चुन्नी देवी और विक्रम लाल के 6बच्चे थे ।सभी पढ़ने में बहुत होशियार थे , बस सरला को छोड़कर |सरला जैसा नाम वैसा स्वभाव, एकदम सरल और सोम्य। सरला हर काम में होशियार थी ।वह खाना तो ऐसा बनाती कि सभी ऊँगली चाटते रह जाते थे।सिलाई ,कढ़ाई ,बुनाई ,नाच- गान के साथ ही लगभग हर कार्य मे अत्यंत दक्ष। किन्तु कम पढ़ी लिखी होने की वजह से सभी भाई बहन उसका मजाक बनाते थे | समझदार होने की वजह से सरला सबके ताने सुनकर भी किसी से कुछ नहीं कहती थी |लेकिन अकेले में वो भगवान के सामने रोती थी और उनसे शिकायत करती थी कि उसे पढ़ाई में कमजोर क्यूँ रखा ?
एक बार उसके हिन्दीअध्यापक ने कक्षा में सभी बच्चों को गृहकार्य में माँ पर कविता लिखकर लाने को कहा |
सरला ने भी कविता लिखी। अध्यापक ने उसे पढने के बाद सरला को अपने पास बुलाया और जोर से डाँटते हुए बोले ," तुमको कविता चोरी की नहीं अपनेआप बनाकर लिखनी थी।"
सरला ने कहा, "कविता मैंने खुद लिखी है मास्टरजी" मास्टर जी आश्चर्यचकित होकर बोले, "क्या सच में !यह कविता तुमने ही लिखी है? मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा !माँ पर ऐसी कविता तो मैं खुद भी नहीं लिख सकता था।|कल अपनी माँ को साथ लेकर स्कूल आना "।
घर आकर सरला ने अपनी माँ से कहा , "मास्टर जी ने आपको बुलाया है " इतना सुनते ही उसकी माँ भड़क गयीं और यह समझ कर कि वह कुछ गलती करके आयी है, सरला को पीटने लगी।बेकसूर सरला माँ की मार खाकर भूखी प्यासी रोते-रोते सो गयी|
अगले दिन माँ स्कूल पहुँची तो मास्टर जी सरला की कविता को माँ को सुनाते हुए बोले ,"आपकी बेटी तो विलक्षण प्रतिभा की धनी है | धन्य हैं आप जो आपने इतनी होशियार बच्ची को जन्म दिया। "
कविता सुऩकर माँ की आँखों से अविरल आँसू बहने लगे |वो खुद को कोसने लगी और बड़बड़ाने लगी, "जो बच्ची माँ को भगवान के समकक्ष मानकर उसकी पूजा करती है मैंने बिना गलती उसको कितना मारा है?"मेरी बच्ची में इतना बड़ा गुण था और मुझे पता ही नहीं चला मैं हमेशा अपने दूसरे बच्चों से उसकी तुलना करती रही |पर वो तो अतुलनीय है।
चुन्नी देवी मास्टर जी को धन्यवाद देती हुई बोलीं, मास्टर जी आज आपने मेरी बेटी की जिस प्रतिभा को उजागर किया है अब वह उसकी ताकत बनेंगी ।यह गुण हर किसी में नहीं होता |क्या हुआ जो मेरी बेटी पढ़ाई में कमजोर है पर वो विचारों से बहुत मजबूत है |
घर जाकर चुन्नी देवी ने एक सुन्दर सी कलम सरला को उपहार में दी और कहा, "मेरी बेटी कलम की सिपाही है मुझे आज पता चला। यह कलम रख और अपने विचारों को धार दे । तू तो मेरी प्यारी विलक्षण बेटी है ।तेरा जैसा और कोई हो ही नहीं सकता। मुझे माफ कर दे बेटी इतना कहकर उसने अपनी मेधावी बेटी को गले से लगा लिया ।
सरला आज बहुत खुश थी ।इतनी खुश की उसकी आँखों से आँसू निकल आये, आज पहली बार यह खुशी के आँसू टपक रहे थे। आज उसे एहसास हो गया था कि भगवान हर किसी में एक विशेष गुण अवश्य डालता है ,जो उसकी पहचान बनाता है। उसको समाज में सम्मान दिलाता है।बस जरुरत है ईश्वर पर भरोसा रखकर अपने अन्दर छिपे गुण को विकसित करने की।

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