काश

      थोड़ा बिजी वाला डे था, उस सुबह सुमना के लिए उसे किट्टी पार्टी में जाने के लिए ड्रेस डिसाइड करनी थी, फेसिअल करना था . आख़िर उसे पड़ोस की मिसेश शर्मा से सुंदर जो दिखना था . वो जल्दी 2 अपने काम को निपटा ही रही थी कि, अचानक नन्ही उंगलियों ने  उसके हाथों को स्पर्श किया . जो सुमना की दस साल की बेटी जूही थी .

       "छोड़ो बेटा ! मम्मा को आज शाम के लिए बहुत सी तैयारी करनी है . पर उन नन्ही, और मासूम आंखों ने अब तक सुमना का साथ नही छोड़ा था . सुमना जूही का हाथ छुड़ाते हुए मैचिंग ज्वेलरी निकालने लगी . जूही अब भी वही थी .

    " क्या है जूही ? कुछ कहना है तो जल्दी बोलो ना ! जूही अब भी चुप थी .फिर कुछ देर की खामोशी के बाद उसने अपनी चुप्पी जैसे ही तोड़नी चाही  तभी, फोन की घण्टी बजी  शायद सुमना का कॉल था . फोन नीचे करते हुए सुमना ने जूही से कहा " बेटा अभी मम्मा थोड़ा बिजी है शाम को बात करेगी ओके ! जाओ आप खेलो .

     जूही धीमे कदमों से अपने कमरे की तरफ बढ़ गई . इधर सुमना  खुद को शाम की पार्टी में खुद को बेस्ट बनाने में लगी रही . उसने जूही को खाने के लिए भी बुलाया पर, उसने जवाब नही दिया ..

     शाम हो चुकी थी सुमना के किट्टी पार्टी में जाने का टाइम हो चुका था . जूही सुमना के पास फिर से आई शायद कुछ कहना था उसे ... "मम्मा मुझे स्कूल नही जाना ."  मुझे वहाँ बिल्कुल अच्छा नहीं लगता . वो मैथ्स वाले सर् हैं ना वो मुझे बहुत तंग करते, बहुत पनिशमेंट  भी देते रोज़ ... जूही अपनी बात आगे कर ही रही रही थी कि, तभी सुमना का कॉल आ गया .

     "अरे ! बस बस मैं रेडी हूँ बस निकल रही हूँ टाइम से पहुँच जाऊँगी  .डोंट वरी ! "

     फोन काटते हुए सुमना ने अपना बैग उठाया और रूही की तरफ मुड़ते हुए कहा " सॉरी बेटा ! वापस आकर तुम्हारी बात पक्का सुनूँगी ." कहते हुए सुमना बाहर निकल गई .

      रात हो चुकी थी सुमना घर लौट चुकी थी . बहुत थक गई थी वो . घर मे आते ही वो किचेन की तरफ बढ़ी गर्मी से गला सूख गया था उसका पानी का गिलास उसके हाथ मे ही था तभी उसकी नज़र सामने खाने के बर्तन पर गई . उसने बर्तन खोल कर देखे तो खाना वैसा का वैसा था जैसे, वो  रख के गयी थी . मतलब जूही ने खाना नही  खाया था .

     सुमना जूही के कमरे की तरफ बढ़ी . सुमना ने दरवाजा खोला . और सामने जो देखा उसकी आंखें फटी रह गई . सुमना की चीख से पूरा घर दहल उठा था . सामने बेड पर जूही खून से लथपथ थी बगल में चाकू भी पड़ी थी . उसके हाथ से खून का सम्पूर्ण कतरा शायद निकल चुका था और जूही ने दम तोड़ तोड़ दिया था ...सुमना फुट 2 कर रोये जा रही थी . मयंक के जाने के बाद जूही ही तो उसका सब कुछ थी .. उसकी अकेली संतान .

     रोते बिलखते सुमना की नज़र सामने टेबल पर पड़े कागज़ के टुकड़े पर पड़ी . कांपते हाथों से सुमना ने उसे उठाया और पढ़ना शुरू किया ...

      हैंडराइटिंग जूही की टूटी - फूटी हिंदी में थी . " मम्मा ! मैथ्स के सर् बहुत गन्दे हैं . वो डेली मुझे पनिशमेंट देते . क्लास में अकेले बुलाते और सबको जाने को कहते . वो मुझे  पकड़ लेते  मैं बहुत सॉरी बोलती थी कि अब से रोज़ होमवर्क करके आऊँगी पर, वो मेरी एक भी नहीं सुनते . वो मेरे शर्ट के बटन खोलने लगते . फिर आगे जो वो करते मुझे बहुत दर्द होता माँ ! मैं तड़प उठती  थी  . वो मुझे डराते हैं कि अगर मैंने किसी को बताया तो वो मुझे पहले से ज्यादा पनिशमेंट देगें . मुझे बहुत डर लग रहा माँ ! मुझे स्कूल नहीं जाना मैंने आपसे बोला भी था कि, मुझे स्कूल नहीं जाना पर, आप क्यूं नहीं  सुनना चाहती थी ? मम्मा ! " मम्मा बहुत डर लग रहा था आज बहुत ज़्यादा .. आपकी गोद मे सोना चाहती हूँ . मैं स्कूल नहीं जाना चाहती माँ ! आज बहुत कोशिश की आपको बताने की किस दर्द से मैं गुजर रही ? पर मम्मा आपने भी तो नहीं सुनना चाहा ... मैं जा रही हूँ मम्मा ! अब से मुझे स्कूल नहीं जाना पड़ेगा . और आपको किट्टी पार्टी में जाने से पहले मेरे लिए खाना नहीं बनाना पड़ेगा, सुबह चार बजे उठ कर अपनी नींद खराब नही करनी पड़ेगी .... सॉरी मम्मा ! लव यू सो मच ..."


     पढ़ते 2 सुमना की आंखे भर आईं थी . वो बस रोती जा रही थी . और बस एक ही बात सोच रही थी कि, काश उसने अपनी किट्टी पार्टी की दुनिया को पीछे करके जूही की चेहरे की उदासी को पढा होता, उसे समझा होता, उसे सुना होता तो आज जूही उसके साथ होती .... उसकी गोद में सर रख कर सो रही होती ....

     आज 2 साल बीत चुके उस हादसे को . लेकिन, आज भी सुमना की सुबह उस एक काश के ख्याल से ही शुरू होती है और काश पर ही खत्म ....

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