मुहाफिज़

. ................सिराज फ़रूक़ी,पनवेल

हनुमान निहायत ही शरीफ आदमी था. न किसी से कुछ लेना न देना अपने काम सेकाम.वह आॅटो रिक्शा चलाता, उससे जो भी आमदनी होती, उसमें से 50रूपये की दारू पीता और 50 रूपये रिक्शा मरम्मत के लिए निकाल लेता, बाकी के सब रूपये बीवी केहाथ में ऐसे थमा देता, जैसे कोई ग़ुलाम अपने आक़ा को.

उसकी बीवी शारदा भी उसके दारू पीने पर कुछ ऐतराज़ नहीं करती थी, क्योंकिघर-परिवार तो चलता ही था. रूकावट होती तो शायद कुछ कहती भी. हाॅ, पहले शारदाऐतराज़ भी करती थी.मगर ,जब देख ली उसकी यही आदत है,तो चुप साध ली थी. वह दारू पीता है मगर रातों को, उसका यह व्यसन उसके कारोबार पर हावी नहीं होता है और न वह होने देता है. वह दिन में पान खाता है और बीड़ी पीता है. उसके इन सब व्यसनों के बावजूद लोग उसे पसंद करते हैं. क्योंकि वह व्यवहार का अच्छा आदमी है.

साबिर अली ने जब अपने बेटे को स्कूल में दाख़िला दिलवाया, तो उसे लाने और ले जाने के लिए एक आॅटो वाले की जरूरत पेश आई, जब उन्होंने इसके बारे में तहक़ीक़ात की तो लोगों ने हनुमान का ही नाम सुझाया. और साबिर अली ने अपना प्याराबेटा अहमद उसके हवाले करते हुए कहा,’’हनुमान! इसे सॅभालकर लाना और ले जाना.....आज से समझो, यह तुम्हारा ही बच्चा है....‘‘

’’आप बेफ़िक्र रहिए साहब, आज से यह हमारी जान है....!‘‘ हनुमान की बातों ने साबिर अली को मुतमईन कर दिया था और वह इस बच्चे को लाने और ले जाने की तरफ़ से बे-फ़िक्र हो गए थे.

( 2 )
एक दिन, शहर में फ़साद फूट पड़ा.फसादी राह चलतों को मारने और पीटने लगे.वाहनों और दुकानों को जलाया जाने लगा.इतना ख़तरनाक फ़साद हनुमान ने जिंदगी में कभी न देखा था. अबतक, वह बहुत से बच्चों को उनके घरों में छोड़ चुका था. सिर्फ अहमद हीबचा था कि ख़ून-ख़राबा शुरू हो गया. हनुमान आफ़त में फॅसा. डरा-सहमा आॅटो लिए कभी इधर तो कभी उधर से भाग रहाहै. दंगाई हाथों में हथियार लिए खदेड़ रहे हैं, गालियाॅ बक रहे है. ’हे मार साले को....पकड़ कुत्ते को, जाने न पाए कमीना .‘ और वह बेचारा राम-राम करता,अपनी और बच्चे की जान बचाने के लिए भागता-फिरता है. वह तमाम ख़तरों से बचकर, सबसे पहले अहमद को उसके बाप के हवाले करना चाहता है.उसे आज अपनी जान से ज़्यादा अहमद की फ़िक्र हो रही है. वह सोच रहा है.अगर अहमद को कुछ हो गया, तो इल्ज़ाम आएगा कि हनुमान भी एक हिंदू था और उसे मार दिया. उसे यह इल्ज़ाम क़तई पसंद नहीं है. उसने गिड़गिड़ाकर भगवान से प्रार्थना की,’’हे भगवान! मेरी और इस बच्चे की रक्षा करना...!‘‘उसने देखा सामने दंगाई आग जलाकर दाएं-बाएं सड़क पर खड़े हैं.

’’अब बचना मुश्किल लगता है....‘‘उसने अहमद से कहा,’’बेटा, पीछे से मेरा गला जोरों से पकड़ ले.....‘‘ अहमद ज़ोरों से हनुमान का गला पकड़ लिया और हनुमान ने ’जय बजरंग बली‘ का नारा ज़ोर से लगाया और सामने जो रोड पर इस वक्त आग का दरिया था पार कर लिया.

दंगाई दंग रह गए कि इतना बड़ा अलाव लगाया था कैसा पार कर गया.रिक्शा था याहवाईजहाज़! हनुमान इस सड़क से निकल कर जब अहमद के घर की तरफ़ जाने वाली सड़क पर पहुॅचा तो देखा सामने बहुत बड़ा ख़तरा है.इस ख़तरे से टकराने की उसमें हिम्मत नहीं हुई.इस लिए उसने जल्दी से आॅटो की स्टेरिंग अपने मुहल्ला की तरफ़ मोड़ दी. क्योंकिअब उसका मुहल्ला भी क़रीब था और सुरक्षा की दृष्टि से उसे अपने ही घर ले जानाज़्यादा उचित लगा.

