चंद्रनगर सीरीज अंतिम भाग-7

अमित और सूरज दौड़ पड़े आम के बगीचे की ओर । जहां पेड़ पर कीलों पर टंगा राहुल कराह रहा था। कमल और उसके साथी हँस रहे थे। वही कमल जो राहुल के सपनों में आकर यातनाएं देता था। वही कमल जिसके बाप से ठाकुर सोमेश्वर ने जमीन हड़प ली और उसके परिवार को उसी के खेत के बीच जिंदा जला दिया गया। इंतकाम की आग में जल रहे ये लोग आज अपना बदला लेने जा रहे हैं।
अमित राहुल की ओर दौड़ा।
"राहुल राहुल।"

राहुल  बेहोशी की हालत में एक नजर अमित की ओर देखता है। लेकिन उसकी आँखों के आगे अंधेरा छा जाता है। राहुल फिर बेहोश हो जाता है।

कमल और उसके साथी अमित को रोकने के लिए आगे बढ़ते हैं । लेकिन अमित का पूरा ध्यान राहुल की ओर रहता है। जैसे ही कमल राहुल के सर पर डंडा मारने की कोशिश करता है। सूरज गोली चला देता है। गोली अमित के कानों के पास से होती हुई कमल के चेहरे को लगती है और उसके आधे चेहरे के चीथड़े उड़ जाते हैं। और उसका जबड़ा लटक जाता है।
कमल अपना टूटा जबड़ा हाथ में लिए कहता है "मारो इन्हें"।

इस बार फिर गोली चलने की आवाज गूंजती है और कमल के बाकी बचे सर के परखच्चे उड़ जाते हैं। कमल का धड़ बिना सर के इधर उधर भटकने लगता है।
अमित राहुल को पेड से छुड़ाने लगता है । पर उसके हाथ पैरों में कील मजबूती से गड़ी होती है जिन्हें अमित अपने हाथों से पकड़ कर खींचने लगता है। अमित के हाथ भी कीलों से छिल जाते हैं और उनसे खून बहना शुरू हो जाता है। खून की एक धार अमित के हाथ से बहती हुई अमित की कोहनी तक जाती है और जमीन पर टपकने लगती है।

उस खून की बूंद जमीन पर पड़ते ही तेज हवा बहना शुरू हो जाती है। कमल का धड़ इधर उधर घूमने की बजाए एक जगह खड़ा हो जाता है। जो लोग डंडे लेकर अमित के पीछे दौड़ रहे थे वो सभी एक जगह खड़े हो जाते हैं। हैरान अमित उन्हें देखता रहता है। राहुल को पेड़ से छुड़ा कर अपने कंधे के सहारे उठा लेता है। राहुल बेहोशी की हालत में अमित के कंधे से  लटका हुआ रहता है।

लेकिन इसी बीच फिर गोली की आवाज गूंजती है। और एक एक करके सबके सर उड़ाता हुआ सूरज अमित की ओर आता है। अमित एक नजर सूरज की ओर देखता है। सूरज की आंखों में खून उतर आया है। ना जाने कितने सालों से उसे इस दिन का इंतजार था। बंदूक ताने वो अमित की ओर देखता रहता है।

तभी तेज हवा से पेड़ों की डाले हवा में तेजी से लहराती है। आसमान की ओर डायन हवा में उड़ती हुई अमित के आगे उतर जाती है। और पेडो से लटकी लाशें एक एक करके जमीन पर गिरने लगती है। धीरे धीरे आम का बागान लाशों के ढेर मे बदल जाता है। कमल और उसके आदमियों के धड़ भी जमीन पर गिर जाते हैं।

डायन अमित की ओर इशारा करती हुई आगे बढ़ती है। तभी सूरज एक ओर गोली दाग देता है। जो डायन के सिर पर लगती है। उसके सर से काला खून टपकने लगता है। जिसे देख कर डायन मुस्कुराती है और सूरज की ओर देख जोरों से चीखती है । इस चीख से सूरज दूर झाड़ियों में जा गिरता है।

