"अरे, सुयू बेटा सुन, जरा धीरे धीरे चल .......कोई गाड़ी आ गई तो ....सुन तो। "

सुनयना, मेरी बेटी! प्यार से सुयू ही बुलाती हू उसे । मेरे हाथ मे इतना सामानथा तो हाथ पकड़ नही सकती थी उसका, तभी सामने से तेज गति से बाईक आई जिसे देखकरसुयू घबरा गई और घबराहट मे उसके कदम ठिठक गए ।न आगे बढ़ पाई न पीछे हो पाई ।मै सब सामान वही छोड़ कर उस तक पहुंची, तब तक वह तेज रफ्तार बाईक निकल चूकी थीऔर सुयू की घुटी घुटी चीख कानो मे गूंजने लगी ।घबराहट के मारे पसीने से तरबतरहो गई । किसी अनहोनी की आशंका से मै मुड़कर देखने की हिम्मत नही कर पा रही थीपर अपनी बच्ची को सही सलामत देखने की आस मे मुड़कर देखा तो पाया एक सभ्य सीदिखने वाली महिला मेरी बेटी को चुप करा रही है और उसके कपड़ो पर लगी मिट्टीझाड़ रही है । मै दौड़कर सुयू के पास पहुंची और उसे गले लगा लिया । भीगी आँखोसे महिला को धन्यवाद दिया ।

बेटी को चुप कराया और सामान उठाने लगी तो वह महिला मेरे करीब आई कहने लगी, "आपनए आए है यहा, पहली बार ही देखा आपको और इतना सामान, मै कुछ मदद कर दू? "

मै थोड़ा झिझक रही थी ।

"जी मेरा नाम नेहा है । मै सामने ही रहती हू । आप मेरी मदद ले सकती है । "औरउसने सामान घर मे रखने मे मदद की ।

"आपको किसी चीज की जरूरत हो तो ज़रूर बताइयेगा । नई जगह है, सेट होने मे समयलगता है "

मैने धन्यवाद बोल कर विदा किया ।सब सामान जैसे -तैसे रखकर लंच बॉक्स निकाला औरसुयू को खाना खिलाकर सुला दिया ।हम आज ही इस कॉलोनी मे शिफ्ट हुए है ।बड़ासामान तो गाड़ी से कल ही आ गया था पर आज कुछ बचा सामान और हमे यहा टैक्सी सेआना था क्योंकि पति ऑफिस के काम से बाहर गए हुए थे तो अकेले ही मैनेज करना था। कुछ देर बाद उठकर रसोई का सामान निकाला और रसोई सैट कर दी ।बड़े सामान औरबाकी व्यवस्था के लिए मूझे इनके आने का इंतजार था जो अगले दिन ही खत्म होनेवाला था तो एक कप चाय बना कर आराम कुर्सी पर पीठ टिका कर बैठ गई ।बहुत सुकूनमहसूस हो रहा था चारो ओर पसरी खामोशी मे । चाय खत्म करके आँखे बंद करके बैठीथी कि आँखो के सामने उसी महिला का चेहरा घूमने लगा । दिखने मे सभ्य परिवार कीलगती थी, आवाज भी बड़ी मधुर थी उसकी । अच्छा पड़ोसी मिल जाए तो यह सबसे बड़ासुख होता है हम जैसे दूसरे शहर से आए परिवार के लिए । बस एक बात बैचैन किए जारही थी वह थी उसकी आँखे । सूनी सी । आँखो मे कही गहरे कोई उदासी छिपी नजर आरही थी । जिसने बड़ा विचलित किया था मूझे ।फिर सोचा हम औरते कभी-कभी बहुतज्यादा ही सोचने लगती है, पता नही क्यो एक अनहोनी की आशंका घेरे रहती है हमे। इस तरह से मैने अपने विचारो को विराम देने की कोशिश की ।