सोचा, चलो अपने ही घर लिए चलते हैं. सुबह, जब हालात साज़गार होंगे तो छोड़ आवेगा.अभी आगे जाना मौत के समुंदर में जाने के बराबर है. क्योंकि आज जो मौत का तांडव हो रहा है,उसमें किस-किस की मौत आएगी,शायद मौत को भी नहींमालूम है?

(3)
वह घर पहुॅचकर अहमद को बीवी के हवाले करते हुए बोला,’’यह अहमद है...संभालकर रख.किसी की अमानत है....!‘‘ ’’यानी मुसलमान....?‘‘ बीवी ने हैरत से सवाल किया. ’’तो इसमें हैरान होने वाली कौन सी बात है....?‘‘ ’’अरे तुम्हें मालूम नहीं है, यहाॅ मुसलमानों को चुन-चुन कर मारा जा रहाहै....और ऐलान किया जा रहा है. अगर किसी ने किसी मुसलमान को छुपाया या पनाह दीतो ख़ैर नहीं है.....‘‘ ’’उनकी नानी की हाड़......!‘‘ हनुमान ने रूआब से कहा,’’तू चल....रख. मैंदेखता हॅू कौन माई का लाल आता है.....?‘‘

’’मुझे तो डर लग रहा है......‘‘बीवी ने सहमते हुए कहा.

’’तू चल तो सही, बड़ी आई डरने वाली.....‘‘हनुमान ने बीवी को धक्का दे दियाथा.बीवी डरते-डरते अहमद को घर में ले गई.

अहमद भी डरते-डरते उसके घर में क़दम रखा.फिर उस अजनबी माहौल या शारदा की बातें सुनकर अहमद सहम सा गया. वह डर कर हनुमानकी टाॅगों से लिपट गया और रोकर बोला,’’अंकल, मुझे घर जाना है......ले चलो न...‘‘

;’’तुम फिकर न करो बेटा. मैं तुम्हें ले चलॅूगा. लेकिन अभी नहीं.माहौल देख रहे हो न....कितना खराब है....आज तुम हमारे घर में रहो.....कल सुबह ले चलॅूगा.....‘‘यह कहते हुए हनुमान ने उसे अपनी गोद में उठा लिया और प्यार करने लगा.

; ’’नहीं अंकल.... मुझे अभी जाना है....‘‘अहमद ने ज़िद की.

’’बेटा! अपने अंकल पर भरोसा नहीं है. होंगे और, जो हिंदू या सिर्फ मुसलमान होंगे.मगर, मैं यानी तुम्हारा अंकल सिर्फ़ और सिर्फ़ अभी तक इंसान ही हॅू....और इंसान को सिर्फ़ इंसान की ही नजर से देखता हॅू.....तुम फिकर न करो.तुम्हारी जान जाए, उससे पहले मेरी जान जाएगी......यह प्राॅमिस रहा....‘‘ औरउसने बच्चों सा क़सम खाने के अंदाज़ में गला पकड़ लिया था.

अहमद नहीं मानता था. मगर हनुमान जानता था, ऐसे माहौल में घर से बाहर निकलना कितना बड़ा ख़तरनाक है. यही नहीं, अब तक वह कई फ़साद देख भी चुका था. वह इसकी भयावतः को अच्छी तरह समझता था. इसलिए चुपचाप घर में बैठा था, वर्ना अहमद जिस हिसाब से ज़िद कर रहा था. वह एक पल भी नहीं रूकता.

(4)
हनुमान का भाई पड़ोस में रहता था.इन दिनों दोनों भाईयों में किसी बात परठनी हुई थी. जब उसे मालूम हुआ. बड़ा भाई एक मुस्लिम लड़का लाया है. वह उसे बचाना चाहता है, तो उसे अपनी रंजिश का बदला लेने का नादिर मौक़ा हाथ आया और वह फौरन;जाकर जाति-धर्म का भेद रखने वाले गिरोह को बता दिया.

अब क्या था? वे लोग हर-हर महादेव का नारा लगाते आन पहुॅचे. जब शारदा ने उन लोगों को अपने घर की तरफ़ आते देखा तो हनुमान सेकहा,’’अरे, वे लोग तो आ रहे हैं....‘‘ ’’कौन लोग रे....?‘‘हनुमान ने गुस्सा दिखाया. ’’अरे, वही लोग......‘‘ ’’कौन लोग....?‘‘ ’’फ़साद करने वाले. अभी चन्द लम्हा पहले, जो लोग बोल कर गए थे वही लोग...‘‘ ’’आने दे, सालों को....‘‘हनुमान ने गंदी गाली देकर जल्दी से हाथ में बड़ासा चाक़ू थाम़ लिया था.फिर वह खिड़की पर आकर उन लोगों को देखा. हर-हर महादेव और जय श्री राम का नारा लगाते आगे बढ़ते आते थे.

