Raina@Midnight-Chapter One

प्रस्तावना
Date: 12th December 2017
Time: 12:00 a.m.
घडी के कांटे रात के ठीक बारह बजा रहे थे|
‘रैना! रैना!!’
विकास बेतहाशा चिल्ला रहा था लेकिन उसकी आवाज़ जैसे किसी पत्थर से टकराई|
रैना को देखकर उसके मुंह से सिसकारी निकल गई|
उसके तन पर एक भी कपड़ा नहीं था, आखें सूजी हुई और जैसे शून्य में टिकी हुई थीं| माथे पर चाकू से गोद कर डायन लिखा हुआ था|
रैना के माथे से बहता खून आखों के पोर से निकलते आसुओं के साथ गाल पर ढलक रहा था|
विकास के तिरपन काँप गए|
रैना अब रैना नहीं रह गई थी, वो रानी बन चुकी थी| जिन परालौकिक शक्तियों के अस्तित्व को वो नकारती आ रही थी वो अब उसके अस्तित्व पर हावी हो रही थी|
विकास ने कैमरे का नाईट विज़न मोड ऑन किया, रैना जैसे किसी सम्मोहन के वशीभूत कहीं खिची चली जा रही थी| उसे ना अपनी नग्नावस्था का ख्याल था ना इस बात का कि विकास उसे रिकॉर्ड कर रहा है|
दिसम्बर की सर्द रात में ठंड और गलन से विकास के हाथ काँप रहे थे जबकि वो टर्टलनैक और उसके ऊपर लेदर जैकेट पहने था, उसके हाथों में भी लेदर ग्लव्स थे, बहुत कोशिश करके वो कैमरे को शेक होने से रोक पा रहा था लेकिन रैना पर तो जैसे नश्तर की भाँती जिस्म को बींधने पर उतारू शीतलहरी का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा था|
खाली सुनसान सड़क के बीचोंबीच रैना बेसुध सी चली जा रही थी| जैसे-जैसे वो आगे बढ़ रही थी शीतलहरी के साथ उड़ कर आता हुआ कोहरा मानो किसी दोशाला की तरह उसे आवृत कर रहा था|
विकास जो रैना से कुछ कदम पीछे था उसने अपनी चाल तेज़ की लेकिन रैना जैसे अचानक ही घने कोहरे के आवरण में कहीं गुम हो गई|
‘रैना! रैना!!’ विकास ने चारों ओर घूम-घूमकर उसे आवाज़ लगाईं, लेकिन वो कहीं भी नहीं थी|
रैना गायब हो चुकी थी|
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Date: 30th January 2017
Time: 11:59 p.m.
‘आर यू रेडी विकास’?
‘एब्सल्यूटली’|
‘शशांक एंड प्रत्युष’?
‘ऑन आवर मार्क्स’|
‘ओके देन, वी आर गोइंग लाइव इन थ्री...टू...वन...’|
‘हेल्लो पीपल, दिस इज़ रैना प्रधान फ्रॉम रैना एट मिडनाइट, टुनाइट वी आर लाइव फ्रॉम ए स्मॉल टाउन नियर राजनगर कॉल्ड रौनकपुर’|
रैना एट मिडनाइट वेबचैनल की लाइव फीड विडियो में रैना प्रधान का चेहरा साफ़ नजर आ रहा था|
उसके बैकड्राप में खेत और कुछ दूरी पर एक जानवरों को बाँधने वाला बाड़ा था जिसके पास सिर्फ एक लालटेन जल रही थी जोकि पास ही बंधे एक बांस पर टंगी हुई थी|
विकास नाईट विज़न कैमरा हैंडल कर रहा था, शशांक फ़्लैश लाइट लिए हुए था ताकि विडियो फीड में लाइट प्रॉपर आये| प्रत्युष के हाथ में उसका लैपटॉप था जिससे वो फीड का लाइव ब्रॉडकास्ट वेबचैनल पर मैनेज कर रहा था|