15 दिनो मे घर बहुत अच्छे से सेट हो गया और कॉलोनी मे आसपास के काफी परिवारोंसे जान पहचान भी हो गई । इस बीच दो तीन बार नेहा भी आई मुझसे मिलने और सुयूभी उसके साथ खुब खुश रहती । पर मै नेहा के बारे मे इतना ही जान पाई थी कीउसकी शादी को पाँच साल हो गए है, कोई बच्चा नही है अभी और जॉइंट फैमिली मेरहती है ।एक दिन मै शाम को पार्क मे बैठी थी और सुयू नेहा के साथ झूले का आनंदले रही थी । नेहा झूला देती और सुयू हंसते हुए झूला झूलती । मैने इन दिनो मेनोटिस किया कि जब भी सुयू नेहा के आसपास होती तो नेहा की हंसी ममतामयी हो उठतीऔर उसकी आँखे सजल, स्नेह से ओतप्रोत । मै उन दोनो के खेल मे मग्न थी कि तभीहमारी पड़ोसी शिखा जी आकर मेरे पास बैठ गई । बातो बातो मे कहने लगी, "यह झूलाझूल रही है वह आपकी बेटी है न, क्या नाम बताया था आपने? "

"जी सुनयना नाम है , प्यार से हम सुयू बुलाते है ।"मैने मुस्कुराते हुए कहा ।

"बड़ी प्यारी बेटी है आपकी, पर मुझे डर है कि कही नजर न लग जाए उसे । हर किसीके साथ खेलने देती है आप तो उसे" शिखा जी चेहरे को टेढ़ा करते हुए बोली ।

"जी, क्या कह रही है आप? " मै थोड़ा गुस्से मे बोली ।

"अरे, आपको क्या पता सुनीता जी! आप तो नई आई है यहा बाकी तो पूरी कॉलोनी वालेजानते है । लगता है कोई साया है इस पर । एक तो बांझ है, ऊपर से किसी भी बच्चेको ऐसी नजर से देखती है कि बिमार पड़े बिना नही रहता वह और अगर कोई गलती से छूले बच्चे को तो भगवान् ही मालिक है । दो घर छोड़कर वह जो अग्रवाल जी रहते है नउन्ही की बेटी को खा गई ।"

"अरे! यह क्या बकवास कर रही है आप? एजयूकेटेड होते हुए भी आप इन बातो को मानतीहै? आश्चर्य है ।जरा इन दकियानूसी बातो का पर्दा हटा कर निश्चल मन से देखिएकितनी ममता भरी है इन नजरो मे । " मैने समझाने के भाव से कहा ।

"हुँह, हमे क्या! हम तो आपके भले के लिए कह रहे है और आप हम पर ही बरस पड़ी ।भलाई का तो जमाना ही नही रहा ।"गुस्से मे कहते हुए वे चली गई और छोड़ गई मुझेमेरे आशंकित मन के साथ। अंधेरा घिरने लगा था तो नेहा से विदा लेकर हम घर आ गए।पर शिखा जी की बातो से मन बड़ा खराब हो गया ।फिर सोचा कल नेहा के घर जाकरमिलती हू । शायद कुछ पता चले ।

अगले दिन सुयू को स्कूल भेज कर जल्दी से काम निपटाया और नेहा के घर चली गई ।डोर बेल बजाई तो थोड़ी देर बाद नेहा ने ही दरवाजा खोला, मुझे देखकर बड़ी खुशहुई । उसने परिवार के सभी सदस्यों से मेरा परिचय करवाया । सास-ससुर, एक देवरऔर नेहा व नेहा के पति कुल पांच लोगो का परिवार है इनका । नेहा के जेठ -जेठानीभी है जो दूसरे शहर मे रहते है जिनके दो बच्चे है । कुछ देर बाद मै उनसे विदालेकर घर वापस आई पर मुझे वहा के माहौल से कुछ पता नही चला । सब बिलकुल नॉर्मललगा । शाम को पार्क मे गई लेकिन आज नेहा नही आई थी । पर वहा मिसेज अग्रवाल मिलगई जिनसे कभी-कभार बात हो जाती थी ।

