रखा मोबाइल उसी समय बजना शांत हुआ| तीनो की हवाइयां उड़ी हुई थीं|
‘घबराओ मत, मर नहीं है| सिर्फ बेहोश है’| तीनो की नज़रें स्वतः ही उस जनाना आवाज़ की दिशा में उठीं| किचेन से लगे स्टोर के दरवाज़े पर नीना खड़ी थी| उसके सर पर एक बड़ा सा स्टोल पट्टी के रूप में लिपटा हुआ था|
‘नीना! तुम जिंदा हो’!! वेद को ऐसा लग रहा था कि वो कोई सपना देख रहा है| उसे देखकर नीना हल्के से मुस्कुराई|
‘ये सब क्या हो रहा है’!! कपिल जोकि बिलकुल ही क्लूलेस था बुरी तरह झुंझलाया|
‘इसे बाहर निकालो और सबलोग बाहर लिविंग रूम में आओ’| नीना ने जैसे बाकियों को आदेश दिया और किचेन के लिविंग रूम वाले दरवाज़े की तरफ बढ़ गई|
नीना! कैसी भी सिट्यूएशन क्यों ना हो नीना हमेशा ही कंपोज्ड और इन-कमांड होती है| वेद ने मन ही मन सोचा, वो मन्त्रमुग्ध सा नीना के पीछे बढ़ता चला गया| उसे अब भी यकीन नहीं हो रहा था कि ये सपना नहीं हकीकत है|
‘वेद से हाथापाई के दौरान जब मेरा सर स्टेचू से टकराया तब मैं टेम्पररी पैरालिसिस का शिकार हो गई थी’| काउच पर इत्मीनान से बैठी नीना ने बोलना शुरू किया| बाकी सभी उसके सामने सोफे पर बच्चों के सामान बैठे थे जो कोई बहुत ही दिलचस्प कहानी सुनने के लिए आतुर बैठे हों| कबीर को वेद और कपिल ने मिलकर दूसरे सोफे पर लिटा दिया था, वो अब भी बेहोश था| नीना व्हिस्की की बोतल अपने कब्ज़े में कर चुकी थी और उसके हाथों में एक जलता सिगरेट थमा था जो कपिल ने उसे जला कर दिया था| नीना ने एक गहरा कश खींचा और बिना धुंआ बाहर छोड़े ही बोतल से व्हिस्की का एक घूँट भरा| धुंआ उसके अंदर ही जज्ब हो गया| उसके खूबसूरत चेहरे पर आए तनाव में अब कुछ राहत नजर आ रही थी|
‘लेकिन मैंने तुम्हारी हार्टबीट, पल्पटेशन चेक किया था’| वेद बोला|
‘सीवियर स्पाइनल कॉर्ड इंजरी में अक्सर इंसान इन द स्टेट ऑफ़ बीइंग डिक्लेयर्ड क्लिनिकैली डेड होता है| ऐसा कई बार हुआ है जहां डॉक्टर द्वारा मृत घोषित करने के बाद भी लोग जिंदा हो गए हैं| किसी गहरे आघात या दबाव के चलते कुछ समय के लिए अगर स्नायु तन्त्र काम करना बंद भी कर दे तो इसका मतलब ये नहीं कि इंसान पूर्णतया मर चुका है| हाँ अलबत्ता ये ज़रूर कहा जा सकता है कि इंसान मौत के मुंह से लौट कर आया है’|
‘लेकिन मैंने एक-दो बार नहीं बल्कि कई बार तुम्हारी नब्ज़ टटोली थी’| वेद ने प्रतिवाद किया|
नीना वेद को देखकर मुस्कुराई| एक हल्की मुस्कान, जैसे कोई दिलोजान अजीज़ चीज़ जो बरसों से खो गई हो और अचानक से उसके मिल जाने पर आती है| नीना के चेहरे पर अपने लिए वैसे भाव वेद ने लम्बे समय से नहीं देखे थे|
‘इंसानी दिमाग बिना ऑक्सीजन के लगभग छे मिनट तक जिंदा रह सकता है राइटर साहब| जब तुमने मुझे CPR(cardiopulmonary resuscitation) दिया था मेरी चेतना तभी लौट आई थी लेकिन स्पाइनल कॉर्ड पर लगी चोट के कारण मैं टेम्पररी पैरालिसिस में थी, मेरी आखें खुली हुई थीं पर अपनी पलक तक झपका पाना मेरे वश में नहीं था| मेरी नब्ज़ इतनी धीमी थी जिसे तुम अपनी बदहवासी की स्थिति में पकड़ नहीं पाए और मुझे मरा समझ बैठे’|
