NH 8 की वो रात।

    तीन चार सेल्फ लगाने के बाद भी जब गाड़ी स्टार्ट नही हुई तब चेक किया कि गाड़ी की बैटरी खराब होने की वजह स्टार्ट नही हो रही है और ऑन कॉल अस्सिस्टेंट सर्विस भी नही थी मेरे पास । बेसमेंट की लिफ्ट बंद थी सो सीढ़ी चढ़ता हुआ ग्राउंड फ्लोर पर आ गया और घड़ी की तरफ़ देखा तो पौने बारह बजा रही थी। उफ्फ आज इतनी लंबी मीटिंग चली टाइम का पता ही नही चला और अब भूख भी लग रही थी तभी मैंने कैब बुक की वो भी शेयरिंग में ये सोच अकेले से अच्छा है कोई तो साथ मे होगा इतनी रात गए। लगभग 5 मिनेट बाद कॉल आया "सर गाड़ी बाहर बेरिकेड के पास है" मै भी जाकर गाड़ी में बैठ गया। मैंने वैसे ही ड्राइवर से पूछा यार इतनी रात को भी गाड़ी चलाते हो वो बोला जी साहेब दिन में स्कूल कैब चलता हूं और रात में ये कैब, बच्चों के लिए सब करना पड़ता है। फिर ड्राइवर ने धीरे आवाज में एफ एम चला दिया जिस पर नैना बरसे रिमझिम बज रहा था। थोड़ी देर चलने के बाद मुझे कुछ हल्की सिसकिया सुनाई दी जो मेरे साथ मे बैठी मैडम की तरफ से आ रही थी। मैंने धीरे से पूछा "एक्सक्यूज़ मी, मे आई हेल्प यू" थोड़ी देर तक जब कोइ जवाब नही आया तो मैंने फिर पूछा कि क्या मैं आपकी कोई मदद कर सकता हूँ। तब उसने मेरी तरफ देखा तो उसकी बड़ी बड़ी आंखों से आंसू निकल रहे थे। उसने कहा आज मेरी जॉब चली गयी है लेकिन मेरे हसबैंड पिछले 4 महीने से बेकार बैठे है अब क्या होगा मुझे नही पता। क्या आप मेरे हसबैंड की जॉब लगवा सकते है एडमिन में; उसने थोड़ा रुक कर कहा। मैंने कहा कोशिश कर सकता हूँ आप अपने हसबैंड का रिज्यूम मेरी मेल आई डी पर भेज दीजिये तो फिर उसने कहा आप मेरा मेल आई डी पर टेक्स्ट कर दो मै रिवर्ट कर दूंगी। उसने अपना ईमेल मुझे बताया और मैंने उसे चिंता नही करने का आश्वासन दिया।
कैब में बैठे बैठे मैं थोड़ा फेसबुक वट्सऐप वगैरह देखने लगा इतने मैं गाड़ी के ब्रेक लगे और उसने मुझे उतरने के बाद बाये किया जब तक मैं जवाब देता वो बहुत दूर जा चुकी थी। मैंने अपनी विंडो की तरफ बाहर देखा तो ये टोल था। ये सब देख मैं थोड़ा असमंजस में पड़ गया कि टोल के पास तो केवल कंपनियों के ऑफिस है फिर ये सोच कर छोड़ दिया कि क्या पता आसपास कोई गांव हो फिर मैंने ड्राइवर से उसका नंबर मांगा तो उसने ये कह कर साफ इनकार कर दिया कि कंपनी की पॉलिसी अनुसार हम किसी भी ग्राहक की डिटेल शेयर नही करते तो मैंने उससे कहा भाई इतना तो बता दो उसका पिकअप कंहा से किया था मुझे उसकी मदद करनी है तो उसने सिर्फ इतना कह बिज़नेस पार्क। खैर मैं भी अपने घर पहुंचा और जाकर पहले रसोई में से कुछ खाने लगा क्योकि खाना नही बना था जिसका एक मात्र कारण बीवी अपने मायके गयी हुई थी।