‘अब हम आपको जो दृश्य दिखाने जा रहे हैं वो शॉकिंग भी है और आउटरेजियस भी| एक तरफ हम बात करते हैं वीमेन एम्पावरमेंट और शाइनिंग एंड राइजिंग इंडिया की दूसरी तरफ आज भी हमारे देश में एक बड़ा वर्ग ऐसा है जिसकी सोच और मानसिकता अब भी सौ साल पिछड़ी हुई है’| वायरलेस माइक्रोफोन पर बेबाकी से बोलती हुई रैना बाड़े के बंद दरवाज़े तक पहुँच कर रुकी| रैना की नज़रें सीधे कैमरे को देख रही थीं जैसे दर्शकों की आखों में आखें डालकर उन्हें चैलेंज कर रही हों|
‘हर्रsss’
बाड़े के अन्दर से अजीब सी आवाज़ आ रही थी|
विकास ने कैमरा ज़ूम-इन कर के रैना के एक्सट्रीम फेशियल क्लोज़-अप पर फोकस किया|
‘होल्ड योर ब्रेथ पीपल, अब जो आप देखने वाले हैं उसके बाद शायद कई रातों तक आपके लिए सोना मुश्किल होगा’| रैना ने एक झटके से बाड़े का दरवाज़ा धकेला, दरवाज़ा एक झटके से आधा खुल कर अटक गया| दरवाज़ा चौखट से एक ज़ंजीर से बंधा हुआ था जिसपर एक मोटा पुराने ज़माने का ताला लटक रहा था|
अन्दर से रंभाने की अजीब सी आवाज़ और तेज़ आने लगी जैसे किसी भैंसे को हलाल किया जा रहा हो|
उसके साथ ही मवेशियों की गोबर, गारा और गंदगी मिश्रित दुर्गन्ध उनकी नाक से टकराई|
अन्दर काफी अँधेरा था|
रैना ने ज़ंजीर को एक झटका दिया, ज़ंजीर काफी मज़बूत थी और उसपर उतना ही मज़बूत ताला जड़ा हुआ था|
‘इसे मैं देखता हूँ, विकास भाई जरा ये लाइट पकड़ना’|
शशांक ने फ़्लैश लाइट विकास के दूसरे हाथ में थमाई और अपने जैकेट में रखा एक बड़ा सा रिंच निकाल कर दरवाज़े की तरफ बढ़ा|
‘नहीं शशांक शोर नहीं...’ विकास उसे समझाने की कोशिश कर ही रहा था कि उसकी बात बीच में रह गई|
शशांक ने रिंच के 4-5 ताबड़तोड़ वार उस कुंडे पर किए जिससे ज़ंजीर और ताला बंधा हुआ था, कुंडा उन दोनों जैसा मज़बूत नहीं था| शशांक के पैरों के पास कुंडा ताले और ज़ंजीर सहित आ गिरा|
शशांक ने विजयी अंदाज़ में विकास की तरफ देखा|
विकास ने फ़्लैश लाइट वापस उसकी ओर बढ़ा दी|
रैना धडधडाते हुए बाड़े के अन्दर दाखिल हुई, शशांक, विकास और प्रत्युष भी उसके पीछे अन्दर आये|
शशांक ने अपने हाथ में थमी फ़्लैशलाइट बाड़े में चारों तरफ घुमाई, वहां गाय और भैसों का तबेला था| जानवरों के ऊपर से गुजरती हुई फ़्लैश लाइट एक जगह आकर रुकी|
वो दृश्य देखकर तीनो लड़के कुछ पलों के लिए जडवत हो गए|
‘कैमरा फोकस करो विकास’| रैना ने निर्देशात्मक अंदाज़ में कहा|
विकास ने कैमरे का रुख उस तरफ किया जिधर फ़्लैश लाइट की रौशनी पड़ रही थी| जैसे ही उसने तीखी लाइट में कैमरे को आउट ऑफ़ फोकस से फोकस में लाया तो सामने का हौलनाक दृश्य उस घड़ी रैना एट मिडनाइट वेबचैनल की लाइव विडियो फीड देख रहे सैकड़ों व्यूअर्स के सामने नुमाया हुआ|
गाय और भैसों के बीच गोबर और गंदगी से सनी हुई एक महिला नजर आ रही थी जो किसी जानवर की भाँती ही खुद को फ़्लैश लाइट की तीखी रौशनी से छुपाने की कोशिश कर रही थी| उसपर पड़ती रौशनी में उसके गले में बंधी मोटी सांकल साफ़ दिखाई दे रही थी जिसका प्रयोग जानवरों को बाँधने के लिए किया जाता है| सांकल का दूसरा छोर एक खूंटे से बंधा हुआ था| खुद पर पड़ती रौशनी से विचलित होकर औरत वहां बंधे बाकी जानवरों की तरह ही अपना सर जोर-जोर से झटक रही थी, उसके गले से जानवरों जैसी ही आवाज़ निकल रही थी|