‘ओ माय गॉड! क्या करने जा रहा था मैं’! वेद ने अपना चेहरा हाथों से ढक लिया| उसे एहसास हुआ कि वो अपने प्यार को ज़िन्दा दफ़न कर देने के कितने करीब था|
‘आगे क्या हुआ’? कपिल ने पूछा|
‘वेद की आदत है जब भी वो परेशानहाल होता है तब खुद से जोर-जोर से बातें करता है| वो क्या करने की सोच रहा था वो ये खुद ही बेख्याली में बडबडा रहा था| जब वेद गड्ढा खोदने के लिए पीछे गया उस समय तक मुझपर से पैरालिसिस का असर कम हो चुका था, मैं अपने शरीर को घसीट सकती थी हालांकि सर से खून बहना बंद नहीं हुआ था जोकि मेरे लिए एक मुश्किल पैदा करने वाली स्थिति थी| वेद ने मेरे सर के नीचे खून रोकने के लिए एक तौलिया लगाया था मैंने उस तौलिए को अपने सर के इर्द-गिर्द लपेटा और किसी तरह घिसटते हुए स्टडी से बाहर निकली| मुझे खून का बहना रोकना था, वेद बाहर था और उसतक पहुँचने की स्थिति या हिम्मत दोनों ही मुझमे नहीं थी| मैं किसी तरह नीचे किचेन में पहुंची’|
‘लेकिन मैंने किचेन और स्टोर रूम का फ्रीज़र चेस्ट भी चेक किए थे’! वेद ने दोबारा प्रतिवाद किया|
‘तुमने किचेन में रखा फ्रिज चेक नहीं किया वेद’| नीना के चेहरे पर विजयी मुस्कान थी|
वेद का मुंह उतर गया, उसके दिमाग में ये ख्याल एक-बार भी नहीं आया कि 984 लीटर के एडजस्टेबल मल्टी-डोर रेफ्रीजरेटर में भी इंसानी जिस्म बहुत आराम से समा सकता था|
‘लेकिन वेद से ये लुका-छुपी का खेल खेलने का मकसद क्या था’? कपिल ने नीना से प्रश्न किया|
नीना खिलखिला कर हंसी, जैसे कपिल की मूर्खता का उपहास कर रही हो| उसकी हंसी की खनक में हल्का दर्द भी छुपा था जिसे सिर्फ वेद ही महसूस कर पाया|
‘खेल तो किस्मत ने खेला था मेरे साथ| अपनी शादी और वेद को एक आखरी मौका देने का मन बना लिया था मैंने लेकिन उससे पहले मुझे आश्वस्त होना था कि वेद फिर से वो गलती नहीं करेगा जो वो पहले कर चुका है| वेद मुझसे रात-दिन माफ़ी मांग रहा था, मैं उसकी बीवी हूँ, उससे बेहतर उसे मैं जानती हूँ, मैं जानती थी कि वेद वाकई अपने किए पर शर्मिंदा है, पश्चाताप की आग में जल रहा है लेकिन बेवफाई की चोट मैंने खाई थी| इसबार चाहकर भी वेद पर भरोसा करना मेरे लिए आसान नहीं था’|
नीना ने वेद की तरफ देखा, वेद ने उससे नज़रें मिलाने की कोशिश नहीं की|
‘मेरे दिमाग में यही सबसे बेहतर विचार आया कि वेद को उन्ही परिस्थितियों में परखा जाए जिनमे वो पहली बार बहका था| मैंने रात-दिन ऐसी लड़की की तलाश शुरू की जिसे बेट की तरह यूज़ किया जा सके| तुमलोग समझ ही सकते हो कि ये काम आसान नहीं था, ऐसे काम के लिए कोई भी लड़की हाँ बोलने में हिचकिचाएगी| मैं अनगिनत लड़कियों से मिली, मेरे रात-दिन फोन, मैसेजेस और मीटिंग्स में गुज़रने लगे और वेद को लगा कि मेरा किसी के साथ अफेयर चल रहा है’|
वेद कुछ ना बोला, ना ही उसने नीना से नज़रें मिलाई|
‘बहुत मुश्किलों के बाद फाइनली मुझे लतिका मिली जो इस काम के लिए तैयार हो गई| इसके बाद मैंने तुम्हे कॉल किया और बताया कि मैं वेद से डाइवोर्स लेने के सिलसिले में तुमसे मिलना चाहती हूँ’| नीना कपिल से मुखातिब होते हुए बोली|
‘और ये जनाब इस नतीजे पर पहुँच गए कि तुम्हारा मेरे साथ ही अफेयर चल रहा है| लेकिन डाइवोर्स फ़ाइल करने की क्या ज़रूरत थी’?
