" सुमन पत्थर सी वहीं बैठी रह गयी और बार बार यही बोल रही थी कि मुझे नहीं चाहिए ये तोहफा । मुझे नहीं पसंद ये।"

आखिर क्या था तोहफे में जिसने सुमन की जिंदगी उथल पुथल कर दी |

आइये जानते हैं --

कुछ दिन पहले की बात है .....

सुमन और प्रमोद आपस में बातें कर रहे थे |

अरे वाह सुमन ! जादू है तुम्हारे हाथों में।तुम हर बार कुछ नया बनाती हो और हर बार तुम्हारी वो डिश काबिले तारीफ होती है और हर बार मेरा मन करता है कि तुम्हारे हाथ चूम लूँ । सच में जादू है इन हाथों में।

अच्छा जी अब तारीफों के पूल बांधना बंद करो इतना भी अच्छा खाना नहीं बना लेती मैं ... मैं तो बस हर बार कुछ नया बनाने की कोशिश करती हूँ और सबसे पहले आपको ही खिलाती हूँ । मुझे तो डर लगता है कि पता नहीं कैसा बना होगा पर हर बार आप इतना मज़ा ले कर खाते हो के मुझे अब कुकिंग से ही प्यार हो गया है । ये सब आपके प्यार का जादू है जो मेरी बनायीं हर डिश का स्वाद निखर कर आता है ।

आप बस ऐसे ही हमेशा मेरे साथ रहना । आपका साथ मुझे हर पल हौंसला देता है । बड़ी से बड़ी मुश्किल भी मुझे आसान लगती है जब भी आप मेरे साथ होते हो।

आपस में ये प्यार भरी बाते करते हुए सुमन प्रमोद के आगोश में आगयी । प्रमोद के सीने पर सर रख कर सुमन अपनी सारी परेशानियों से दूर एक अंदरूनी सुकून महसूस कर रही थी ।

सुबह सुमन प्रमोद के लिए कॉफ़ी ले कर आयी और बोली आपको पता है न अगले हफ्ते क्या है ??

प्रमोद ने कहा नहीं मुझे तो कुछ याद नहीं अब तुम ही बता दो ।

सुमन गुस्सा करते हुए बोली आपको सच में कुछ भी याद नहीं ।

मैं जानती थी। आप बस बड़ी बड़ी बातें करोगे पर रहोगे वैसे ही जैसे मेरे बाकि सहेलियों के पति हैं । उन्हें भी कुछ याद नहीं रहता ।

जाओ छोड़ो अब याद ही नहीं तो क्या फायदा कुछ बोल कर ।

सुमन चिढ़ते हुए तेज़ी से उठी और बाहर की तरफ चल दी तो प्रमोद ने झट से गाना गया कि तुम रूठा न करो मेरी जान , मेरी जान निकल जाती है ।

प्रमोद थोड़ा बुरा गाते थे जिसको सुन कर सुमन को थोड़ी हंसी भी आयी और प्यार भी आया पर वो अपना गुस्सा बरक़रार रखना चाहती थी । वो आगे चलती गयी तो प्रमोद ने फिर से कहा मुबारक हो तुमको ये सालगिरह हमारी ,सदा मेरी रहो ये दुआ है हमारी ।

सुमन पीछे पलटी और ज़ोर से हंसने लगी और बोली अच्छा जी आपको याद था तो क्यों परेशान कर रहे थे मुझे । बोलो बताया क्यों नहीं कुछ।

प्रमोद ने कहा ये सीधी सादी साधारण जिंदगी मुझे पसंद नहीं है। जिंदगी में थोड़ा मस्ती मज़ाक थोड़ा रोमांस ये भी तो जरुरी है । प्रमोद ने सुमन का हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा तो सुमन हाथ झटक कर बोली थोड़ी तो शर्म करो । अब हमारी उम्र नहीं रही ये मस्ती मज़ाक करने की, हम चालीस का दायरा पार कर चुके हैं । दो बच्चो के बाप हो आप । बच्चे पढ़ाई के सिलसिले में बाहर रहते हैं इसका ये मतलब नहीं की आप आज़ाद हो गए हैं। प्रमोद ने कहा सुमन जी हम आज़ाद कैसे हो सकते हैं हम तो आपकी जुल्फों के साये में फंस चुके हैं । आपका दीदार ही हमारी जिंदगी है और आपके हाथों से बने खाने में हमारी जान बसती है । जब तक आप यूँ ही हमें मदहोश करती रहोगी हम आज़ाद कैसे हो पाएंगे सुमन जी।

