वो छोटी बच्ची भाग 1

"हैं आकाश , हॉस्टल से तु घर आ गया और मुझसे
मिला भी नहीं , और ये मैं क्या सुन रहा हुँ आंटी ने
बताया तु साइक्रेटीस्ट से अपना इलाज करवा रहा
हैं? क्या हो गया मेरे भाइ ?,, आर्यन जो की आकाश
का दोस्त था , आकाश से मिलने के लिये उसके घर
आया हुआ था। पर उसकी हालत देख वो चिंतित हो
उठा ।
अपने कमरे मे आर्यन कि आवाज सुन कर आकाश
ने चौंक कर अपनी आँखें खोली ।
"आर्य कब आए तुम ? आओ बैठो न ,
"अरे तु बैड से न उठ ..मैं यही चेयर पर बैठ जाता
   हुँ...., इतना कह आर्यन चेयर पर बैठ गया ।
"तु जो सोच रहा हैं एसा नहीं हैं , मैं बीमार नहीं हुँ
आर्यन ....माँ को बस फिक्र लगी रहती हैं ,, आकाश
बेड पर बैठ गया ।

" आंटी के साथ-साथ मुझे भी तेरी फिक्र हैं आकाश ,
अपनी सेहत पर ध्यान क्यों नहीं देता तू ?

"मैं बीमार नहीं हुँ , और न ही पागल हुँ ...ये लोग मेरी
बात समझते ही नहीं .....कुछ हो रहा हैं मेरे साथ कुछ
अजीब सा,, आकाश के चेहरे पर रहस्यमयी भाव भंगिमाए थी ।

"तु साफ साफ बता आकाश , आखिर बात क्या हैं ?

"रूको , मैं तुझे सब बताता हुँ ....,,

इतना कहते हुए आकाश बेड से उतर कर , अपनी
अलमीरा से फोल्ड किया हुआ कागज निकाल
आर्यन की और बढ़ा कर कहा

"इसे खोलो और देखो ,,

आर्यन ने जब उसे खोला तो अच्मभींत हो गया । एक
छोटी सी बच्ची का प्यारा सा स्कैच था । स्कैच इतनी
सुंदर थी कि मानो बच्ची अभी बोल पडेगी ।

"ये क्या हैं ? मैं कुछ समझा नहीं ,, उसने सवालिया
नजरों से आकाश को देखा ।

"यही वो राज हैं , जिसने मेरी जिन्दगी को नरक बना दिया हैं... मैं तुझे शुरू से बताता हुँ................
4 महीने पहले जब मै हॉस्टल मे था तो सीनियरो ने
मेरे साथ रैंगींग की और मुझे ...एक टुटे फुटे भूतीया
मकान मे जबरदस्ती भेजा ...जो की हॉस्टल से दुर
नदी के उस पार था ........।
उन सबने मुझे प्रुफ के तौर पर उस मकान से कुछ लाने के लिये भी कहा .....
यदि मैं एसा न करता तो वे मुझे झूठे केस मे फसा कर
हॉस्टल से निकलवा देते , इस लिये मैंने उनकी हर बात
मान ली ।
टुटी फुटी चचरी को पार कर मैं किसी तरह वहाँ पहुँचा
.........वो सच मुच बहुत डरावना था आर्यन ...वही
मुझे इस बच्ची की ये स्कैच मिली ....धुल से सनी ...
टुटे फुटे सामानो के बीच .......मुझे ये अच्छी लगी
और मैंने प्रुफ के तौर पर ले ली ....
वहाँ से लौट कर मैंने ये चित्र दिखा कर अपने सीनियरो की बोलती बंद कर दी .......क्यों की वे
खुद वहाँ जाने की हिम्मत नहीं रखते थे...,,

आकाश मानो यादों मे खोया हुआ बोले जा रहा था

"पर..पर..उसके बाद मेरे साथ अजीब अजीब घटनाएं
होने लगी ...मैं अपने सपने मे इस बच्ची को देखने
लगा ...खून से सनी हुई इस बच्ची के हाथ मे एक बॉल थी और वह उसी नदी किनारे खडी थी ....
और ये कह रही थी की
"पापा आप मुझसे प्यार नहीं करते न ?" ...........
यही सपना मैं रोज रात देखता हुँ ,,

"और आर्य जब कभी भी मैं सो रहा होता हुँ एसा
लगता हैं जैसे ....जैसे कोई मेरे सिराहने मे बैठा हैं..
...मेरे... मेरे माथे पर हाथ रख सहला रहा हैं ....एसी
और भी चीजे हुइ है आर्यन , जिसे बताऊ तो तु
यकीन नहीं करेगा...........
मैंने कई राते हँसने कि आवाजें भी सुनी हैं..
हॉस्टल मे तो मेरी हालत पुरी तरह से खड़ाब हो चुकी
थी । इसलिए मैंने छुट्टी ले ली और घर आ गया ...
पर यहाँ भी मेरे साथ वही होता रहा.... ये सब मैंने
माँ पापा को बताया तो वे मुझे साइक्रेटीस्ट के पास
ले गए ........उन्होने इन सारी चीजों को पढाई का
प्रेशर और रैंगिग का डर बताया ......पर आर्यन
मैं इस डर को हमेशा महसूस करता हुँ.....सिर्फ बंद
आँखो से ही नहीं मैंनै उस बच्ची को खुली आँखों से
भी देखा हैं...,, आकाश भयभीत स्वर मे बोला ।

"क्या?,, अब तक चुप बैठा आर्यन चौंक गया ।

"हाँ , मैंने उसे इस रुम मे कई दफा देखा  हैं पर मैं किसी को बता पाता उससे पहले ही वो गायब हो
जाती थी ,,
आकाश काफी परेशान था ।

"आकाश लीसन , तु आराम कर यार ज्यादा सोच
मत ..तु रेस्ट कर भाइ ,,

"मैंने कहा न आर्य मैं बीमार या पागल नहीं हुँ।

"आकाश , तु माने या न माने तुझे आराम की जरूरत
हैं ..जरूरी नहीं कि साइक्रेटीस्ट के पास जाने वाला
पागल ही हो...मुझे तेरी बातो पर यकीन हैं पर .......
आर्यन कि बात को बीच मे ही काट कर आकाश बोला

"मैंने सोच लिया हैं , मैं वापस सोनपुर जाउंगा अपने
सवालों का जवाब लेने ...अपने सपने का सच जानने
के लिए और ये सब मुझे यहाँ तो पता नहीं चलेगा न..
तु मेरे साथ आएगा ?

"ये कोई फिल्म नहीं हैं आकाश ...इससे क्या फायदा
होगा ?

"हाँ या न?

"आकाश पर.....

"साथ आएगा? हाँ या न?

"ओके फाइन , मैं आउंगा तेरे साथ पर तु मुझे डीटेल
से प्लान समझाएगा ? ,,

आर्यन ने आखिर कार आकाश कि बात मान ही ली


.................क्रमशः

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