पीछे आ रहा रामदयाल उसे संभालते हुए कहता है।
"इसे जला कर मरना होगा। मैं गाड़ी से कुछ पेट्रोल निकाल लाया हूं।"
"अमित की चिंता मत करो अमित उसी का खून है ये बात वो जान गई है वो उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। अब अमित ही हमें डायन के कहर से बचा सकता है।"

"मेरा भी कुछ नहीं बिगाड़ सकती ये डायन। इतनी बेरहमी से इसने मेरे माँ बाप को मार डाला तबसे मैंने ठान लिया था बाकी जीवन मैं सिद्धियां पाने में लगा दूँगा और जिस दिन मुझे ये सिद्धियां प्राप्त होंगी मैं इस मौत के साये से इस गाँव को मुक्ति दिलाऊँगा।"

डायन अमित के चेहरे को नाखूनों से कुरेदती हुई कहती है।"तू भाग जा ।क्यों आया है यहाँ"
"दिख नही रहा तुझे यहां मौत घूम रही है चारो तरफ।"
"जा भाग जा।"

"राहुल को छोड़ दो। वो निर्दोष है। क्यो सबकी जानें ले रही हो। छोड़ दो उसे।"

"जो यहाँ आयेगा मारा जाएगा। जान प्यारी है तो भाग जा।"

इसी के साथ राहुल का शरीर उसी बेहोशी की हालत में हवा में लहराता हुआ डायन की ओर चला जाता है। डायन उसके सर पर हाथ फेरती है और उसके कंधे पर अपने दांत गड़ा देती है। राहुल दर्द से चीख उठता है।

उसका चेहरा पहले पीला फिर सफेद पड़ने लगता है। चेहरे से राख उड़ने लगती है। राहुल अमित की ओर देखता है उसकी आंखे भी पीली हो चुकी है। उसी डायन की तरह।

कुछ देर बाद डायन उसे छोड़ देती है। लेकिन राहुल का शरीर अब भी हवा में ही स्थिर रहता है। अमित जान गया था राहुल भी अब उन्ही बुरी शक्तियों का मालिक है जैसे यहाँ के सभी लोग।

राहुल कुछ देर तक तो अमित की ओर देखता है लेकिन अगले ही पल वो डायन की ओर झपटता है और उसकी गर्दन पकड़ लेता है। एक गजब की ताकत राहुल के शरीर मे आ गयी थी। अब शैतानियत ही शैतानियत से लड़ने लगी।

डायन ने तुरंत कौए का रूप धारण किया और राहुल के चंगुल से आजाद हो आसमान में उड़ने लगी। राहुल  भी डायन का पीछा करने लगा। हाथों से उसे झपटने की कोशिश करता। पर डायन काफी तेजी से उड़ रही थी। फिर राहुल ने भी बाज का रूप धारण कर लिया और तेजी से डायन का पीछा करते हुए उसके पंखों पर झपटा। जिससे डायन सीधे खेतों में आ गिरी।

वही लंबी घनी घाँस से घिरे खेत जिसपर गिरते ही डायन ने अबकी बार काले भेड़िये का रूप धारण कर लिया। राहुल भी जमीन पर उतरते हुए भेड़िये के रूप में आ गया। आमने सामने भेड़ियों की गुर्राहट सुनाई दे रही थी। दोनों एक दूसरे के खून के प्यासे।

रामदयाल, सूरज, और अमित उस खेत की ओर भागे। रास्ते में मिलने वाले नरभक्षियों को सूरज गोलियों से भून रहा था। ये सूरज की सिद्धियां थी जिससे वो उन्हें मार सकता था।

अमित और रामदयाल की चलाई गोलियों का उन पर कोई असर नहीं होता था तो रामदयाल और अमित बंदूकों में कारतूस भर कर सूरज को दिए जा रहे थे।