लाइव फीड व्यूअर्स की तादाद तेज़ी से बढ़ रही थी|
‘अंधविश्वास ने आज भी हमारे देश, हमारे समाज के एक बहुत बड़े हिस्से को इस कदर अँधा कर रखा है कि उन लोगों की नज़रों को एक इंसान और जानवर में फर्क नहीं दिखाई देता’| रैना की आवाज़ क्रोध और उत्तेजना से काँप रही थी|
‘यहाँ क्या हो रहा है!! कौन हो तुम लोग’? बाड़े के दरवाज़े के पास से एक गरजदार मर्दाना आवाज़ आई|
शशांक ने फ़्लैशलाइट का रुख आवाज़ की दिशा में किया| दरवाज़े पर एक लम्बा-चौड़ा, बड़ी-बड़ी मूछों वाला आदमी खड़ा था, उसके एक हाथ में टॉर्च और दूसरे में लाठी थी| उसके चेहरे से ही क्रूरता झलक रही थी|
‘क्या कर रहे थे तुमलोग यहाँ चोरों की तरह घुसकर’? क्रोध से भरी हुई लाल आखों से उसने चारों को घूरते हुए कहा|
‘और ये क्या है तेरे हाथ में? ये तो कैमरा है! क्या रिकॉर्ड कर रहे हो तुमलोग’!! उस मूछों वाले आदमी की नजर विकास के हाथ में थमे कैमरे पर पड़ी| आगभभूका हुआ वो विकास के ऊपर झपट ही रहा था उसके हाथ से कैमरा छीनने के लिए कि शशांक बीच में आ गया|
‘जरा रुको बड़े भाई| आराम से बात करते हैं’|
‘क्या बात करेगा तू’?
‘तुम जो कर रहे हो वो बहुत ही गलत और अमानवीय है| तुम इस तरह किसी महिला को जानवार बना कर गाय-भैसों के बीच नहीं बाँध सकते’|
‘देख बे लौंडे, जितनी तेरी उम्र नहीं होगी उतने मेरे सर के बाल सफ़ेद हो गए हैं| मुझे उपदेश मत झाड वर्ना तेरा उपदेश इस लट्ठ के साथ ही वापस तुझमे घुसेड़ दूंगा’|
‘देखिये बात करने का आपका ये तरीका ठीक नहीं है’| मामला खराब होता देख रैना ने बीच में हस्तक्षेप किया|
‘और तुमलोग जो चोरी-छुपे यहाँ आधी रात को घुस कर विडियो बना रहे हो वो ठीक है’?
‘मैं आज दिन में आपसे मिलने आई थी, उस समय ही मैंने आपको समझाया था कि आपकी पत्नी बीमार हैं| उन्हें झाड-फूंक कराने और यूं जानवरों की तरह बाँध कर रखने की नहीं बल्कि उनका सही ढंग से इलाज करवाने की ज़रूरत है| आपने अगर उस समय मेरी बात मान ली होती तो मुझे मजबूरन ये कदम ना उठाना पड़ता’|
‘मैंने भी तुझे उस समय समझाया था कि मेरी बीवी पागल नहीं है, उसपर पिशाच का साया है जिसकी वजह से खुद को जानवर समझने लगी है वो| वो खुद जानवरों की तरह व्यवहार करती है अगर उसे यहाँ जानवरों के बीच नहीं बांधता तो ये घर और गाँव में ना जाने कितने लोगों पर हमला कर देती’|
‘देखिये महाजन सिंह जी, आप मेरे साथ इन्हें लेकर मेंटल इंस्टिट्यूट चलिए वहां डॉक्टर्स इनका प्रॉपर चेक-अप करके बताएंगे कि...’
‘अरे क्या बताएंगे डॉक्टर!! यही कि मेरी बीवी पागल है!! तुमने कभी किसी पागल को ऐसे जानवर बने देखा है| तुम साले शहरी लौंडे-लौंडिया दो-चार अक्षर पढ़-लिख क्या जाते हो खुद को बहुत होशियार समझते हो| अरे दुनिया में भगवान और शैतान से ऊपर नहीं है तुम्हारी ये पढ़ाई-लिखाई| इस औरत पर पिशाच का साया है जिससे ये धीरे-धीरे जानवर बन रही है, इसे कोई सिद्ध बाबा या तांत्रिक-ओझा ही ठीक कर सकता है कोई डॉक्टर नहीं’!
