अचानक इस छोटे से शहर को क्या हो गया ?जिसे देखो दशहत में डूबा हुआ लग रहा है .हर शख्स तेज कदमो से अपनी मंजिल पर पहुँच कर सुरक्षित होना चाहता है .पुलिस की गाड़ियां चारों ओर सांय सांय करती हुई भाग रही है .यह क्या हुआ ?किसने किया ?सबके मुंह पर एक ही सवाल है 'क्या बड़े बड़े शहरों को निशाना बनाने वाले आतंवादियों की नजर अब छोटी छोटी जगहों पर भी पड़ गयी है .क्या अब छोटे शहर भी सुरक्षित नहीं .
हुआ यह की शहर की चार डस्टबीन के पास कुछ समय के अंतराल से चार धमाके हुए .तभी से शहर में अफरा तफरी मची हुई है .सभी को लग रहा है यह किसी बड़ी घटना की शुरुवात है .पुलिस की गाड़ियां तेज गति से दिशाहीन सी दौड़ रही मानो करने वाला तेज गति से भाग रहा होगा और पुलिस पीछे से जा कर पकड़ लेगी .पुलिस भी यह जानती है सी सी टीवी कैमरों में कुछ भी ढूंढ पाना होगा .अव्वल तो उनमें कुछ दिखाई ही नहीं देगा और जो दिखाई देगा वह इतना अस्पष्ट होगा की पहचान कर पाना ही मुश्किल होगा .शहर में इस तरह की पहली घटना है अतः तुरंत ही एटीएस को सूचना दी गई तथा बम निरोधक दस्ता भी बुलवा लिया गया .
बम बहुत ही साधारण दीपावली पर चलने वाले सबसे बड़े साईज़ के रस्सी बम थे .पर चिंता की बात यह थी कि चार स्थानों पर एक साथ किसने की यह बदमाशी .कोई कह रहा था आने वाले दिनों के लिये चेतावनी दी गई है .किसी की राय थी सफाई वाले अमले ने काफी दिनों से सड़ता हुआ कचरा नहीं उठाया है इसलिये किसी सिरफिरे ने स्वच्छता अभियान का यह नया तरीका ईजाद किया है .किसी की राय थी पुलिस प्रशासन काफी समय से काफी समय से सिर्फ नेता लोगों के आगमन प्रस्थान की ही व्यवस्था कर रहा था अतः किसी ने उनकी कार्य क्षमता को परीक्षित के लिये यह काम किया है .कुछ की राय तो और ही अलग थी कि प्रशासन की गाड़ियों का ईंधन काफी समय से अफसरों के परिवारों पर खर्च हो रहा था इस बहाने कुछ शहर की प्रशासनिक व्यवस्था पर खर्च होगा .
जैसी की अपेक्षा थी तीन जगहों के सी सी टीवी कैमरे व्यवस्था के नाम पर बलि चढ़े हुए थे .एक कैमरे में जरुर कुछ धुंधली सी तस्वीरें सामने आ रही थी .परन्तु इस दस पंद्रह लाख की आबादी वाले शहर में दिख रहे शख्स को कैसे पहचाना जाय .सब एक दूसरे का मुंह देख रहे थे .तभी एक कनिष्ठ आरक्षक बोला "अरे ,यह तो अपने बाबुभाई जैसा दिखता है ."
"बाबुभाई?कौन बाबुभाई??कहां रहता है???" अंधेरे में आशा की एक किरण देख कर अफसर ने उद्द्विग्नता से पूछा.
"क्या कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड है उसका?"दूसरे अफसर ने पूछा.
"मेरे मोहल्ले में पिछले बीस साल से रहता है.उसका अपना परिवार है.एकदम सीधा सादा सा आदमी है."उस आरक्षक ने बताया.
"अरे,जल्दी चलो कहीं घटना को अंजाम देने के बाद कहीं फरार ना हो गया हो."पहला अफसर शीघ्रता से बोला.
