मेरी प्यारी डायरी, आज दिन रविवार हैं, और आसमान में खिली हुई धूप निकली हैं। हल्की हल्की ठंडी हवा और धूप की गरमाहट का मिश्रण एक अलग ही वातावरण बना रहा है। ऑफिस से आज ज्यादा काम था नही, तो सोचा थोड़ी देर छत पर चल कर धूप सेक लुंगी, और कुछ देर तुमसे बात भी हो जाएगी। तुम तो जानती ही हो, मुझे फरबरी की धूप कितनी पसन्द हैं। पूरे शरीर की थकान इस धूप की गरमाहट से दूर हो जाती है। और एक नई ताजगी मिलती हैं।

पर डायरी आज मन शांत नही हैं।
यहां अब दिल नही लगता। घर से ऑफिस और ऑफिस से घर के चक्कर काटते हुए मुझे 6 महीने हो गए हैं।
सोचा था कि एक नए शहर में जाकर एक नई शुरुआत करूँगी। पर सब उल्टा हो रहा हैं।
कभी कभी यहां से भाग जाने का दिल करता हैं, पर दूसरे पल सोचने लगती हूँ, की कहाँ जाऊंगी?

मानती हूँ, की यह दुनिया बहुत बड़ी हैं, पर माँ और बाऊजी के जाने के बाद जो था अब उसने भी मुह मोड़ लिया हैं। कुछ दोस्त हैं, जो अब अपनी जिंदगी में मशरूफ हो गए हैं। सब एक अच्छी गृहस्थी वाले और एक सुखी परिवार की तरह रह रहे हैं।
मेरी जिंदगी में यह परिवार शब्द आने से पहले ही कहीं गायब हो गया।

तलाक के बाद जिंदगी कितनी अलग हो जाती है, आपके प्रति लोगो का नजरिया बदल जाता हैं। हर कोई मुझमे अब  दोष ढूंढता हैं, सोचता हैं कि मैं सही नही हूँगी, इसीलिए मेरे पति ने मुझे तलाक दिया होगा।

मैं सही थी या नहीं, यह मुझे कैसे पता लगेगा। मैंने तो बस एक फैसला लिया था। वो फैसला मेरे लिए इतना गलत साबित होगा, ऐसा मुझे कहाँ मालूम था।

रजत का सम्बंध किसी और के साथ यह मैं कैसे स्वीकार करती। दिल के हर कोने में मैने रजत का नाम गुदा रखा था। पर जब सच्चाई सामने आई तो वो नाम ऐसे मिटा जैसे समंदर किनारे किसी ने रेत पर नाम लिखा हो, और जब कोई तेज लहर आई तो उस नाम के साथ साथ उसका वजूद भी ले गई हो।

प्रिय डायरी तुझसे मैंने कभी कुछ नही छिपाया। तूने हमेशा मेरा तब साथ दिया, जब मै मुसीबतों का पहाड़ चढ़ रही होती हूँ। तुझ पर लिखे गए मेरे एक एक शब्द हमारे रिश्ते को एक मजबूती देता हैं।

डायरी मुझे याद हैं वो दिन जब मैं ऐसे ही किसी रविवार के दिन घर पर अकेली थी। रजत घर पर नही था। जबसे मुझे उसके दूसरे रिश्ते का पता लगा था, तबसे रजत घर आता ही नही था। और अगर आया भी तो सिर्फ अपने काम से।

दरवाजे पर दस्तक हुई थी, मुझे लगा था कि रजत होगा। पर जब दरवाजा खोला तो एक काले सूट में आदमी था, जिसके हाथ मे कुछ कागज थे।

मेरे नाम का तलाकनामा आया था। और साथ मे रजत का खत।

"आरोही, हमारा रिश्ता कमजोर निकला, हम एक दूसरे को समझ नही पाए। हमारे बीच शायद ही कभी प्यार रहा होगा। और अगर प्यार था, तो शायद वो हम दोनों की बदकिस्मती थीं, और कुछ नही।
हमारे रिश्ते की शुरुआत मुझसे हुई थी, और खत्म भी मुझसे ही हो रहा हैं।
इस खत के साथ कुछ कागज भेज रहा हूँ, पढ़ कर अपने दस्तखत कर देना।"

खत पर लिखा एक एक शब्द मेरे अंदर की सहनशक्ति को खींच रहा था। मैंने एक पल भी बिना देर किए, उन कागज पर दस्तखत कर दिए थे।

कोर्ट की पेशी में मेरी तरफ के वकील ने कई तरह के आरोप रजत पर लगाएं। मैं उन सारे आरोपो को सुन रही थी, और गौर कर रही थी, रजत के चेहरे पर, क्या उसको इन सबसे फर्क पड़ रहा था क्या?
कुछ अलग नही दिखा, वो एक स्थिर सी सोच के साथ बैठा रहा। उसका चेहरा बिल्कुल साफ था।

जज ने हमे 6 महीनों की महोलात दी। एक साथ रहने की। और हमे दोबारा एक बार फिर अपने रिश्ते के बारे में सोचने के लिए।
पर अब किस रिश्ते के बारे में सोचना था। वो रिश्ता जो रजत की तरफ से कमजोर था। रिश्ते कितनी जल्दी खत्म हो जाते हैं यह उस दिन पता लग गया था।
रजत अपना होकर भी पराया हो गया था।

जज की तरफ से फैसला था कि मैं चाहू तो, रजत की आधी सम्पति ले सकती हूँ, जिससे अपना एक अच्छा भविष्य शुरू कर सकू।
पर जिस इंसान ने अपने दिल मे जगह नही दी, उसके पैसों पर मेरा कैसा हक़।

पर अब कैसे भी करके मुझे रजत के साथ 6 महीने एक ही छत के नीचे काटने थे।

                        

                               जारी रहेगी।(To be continued)

hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.