‘वेद का लिटमस टेस्ट करने से पहले उसे पूरी तरह इंस्टीगेट करने के लिए और दूसरी बात अगर वो इस टेस्ट में फेल होता तो उसे छोड़ तो मैं वैसे ही देती’|
‘हुम्म| कंटिन्यू’
‘जब मैं तुमसे मिलने मोटेल आने को निकली थी मुझे तभी पता था कि वेद मुझे फॉलो कर रहा है जोकि मेरे हक में ही था| पुरुष किसी गैरलड़की के साथ सम्बन्ध को कितना भी कैसुअली ले लें लेकिन खुद अपनी बीवी के किसी गैरमर्द के साथ होने का ख्याल ही उन्हें कितना बौखला देता है ये तुम उस शाम मोटेल में देख ही चुके हो’|
दो पल के लिए शान्ति छाई रही, कोई कुछ ना बोला|
‘आज शाम का समय वेद के लिटमस टेस्ट के लिए तय कर लिया था मैंने| मैं वेद को डाइवोर्स पेपर देकर कपिल के साथ निकल जाती, उसके बाद यहाँ अकेले रह गए वेद के पास लतिका पहुँचती| वेदर एप्प पर आज शाम हैवी रेनफॉल का फोरकास्ट देखा था मैंने लेकिन ऐसी तूफानी बारिश होगी इसकी उम्मीद नहीं थी मुझे’| नीना ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा| आसमान में बिजली कड़की|
‘ना ही तुमने उम्मीद की थी कि डाइवोर्स पेपर देते समय वेद से तुम्हारी बहस ये मोड़ ले लेगी’| कपिल बोला| नीना ने सहमती में सर हिलाया|
‘मेरे लिए होश में आने के बाद सबसे ज़रूरी ब्लीडिंग कण्ट्रोल करना था| मैं किसी तरह किचेन में पहुंची और एडजस्टेबल फ्रिज में बैठ गयी| उस घड़ी डीप फ्रीज़र चेस्ट में बैठना मेरे लिए अधिक फायदेमंद होता लेकिन मुझमे इतनी ताकत नहीं थी कि फ्रीज़र खाली करूँ’|
‘यानी जिस समय मैं वापस अन्दर आया और त्तुम्हारी लाश गायब पा कर तुम्हे हर जगह तलाश रहा था उस समय तुम फ्रिज में थी’?
‘हाँ, ब्लीडिंग रोकने का इससे त्वरित उपाए मुझे नहीं सूझा| ब्लीडिंग तो रुक गई लेकिन मैं अधिक समय तक फ्रिज में बैठी नहीं रह सकती थी, पहले से ही एक्सेसिव ब्लड लॉस की वजह से मुझे कमजोरी महसूस हो रही थी, अधिक समय तक फ्रिज में बैठने से मेरा ब्लड प्रेशर तेज़ी से नीचे गिरता और मैं वहीं पर बेहोश भी हो सकती थी, जिस स्थिति में मेरी एक सर्द मौत निश्चित थी’|
‘फिर तुम फ्रिज से बाहर क्यों नहीं निकली’? वेद तड़पकर बोला|
‘निकलने ही वाली थी, लेकिन तबतक किस्मत ने अपनी दूसरी चाल चली| कॉलबेल बजी, लतिका यहाँ आ चुकी थी| उस समय मुझे यही विचार आया कि जिस स्टेज सेट-अप के लिए मैंने लिटरेली अपना खून-पसीना बहाया है वो मेरे सामने आने से एक ही झटके में फ्लॉप हो जाएगा| मैंने फैसला किया कि तुमलोगों के सामने नहीं आउंगी ताकि लतिका अपने काम को प्रीप्लांड तरीके से अंजाम दे सके’|
नीना ने एक नजर वेद और लतिका पर डाली और मुस्कुराई, उन दोनों के चेहरों पर कोई भी निश्चित भाव प्रकट ना हुए लेकिन नीना को इस बात की प्रवाह ना थी| उसने सिगरेट का कश खींच कर व्हिस्की का घूँट पहले की तरह भरा और बात आगे बढाई|
‘मैं फ्रिज से तो बाहर निकल आई लेकिन किचेन से बाहर नहीं निकली| लिविंग रूम से लगे किचेन के दरवाज़े की झिर्री से मैं तुम दोनों को देख रही थी’|
‘मतलब मेरा शक सही था कि किचेन के दरवाज़े के पीछे कोई छुपा हुआ है लेकिन जब मैं किचेन के अन्दर आई तब तुम वहां नहीं थी’| लतिका बोली|
‘तुम्हे किचेन की ओर बढ़ता हुआ देखकर ही मैं किचेन के पैसेज से लगे दरवाज़े से बाहर निकल गई| मैं मास्टर बैडरूम के सामने से गुजरी थी जब वेद अपने कबर्ड से टॉवल निकालते हुए खुद में ही बडबडा रहा था’|
‘तो वो तुम थी! लेकिन तुम गई कहाँ थी’?