उस जुनूनी भीड़ को देखकर उसने सोचा, इन लोगों से निपटनाआसान काम नहीं है और उसने बच्चे को लेकर कहा,’’तू इन लोगों को यहाॅ रोक. मैं पीछे के दरवाजे़ से निकल जाता हॅू.....‘‘

’’ठीक है.....!‘‘ शारदा ने काॅपते हुए लहजे में जवाब दिया. और फिर हनुमान बच्चे को लेकर पीछे के दरवाजे़ से एक दो तीन हो गया.दंगाई उसके घर के सामने आकर चिल्लाए,’’हनुमान, कहाॅ है....?‘‘
’’बाहर हैं.....‘‘ बीवी ने जवाब दिया. ’’आॅटो तो बाहर खड़ा है.....‘‘
’’यही-कहीं बाहर चले गए होंगे.....‘‘ .
’’ठीक है, वह बच्चा कहाॅ है....?‘‘
’’कौन सा बच्चा......?‘‘ अब शारदा का कलेजा तो जैसे मुॅह को आ गया.उसके जिस्म को जैसे थरथरी सी लग गई.
’’वही मुसलमान का बच्चा, जिसे वह अपने साथ आॅटो में लाया है...‘‘दंगाईयों ने दहाड़ा .
’’क्या मालूम.....?‘‘बीवी ने कांपते लहजे में अनभिज्ञता व्यक्त की.
’’झूठ मत बोल......!‘‘दंगाई चिल्लाए.

अभी वह कुछ बोल पाती कि दंगाई उसे ढकेलकर घर के अंदर दाख़िल हो गए. इधर-उधरदेखा. मगर कहीं न मिला.आख़िर, पीछे का दरवाज़ा खुला देखकर, जब एक दंगाई उधर से झाॅका तो पाया, सामने कुछ दूर पर हनुमान बच्चे को लिए भागा जा रहा है. उसने हनुमान को पहचानकर चिल्लाया,’’वह देखो..... वह ..... भागा जा रहा है,साला.....!‘‘

सब ने उसके साथ उस तरफ़ देखा और दौड़कर घर से बाहर कूद गए थे. हनुमान ने जब उन लोगों को अपनी तरफ़़ आता देखा, तो और ज़ोरों से भागने लगा.वह हड़बड़ाहट में बच्चे को लिए-लिए कई जगह गिरा भी. संभला. फिर उठा और भागने लगा. जब इन लोगों ने देखा, हनुमान को पकड़ पाना आसान काम नहीं है,तो गुस्से में उस पर फ़ायर कर दिया.

वह घायल होकर चकरा गया.मगर रूका नहीं. खुद को संभाला और दुगुनी ताक़त सेभागने लगा, और भागता ही चला गया.उसे अब पीछे का कोई ख़ौफ़ नहीं था. सिर्फ़ और सिर्फ़ आगे की ही फ़िक्र थी.बच्चे को उसके माॅ-बाप तक पहुॅचाने की कोशिश थी और इस कलंक से बचने की कि हनूमान हिंदू था.बच्चे को मार डाला होगा. वह लड़खड़ाते हुए उस मुक़ाम तक पहुंच गया, जहां से अहमद का मुहल्ला क़रीब था.उसे लगा, अब वह सुरक्षित स्थान पर आ गया है. हालांकि,अब उसमें और ज़्यादा चलने या भागने की ताक़त नहीं थी. जिस्म निढाल हो चुका था.उसने एक पेड़ का सहारा लेकरअपनी उखड़ती हुई साॅसों पर काबू पाने की कोशिश की और कहा,’’ब्.....ब....बेटा!अह...मद....अब जाओ....त्...त...तुम... भाग जाओ..... वह जो दिख रहाहै...त्...त...तुम.... तुम्हारा ही मुहल्ला है. च्...च....चले जाओ.....जाओ..... चले जाओ. व....वहीं...त... तुम्हारे मम्मी-डैडीहैं....त्...त.....तुम.....तुम्हारा इं...इंतज़ार ....कर ....रहे.....हैं...ज....जा...अ...ह....!‘‘

अहमद हिम्मत करके उठा और दम तोड़ते, लहूलुहान हनुमान को सहमी नज़र देखा, उसके बाद अपने घर की तरफ़ देखा, उसके बाद ’मम्मी...!‘ कहकर नन्हें-नन्हें कदमों से भयभीतावस्था में घर की तरफ़ भागता चला गया. हनुमान तो चाहता था. उसे घर तक पहॅुचा दे, मगर उसकी हिम्मत यहां तकbपहुॅचने में ही जवाब दे गई थी.

पश्चिमी छोर पर सूर्य बैठा सुखऱ् व ज़र्द आॅखों से यह सारा मंज़र देखता रहा और जैसे इस मंज़र की ताब न लाकर क्षितिज में मुॅह को छुपा लिया.मस्जिद सेbअज़ान की आवाज़ आई,’’ अल्लाह हू अकबर, अल्लाह हू अकबर....!‘‘

यही वह पल था, जब हनुमान ने आखि़री साॅस ली और उसके मुॅह से निकला, ’’हे भगवान....!‘‘ और वह दम तोड़ दिया.
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