जल्दी ही लगभग पचास पुलिस कर्मियों ने बाबुभाई के घर को घेर लिया .
बाबुभाई उस समय खाना खा कर अपने घर में विश्राम कर रहे थे .चार पांच एके फोर्टी सेवन धारी पुलिसवालों ने बाबुभाई के घर का दरवाज़ा खटखटाया और जैसे ही दरवाज़ा खुला पुलिसवाले उसको खींचते हुए गाड़ी में बैठा कर अपने साथ ले गये .
चुंकि दिन का समय था और मामला गंभीर था.इसलिये यह निश्चित हुआ की तुरंत कोर्ट में पेश कर रिमांड हासिल कर ली जाय .
बाबुभाई पैंतालीस पचास साल का एक दुबला पतला व्यक्ति था .उसके हाव भाव भी आतंकी जैसे नहीं थे .
पुलिस ने अपने कार्यक्रम के अनुसार बाबुभाई को रिमांड के लिये कोर्ट में पेश किया .
"क्या यह काम तुमने किया है?"जज ने बाबुभाई से प्रश्न किया.
"जी,सर.मैंने ही यह काम किया है."बाबुभाई ने स्वीकार किया.
"क्यों?" जज ने हैरानी से पूछा.जज को स्वयं भी यह आशा नहीं थी कि इतनी आसानी से और इतनी जल्दी स्वीकारोक्ति होगी.
"सर,इस क्यों का जवाब बहुत लम्बा है.आप सुनेंगे,समझेंगे और मदद करेंगे ?" बाबुभाई ने जज साहब से पूछा.
"कोर्ट की यह कोशिश रहेगी की तुमको पूरा पूरा न्याय मिले."जज साहब ने कहा.
"सर मेरी उम्र सैतालीस साल की है और मैं पिछले बाईस सालों से एक प्राइवेट फैक्टरी में नौकरी कर रहा हूं..अभी तक तो सब ठीक चल रहा था.परन्तु पिछले साल कालाधन निकालने के नाम पर कुछ मुहिम चालू हुई.पता नहीं उसका असर था या किसी और कारण का यह फैक्टरी बंद हो गई.पिछले एक साल से मै और मेरे जैसे हजारों लोग नौकरी की तलाश कर रहे है किन्तु हमें कोई नौकरी देने को तैयार ही नहीं है.
नौकरी से निकालते समय जो पैसा दिया गया था वह घर लोन चुकाने में चला गया .अब हमारे हाथ में कुछ नहीं है .अगर धंधा चालू करें तो बैंक लोन देती ही नहीं है .यहां तक की सरकार जो योजनाऐं ले कर आती है वह सभी युवाओं के लिये ही होती है .तो फिर हम जैसे लोग कहां जाये .हमारे परिवार को कहाँ ले कर जाऐं .जब युवा थे तब जवाबदारियां भी कम थी अब तो अपने अलावा परिवार व बच्चों की जवाबदारी भी है .
सरकार जो योजनाऐं चलाती हैं वह या तो युवाओं के लिये होती है और जो सुविधाऐं देती है वह सीनियर सिटीजन के लिये .मतलब सरकार की नजर में हमारे जैसे अधबीच के लोग हर दृष्टि से महत्वहीन है .उनके लिये कोई योजना कोई प्रबंध नहीं .उनकी गिनती कहीं भी नहीं होती.देखिये कहीं दुर्घटना भी होती है तो कैसे प्रस्तुत किया जाता है .आज एक दुर्घटना हुई जिसमे बीस लोग मारे गये जिन में से पांच महिलाऐं ,दो बच्चे व एक वृद्ध शामिल है .मतलब बाकी जो बारह मरे उनका जोड़ घटाव जनता स्वयं करे .इस समस्या के सन्दर्भ में मैं प्रधानमंत्री ,राष्ट्रपति ,मानवसंसाधन मंत्री और यहां तक की सुप्रीम कोर्ट को भी चिठ्ठी लिख चुका हूं परन्तु कहीं से कोई जवाब नहीं आया ."