‘पहले गेस्ट बैडरूम की तलाश लेने के बाद तुमने दूसरे गेस्ट बैडरूम का दरवाज़ा खोला था, अगर तुम दरवाज़े से अंदर आते तो निश्चित ही मुझे दरवाज़े की आड़ में छुपा हुआ देख लेते’| नीना मुस्कुराई|
‘पर उसी समय मुझे किचेन में किसी के होने का आभास हुआ जोकि लतिका थी और मैं किचेन की ओर बढ़ गया’| वेद भी मुस्कुराए बिना नहीं रह सका|
‘जब तुम और लतिका लिविंग रूम में थे उस समय मैं दूसरे गेस्ट बैडरूम से निकल कर मास्टर बैडरूम में पहुंची क्योंकि ब्लीडिंग को रोकते हुए मेरे सर का टॉवल पूरी तरह गीला हो चुका था| मुझे एक फ्रेश कपड़ा अपने सर पर लपेटना था जो दर्द से भी राहत दे| मैं तुम्हारे कबर्ड से स्टोल निकाल कर सर पर बाँध ही रही थी कि लतिका के मास्टर बैडरूम की ओर बढने की आहट मुझे मिली| अब उस स्थिति में मेरा बैडरूम से निकलना संभव नहीं था इसलिए मैं बेड के नीचे छुपकर लेट गयी’|
‘लाइट जाने पर लतिका ने जिसके स्पर्श को बेड के नीचे रखी लाश समझ लिया था वो तुम थी’| वेद बोला|
‘हाँ, फ्रिज में बैठने और ब्लड प्रेशर डिप होने की वजह से मेरा शरीर ठंडा पड़ रहा था’| नीना ने एक घूँट व्हिस्की का और लगाया| सिगरेट और व्हिस्की ने वाकई उसे काफी राहत दी थी| ‘जब लतिका बैडरूम से चिल्लाते हुए बाहर भागी थी तब मैं बेड के नीचे से निकली और वापस गेस्ट बैडरूम में चली गई| वेद तुम्हारे साथ  यहाँ बैडरूम में आया, उस समय मैं अँधेरे का फायदा उठाकर गेस्ट बैडरूम से निकल कर पैसेज से होते हुए वापस किचेन में आ गई’|
‘लेकिन मैं फिर बैडरूम से निकल कर लिविंग रूम और किचेन में भी गया था’|
‘हाँ, लेकिन इसबार तुमने किचेन से लगे स्टोररूम में आना ज़रूरी नहीं समझा क्योंकि तुम सिर्फ बाहरी दरवाज़े चेक कर रहे थे| मैं किचेन के स्टोर रूम में थी जब तुम पैसेज से वरेंडा की तरफ बाहर निकले’|
‘मैंने तुम्हारी झलक हमारे बैडरूम के बाहर पैसेज में देखी थी’|
‘जब तुम वरेंडा के चैनल गेट से बाहर निकल गए तब मैं भी किचेन से निकली और पैसेज की ओर बढ़ी| मैंने रौशनी के लिए ये क्लिपर लिया हुआ था’| नीना ने अपने हाथ में थमा सिगरेट जलाने के लिए प्रयोग किया जाने वाला ख़ास क्लिपर लाइटर दिखाया|
‘इस क्लिपर की वजह से ही स्टेन ग्लास से देखने पर लग रहा था जैसे तुम कोई लपलपाती हुई मोमबत्ती पकड़ी हुई हो’|
‘मैं जब वरेंडा में पहुंची तब तुम शेड और गेराज की ओर से बैकयार्ड की तरफ बढ़ रहे थे जबकि ये बेचारा कबीर बैकयार्ड में कपिल को बेहोश करके दूसरी तरफ से वरेंडा की ओर आया| कबीर यहाँ की वस्तुस्थिति से पूरी तरह अनभिज्ञ था और लतिका की सुरक्षा को लेकर घबराया हुआ था| मुझे देखकर पहले से ही आतंकित कबीर और ज्यादा आंदोलित हो गया और मेरी ओर लपका| मैं वापस किचेन की ओर भागी और कबीर मेरे पीछे भागा| मेरी झलक खिड़की पर देखने के बाद तुम भी दूसरे साइड से इस और भाग रहे थे जबकि लिविंग रूम में मौजूद लतिका को मेरे और मेरे पीछे भागते कबीर की भनक मिली| जबतक लतिका लिविंग रूम से पैसेज में आई तबतक मैं और मेरे पीछे कबीर पैसेज से किचेन में प्रवेश कर चुके थे| पैसेज में वरेंडा की तरफ आगे बढती लतिका तुमसे टकराई जब तुम बाहर से अंदर भाग रहे थे| कबीर इतना आवेश में था कि मेरे पीछे वो किचेन के स्टोर रूम में आया और सीधे मुझपर छलांग लगा दी, मैं सही समय पर उसके सामने से हट गई और कबीर का सर स्टोर में रखे फ्रीज़र चेस्ट के कोने से टकराया और वो अपने होश खो बैठा’| नीना ने अपनी बात खत्म की|