सुमन ने शरमाते हुए कहा अब चलो भी जाओ .. आपको ऑफिस नहीं जाना । उठो तैयार हो नहीं तो लेट हो जाओगे फिर जल्दी बाज़ी करोगे ।

प्रमोद कुछ सोचने लगा तो सुमन बोली अब क्या हो गया अचानक से शांत कैसे हो गए ।

प्रमोद ने कहा मैं सोच रहा हूँ ये नौकरी छोड़ दू और हम अपना खुद का रेस्टुरेंट खोलेंगे । जिसका मेनू तुम सजाओगी अपनी पसंदीदा डिश से । इतना अच्छा खाना बनाती हो तुम , मैं तो अपनी उंगलिया तक चाट जाता हूँ । तुम रेस्टुरेंट की मालकिन रहना और मुझे अपना असिस्टेंट कम मैनेजर बना लेना । दोनों मिल कर काम करेंगे । पर हाँ मैडम जी हर महीने मेरी तनख्वाह मुझे दे देना । मेरी एक पत्नी है जिसके हाथ में मैंने हर महीने तनख्वाह नहीं दी तो वो मुझे मारेगी मालकिन । मुझ पर रहम करना । प्रमोद सुमन के साथ ड्रामा करने लगा ।

सुमन बहुत हंसी फिर बोली प्रमोद आप ये फालतू की बाते छोडो और ऑफिस जाओ । ये रेस्टुरेंट का सपना मत देखो । मैं ठीक ठाक खाना बना लेती हूँ इसका ये मतलब नहीं की हम रेस्टुरेंट खोल ले।

सुमन ने जबरदस्ती तैयार कर प्रमोद को ऑफिस भेज दिया ।

उन दोनों की शादी की साल गिरह को सिर्फ दो दिन ही बचे थे । रात को सुमन ने प्रमोद से पूछा आप ही बताओ न मैं आपको क्या तोहफा दूँ सालगिरह पर । अब ये ना कहना ही मुझे कुछ नहीं चाहिए । बताओ क्या दूँ । इस बार मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा है । परी होती तो अपनी माँ की मदद जरुर करती पर इस बार दोनों बच्चे भी हमारे साथ नहीं होंगे । उनके एक्साम्स चाल रहे हैं ।

प्रमोद ने कहा मन उदास न करो सुमन । दोनों बच्चे दूर रह कर भी हमारे पास ही हैं । और रही गिफ्ट की बात तो हाँ तोहफा तो मुझे चाहिए पर मैं आज नहीं उसी दिन बताऊंगा ।

सुमन ने कहा.. पर उस दिन बताओगे तो मैं कैसे ले आउंगी।

प्रमोद ने कहा तुम्हे कहीं नहीं जाना पड़ेगा । तुम बस परसो का इंतज़ार करो ।

सुमन ने कहा अच्छा जी ठीक है पर आप क्या दे रहे हो इस बार ।

ये हमारी पच्चीसवीं सालगिरह है । इस बार क्या तोहफा देने वाले हो।

प्रमोद ने हँसते हुए कहा तुम कहो तो अपनी जान भी तुम्हे दे दूँ ये तोहफे क्या चीज हैं ।

प्रमोद की ये बात सुन कर सुमन थोड़ी स्तब्ध सी हो गयी । उसकी आँखे भर आयी और बोली मुझे कोई तोहफा नहीं चाहिए बस यूँ ही मेरे साथ रहो हमेशा । हर कदम पर मेरे हमकदम रहना मुझे कभी छोड़ के नहीं जाना प्लीज़।

प्रमोद ने सुमन का उतरा हुआ चेहरा देख कर कहा ये तुम कैसी बाते करने लगी सुमन । मैं तो मज़ाक कर रहा था यार । वैसे इस बार सरप्राइज है तुम्हारे लिए । मुझे उम्मीद है तुम्हे ये तोहफा बहुत पसंद आयेगा ।

सुमन ने मुस्कुरा कर कहा मेरा सबसे अनमोल तोहफा तो आप ही हो।

कल प्रमोद और सुमन की सालगिरह है। प्रमोद रात में दिनांक बदलते ही सुमन को तोहफा देना चाहता था । वो ऑफिस से निकल कर सीधे ज्वेलरी शो रूम के लिए निकल पड़ा । वो सुमन को हीरे की अंगूठी देना चाहता था ।

सुमन भी इधर पूरी तैयारियां कर चुकी थी । घर को सजाया फिर अपने आप को भी सजाया क्यूँकि वो जानती थी की उसको ऐसे तैयार देख कर प्रमोद को बहुत ख़ुशी होगी ।