मैने उनसे सीधे ही पूछ डाला बिना किसी भूमिका के ।"आपकी बेटी को क्या हुआ था?नेहा जी का इन सबसे क्या संबंध है? " वे सकपका गई । पर मेरे रिक्वेस्ट करने औरकल की घटना का जिक्र करने पर वे बोली, "जी इस बारे मे मै आपसे यहा बात नही करपाउंगी । कल आपके घर आउंगी, वही सब बताऊंगी । " मैने धन्यवाद किया और घर लौटआई । आज रात कुछ ज्यादा ही लम्बी लग रही थी, नींद आँखो से ओझल हो चुकी थी बससुबह का इंतजार था । दिमाग तो बहुत से तर्क दे रहा था पर दिल कहता था कि वहनिश्चल ममता से भरी हुई आँखे झूठी नही हो सकती ।



सोचते सोचते मुझे नींद आ गई । सुबह उठी तो सर मे बहुत दर्द था, रात को सो नहीपाई ठीक से । फिर भी हिम्मत करके उठी, सुयू को स्कूल भेज कर काम निपटाया औरइंतजार करने लगी मिसेज अग्रवाल का । काफी देर इंतजार किया पर वे नही आई । परअब मुझ मे सब्र करने की हिम्मत नही बची थी, मुझे सच जानना था ।मै खुद ही मिसेजअग्रवाल के घर चली गई । मुझे देखकर वह बोली, "अरे आप! आज थोड़ा लेट हो गया कामनिपटाने मे, बैठिए । मै चाय नाश्ता लाती हू ।"

"नही, आप रहने दीजिए, मै नाश्ता करके आई हू ।आप प्लीज मुझे बताए क्या हुआ था? "

"जी यह है मेरी बेटी पीयू । "वे तस्वीर की तरफ इशारा करके बोली । "डेढ सालपहले की बात है, पीयू और सीया नेहा के घर मे छत पर खेल रही थी । मै अपने घरपर खाना बना रही थी । थोड़ी देर बाद नेहा के ससुर जी का फोन आया कि पीयू छतसे गिर गई है और उसे अस्पताल ले जा रहे है ।मै नंगे पैर ही दौड़ पड़ी । बिनादेर किए अस्पताल ले गए पर मेरी पीयू को बचा नही पाए । सिर पर चोट लगी थी, काफीखून बह गया था ।" कहते हुए वे जार -जार होकर रोने लगी ।

सांत्वना के दो बोल भी नही निकल पाए मेरे मुँह से । उनका दर्द ही इतना बड़ा हैकि हर शब्द छोटा जान पड़ता था और मेरा दिमाग कई सारे प्रश्नो के बीच उलझा हुआथा आखिर बिना सांत्वना दिए ही पूछ बैठी " मै कुछ समझ नही पा रही हू, यह सीयाकौन है? कृपया खुल कर बताए । ताकि मै कुछ समझ पाउ। "

"सीया नेहा की जेठानी की लड़की है ।पहले वे यही रहते थे ।उनके जुड़वा बच्चे है। एक लड़का और एक लड़की । पीयू, सीया और संजू (सीया का भाई ) तीनो साथ हीखेलते थे । उस दिन बारिश की वजह से मैदान मे कीचड़ बहुत हो गया था, तो तीनोनेहा के घर ही खेल रहे थे । "

"आई एम रियली साॅरी,मै जानती हू आपका गम बहुत बड़ा है, आपके दर्द को मै इसलिएमहसूस कर सकती हू क्योंकि मै भी एक माँ हू । पर सब लोग नेहा के लिए क्यो कहतेहै कि उस पर कोई साया है और बच्चे को दूर रखो उससे? "