दो दिन तक मेरे मेल पर कोई जवाब नही आया था ये सोच क्यो न खुद ही मिल लिया जाये।
अगले दिन ऑफिस के लंच टाइम में मैं बिज़नेस पार्क गया जोकि लगभग एक किलोमीटर दूर मेरे ऑफिस से था। पैदल ही आया क्योंकि गाड़ी मेरी आज भी ठीक नही हो पाई थी उसे तो वीकेंड पर ही ठीक करवाना था।वँहा पहुंच कर देखा तो लगभग हजार से ऊपर ऑफिस होंगे ये तो मेरे लिए बड़ी मुसीबत का काम हो गया उसे ढूंढ पाना तभी मेरे दिमाग मे आइडिया आया मैंने गेट पर जाकर गॉर्ड से पूछा "भाई यहाँ देर रात तक चलने वाले ऑफिस कितने होंगे" क्योंकि मैंने सोचा की वो मुझे देर रात को ही मिली थी। तब गॉर्ड ने बड़े रॉब से कहा आप ये जानकारी क्यो मांग रहे हो और कौन हो आप। ये सुनकर मैं थोड़ा घबरा गया लेकिन फिर मैंने कहा "भाई फ़ूड वेंडर हूँ और हम लेट नाईट चलने वाले ऑफिस में डिनर सप्लाई करते है" फिर उसने कहा साथ वाले टावर में होंगे कोई 15 से 20 क्योंकि ये बिल्डिंग नई है।
फिर एक एक ऑफिस में पूछताछ करने लगा लेकिन वो कँही नही मिली और शाम के 5 बज चुके थे शायद आज मेरा हाफ डे लग गया होगा सोच कर निकला और बाकी कल के लिए छोड़ दिये। अगले दिन मुश्किल से एक दो ऑफिस बचे होंगे तो मैं एक ऑफिस में गया देखा रिसेप्शन पर एक मैडम मोबाइल पर व्यस्त है। "excuse me" मैंने बड़ी विनम्रता से कहा तो मैडम ने मेरी तरफ देख कहा "यस" , जी यंहा मिसेज दिव्या काम करती है, मुझसे उनसे मिलना था। मैंने एक ही सांस में कह दिया तब रेसस्प्शनिस्ट ने मेरी ओर देखा और डेस्क फोन पर कुछ बात कर मुझे सोफे पर प्रतीक्षा करने को कहा। मैंने सोचा चलो आज मिल कर ये काम भी हो जाएगा। थोड़ी देर बाद एक मैडम आई और मेरी ओर मुखातिब होते हुए बोली" "यस मिस्टर आई एम शिवांगी H R मैनेजर" आपको दिव्या से मिलना है? आप क्या लगते है दिव्या के? उसने बड़े ही जासूसी अंदाज में पूछा। जी मै उनका फैमिली फ्रेंड हूँ। ओह शायद आप काफी समय बाद उनसे मिलने आये है। वो पहेली बुझा रही थी और मेरी समझ मे कुछ नही आ रहा था। मैंने कहा "हां"। दरअसल उसकी तीन साल पहले डेथ हो गयी थी और उसकी लाश टोल के पास मिली थी। ये सुनकर मेरे पैरों से जमीन खिसक गयी लेकिन अपने आप को सम्हालते हुए मैने पूछा "क्या हुआ था" वो बोली उसकी ही सहेली ने उसे धोखा दिया था । उसके पति की जॉब जाने से उसने अपने पति के लिए अपनी सहेली से बात की थी और उसकी सहेली ने उसके पति को अपनी कम्पनी में लगवा दिया था लेकिन थोड़े समय बाद उसकी सहेली और पति ने शादी कर ली जिससे हताश हो उसने आत्महत्या कर ली।
मैंने बस इतना पूछा कि अब उसका पति कँहा है तो शिवांगी ने कहा उसी कंपनी मैं MD है।

मैं वँहा से चुप चाप उठ कर चल दिया और सोचने लगा कि कोई किसी के लिए जान देता है और कोई किसी की जान लेता है।
अगले दिन ऑफिस में मैं अपना काम कर रहा था कि मेरा कलीग सुधीर आया और बोला " यार कोई एडमिन की जॉब है तेरी नजर मैं। मैंने उसे देखा और बोला किसके लिए।

वो बोला कुछ नही यार कल रात एक मैडम मिली थी उसके पति के लिए ।बड़ी जरूरत मंद नजर आ रही थी तो मैंने बोल दिया कोशिश करता हूं।

मैं मौन होकर बस अपने कलीग की ओर ही देख रहा था।

.......
This is my first effort to write story.
This is a work of fiction. Names, characters, business, events and incidents are imagination. Any resemblance to actual persons, living or dead, or actual events is purely coincidental.Please Like and share.

सभी पाठकों का तहे दिल से धन्यवाद।

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