इंतेज़ार की घडियाँ बढ़ने लगी । प्रमोद ने बताया था सुमन को की आज आने में थोड़ी देरी होगी । रात के साढ़े ग्यारह बज गए प्रमोद का कुछ पता नहीं चल रहा था । सुमन को चिंता होने लगी पर उसने सोचा जरुर ये कोई सरप्राइज प्लान कर रहे होंगे और रात में बारह बजे ही आएंगे और मुझे विश करेंगे।

इसी ख्याल में मुस्कुराते हुए सुमन इंतज़ार के पल बीता रही थी । अब समय साढ़े बारह हो गया । उसकी चिंता बढ़ गयी तो उसने प्रमोद को फोन लगाया पर नंबर बंद आ रहा था । ऑफिस में कॉल किया तो पता चला की प्रमोद नौ बजे ही ऑफिस से निकल चुका था ।

अब सुमन की चिंता बढ़ने लगी थी ।

सब जगह से कोई जवाब न मिला तो सुमन ने अपने पडोसी को कहा । पडोसी प्रमोद को ढूंढने उसके ऑफिस की तरफ निकल गए ।

रास्ते में उन्हें भीड़ दिखाई दी । वहीँ रुक कर उन लोगो ने देखा तो उन्हें प्रमोद की कार बहुत बुरी हालत में मिली । वहां खड़े लोगो ने बताया की अंदर बैठे आदमी को लोग अस्पताल ले गए हैं ।

पडोसी ने तुरंत सुमन को अस्पताल आने कहा और फोन रख दिया।

सभी अस्पताल पहुंचे तो वहां प्रमोद की आखिरी साँसे चल रही थी । वह बुरी तरह से घायल था । एक ट्रक ने कार को टक्कर मर दी और प्रमोद का एक्सीडेंट हो गया था ।

सुमन पहुंची तो उसे बताया गया की प्रमोद I.C.U में है ।

सुमन भाग कर वहां पहुंची ।

जब उसने प्रमोद की ये हालत देखी तो मानो उसके पैरो तले की जमीन ही कोई छीन ले गया हो ।

प्रमोद बहुत मुश्किल से सिर्फ सुमन का नाम ही ले पाया था सुमन ने भी प्रमोद का झख्मी हाथ अपने हाथ में ले कर कहा क्या यही आपका सरप्राइज है । मुझे बिलकुल पसंद नहीं ये सब। मुझे नहीं चाहिए कोई तोहफा । प्लीज जल्दी से ठीक हो जाओ । प्लीज प्रमोद।

प्रमोद के जवाब का इंतज़ार कर रही सुमन को डॉक्टर ने बताया अब आपके पति जा चुके हैं । सुमन पत्थर सी वहीं बैठी रह गयी और बार बार यही बोल रही थी की मुझे नहीं चाहिए ये तोहफा । मुझे नहीं पसंद ये । जिस दिन हाथ पकड़ कर लाये उसी दिन हाथ छोड़ भी दिया अापने । क्यों किया अपने ऐसा .... दुखों का पहाड़ टुटा था सुमन पर उस दिन ।

पापा की खबर सुन कर दोनों बच्चे भी आ चुके थे । वो खुद ही बिखरे पड़े थे पर फिर भी अपनी माँ को सँभालने की पूरी कोशिश कर रहे थे ।

सुमन की बिखरी जिंदगी इतनी आसानी से तो नहीं संवर सकती थी ।

प्रमोद के जाने के बाद सुमन तो जैसे मुस्कुराना ही भूल गयी । अपनी माँ को दुखी देख कर बच्चे भी बहुत परेशान थे ।

वो हर बार सुमन को खुश करने की कोशिश करते पर सुमन की मुस्कान तो जैसे प्रमोद के साथ ही चली गयी थी ।

सुमन हमेशा प्रमोद की तस्वीर को देखती रह्ती, उसके अलमारी के सामने खड़े खड़े प्रमोद के कपड़े निहारती रह्ती । कभी जूते उठा कर साफ़ करती तो कभी कपड़ो को सजाने लगती।

घर पर आए रिश्तेदारों ने सुमन की ये हालत देख कर सुमन से कहा की जो इस दुनिया में नहीं है उसके सामान को तुम क्यों अपने कमरे में सजाये बैठी हो। सब कुछ हटा दो तभी तुम आगे बढ़ पओगी।