मिसेज अग्रवाल - "वह तो अभागी है बेचारी ।भगवान् भी पता नही कैसे कैसे खेलरचता है, किसी की झोली मे इतनी खुशिया देता है कि समाती ही नही है और किसीकिसी के भाग्य मे खुशी का एक कतरा तक लिखना भूल जाता है ।पाँच साल पहले ब्याहकरके आई थी इस घर मे, तब तो दुल्हन के जोड़े मे भी मासूम गुड़िया सी नजर आ रहीथी ।घर मे जेठानी का दबदबा था ।उन्होंने शादी के दूसरे साल मे ही पोते का मुँहजो दिखा दिया था । सास-ससुर सब उसी का गुणगान करते और उसी की बात को तवज्जोदेते । नेहा शांत स्वभाव की है,सबका दिल आसानी से जीत लिया ससुराल मे । लेकिनजेठानी को यह बात रास नही आती थी । उसे लगता कि उसका एकछत्र राज न छीन जाएइसलिए हमेशा कोशिश करती नेहा को नीचा दिखाने की लेकिन नेहा कभी किसी बात काबूरा नही मानती और जेठानी के बच्चो को अपने बच्चो की तरह रखती थी । नेहा केआने के बाद जेठानी के बच्चो के लगभग सभी काम जैसे सुबह तैयार करना, स्कूल सेआकर खाना खिलाना, पढ़ाना सभी नेहा ही करती । उसे बच्चे बेहद पसंद थे । खासकरउसका मन सीया की तरफ बहुत था क्योंकि लड़की होने की वजह से जेठानी सीया कोसिर्फ बड़ा कर रही थी, बचपन मे जिस स्नेह और अपनेपन की जरूरत होती है वह सीयाको मिला ही नही । दादी और जेठानी दोनो मिलकर सीया को जब तब डाट देते, गलतीसंजू की होती फिर भी डाँट सीया को ही पड़ती । नेहा के आ जाने से सीया को जैसेनई माँ मिल गई थी । भले ही सीया पेट से नही जन्मी थी नेहा के, लेकिन असल मेवही उसकी माँ होने का फर्ज निभा रही थी । इसी बीच नेहा ने खुशखबरी सुनाई की वहमाँ बनने वाली है । घर मे सभी खुश थे सिवाए जेठानी के क्योंकि जेठानी को लगनेलगा अगर इसके लड़का हो गया तो मेरा एकछत्र राज कायम नही रह पाएगा । कुछ समयबाद नेहा के अचानक गर्भपात हो गया । कोई कुछ समझ नही पाया । डॉक्टर ने कहा किबच्चेदानी कमजोर है इसलिए ज्यादा एहतियात बरतने की जरूरत है ।इस तरह से एक केबाद एक उसके पांच बार गर्भपात हो गया । वह बहुत ध्यान रखती, उसके पति महेश भीपूरा ख्याल रखते पर नतीजा वही का वही । नेहा बहुत कमजोर हो गई थी । डॉक्टर नेनेहा को समझाया कि उसकी बच्चेदानी कमजोर है और वह बच्चे का वजन नही ले पातीइसलिए बच्चा ठहर तो जाता है लेकिन पूरा पनप नही पाता और गर्भपात हो जाता है । "

"अच्छा, बच्चे नही हो रहे इसलिए मनहूस का तमगा लगा दिया लेकिन उस पर साया हैकिसी का यह बात क्यो कही उन्होंने? "

मिसेज अग्रवाल- "उन्ही दिनो जब नेहा काफी कमजोर थी पीयू के साथ यह हादसा हुआथा । सभी कह रहे थे कि पैर फिसलने से गिर गई लेकिन एक माँ का मन कैसे विश्वासकरता । मेरा मन नही मान रहा था यह सब दलील और इस घटना के महीने भर बाद ही नेहाके जेठ -जेठानी दूसरे शहर बस गए अपने बच्चो के साथ तो मुझे लगा कुछ गड़बड़ तोजरूर है ।