‘भगवान और शैतान की बहस में मैं नहीं पड़ना चाहती लेकिन आपको इतना बताना चाहती हूँ कि जिसे आप पिशाच का साया समझ रहे हैं वो एक मानसिक रोग है| क्लिनिकल लायकेनथ्रोपी नाम के इस मानसिक रोग में इंसान खुद को जानवर समझने लगता है और जानवरों जैसा ही व्यवहार भी करने लगता है| क्लिनिकल लायकेनथ्रोपी बहुत ही रेयर मेंटल कंडीशन है जिससे लाखों में कोई एक इंसान ही ग्रस्त होता है’|
‘बकवास है ये’|
‘ये बकवास नहीं सच है, समय रहते सही इलाज और सही वातावरण मिले तो मरीज़ काफी हद तक ठीक हो सकता है लेकिन अगर मरीज़ को सही देखभाल ना मिले तो ये बिमारी जानलेवा हो जाती है और कुछ ही दिनों में मरीज़ की मौत हो जाती है’|
‘पिशाच का साया जिसपर पड़ जाए वो तो वैसे भी कुछ दिनों का ही मेहमान होता है लड़की| मैंने कहा ना, तुमलोग या तुम्हारा डॉक्टर इसे ठीक नहीं कर सकते| अब निकलो यहाँ से’|
‘हमें निकालने से कुछ नहीं होगा, ये विडियो देश भर में हज़ारों-लाखों लोग देख रहे हैं| आप हमें भगा सकते हैं लेकिन कल को आपके दरवाज़े पर देश भर की मीडिया और एनजीओ होंगे’|
‘हाँ-हाँ उनको भी देख लेंगे, अब चलो दफा हो यहाँ से| और सुन लड़की, विडियो बना कर इन्टरनेट पर डालने का इतना शौक है ना तो ये ऊलजलूल चीज़ें क्यों अपना विडियो इन लौंडों के साथ बना कर डाल, देश क्या विदेश से भी लाखों लोग देखेंगे’| महाजन सिंह ने रैना को सर से पैर तक घूरते हुए कहा|
रैना अबतक शालीनता से स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही थी लेकिन इसके बाद उसके लिए खुद पर काबू रख पाना असंभव हो गया|
‘यू बास्टर्ड! हाउ डेयर यू’!! गुस्से में बिफरती रैना शर्तिया महाजन सिंह का मुंह नोच लेती और प्रत्युष बीच में ना आता|
‘नो रैना| वी नीड टू गो, राईट नाउ’| प्रत्युष रैना को समझाते हुए बोला|
रैना सहित विकास और शशांक ने भी उस तरफ देखा जिधर प्रत्युष इशारा कर रहा था|
बाड़े के खुले दरवाज़े के बाहर उन्हें दर्जन भर लोग हाथ में मशाल और लाठी लिए आते दिखाई दिए|
‘दो टके की लौंडिया महाजन सिंह पर हाथ उठाने चली है, तेरे जिस्म के छोटे-छोटे टुकड़े यहीं खेतों में फिकवा दूंगा किसी के बाप की औकात नहीं है कि कुछ बिगाड़ ले मेरा’
रैना गुस्से से थर-थर काँप रही थी, प्रत्युष ने बड़ी मुश्किल से उसे कण्ट्रोल किया|
‘तुमने अगर हमें किसी भी तरह नुक्सान पहुंचाया तो याद रखना इस समय हज़ारों लोग तुम्हारी हरकत के चश्मदीद गवाह होंगे| क़ानून से बच नहीं पाओगे तुम|’ विकास ने धमकी भरे लहजे में कहा, हालांकि वो जानता था कि उस धमकी का महाजन सिंह पर कोई ख़ास प्रभाव नहीं पड़ने वाला|
महाजन सिंह कुछ क्षण उन्हें घूरता रहा| विकास की अपेक्षा के विपरीत महाजन सिंह पर धमकी का प्रभाव पड़ा|
‘निकल जाओ यहाँ से, अगली बार इस जगह के आस-पास भी नजर आये तो दुनिया में दोबारा किसी को नजर नहीं आओगे’| महाजन सिंह लगभग फुफकारता हुआ बोला|
तीनो लड़के रैना को लेकर फ़ौरन ही वहां से निकले, बाहर लाठी और मशाल लिए भीड़ ने उन्हें ना रोका| वहां से लगभग पांच सौ मीटर दूर उनकी वैनिटी खड़ी थी|