वहाँ डायन और राहुल का भेड़िया रूप आपस में लड़ रहे थे। लेकिन मुकाबला बराबरी का था। दोनों  एक दूसरे को काफी जख्म दे चुके थे। कभी डायन उस पर झपट पड़ती और कभी राहुल उस पर झपट पड़ता। लेकिन इस बार जैसे ही डायन ने राहुल पर झपट्टा मारा राहुल ने डायन के भेड़िया रूप को एक ओर छिटक दिया।

राहुल अपने असली रूप में आ गया। लेकिन शैतानियत उसके चेहरे पर साफ नजर आ रही थी। वही पीली आंखे, लंबे नुकीले दांत, लंबे नाखून और सफेद पड़ चुका चेहरा बता रहा था कि अब सामने राहुल नहीं एक शैतान है। डायन भी अपने रूप में लौट आई थी।

राहुल ने झुक कर जमीन पर हाथ रखा। और जोर जोर से कहने लगा।

"ऐ चंद्रनगर के वासियों। मैं ठाकुर राहुल प्रताप सिंह, सोमेश्वर सिंह का बेटा। तुम अपने इंतकाम का बदला चाहते हो तो आओ मुझ से मुकाबला करो। चले आओ। भूत प्रेत नरभक्षी और तुम डायन । आओ मुकाबला करो मेरा।"

इसी के साथ तेज अंधड़ चलने लगा। लाशें वापस जिंदा होकर राहुल की ओर बढ़ने लगी। कुँए तालाब झाड़ियों ओर पेडो से शैतानी ताकते राहुल की ओर बढ़ने लगी।
रामदयाल, अमित, सूरज तीनों की समझ में कुछ नहीं आ रहा था क्या होने जा रहा था।
रामदयाल वही सड़क पर बैठ कर छाती पीटने लगा।

"उठो काका अभी देखो क्या होता है। आज पहली बार शैतान को शैतान से लड़ते देख लो ऐसा नजारा कभी देखने को नही मिलेगा। अमित ने उसे सहारा दिया।

"उठ बूढ़े।" सूरज अब भी बेहद गुस्से में था।

उन सभी शैतानी आत्माओ का ध्यान हम से हट कर राहुल की ओर बढ़ गया था। वो सभी राहुल की ओर बढ़ रहे थे।

डायन उस पर हँसने लगी। "आज तेरा आखिरी दिन है। तू नही बचेगा।"

वो सभी राहुल के बेहद करीब आ चुके थे। तभी राहुल ने राहुल ने अपना मुह खोला और उन सभी आत्माओ को अपने भीतर सोखने लगा।

डायन की हँसी अचानक बंद हो गई। "नही नही ये नही हो सकता।"

एक एक करके वो सारी शैतानी ताकते राहुल में समा गयी। राहुल की आंखे लाल हो चुकी थी । डायन जैसे ही उसकी ओर झपटी राहुल ने उसकी गर्दन पकड़ ली। डायन छटपटाने लगी । राहुल उसे उसी बरगद के पेड़ की ओर ले जाने लगा जिस पर उसे लटकाया गया था।

राहुल ने उसे पेड़ पर टिका दिया और उसे गर्दन से दबोचे रखा। रामदयाल, अमित, और सूरज उस पेड़ की ओर दौड़े। वहाँ पहुँच कर रामदयाल ने पेट्रोल की पीपी डायन पर उंडेल दी और उसे आग लगा दी। डायन चीखने चिल्लाने लगी।  फिर राहुल ने उसकी आत्मा को भी अपने अंदर सोख लिया। डायन उसके हाथों में ही जल कर राख हो गई।

तभी राहुल घुर्राया  " जितना जल्दी हो सके भाग जाओ यहां से। भाग जाओ।"

राहुल उन तीनों की ओर लपका। लेकिन वो तीनों वहाँ से तुरंत भागे।  बरगद के पेड़ से बंधी रस्सी राहुल की गर्दन पर लिपटी और राहुल उसी से लटक गया। उसका शरीर हवा में झूलने लगा और एक भयानक हँसी हँसा। उसके मुह से अब कई लोगो की आवाज आ रही थी। वो सभी आत्माएं अब एक जिस्म में कैद थी।