कुछ देर तक वहां शान्ति छाई रही, जो कबीर के कराहने की आवाज़ से भंग हुई| कबीर होश में आ रहा था| होश मे आने पर कबीर ने उन लोगों को बताया कि लतिका से तय हुए प्लान के मुताबिक़ वो फार्महाउस की बाउंड्री फांद कर अंदर आया| जगह का मुआयना करने की गरज से जैसे ही वो बैकयार्ड पहुंचा वहां आदमकद गड्ढा खुदा देखकर उसके होश हिरन हो गए| उसे यही लगा कि नीना और वेद कोई साइकोकिलर कपल हैं जो लतिका को बहलाकर वहां लाए हैं और अब उसे मार कर बैकयार्ड में दफनाने वाले हैं|  कबीर वस्तुस्थिति समझने की कोशिश कर ही रहा था जब उसे किसी के आने की आहट मिली| उसे यही लगा कि वेद वहां आ रहा है और उसने वेद के धोखे में कपिल के सर पर पीछे से वार कर दिया जिससे बेहोश होकर कपिल गड्ढ़े में गिर गया| बैकयार्ड में जो दरवाज़ा था जोकि किचेन का बैकडोर था कबीर ने उसे खोलने की कोशिश की लेकिन वो दरवाज़ा नहीं खुला, फिर उसने सामने का दरवाज़ा ट्राय करने की सोची| कबीर की बदकिस्मती ये थी कि वो वरेंडा वाली तरफ से जाने के बजाए दूसरी ओर से गया वर्ना उसे खुला हुआ चैनल गेट दिख जाता| बहरहाल फ्रंट डोर ट्राय करने पर वो भी नहीं खुला, तब कबीर का ध्यान दरवाज़े पर लगे ऑटोमेटिक सिक्योरिटी सिस्टम पर गया| उसी समय आसमान में बिजली कडकी और कबीर ने लिविंग रूम में मौजूद लतिका और वेद को देखा| लतिका के साथ किसी दूसरे शख्स को देखकर कबीर समझ गया कि जो लिविंग रूम में है दरअसल वो वेद है और उसने वेद के धोखे में बैकयार्ड में किसी और पर हमला कर दिया है|
कबीर अंदर जाने का रास्ता तलाशता गैरेज और शेड की तरफ पहुंचा जहां फार्महाउस की पॉवर सर्किट और बैकअप यूनिट थी| अन्दर प्रवेश करने के लिए उसने फार्महाउस का मेन पॉवर फ्यूज निकाल दिया, उसे उम्मीद थी कि फार्महाउस की बिजली पूरी तरह काट देने से ऑटोमेटिक सिक्योरिटी लॉक खुल जाएंगे लेकिन ऐसा ना हुआ| इस बार कबीर ने फार्महाउस के दूसरी तरफ से जाने का निश्चय किया| वो आगे बढ़ ही रहा था कि पूरी तरह अंधियारे हो चुके फ़ार्महाउस के एक कमरे में जो शायद कोई बैडरूम था उसे हल्की रौशनी और दो साए दिखाई दिए जोकि लतिका और वेद के थे| लतिका को वेद के साथ बैडरूम में देखकर उसके दिमाग ने रहा सहा काम भी करना बंद कर दिया| वो पागलों की तरह बेतहाशा भागा, तभी उसे वरेंडा का चैनल गेट और वहां खड़ा एक लड़की का साया दिखाई दिया जोकि नीना थी| अपने होशोहवास खो चुका कबीर सीधे नीना के पीछे भागा और स्टोर रूम तक उसका पीछा करने के बाद उसपर झपट पड़ा, इसके बाद उसकी दुनिया अँधेरी हो गई|
‘सारी बातें साफ़ हो चुकी हैं, अच्छी बात ये है कि सभी लोग सही सलामत हैं, किसी की जान नहीं गई हालांकि ऐसा होने की प्रबल सभावना थी’| कपिल अपने वकीलिया अंदाज़ में बोला| ‘मेरी सलाह यही होगी कि आज यहाँ जो कुछ भी हुआ उसे यहाँ मौजूद हर शख्स भूल जाए और इसका ज़िक्र कभी कहीं ना करे’|
‘जो कुछ हुआ उसके लिए मैं शर्मिंदा हूँ, ऐसा कुछ घटित हो जाएगा ये मैंने बिलकुल नहीं सोचा था’| नीना शुष्क भाव से बोली|
‘तुम चाहो तो मेरे खिलाफ असाल्ट केस फाइल कर सकती हो नीना’| वेद भावुक होते हुए बोला|