उनके जाने के बाद एक दिन नेहा मेरे पास आई थी सांत्वना देने । तब मैंने उसेप्यार से पूछा तो जो उसने बताया एक बारी विश्वास ही नही हो पाया, वह बोली, "उनदिनो मै बहुत कमजोर थी, खड़े होने पर भी चक्कर आ रहे थे । फिर भी जेठानी जीअपने साथ छत पर ले गई की खुली हवा मे तुम्हे अच्छा लगेगा ।वही पर सीया और पीयूखेल रही थी । छत पर पहुंचे तो जेठानी ने देखा कि जो कपड़े सूखने डाले थे वहबारिश से गीले हो गए । वे गुस्से मे सीया की तरफ यह कहते हुए बढ़ी कि, "तुझसेकहा था ना कि सूखे कपड़े हटा लेना छत से, जब देखो तब बस खेल मे लगी रहती है।"और उसे जोर से एक तमाचा जड़ दिया । वह बेचारी डर गई, मै उसे बचाने उस तकपहुंचने की कोशिश कर रही थी इतने मे ही जेठानी जी सीया को बुरी तरह पीटने लगी,पीयू भी डर कर रोने लगी, वे छत के बिल्कुल किनारे पहुंच चुकी थी और पीयू सबसेपीछे खड़ी थी, डर की वजह से वह पीछे खिसकती गई और किनारे पर जेठानी ने सीया कोधक्का दिया उसका एक हाथ मैने पकड़ लिया और दूसरे से पीयू को पकड़ने की कोशिशकी लेकिन उसी वक्त मै बेहोश हो गई और जब होश आया तो पता चला कि पीयू को नहीबचा पाए । मूझे माफ कर दिजिये । "

"अब जो होना था सो तो हो चुका, इसमे तुम्हारी क्या गलती ।तुमने तो बचाने की हीकोशिश की थी न ।पर तुम चुप क्यो रही? तुम्हारी जेठानी ने पूरी कॉलोनी मेअफवाह फैला दी कि तुम पर कोई साया है, तुमने पीयू को मारा है क्योंकि तुम्हारेबच्चे नही हो रहे इसलिए वह भी शहर छोड़कर जा रही है कि तुम कही उसके बच्चो कोनुकसान न पहुंचा दो । सच बताओ तुम चुप क्यो हो? क्यो उस औरत को बचाने की कोशिशकर रही हो जिसने अपनी बच्ची तक को नही बख्शा? बताओ नेहा! "

नेहा- "मै जबसे शादी करके आई तभी से सीया को प्यार और स्नेह के लिए तड़पते हीदेखा । एक छोटी सी बच्ची को सिर्फ इसलिए दुत्कार मिलती थी क्योंकि वह एक लड़कीहै । एक बच्चा माँ के सबसे करीब होता है । जब घर मे भाई-बहन के बीच झगड़ा होताहै या कोई बड़ा डांट देता है तो बच्चा अपनी माँ के पास जाता है, प्यार पाने केलिए क्योंकि बच्चे को विश्वास होता है कि चाहे सभी उसके खिलाफ खड़े है पर माँफिर भी प्यार करेगी, सबकी डांट से बचाएगी । पर जब वही माँ दुत्कार दे बच्चे कोतो उसका विश्वास डगमगा जाता है, फिर वह लाचार घर के बाकी लोगो मे स्नेह तलाशताहै । अमूमन जॉइंट फैमिली मे अगर माँ बच्चे पर ध्यान नही दे पाती तो घर केदूसरे सदस्य जैसे दादा दादी, चाची या ताई उस बच्चे पर स्नेह लुटाते है तो कहीन कही से स्नेह की भरपाई हो जाती है जो इन मासूम बच्चो की परवरिश का सबसे अहमघटक है । "