सुमन ने तुरंत सबको मना करते हुए कहा कोई कुछ नहीं छुयेगा यहाँ । ये मेरे पति का सामान है और इस पर सिर्फ मेरा हक़ है । सुमन का गुस्सा आंसुओं की धारा में बदल गया और बोलने लगी.... कैसे निकालोगे आपलोग प्रमोद को यहाँ से वो तो मेरे दिल में हैं और हमेशा रहेंगे । आप लोग जाओ यहाँ से मैं अपना ध्यान रख लुंगी।

सुमन ने हौसला बाँधा और सबको विदा किया। बच्चों को भी कल जाना होगा क्यूँकि उनके एग्जाम चल रहे थे । सबके जाने के बाद सुमन वापस कमरे को ठीक कर रही थी तभी बिस्तर के गद्दे के नीचे उसे प्रमोद की डायरी मिळी। पहले पेज पर ही लिखा था आई लव माय फॅमिली। उससे देखते ही सुमन के आंसू छलक गए । उसने पढ़ना जारी रखा । प्रमोद ने इस डायरी में अपने फ्यूचर प्लानिंग लिख रखे थे और ख़ास दिनों की लिस्ट बना रखी थी जिसमे सालगिरह का दिन भी लिखा था ।

हर ख़ास दिन के सामने एक ख्वाइश लिखी हुयी थी ।

जो प्रमोद सुमन से तोहफे के रूप में लेता था ।

सालगिरह का तोहफा भी अभी उधार था सुमन पर जो प्रमोद सालगिरह के दिन सुमन से माँगने वाला था पर उसके पहले की नियति ने सब कुछ बदल दिया।

सुमन ने प्रमोद की ख्वाइश पढ़ी तो लिखा था

सुमन का रेस्टुरेंट । प्रमोद चाहता था की सुमन अपना खुद का रेस्टुरेंट खोले । वो सुमन से यही माँगने वाला था सालगिरह पर।

ये पढ़ कर उसे फिर वही दिन याद आगये जब प्रमोद के साथ सब हादसा हुआ था और सुमन सोचने लगी की प्रमोद अापने मुझे सच में सरप्राइज कर दिया था उस दिन । जिंदगी भर साथ निभाने का वादा कर के आप बीच राह में ही मुझे छोड़ गए । आप तो सालगिरह का तोहफा देने वाले थे न ये कैसा तोहफा दिया अपने मुझे । क्यों प्रमोद... क्यों किया ऐसा



सुमन ज़ोर ज़ोर से रोने लगी । रोने की आवाज़ सुन कर सुमन के बच्चे परी और नीरज भी कमरे में आगये ।

परी ने पापा की डायरी में उनकी आखिरी ख्वाइश देखी। उसे पढ़ कर सुमन ने माँ को हौसला दिया और कहा माँ तुम तो पापा से बहुत प्यार करती हो न ।

कुछ कारन वस आज पापा हमारे साथ नहीं है पर इसका ये मतलब तो नहीं की हम उन्हें भूल जाए।

माँ ने कहा परी ये कैसी बाते कर रही हो । प्रमोद को कैसे भूल सकते हैं हम।

परी ने कहा माँ अगर ऐसी बात है तो पूरी करो पापा की ख्वाईश । उन्हें भी उनका तोहफा दो मम्मी।

पापा नहीं है तो क्या हुआ उनका साथ तो है ना |

सुमन ने कहा परी ये सब बाते आसान है पर बिना प्रमोद के मैं कुछ नहीं कर सकती ।

मम्मी, क्या इसी दिन के लिए पापा आपको हौसला देते थे । पापा साथ न हो कर भी आपके साथ है । आप शुरुवात तो करो फिर देखो हर कदम पर पापा आपके साथ होंगे।

परी की बातो ने सुमन को भी सोच में डाल दिया । सुमन भी प्रमोद की आखिरी ख्वाइश पूरा करनी चाहती थी बस हिम्मत नहीं जूटा पा रही थी । प्रमोद ही सुमन की हिम्मत था पर उसके जाने के बाद सुमन के बच्चे अपनी माँ की हिम्मत बने और सुमन ने भी सोच लिया की वो प्रमोद को उनका तोहफा जरुर देगी। अगले दिन बच्चे दूसरे शहर चले गए और माँ का हौसला बढ़ा कर गए । उन्होंने बोला की आप तैयार कर लो खुद को माँ । हम एक महीने बाद वापस आएंगे और मिल कर पापा का तोहफा तैयार करेंगे।

हम सभी जानते हैं की किसी भी नए काम की शुरुवात इतनी आसान नहीं होती है । यहाँ भी वही हाल था सभी पडोसी रिस्तेदार बाते बना रहे थे की प्रमोद के रहने पर ये बाहर तक नहीं निकलती थी और पति के जाने के बाद इस औरत के पर निकल आए अब उड़ना चाहती है ये । घर के बड़े जिद्द पर अड़ गए की अगर तुम्हे पैसा चाहिए तो हमसे ले लो । हमारे घर की औरते काम धंधा नहीं करेंगी ।