नीना ने वेद को देखा| ये वही शख्स था जो उससे बेपनाह मोहब्बत करता था, हाँ वो अजीब्ब बेशक था लेकिन जैसा भी वो था नीना ने उससे वैसे ही प्यार करना स्वीकार किया था|
‘तुम्हारा लिटमस टेस्ट तो अल्टीमेटली फ्लॉप हो गया, अब तुम क्या करोगी? डाइवोर्स पेपर दोबारा रेडी करवाऊं’? कपिल व्यंगात्मक लहजे में बोला|
‘वेद मेरे जिंदा होने के बारे में नहीं जानता था, वो चाहता तो बहुत आराम से तुम दोनों को इस पूरे मामले में फंसा सकता था| तुमपर ये इलज़ाम डाल सकता था कि तुमने मेरा कत्ल किया और इसे भी मारने की कोशिश की’|
‘हुंह! जैसे कि ये कहता और दुनिया मान लेती’|
‘मोटेल के सिक्योरिटी कैमरा से उस शाम की फुटेज आराम से मिल जाती जब हम दोनों एक कमरे में थे और वेद हमारे पीछे वहां आया था| जो अफेयर की इमेज इसके दिमाग में उभी वो किसी के भी दिमाग में उभर सकती थी| वेद को मेरे और तुम्हारे अवैध संबंधों का पता चल गया लेकिन ये मुझे किसी भी हाल में छोड़ने को तैयार नहीं था इसकी पुष्टि ऊपर स्टडी में बिखरे डाइवोर्स के फटे पेपर्स से हो जाती| मैंने तुम्हे फोन करके यहाँ ये बताने के लिए बुलाया कि मुझे मेरी गलती का एहसास हो गया है और मैं अपने पति के साथ ही रहना चाहती हूँ इसलिए तुमसे सारे सम्बन्ध तोड़ रही हूँ| ये सुनकर तुम आपा खो बैठे और हम दोनों पर तुमने हमला कर दिया जिसमे मेरी जान चली गई| तुमने हम दोनों की लाशें बेकयार्ड गार्डन में दफनाने के लिए पीछे गड्ढा खोदा लेकिन वेद जिसे तुमने मरा समझ लिया था उसे सही समय पर होश आ गया’|
‘और ये लतिका और कबीर? इनके बारे में क्या बोलता वेद’|
‘लतिका को मैंने कैश पेमेंट दी थी, ये किसी भी तरह ये बात साबित नहीं कर सकती थी कि मैंने इसे वेद को सिड्यूस करने के लिए हायर किया था जबकि वेद के लिए ये साबित करना आसान था कि लतिका और कबीर तुम्हारे एकॉमप्लिस थे’|
कपिल मुंह बाए नीना को घूरता रहा|
‘वेद तू तो बेकार ही राइटर के रूप में फेमस हो गया, असली टैलेंट तो तेरी बीवी है! क्या ज़बरदस्त प्लॉट तैयार किया है| हाइपोथेटिकल ही सही लेकिन प्लॉट बहुत ही पुख्ता है’| कपिल नीना की तारीफ़ किए बिना ना रह पाया|
‘जब वेद मेरी डेथ के बारे में तुमसे यहाँ कन्फेस कर रहा था तब मैं किचेन से उसे ही देख रही थी, उसकी आखों, उसकी आवाज़ में वही सच्चाई थी जिससे आकर्षित होकर मैंने वेद से प्यार किया था’| नीना वेद को देखते हुए बोली, वेद को अपनी आखों और कानो पर यकीन नहीं हो रहा था|
‘जो बीत गया मैं वो सब भुला देना चाहती हूँ, वेद के साथ एक नई शुरुआत करना चाहती हूँ’| नीना ने यथावत वेद की नज़रों में नज़रें डाले हुए कहा| वेद कुछ ना बोला, वो अपनी जगह से उठा और नीना को अपनी बाहों में भर लिया|
उस रात एक और विंटेज शराब की बोतल खोली गई,  Lagavulin 1875 single malt scotch. बोतल खुद वेद ने खोली, इस बोतल के खुलने का उसे दुःख नहीं था जैसा Redbreast Irish Whisky खुलने पर था, उस समय वो दुनिया का सबसे खुश इंसान था, उसकी नीना...उसका प्यार उसे वापस मिल गया था|
FEW MONTHS LATER,
