अध्याय-1

आज पूरे 10 दिनों बाद सारा मामला खत्म हुआ और सब पहले की तरह चलने लगा।रोज के नियम,खाना, प्रार्थना,आना-जाना हो या कंही बाहर रुकना,कोई बदलाव नही कोई नया नियम नही।शिवि गर्ल्स होस्टल की बात ही अलग है।यंहा की वार्डन जितनी सख्त दिखती है,उतनी ही है। पर औरत तो औरत होती है ना? एक औरत का दिल बहुत जल्दी पिघल जाता है।कोई नाम नही जानता उनका बस सब वार्डन मैडम ही कहते हैं।
"तूने सुना? कोई नई लड़की आई है?"
"हाँ, सुना और मैडम ने उसे वही कमरा दे दिया है।"
"तो देने दे।हमें क्या करना?"
"नाम पता किया?आज रात बुला ले रैगिंग का लिए?"
"हाँ। प्रेयर के बाद सीधे मेरे रूम में।"
"ओके,चल मिलते हैं।"
होस्टल का नियम था रात को 9 बजे प्रार्थना होगी और उसके बाद अटेंडेंस होकर सब अपने कमरे में जाएंगे।कोई अपसेंट हो तो उसकी एप्लिकेशन भी देनी होती थी।कई बार लड़कियां फोन पर बात करने के लिए भी पेट दर्द का बहाना बना लिया करती थीं।ऐसा नही था कि वार्डन मैडम जानती नही थीं।पर हाँ,कुछ कहती भी नहीं थीं।उनकी नज़र में लड़कियां इतनी सयानी तो थी ही,कि अपना भला-बुरा जानती हैं।
"सुनो सब। ये रवीना है।नई आई है।आज से रूम नम्बर 13 में रहेगी।इसे रूल-रेगुलेशन बुक दे दी गई है।बाकी दूसरी मंजिल की मॉनिटर सिया, इधर आओ।"
"जी,मैडम"
"सिया,इसे पानी के आने जाने का समय और फ्लोर पर क्या नियम कायदे हैं सब समझा देना।"
"जी मैडम,आप फिकर ना करें।मैं सब समझा दूंगी।"
सिया ने अपना हाथ रवीना की तरफ बढ़ाया और उसे हेलो किया।रवीना के बाल खुले थे,लंबे काले बाल।बाल पंखे के नीचे खड़े होने की वजह से उड़ कर रवीना का चेहरा ढांक रहे थे।
क्रमशः-वीणा-रवीना(1)

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