सबकी बाते सुमन को तीर की तरफ भेद रही थी पर अपने जख्मी मन को हिम्मत देते हुए सुमन ने कहा की अब वो किसी की नहीं सुनेगी वही करेगी जो प्रमोद चाहते थे । अगले दिन से ही सुमन खाने की नयी नयी रेसिपी बनाने लगी । उसका विवरण लिखने लगी । खुद ही अपने बनाये डिश को रेटिंग और फीडबैक भी देने लगी ।

ऐसे करते हुए एक महीने बीत गए । बच्चे भी वापस आगये और उन्होंने प्रमोद के एक दोस्त से मदद मांगी । उस दोस्त ने सभी जरुरी जानकारी इक्कट्ठा की और सुमन और बच्चो की मदद की रेस्टुरेंट खोलने की प्रक्रिया में ।

परी और नीरज यथा संभव माँ की मदद करने लगे और विज्ञापन के हर माध्यम का सहारा ले कर रेस्टुरेंट का प्रचार प्रसार करने लगे ।

बच्चों को पढ़ाई के सिलसिले में जाना पड़ता था उसलिए सुमन ने उसी शहर की कुछ औरतो को अपने साथ रेस्टुरेंट में काम करने के लिए मना लिया ।

सुमन की मेहनत रंग लाने लगी । एक साल में ही काफी नाम हो चुका था रेस्टुरेंट का । अब सालगिरह की तारीख पास आ चुकी थी ।

सालगिरह के दिन सुमन ने वो सब कुछ बनाया जो प्रमोद को पसंद था और सभी ग्राहको को मुफ्त में खाना खिलाया ।

सुमन के बच्चे भी उस वक़्त वहां मौजूद थे । उन्हें अपनी माँ का ये रूप देख कर बहुत गर्व महसूस हो रहा था ।

शाम हो गयी सुमन ने प्रमोद की तस्वीर के पास दिया जलाया और कहा आज मुझे लग रहा है की मैंने आपकी ख्वाइश पूरी कर दी । यही तोहफा चाहते थे न आप मुझसे । अपने मुझे नहीं बताया... हर बार की तरह छुपाया लेकिन देखो मैंने फिर भी पता कर लिया । सब लोग कितने खुश हैं प्रमोद देखो । आज सब कुछ आपकी पसंद का बनाया है मैंने । आप होते तो मेरा हाथ चूम लेते आज । मुझे आपकी बहुत याद आती है। आप क्यों चले गए मुझे छोड़ कर । आप होते तो हम साथ में मिल कर अपना ये बिज़नेस करते । पर मैं जानती हूँ आप साथ न हो कर भी मेरे साथ हो । क्यों हो न प्रमोद । आज आपको भी तो गर्व होगा न अपनी सुमन पर । आपकी सुमन ने आपको आपका तोहफा दे दिया आज और आपके इस तोहफे ने आपकी सुमन को नयी जिंदगी दे दी है । आप जानते हैं दोनों बच्चो ने भी मेरी बहुत मदद की है । नीरज को तो अभी और पढ़ना है पर परी की पढ़ाई इस साल पूरी हो जाएगी । मैं चाहती थी की वो प्लेसमेंट ले पर वो यहाँ मेरी मदद करना चाहती है । इंटरनेट के माध्यम से भी उसने विज्ञापन करना शुरू कर दिया है । आप जानते हैं इस रेस्टूरेंट का नाम क्या है ..... इसका नाम है...

" तोहफा ( गिफ्ट ऑफ़ लव) । "

सिर्फ आपके लिए प्रमोद।

दोस्तो सुमन ने तो अपने प्यार का तोहफा दे दिया प्रमोद को पर सभी औरते सुमन की तरह हिम्मत नहीं दिखा पाती और ऐसे कठिन समय में सामाजिक परिस्तिथि और पारिवारिक दबाव के कारन खुद को एक कोने तक सिमित कर लेती हैं । खुद को इतना निरर्थक समझना सही नहीं होता है । हम सबमें क्षमता है कुछ करने की बस जरुरत है तो एक जूनून की जैसे सुमन ने दिखाया अपना जुनून।

आप भी हार मत मानिये और खुद को आगे बढ़ाते रहिये । आप परिस्तिथि के मोहताज़ न बने बल्कि परिस्तिथियों को अपने हिसाब से बनायें।

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