पहली नजर

बचपन से मैं हिंदी माध्यम से पढ़ रहा था ,और मैं 8वीं तक पढ़ा भी था , परन्तु इस अंग्रेजी के युग में पिताजी मुझे भी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाना चाहते थे । इस लिए वो मुझे अपने साथ sheopur ले गए जहाँ वो कपडे सिलने का काम करते थे ।


उन्होंने मेरा दाखिला भी एक अंग्रेजी स्कूल में क्लास 5वीं में करा दिया । में मेरे पिताजी के साथ रहता था हमारी जो एक किराय की दुकान उसी में हम लोग खाना पीना बनाते थे । और क्योकिं मेरे मामाजी भी वही रहते थे तो हम लोग रात में सोने के लिए वही जाते । मैं पहले दिन स्कूल गया तो वहां मुझे बहुत अजीव लगा । लेकिन 4-5 दिन स्कूल जाते जाते मुझे अच्छा लगने लगा ।


मैं सुबह जल्दी स्कूल जाता था । एक दिन मुझे एक लड़की दिखाई दी उसके पैर में चोट लगी थी तो उसके पैर से एक कपडा बांधा था । उस लड़की को देखते ही मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा और शायद पहली नजर में ही मुझे उससे प्यार हो गया । लेकिन जब मुझे पता चला के वो तो 8वीं क्लास में है और में 5वीं में , परन्तु फिर मैंने सोचा की मेंने भी तो 8वीं पास की है हिंदी माध्यम से और अब में 5वीं में हु तो क्या हुआ ।


मैं 5वीं से अंग्रेजी माध्यम से पढ़ रहा था , और वो 8वीं में हिंदी माध्यम से । मैं पढ़ने में अच्छा था तो मेरी सबसे अच्छी बनती थी और मुझसे सब प्यार से बातें करते थे । सुबह की प्रार्थना भी मैं और मेरे दो दोस्त ही करते थे ।


रोज सुबह जल्दी आ कर उसके आने का इंतेजार करना लंच टाइम में पानी पूरी खाते समय उसे देखना मुझे बहुत अच्छा लगता था । और जिस दिन वो स्कूल नहीं आती थी तो उसे देखे बिना अच्छा नहीं लगता मैं बहुत परेशान हो जाता और सोचता कि आखिर क्या हुआ वो क्यों स्कूल नहीं आई । मुझे लड़कियों से बात करे में बहुत डर लगता, मैं सिर्फ उसे दूर से देखकर मन ही मन खुश हो जाता।


ऐसे ही एक साल गुजर गया। फिर में 6वीं क्लास में आया और वो 9वीं में । जैसा सभी स्कूलों में होता है 15 अगस्त और 26 जनवरी को वैसे ही हमारे स्कूल में भी dance बगैरह होता था और में भी उसमे partcipate करता और वो भी लेकिन पता नहीं जब लडकिया dance करती थी तो मैं dance room से बाहर चला जाता पता नहीं क्यूँ। ऐसे ही समय गुजर ता गया रोज उसे देखना उसके बारे में सोचना , रात में उसी के सपने देखना और खुश होना।


उस समय मुझे मेरी लाइफ बहुत अच्छी लगती थी । सोचता था कि उसे बता दूँ लेकिन फिर सोचता की वैसे भी मैं 6वीं क्लास में हु और वो 9वीं क्लास में बता नहीं क्या सोचेगी । जैसा मैंने बताया कि मैं पढ़ने में अच्छा था और वो भी, स्कूल ज्यादा बड़ा नहीं था तो जिस दिन कोई मैम स्कूल नहीं आती थी तो हमारे स्कूल के प्रिंसिपल सर मुझे और उसे PG और LKG की क्लास में जाने को कहते तो में बहुत खुश हो जाता । और फिर हम दोनों उन्हें ज्यादा तो नहीं but थोड़ा बहुत पढा देते और वही रहते जिससे वो शोर न करे ।


ऐसे ही कुछ और दिन निकल गए । मुझे लगने लगा कि शायद वो भी मुझे पसंद करती है क्योंकि उससे छोटी कुछ लड़कियां थी जो 3-4 क्लास में थी और वो उसी के घर के पास रहती थी ।वो मुझसे खड़ूस कहा करती थी क्यों की मैं ज्यादा किसी से बात नहीं करता था अकेला अकेला रहता था मुझे लगता था कि शायद ऐसा कहने के लिए उसी ने कहा होगा तो मैं सिर्फ खुश हो जाता और इग्नोर कर देता था ।


मेरे साथ साथ एक और लड़का था जो कि उसी का classmate था और वो भी उसे पसंद करता था उसका नाम ऋषिराज था । हालाँकि मैं भी उसी लड़के के साथ रहता था तो ये उसने मुझे बताया लेकिन उसे नहीं पता था कि में भी उसे पसंद करता हु क्योंकि मैंने ये किसी से नहीं कहा था ये सिर्फ mayank जनता था जो मेरी मौसी का लड़का था । उसे बत्तियां (जो चौक के जैसी होती है) खाने की आदत थी , और मुझे उसका बत्तियां खाना बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता था।


कुछ दिन और गुजर गए फिर एक दिन मैंने सोचा क्यों न उसे बता दू । मैंने एक लेटर लिखा वो लेटर कम कहानी ज्यादा दी उसमे मैने लिखा कि- "मैं तुम्हे बहुत पसंद करता हु क्या तुम भी मुझे पसंद करती हो और हाँ तो इस लेटर पर अपना जबाव लिख देना अगर नही करती हो और तुम्हे ये पढ़ कर गुस्सा आये तो सर से please complain मत करना सिर्फ ऐसे फाड कर फेंक देना ।" इतना कुछ लिख कर मैंने ये लेटर मयंक को उसे देने के लिए दिया । मैं बहुत डर रहा था कि आगे होगा क्या ? क्या वो हाँ बोलेगी या फिर सर से मेरी complain करेगी .....






to be continue.......



इसके आगे की कहानी जानना चाहते हो तो please मुझे comment कर बताये...

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