"इसका मतलब यह हुआ कि आप की बात किसी कारणवश नहीं सुनी गई तो आप सुनवाई के लिये कानून तोड़ेंगे,आतंक फैलायेंगे?"जज ने बाबुभाई को डांटते हुए प्रश्न किया.
"जी,नहीं मेरा मकसद सिर्फ सरकार का,न्याय पालिका का और मेरे जैसे पीड़ित लोगों का ध्यान आकर्षित करना था.आज इस घटना की चर्चा सभी न्यूज़ चैनेल्स में हो रही है.इसके माध्यम से लोगों तक,सरकार तक हम जैसे लोगों की समस्या पहुंचेगी."बाबुभाई ने जवाब दिया.
"तो आप सरकार से क्या चाहते है?"जज साहब के शब्दों में अब सहानुभूति थी.
"आजकल सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिये कई पैसे वाले,पूंजीपति उद्यम लगा लेते हैं.उसमे कई लोगों को रोजगार भी देते है.लेकिन अपना उल्लू सीधा होते ही यह लोग उस इकाई को बंद कर देते है बिना यह सोचे की कितने लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से कितनी आशाओं से उनसे जुड़े है.उनका वर्तमान यह धनपति खरीदते है और भविष्य निगल जाते है.उम्र बीत जाने के बाद हमें ना कोई नौकरी मिलती है ना बिजनेस के लिये कोई सरकारी सहायता.
जज साहब जनता के साथ यह खिलवाड़ बंद होना चाहिये .इन लोगों के लिये सरकार ने उद्यम खोलना जितना आसान बनाया है बंद करने के लिये उतना ही कठोर बनना चाहिये .सरकार को चाहिये की वह ऐसे कानून बनाए जिससे किसी भी उद्यम को बंद करते समय उसमे नियुक्त कर्मचारी को वरिष्ठता के आधार पर कम से कम दो वर्ष और ज्यादा से ज्यादा पांच वर्ष तक का वेतन दिया जाए .इन पैसों से निकाले जाने वाले कर्मचारी अपना स्वयं का छोटा मोटा व्यवसाय प्रारम्भ कर पायेंगे .ऐसा होने पर अस्सी प्रतिशत कंपनियां जो फर्जी तरह से बंद होती है रुक जाएंगी और देश का उत्पादन भी निश्चित तौर पर बढ़ेगा .इसके अतिरिक्त सरकारी योजनाओं में भी इस तरह नौकरी से निकाले गये लोगों के लिये कुछ आरक्षण रखा जा सकता है बिना आयु सीमा बंधन के .
जज साहब डस्टबीन के पास बम फोड़ने का उद्देश्य हमारे देश और समाज में आई गंदगी की सफाई के लिये ध्यान आकर्षित करना था .मुझे विश्वास है मैं आपके माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचा पाऊंगा .
यह भी निश्चित है यदि इस समस्या का समाधान शीघ्र ही नहीं खोजा गया तो अब आतंकवादी चालीस साल की उम्र से ज्यादा वाले नजर आएंगे .आखिर आदमी को जीने के लिये पैसा तो चाहिये ही ना ."
"बाबुभाई तुमने एक सही समस्या को बहुत ही गलत ढंग से उठाया है.इस तरीके को न्याय संगत बिलकुल नहीं कह सकते.मैं कोशिश करुंगा की आपकी समस्या शासन तक पहुंचे.फिर भी आपने जो गलती की है उसकी सज़ा तो आपको मिलनी ही चाहिये.पुलिस ने आपके लिये रिमांड मांगी है,किन्तु मैं आपके पिछले बेदाग रिकॉर्ड को देख कर उनकी यह अर्जी ख़ारिज करता हूं,और यह निर्देशित करता हूं कि प्रशासन को गुमराह करने जैसी धाराओं पर मर्ग कायम कर कार्यवाही करें."जज साहब ने अपना निर्णय सुनाया.

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