विकास और प्रत्युष रैना के साथ वैनिटी में पीछे सवार हुए, शशांक ने ड्राइविंग सीट संभाली और गाड़ी को गियर में डाल कर जेट को मात करने वाली स्पीड से भगाया|
रैना विस्फरित नेत्रों से बाड़े की तरफ देख रही थी, जैसे वहां कुछ था जो उसे बुरी तरह विचलित कर रहा था|
‘विकास गिव में ए सिगरेट’| रैना अपने पर काबू करने की भरसक कोशिश करते हुए बोली|
‘रैना नो’| प्रत्युष ने उसे समझाने की कोशिश की|
‘विकास गिव मी ए फकिंग सिगरेट’!! रैना गुस्से में चिल्लाई| विकास ने चुपचाप सिगरेट केस और लाइटर रैना की तरफ बढ़ा दिया|
रैना ने एक सिगरेट निकाल कर होठों से लगाई|
‘हरामज़ादा! उसकी हिम्मत कैसे हुई मुझे ऐसा बोलने की!! जान ले लूंगी मैं उस कुत्ते की’| सिगरेट जलाते हुए रैना बोली, गुस्से, आवेग और अपमान की उसकी आवाज़ काँप रही थी, गला भर गया था उसका|
‘तुम्हे कुछ करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी रैना| आज की लाइव विडियो के वेब व्यूज स्टैटिस्टिक्स फिनौमिनल हैं, कल सुबह वाकई एनजीओज महाजन सिंह की गर्दन पर सवार होंगी’| प्रत्युष अपने लैपटॉप पर नजर डालते हुए बोला|
पर रैना को तो जैसे उसकी आवाज़ सुनाई ही नहीं दे रही थी, वो अपनी नाक की दोनाली से सिगरेट का धुंआ यूं छोड़ रही थी जैसे महाजन सिंह की मौत का मंसूबा बना रही हो|
अगली सुबह वाकई विभिन्न समाज सेवी संगठनों और मीडिया ने रौनकपुर के ठाकुर महाजन सिंह के घर पर धावा बोल दिया था। पुलिस और मीडिया की मौजूदगी में जब बाड़ा खुलवाया गया तो वहां महाजन सिंह की पत्नी खूंटे से बंधी हुई मृत अवस्था मे पाई गई। बहुत हो-हल्ला मचा, महाजन सिंह ने दावा किया कि रात में उस लड़की और उसके साथियों की हरकत से कुपित होकर पिशाच ने उसकी पत्नी की जान ले ली।
पुलिस ने महाजन सिंह को हिरासत में ले लिया लेकिन साक्ष्यों के अभाव में उसपर कोई कार्यवाही ना हो सकी।
अपनी ऊंची राजनीतिक पहुंच की बदौलत महाजन सिंह जल्द ही बरी हो गया और यह सारा प्रकरण जिसने रैना एट मिडनाइट वेबचैनल के वायरल हुई वीडियो ने देश का सबसे बड़ा मुद्दा बना दिया था उसे कुछ दिन बीतते ही लोगों ने अपने ज़हन से भुला दिया।
इस प्रकरण के ठंडे पड़ जाने के लगभग दो हफ्ते बाद महाजन सिंह ने उसी बाड़े में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली जहां उसकी पत्नी मृत पाई गई थी। हालांकि महाजन सिंह की मौत रहस्यमय और संदिग्ध अवस्था मे हुई थी लेकिन साक्ष्यों के अभाव में उसे आत्महत्या ही माना गया।
इस घटना को लेकर रौनकपुर में तरह तरह की अफवाहों और अटकलों का बाज़ार गर्म था।
कुछ लोगों का कहना था कि महाजन सिंह की बीवी की प्रेतात्मा ने उसकी जान ले ली तो कुछ का मानना था कि जिस पिशाच ने उसकी बीवी के शरीर पर कब्ज़ा किया था उसी पिशाच ने कुपित होकर महाजन सिंह की भी जान ले ली। कुछ ऐसे लोग भी थे जिनके मुताबिक महाजन सिंह ने अपनी बीवी का कत्ल किया था और फिर आत्मग्लानि के वशीभूत होकर उसने खुद की जान भी ले ली। कुल मिला कर जितने मुंह उतनी बातें थी।
समय बीतता गया और महाजन सिंह वाली घटना का ज़िक्र रौनकपुर की चौपालों और चाय की टपरियों पर भी होना बंद हो गया।

