सेल्फी वाले टेढ़े चेहरे।

बेड पे लेटा हुआ गर्दन मोबाइल की स्क्रीन पे झुकी हुई 9 घण्टे की शिफ्ट के बाद थका हुआ जिस्म सिर्फ आंखे और उंगलियां मोबाइल की स्क्रीन पे हरकत कर रही थी हर रोज़ की तरह मूड फ्रेश करने के लिए FB स्क्रॉल कर रहा था। पर यहाँ भी अब ऐसा कुछ रहा नही रोज वही सेल्फी वाले टेढ़े चेहरे देख कर बोर हो चुका था।

वो तो भला मानो फेसबुक ऐड का जिसमे मुझे "YQ" का ऐड दिखा मतलब यहाँ आप सब कुछ लिख सकते हो मतलब सब कुछ दिल की भड़ास, गुस्सा, नाराज़गी, नफरत, खामोशी, उदासी और इज़हार ए मोहब्बत और आपको यहां कोई रोकने टोकने वाला भी नही न ही पुराने दोस्त न पुराना प्यार न रिश्तेदार जो आपके जज़्बातों और अहसासों में दखल अंदाजी करें।

दिन 8 मार्च उस दिन को मैं क्या लिखूं मेरी ज़िंदगी मे कुछ नए लोगो की आमद या फिर वो दिन जो हर शख्स एक न एक दिन इस एहसास से गुजरना पड़ता है चाहे वह कितना भी इंकार कर ले कोई न कोई दिल मे दस्तक दे ही जाता है।

फिर क्या मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ "YQ" एकदम नयी जगह थी यहां अपना जानने वाला कोई था नही। और इससे बेहतर मेरे लिए कुछ नही हो सकता था बस मैंने अपने अहसास और जज़्बात को लफ़्ज़ों में ढालना शुरू कर दिया। लोगो को पसंद आने लगा और उन लोगो के कमेंट्स भी आने लगे जिनके ख़यालात मेरे ख़यालात से मिलते गए।

इसी लिस्ट में दो खूबसूरत नाम थे शबनम और रुख़सार
बहोत ही प्यारा नाम था इनका और ख़यालात भी क्योंकि मुझसे काफी हद तक मेल खाते थे

शबनम वो पहली मोहतरमा थी जिनका मेरी जिंदगी में दखल हुआ। उनका पहला अल्फ़ाज़ था "आप बहोत अच्छा लिखते है" पता नही इसमें सच्चाई कितनी थी लेकिन इतना मेरे हौसला अफजाई के लिए काफी था।

फिर कुछ दिनों बाद मेरी ज़िंदगी मे दूसरी मोहतरमा की दखल हुई नाम था रुख़सार इनका पहला अल्फ़ाज़ था "आपकी सोच बहोत गहरी है आप जो भी लिखते है दिल से लिखते है"। मैं लिखता तो दिल से ही हु पर पता नही इन्होने दिल से कहा था या नही।

फिर वो दिन था और रमज़ान के पहले दिन तक ऑफिस से आने की बाद कब रात हो जाती और 12-1 बज जाते पता ही नही चलता था। धीरे धीरे दोनों से बाते होने लगी और दोस्ती बढ़ती गयी। एक दूसरे के साथ personal information शेयर करने लगे।

ज़ाहिर सी बात ही वक़्त तो 24 घंटे का ही होता है। ऑफिस के बाद का सारा वक़्त इनके साथ बीतने लगा जिसका मेरे और भी काम पे असर पड़ा
स्टॉक मार्केट में अच्छा खासा पैसा इन्वेस्ट कर रखा था वक़्त न दे पाने की वजह से वो लॉस में जाने लगे और मुजे काफी नुकसान हुआ
घर पे भी काम वक़्त देने लगा रोज घंटो बात करता था अम्मी, अब्बू और अप्पी से उनके आने के बाद दूसरे तीसरे दिन ही कर पाता था। फिर कभी कभी मुझे ये अहसास हुआ तो मैंने पीछे आने की कोशिश की पर हो न सका।

वो कहते है ना जब दोस्ती ज्यादा बढ़ जाये तो मोहब्बत की अलामत आने लगती है वैसा ही कुछ होने लगा था। मैं भी उसी गिरफ्त में जकड़ता गया।

खैर दोनों से बातें होती रही और मेरा भी झुकाव मोब्बत की तरफ होने लगा। मैनी किसी से अभी तक ज़ाहिर नही किया सिर्फ दोस्ती तक ही रखा है। मेरे लिए मुश्किल था दोनों में से एक को चुनना। मैं इंतेज़ार में था कि सही वक्त आने पर किसी एक को सबकुछ बात दूंगा। फिर मैंने wait and watch पॉलिसी की तरह देखता रहा।

शबनम बहोत mature है और थोड़ा संज़ीदा भी। शायद वो पहले गुजर चुकी थी ऐसे अनुभव से। समाज से जुड़ी हुई थी जॉब करती थी लोगो को देखा था तज़ुर्बा था अच्छे और बुरे दोनों का। पर थी वो बहोत जिद्दी अपने बात पे अड़ी रहने वाली। इसी बात पे उससे मेरा कई बार झगड़ा हुआ। पर मोहब्बत जब करती थी तो टूट के करती थी सारे गीले शिकवे मिटा देती थी। एक अलग जिंदगी का एहसास कराती थी।

रुख़सार बहोत शरारती लड़कियों की तरह थी बिल्कुल भी mature नही थी। अपनी छोटी छोटी खुशी और ग़म मेरे साथ शेयर करती थी। थोड़ी घरेलू लड़कियों जैसी थी। बहोत ज्यादा बात करने वाली। पर पढ़ लेती थी चेहरों के हाव् भाव को बड़ी आसानी से शायद इसलिए कि वो एक shychologist थी। लिमिट में थी confert जोन में रह कर बाते करती थी।

फिर नज़दीकियां बढ़ती गयी और छोटे मोटे झगड़े भी वक़्त न दे पाने की वजह से। हो भी क्यो न मैं अपनी खराब सोशल लाइफ की वजह से हमेशा बदनाम रहा हु। शिकायते रही है लोगो की ओर इनको भी हो गयी।

और फिर रमज़ान का महीना आ गया लोगो के लिए ये महीना खुशी लेकर आता है पर शायद चाँदरात का दिन इनके लिए ग़म भरा रहा। मैनी decide कर लिया था कि रमज़ान भर इनसे बाते नही करूँगा वो इसलिए कि मैं नही चाहता था कि इस पाक महीने में मुझसे जाने अनजाने में कोई गुनाह हो।
जैसे ही मैन इनसे बोलै की आज के बाद हमारी बात नही हो पाएगी दोनों फूट पड़े हीरोशिमा नागासाकी बम की तरह। वो बोलती गयीं और मैं सुनता गया। कुछ जवाब न दे सका।

बड़े सदमे की तरह गुजरा वो वक़्त फिलहाल मैन सबकुछ एक महीने के लिए बंद कर दिया है।
बस इंतेज़ार है ईद का चाँद दिखने का...

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