"भाग जाओ ।हाहाहा"

"फिर लौट के मत आना । ये गाँव जिसे तुम कहते हो।चंद्रनगर।  हाहाहा।"

अमित दौड़ कर अपनी कार स्टार्ट कर लेता है।

"रामदयाल काका, सूरज जल्दी चलो। जल्दी आओ।"

लेकिन रामदयाल वही सहमा हुआ रुक जाता है। एक नजर हवेली की ओर देख कर कहता है "बेटा तुम जाओ।"

सूरज आगे बढ़ कर अमित की कार का दरवाजा बंद करते हुए कहता है। " सुबह होने वाली है अमित जाओ । तुम्हारी दुनिया तुम्हारा इंतजार कर रही है। हमें यही रहने दो। जाओ"

अमित गाँव की मुख्य सड़क पर गाडी मोड़ देता है। अपनी गाड़ी के रियर मिरर से एक बार रामदयाल और सूरज की ओर देखता है। सूरज और रामदयाल धुंआ बन कर उड़ जाते हैं। अमित भौचक्का रह जाता है। उसे कुछ समझ नहीं आता । ये अचानक क्या हुआ।

क्या रामदयाल काका और सूरज भी शैतानी साये थे?

वहीं दिन निकलने लगा। अमित ने कार की रफ्तार तेज कर दी।
रामदयाल और सूरज आखिर यह सब क्या था?
इस सोच विचार में अमित का ध्यान चूक जाता है और गाँव के बाहर लगे बोर्ड से कार टकरा जाती हैं। और कार के स्टेयरिंग से उसका सर टकरा जाता है। अमित कुछ देर बेहोश रहने के बाद जागता है। वापस कार स्टार्ट करता है लेकिन कार धुंआ देकर बन्द हो जाती है। अमित कार को धकेलता हुआ ले जाता है । कुछ दूरी पर उसे किस्मत से मैकेनिक मिल जाता है।

मैकेनिक: "क्या हुआ साहब।"

अमित: "गाड़ी खराब हो गई है"

मैकेनिक: "क्या हुआ"

अमित: "गाँव के बाहर बोर्ड से टकरा गई थी।"

मैकेनिक: "कौनसा गाँव साहब।"

अमित: "चंद्रनगर ......नाम तो सुना होगा।"

मैकेनिक: "जी साहब। पर वो गाँव तो कई सालों पहले उजाड़ हो चुका है। कोई नही रहता वहां।"
मैकेनिक गाड़ी ठीक करने लगा।

मैकेनिक: "आप किस लिए आये यहाँ।"

अमित: "कुछ जमीन का काम था।"

मैकेनिक: "जमीन । मैकेनिक हँसने लगता है। कुछ साल पहले ठाकुर साहब के बेटे भी आये थे इसी जमीन के चक्कर में।" :

अमित:  "फिर क्या हुआ था।"

मैकेनिक: "कुछ नहीं एक सेठ ने यहाँ कॉलोनी बसाने का सोचा। कुछ दिन बाद उसकी लाश मिली। बाकी परिवार ना जाने कहाँ गायब हो गया। और ठाकुर साहब के बेटे राहुल उनका भी कोई अता पता नहीं चला।"

मैकेनिक: "आप भी तो होकर आए वहाँ कोई मिला आपको।"

अमित: "नहीं मुझे भी कोई नहीं मिला।"

मैकेनिक: "उजाड़ गाँव है यहाँ बरसों से कोई नहीं आया साहब। लो गाड़ी ठीक हो गई। वायरिंग जल गई थी बस।"

अमित सोच में पड़ जाता है। मैकेनिक को पैसे चुका कर कार का दरवाजा खोलता है।
उसे सीट पर एक फ़ाइल पड़ी मिलती है। अमित उसे खोल कर देखता है। उसमे उसके घर और खेत के कागज होते है। जमीन राहुल ने वापस उसके नाम कर दी थी।

और फ़ाइल के कवर पर खून से लिखा हुआ था।

अफसोस......ये तुम्हारे किसी काम की नहीं

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