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रैना एट मिडनाइट की व्यूअरशिप और रीच में रौनकपुर वाली घाटना के बाद काफी बढ़ोतरी हुई थी। रैना और उसकी टीम ने विभिन्न सरकारी और गैरसरकारी समाजसेवी संगठनों के साथ कॉलेब्रेट करके एक अवेयरनेस मूवमेंट चलाई जहां रैना और उसकी टीम देश के अलग-अलग गांवों, कस्बों, छोटे और बड़े शहरों में जाकर लोगों को मानसिक बीमारियों और उनके उपचार के बारे में बताते थे। उनका उद्देश्य भूत-प्रेत और आत्मा आने के नाम पर मानसिक रूप से पीड़ित लोगों जिनमे बड़ी संख्या महिलाओं की होती थी उन्हें अमानवीय प्रताड़ना से बचाना और उनके सही उपचार के लिए उन्हें सही मानसिक चिकित्सा मुहैया कराना था।

रैना ने विकास, प्रत्युष और शशांक के साथ मिलकर ऐसी असंख्य मानसिक रोग से पीड़ित महिलाओं और उनके उनके ही घरवालों, तांत्रिक-ओझा और बाबाओं द्वारा उपचार के नाम पर किए जा रहे शोषण पर डाक्यूमेंट्री फिल्में बनाईं।
इसके अलावा ऐसे कई एक्सक्लूसिव वीडियो फुटेज रैना एट मिडनाइट पर रात बारह बजे नियमित रूप से अपलोड होते रहे।
इन वीडियो फुटजेस में सिर्फ मानसिक रूप से पीड़ित लोगों को ही कैद नहीं किया गया था बल्कि इनमे एक बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी थी जो खुद ही डायन, चुड़ैल और सिद्धिप्राप्त साधक बने बैठे थे।
इन वीडियो क्लिप्स में ऐसी महिलाओं के हिडन वीडियो लिए गए थे जो खुद को शैतान की उपासक समझती हैं और अपने ऊलजलूल काले जादू के तरीकों से अपने ही घरवालों, रिश्तेदारों या पड़ोसियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करती है।
बहुतेरे हिडेन वीडियो ऐसे सड़कछाप इश्कियाए लड़कों के थे जो सड़क किनारे फुटपाथ पर और रेलवे स्टेशन के हॉकर्स स्टॉल पर मिलने वाली लुगदी कागज़ पर छपी, सस्ती घटिया बाइंडिंग वाली और उतने ही फर्जी, सस्ते और घटिया राइटरों द्वारा लिखी गयी काले और लाल जादू की किताब, वृहद इंद्रजाल और वशीकरण के 1001 टोटकों की किताब पढ़कर अपने स्कूल, कॉलेज या पड़ोस की लड़कियों को अपने 'प्यार' के सम्मोहनपाश में फांसने के लिए रात को किसी पीपल या बरगद के नीचे शमशान क्रियाएं करते पाए जाते थे।
जो बात वाकई हैरान और परेशान करने वाली थी वो यह थी कि इनके अलावा काला जादू, शमशान क्रियाएं, टोना और टोटका करने वाले लोगों की काफी बड़ी तादाद ऐसी थी जो पढ़ी लिखी, सोशली हाई क्लास और सोसाइटी को बिलॉन्ग करने वाले लोगों की थी।
बॉलीवुड हॉरर फिल्मों के नेगेटिव कैरेक्टर्स की तरह ये लोग काले चोंगों में, नकली रुद्राक्ष की माला डाले, माथे पर लाल मोटा तिलक लगाए और आँखों मे सुरमा डाले नहीं नज़र आते थे।
ये तबका गांव या छोटे शहरों का नही बल्कि मेट्रोपोलिटन का था। ये लोग आम इंसान थे, हर रोज़ सुबह पार्क्स में जॉगिंग करने वाले, मॉल्स और मल्टीप्लेक्सेज में जाने वाले, वीकेंड पार्टी करने वाले आम इंसान जिन्हें देखकर उनकी शक्ल या उनके सामाजिक हैसियत से उनकी पिछड़ी हुई मानसिकता का पता नही लगाया जा सकता था।

Date: 30th June 2017
Time: 11:15 p.m.

'प्रत्युष तू श्योर है ना कि वो आएगा| तेरी इनफार्मेशन गलत तो नहीं निकलेगी'?