"लेकिन सीया को यह स्नेह न माँ से मिला न ही पिता से और न ही घर के दूसरेसदस्य से ।पाँच साल की बच्ची को पढ़ाने की बजाए घर के काम मे मदद ली जाती थी।इसलिए घर मे आते ही मैने सभी काम अपने सिर पर ले लिए थे ताकि उस मासूम कोखेलने और पढ़ने का वक्त मिल सके । स्कूल भी सिर्फ लोगो के डर से भेजा जाता थाक्योंकि न भेजने पर सभी पूछेंगे कि स्कूल क्यो नही भेजते? इस घर मे आई तो इतनाअहसास था कि ब्याह हो गया है मेरा, पर पत्नी, बहू, देवरानी, भाभी आदि सिर्फनाम के ही रिश्ते लगते । लेकिन सीया को देखते ही मेरी ममता जाग उठी थी । आँखोमे स्नेह के अश्रु बरसने लगे । बाकि रिश्तो को बाद मे जाना, महसूस किया लेकिनसीया और मेरे बीच के स्नेह के रिश्ते को पहले दिन ही समझ लिया । सभी कहते हैकि नेहा बांझ है, उसके बच्चे नही होते जरूर पिछले जन्म मे कोई ऐसा पाप कियाहोगा जिसका फल भुगत रही है । लेकिन मेरा मानना है दीदी की मैने जरूर पिछलेजन्म मे कोई पुन्य किया है जो उन्होंने शारीरिक क्षमता न होने पर भी मुझे माँबनने का सौभाग्य प्रदान किया । मैने सुना है जब माँ अपने बच्चे को जन्म देतीहै और उसे पहली बार छूती है तभी से एक नेह की डोर जुड़ जाती है दोनो के बीचबिल्कुल ऐसा ही अहसास हुआ था मूझे जब मैंने पहली बार सीया को प्यार से गलेलगाया था । कोख से जन्म नही दिया तो क्या हुआ दीदी, मेरे शरीर मे दौड़ते लहूका हर एक कतरा इस बात की गवाही देता है कि मै ही उसकी माँ हू । सभी रिश्ते खूनके हो यह जरूरी तो नही, रूहानी रिश्ते भी अपना अस्तित्व रखते है और खून केरिश्तो से कही ज्यादा पाक और साफ होते है । "

"उस दिन होश मे आने के बाद देखा मेरे पास सिर्फ जेठानी ही थी उन्होंने ही मुझेपीयू के बारे मे बताया । मै बिलख पड़ी । इन सब मे उस मासूम की जान चली गईजिसका इन सबसे दूर दूर तक कोई नाता नही था । मैने जेठानी को बहुत सुनाया औरआपके पास आने वाली थी सच बताने के लिए तो उन्होंने धमकी दी कि अगर किसी को सचबताया तो सीया का भी वही हाल करेगी जो पीयू का हुआ । मै डर गई , इसलिए चुप रही।फिर एक दिन जेठ -जेठानी दूसरे शहर चले गए पर साथ मे सीया को भी ले गए । सीयाके जाने के बाद मुझे उदास देखकर इन्होंने मुझसे पूछा कि क्या हुआ है मुझे तोमैने सारी बात इनको बताई और सीया को गोद लेने की इच्छा भी जताई । एक बार तोइन्हे विश्वास नही हुआ लेकिन जब उन्होंने सीया के प्रति जेठानी के रवैये परगौर किया तो यह समझ गए । इन्होंने अपने जेठ से बात की पहले तो जेठानी नखरेकरने लगी लेकिन जब इन्होंने सब बात मालूम होने की बात कही तो वह इस शर्त परराजी हो गए कि इस बारे मे आपको न बताया जाए । सीया को गोद लेने की सारीप्रक्रिया पूरी हो चुकी है और आज ये सीया को लेने गए है । मै आपको आज सच बतानेआई हू क्योंकि एक माँ होकर दूसरी माँ के साथ अन्याय होते नही देख सकती । आपकोपूरा हक है सच जानने का ।आगे का फैसला मै आप पर छोड़ती हू ।"

मिसेज अग्रवाल -"सच बता कर तुमने मुझ पर बहुत बड़ा अहसान किया है नेहा क्योंकियह ख्याल की आखिर क्या हुआ था पीयू के साथ मुझे सोने नही देता था । कुछ भीकरके मै अपनी पीयू को तो वापस नही ला सकती लेकिन हा तुम्हारी जेठानी का असलीरूप सबके सामने आना जरूरी है ताकि सभी को यह समझ आए की गुनाह की कोई माफी नहीहोती । देर से ही सही सच सबके सामने आता ही है ।"

इतना कहकर मिसेज अग्रवाल ने अपनी बात खत्म करी । अब चारो तरफ सन्नाटा पसर गया। मेरे और मिसेज अग्रवाल की आँखे आँसूओ से भीगी थी । हम दोनो ही माँ है लेकिनआज हमारी नजरो मे उस माँ का दर्जा ऊँचा हो गया जो दुनिया की नजर मे माँ नही हैलेकिन जब भी हमारे सामने ममता की मिसाल देने की बात आएगी तो नेहा के अलावाशायद ही कोई नाम हमारी जुबान पर आए ।

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