इस बार नीना के गार्डन में गज़ब की बहार आई थी| मिडनाइट लिली के फूल अपनी अद्वितीय सुगंध से पूरे फार्महाउस को गमकाए हुए थे| गार्डन में खड़े वेद ने क्यारी और अपनी स्टडी की फ्रेंच विंडो के बाहर आयरन हैंगिंग हेज पर लगे गमलों में हवा से मदमस्त झूमते लिली के फूलों पर नजर डाली| वो फूल अब उसे पहले की तरह बदसूरत नहीं लगते थे| वेद की निगाहें नीना को तलाश रहीं थीं| नीना पीछे गार्डन में नहीं थी|
नीना को ढूंढता हुआ वेद शेड तक पहुँचा, नीना नए गमलों में आने वाली ठंड के मौसमी फूलों की पौध लगाने में व्यस्त थी| हवा से उसके बाल उसके चेहरे पर आ रहे थे, उस घड़ी उसके चेहरे पर अपार सुकून और शान्ति थी और साथ ही थी बच्चों जैसी मासूमियत जो हमेशा वेद को मन्त्रमुग्ध कर देती थी| वेद आगे बढ़ा और उसने पीछे से आकर नीना को अपनी बाहों में भर लिया, नीना खिलखिला कर हंस दी| उसकी हंसी में वही पुरानी खनक वापस आ गई थी| वेद ने नीना की गर्दन पर चुम्बन अंकित किया, नीना की सासें भारी होने लगीं| वेद नीना की लम्बी सुराहीदार गर्दन को चूमते हुए नीचे बढ़ने लगा, रास्ते में बाधक बने टैंक टॉप का स्ट्रैप उसने हौले से सरका दिया और चुम्बन का सफर जारी रखा| नीना ने प्रतिवाद ना किया| वो सिर्फ एकटक वेद को देख रही थी, जैसे वेद द्वारा खुद को प्यार किए जाने का ये दृश्य वो अपने अंतर्न्मन पर हमेशा के लिए अंकित कर लेना चाहती हो| कुछ ही देर में वेद नीना के अनावृत जिस्म का हर कोना यूं एक्सप्लोर कर रहा था जैसे कोई किशोर पहली बार नारी देह के संसर्ग का सुख प्राप्त करता है| चरमोत्कर्ष के उन पलों में नीना और वेद ने अपनी आखें बंद कर लीं| वेद ने खुद को फिर नुसा-दुआ के अथाह पारदर्शी समुन्द्र की उफनती लहरों में डूबता महसूस किया|
नीना के चेहरे पर अपार शान्ति के भाव थे, उसकी आखें अब भी बंद थीं और चेहरे पर हल्की सी , बेहद मासूम मुस्कान थी| अपनी उखड़ी हुई साँसों को व्यवस्थित करने की मंशा से वेद नीना के बगल में लेट गया| जाने कितनी ही देर तक दोनों उसी तरह निशब्द और निर्वस्त्र एक-दूसरे की बाहों में लेटे रहे| फिर नीना आहिस्ते से उठी और शेड की फर्श पर बिखरे अपने कपड़े समेट कर पहनने लगी, वेद उसे ही देख रहा था|
‘एक बात पूछूं नीना’? वेद उसे यूं ही ताकते हुए बोला|
नीना ने अपने बाल ठीक करते हुए हाँ में सर हिलाया|
‘अगर उस रात सबकुछ तुम्हारे प्लान के मुताबिक़ जाता, तुम समय पर निकल जाती और लतिका उसके बाद मेरे पास आती और मैं उसके साथ बहक जाता तो तुम क्या करती’?
‘तुम्हे क्या लगता है राइटर साहब मैं क्या करती’? नीना ने उसकी तरफ देखा, उसकी आखों में शरारत के भाव थे|
‘मुझे वाकई डाइवोर्स दे देती’|
नीना ने इनकार में सर हिलाया|
‘फिर’?
नीना हौले से वेद के पास आई| अपना हाथ वो आहिस्ता-आहिस्ता शरारती भाव से वेद के सीने पर फिराने लगी| नीना कपड़े फन चुकी थी जबकि वेद अब भी निर्वस्त्र था| नीना उसकी गोद में बैठ गई और अपने होठ हौले से वेद के कानो के पास लाइ|
‘अगर तुम दोबारा मुझे चीट करते तो मैं तुम्हारे छोटे-छोटे टुकड़े कर के अपनी ऑर्गनिक खाद की डंग पिट में डाल देती और फिर जब तुम गल कर खाद बन जाते तब अपने गमलों में दफना देती’| नीना खिलखिलाते हुए बोली| वेद की भी हंसी निकल गई, नीना उसकी गोद से उठी और खिलखिलाते हुए वहां से बाहर निकल गई| वेद यथावत वहीं लेटा रहा, उसने अपनी आखें फिर से बंद कर लीं|
अचानक उसकी बंद आखों के सामने कुछ कौंधा! कुछ ऐसा जिसे वो भूल ही गया था|
मेहर का लॉकेट!