'आजतक कभी निकली है क्या? रिलैक्स रैना, वो आएगा और ज़रूर आएगा'|
'जबतक वो आएगा तबतक हमलोग इस वैनिटी में फ्राइड चिकेन बन चुके होंगे| साले शशांक ये वैनिटी का एसी ठीक क्यों नहीं करवाता तू'!! पसीने से तरबतर विकास माथे से पसीना पोंछते हुए बोला|
'भाई, ये मेरा काम ना है| इस प्रत्युष को बोला था मैंने इसने नहीं करवाया'|
'अबे तेरे हिस्से का काम मैं क्यों करू? तू कभी ये तो नहीं बोलता कि मेरी जगह मेरी गर्लफ्रेंड के साथ डेट पे चला जा| फिर अपने बाकी कामों के लिए क्यों बोलता है मुझे'|
'बिकॉज़ आई डोंट मिक्स बिज़नस विद प्लेज़र| वैसे भी मेरे हाथों की लकीरों में शायद ऊपर वाला गर्लफ्रेंड वाली लाइन डालना भूल गया है'| रैना पर एक चोर नजर डालते हुए शशांक बोला|
'चुप करो बे तुम दोनों! यहाँ गर्मी से आत्मा पिघल रही है और साला तुमलोगों को बकैती सूझी है'| विकास ने झुंझलाकर प्रत्युष और शशांक को लताड़ लगाई, दोनों खामोश हो गए|
रैना उस दिन काफी शांत थी|
गर्मी से उन चारों की ही हालत खराब हो रही थी|
उस घडी उनकी वैनिटी राजनगर के बाहरी एरिया में खड़ी थी जोकि हाईवे से लगा हुआ था और जिसे ग्रेटर राजनगर एक्सटेंशन के नाम से जाना जाता था|
कुछ साल पहले तक ये एरिया बियाबान हुआ करता था लेकिन पिछले कुछ सालों में ही यहाँ कई बड़ी मल्टीनेशनल फर्म्स ने अपना बेस सेटअप किया था जिस वजह से ग्रेटर राजनगर एक्सटेंशन आई.आई.टी. एंड मार्केटिंग प्रोफेशनल्स का काफी बड़ा हब बनता जा रहा था| प्रॉपर्टी रेट्स हाई हुए थे, कई रेजिडेंशियल सोसाइटीज डेवलप हो रही थीं|
ग्रेटर राजनगर एक्सटेंशन के सेक्टर 13 के जिस हिस्से में फिलहाल उनकी वैनिटी खड़ी थी वहां दूर-दूर तक सिर्फ खाली प्लॉट्स थे जिनमे ऊंचे-ऊंचे झाड-झंखाड़ उगे हुए थे| इस सेक्टर में सिर्फ एक ही रेजिडेंशियल सोसाइटी थी जिसके नवासी हिमांशु तुरानवाल के इंतज़ार में वो लोग वहां मौजूद थे|
उस घड़ी उन लोगों ने वैनिटी को एक खुले हुए प्लॉट की ऊंची झाड़ियों के पीछे छुपाया था| वैनिटी की सभी लाइट्स बंद थीं ताकि किसी को उसकी वहां मौजूदगी का पता ना चले|
विकास ने अपनी रिस्ट वॉच के रेडियम डायल पर नजर डाली, साढ़े ग्यारह बज रहे थे|
दूर हाई-वे से किसी गाड़ी की दो हेड-लाइट्स नजर आयीं, गाड़ी ने हाई-वे का रास्ता छोड़कर खाली प्लॉट्स को जाने वाला कच्चा रास्ता पकड़ा|
'हियर कम्स हॉर्नी हिमांशु'| प्रत्युष ने व्यंगपूर्ण अंदाज़ में कहा|
'हाहाहा...सही कहा भाई| हॉर्नी ही है ये, साला शौक का तो पता नहीं लेकिन ठरक वाकई बड़ी चीज़ होती है| बन्दा चालीस का है, दो बच्चियों का बाप है और अपनी कंपनी की फ्रेशर इंटर्न निधि के पीछे पड़ा हुआ है'| शशांक बोला|
'मेरे एक फ्रेंड का छोटा भाई भी उस लड़की के साथ ही हिमांशु की कंपनी में इंटर्न है| उससे ही इस हॉर्नी हिमांशु के काले जादू वाले काले कारनामों का पता चला'| प्रत्युष बोला|
'लेकिन इसके काले जादू का क्या चक्कर है'?