वेद रबर के गुड्डे की तरह उछल बैठा| उसके दिमाग में जो विचार कौंधा था उसने वेद के पूरे वजूद में उथल-पुथल मचा दी थी| बिजली की गति से उसने अपने कपड़े पहने और सीधे फार्महाउस के अंदर भागा| सीढ़ियों पर गिरते-पड़ते वो अपनी स्टडी तक पहुंचा| उस घड़ी स्टडी खाली थी और फ्रेंच विंडो के बाहर आयरन हैंगिंग हेज पर टंगे मिडनाइट लिलिस की खुशबू वहां बसी हुई थी|
वेद खिड़की की तरफ बढ़ा| उसके पैर काँप रहे थे| पूरा जिस्म पसीने से तर हो रहा था| वेद ने फ्रेंच विंडो से बाहर झाँका, बैकयार्ड गार्डन में नीना नए पौधे लगाने में तल्लीन थी| कांपती उँगलियों से उसने हैंगिंग हेज पर से एक मिडनाइट लिली का गमला उठाया और कमरे में ले आया|
वेद का दिल इतनी तेज़ बज रहा था कि उसे लगा किसी भी पल उसे दिल का दौरा पड़ सकता है| वेद ने गमले की गीली मिट्टी और खाद की परत के अंदर अपनी उंगलियाँ डालीं| उसकी सांस ऊपर की ऊपर नीचे की नीचे रह गई| उसकी उँगलियों की पकड़ में जो कुछ भी आया उसे वेद ने खींच कर बाहर निकाला, वो इंसानी अवशेष, हड्डी का टुकड़ा था| वेद धम्म से स्टडी में अपनी कुर्सी पर ढेर हो गया| उसे समझ आ गया कि नीना ने उससे जो कहा था कि वो उसका हश्र करती वैसा ही हश्र वो मेहर का पहले ही कर चुकी थी|
वेद ने दोनों हाथों से अपना सर पकड़ लिया| उस शाम मेहर ऑटोमेटिक डोर लॉक के होते हुए घर में प्रवेश करके सीधे वेद की स्टडी तक कैसे पहुँच गई जबकि उसे पासकोड नहीं पता था, ऐसा तभी संभव था जब नीना ने निकलते वक्त ही मेहर को आते हुए देख लिया हो और जानते-बूझते उसके लिए मेन डोर खुला छोड़ा हो|  ये ख्याल पहले वेद के दिमाग में कभी आया ही नहीं था| नीना ने लतिका के साथ पहली बार वेद का लिटमस टेस्ट नहीं किया था| वेद मेहर की ओर आकर्षित है ये बात नीना उसके हाव-भाव से ही समझ गई थी, उसने प्लानिंग करके ट्रैप सेट किया था| वो देखना चाहती थी कि उसकी गैरहाजरी में वेद और मेहर क्या करते हैं| इस केस और लतिका के केस में फर्क बस इतना था कि लतिका नीना के प्लान का हिस्सा थी जबकि मेहर खुद भी नीना की प्लानिंग से उतनी ही अनजान और अनभिज्ञ थी जितना वेद था| अब ये साफ़ था कि उस रात मेहर के वेद की स्टडी में आने के कुछ ही देर में नीना वापस लौट आई थी|
ज़ाहिर था कि किसी दिन वेद की गैरहाजरी में नीना ने मेहर को फार्महाउस बुलाया और उसे मार कर उसके जिस्म के टुकड़े कर के अपनी ऑर्गनिक खाद की डंग पिट्स में डाल दिया| इस हाथापाई के दौरान ही मेहर का लॉकेट मिडनाइट लिली की क्यारी में गिर गया जिसपर नीना का ध्यान नहीं गया था| नीना जानती थी कि पूरी लाश को ठिकाने लगाना उसके लिए मुमकिन नहीं, इसलिए उसने एक बहुत ही नायब रास्ता एख्तियार किया| लाश के टुकड़े ऑर्गनिक खाद में होने की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था|
क्या गजब का बदला लिया था उसने मेहर से, कितनी बर्बर सजा दी थी उसने मेहर को अपना पति चुराने की| मेहर अब उसके बाग़ के सबसे पसंदीदा फूलों का आहार बन कर रह गई थी|
वेद ने फ्रेंच विंडो से बाहर देखा, नीचे बैकयार्ड गार्डन में नीना अब भी पौधे लगाने में तल्लीन थी| कैसी बच्चों जैसी निश्छल मासूमियत थी नीना के चेहरे पर|
समाप्त|

 

        

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