'लड़की को वश में करने के लिए ये किसी अघोरी की मदद ले रहा है जो इससे तामसिक क्रियाएं करवाता है| इन क्रियाओं के लिए एक निर्धारित खाली जगह चाहिए थी जहां 21 रातों तक ये क्रिया कर सके| आज वो इक्कीसवी रात है'|
'लेकिन मेरे शरलक होम्स तुझे ये इतनी ख़ुफ़िया वाली जानकारी कहाँ से मिल जाती है'? शशांक बोला|
'जब सनी...मेरे फ्रेंड के छोटे भाई ने हिमांशु के बारे में बताया था तो उसने एक अजीब बात बताई थी| हिमांशु निधि से उसकी पर्सनल चीज़ें जैसे उसकी हैंकी, या हेयर क्लिप किसी ना किसी बहाने से मांगता था| शुरुआत में एक दो बार तो निधि ने मना नहीं किया लेकिन बार-बार ऐसा होने पर उसे कुछ शक हुआ तो उसने हिमांशु को स्मार्टली मना कर दिया| लेकिन इसके बाद उसके ऑफिस बैग से उसकी कुछ पर्सनल चीज़ें चोरी हुई'|
'लेकिन ये चोरी तो कोई भी कर सकता था'!
'बिलकुल कर सकता था लेकिन अगर बैग में से मोबाइल फोन की जगह चोर सेनेटरी पैड चुरा कर ले जाए तो वो चोर कोई साइको ही हो सकता है'|
'या फिर परवर्ट'| रैना बोली|
'बिलकुल| इसके बाद ही मैने दिन-रात इस हॉर्नी हिमांशु की हर मूवमेंट पर नजर रखना शुरू किया और जल्दी ही इसका ये कारनामा मुझे पता चल गया'|
'एव्रीबडी क्वाइट! कार पास आ रही है'| विकास ने बाकी तीनो को आगाह किया| इसके बाद कोई कुछ ना बोला|
जिस प्लाट में वैनिटी खड़ी थी उसके अगले प्लाट में आकर एक स्कोडा रुकी| ड्राइविंग सीट पर बैठा शख्स बाहर निकला, वो हिमांशु ही था|
गाड़ी की हेडलाइट्स अभी भी जल रही थीं, उसने नीचे उतारकर चारों तरफ देखा और कुछ सोचता रहा, फिर वो वापस मुड़कर गाड़ी की डिक्की की तरफ बढ़ा|
रैना, विकास, शशांक और प्रत्युष बिना आवाज़ किए धीरे से वैनिटी से बाहर निकले और ऊंचे झंखाड़ की आड़ लेते हुए हिमांशु की गाड़ी की तरफ बढ़े| विकास अपना नाईट विज़न कैमरा ऑन कर चुका था, लेकिन इस बार कैमरे की लाइव विडियो फीड वेबचैनल पर ब्रॉडकास्ट नहीं हो रही थी|
क्योंकि अबतक हिमांशु ने अंधविश्वास में कोई भी गंभीर अपराध नहीं किया था इसलिए रैना उसका ये हिडेन विडियो बना कर उसे एक चांस देना चाहती थी ताकि वो अपनी ये हरकतें बंद करके सही रास्ते पर आ जाए| अगर हिमांशु उसकी बात नहीं मानता तो उस केस में रैना ये विडियो चैनल पर अपलोड कर देती|
इससे पहले भी कई बार ऐसा हो चुका था जब रैना ने दोषी का विडियो शूट करके उसे कन्फ्रंट किया था| कई केसेस में दोषी के कसबल फ़ौरन ही ढीले पड़ जाते थे फिर रैना या तो उनका विडियो अपलोड नहीं करती थी या फिर उनकी पहचान गुप्त रखने के लिए उनके चेहरे विडियो में ब्लर कर देती थी|
'ये कर क्या रहा है'?
'मेक श्योर कर रहा है कि आस-पास कोई है तो नहीं'|
'वैसे ये हिमांशु यहाँ करता क्या है'? रैना ने प्रत्युष से पूछा|
'निधि की जो भी पर्सनल चीज़ें वो चुराता था उन्हें यहाँ लाकर उनसे कुछ जादू-टोना करता था, शायद वशीकरण के लिए| मैंने हिमांशु का पीछा करके मोबाइल से इसका विडियो बनाने की कोशिश की थी लेकिन इस जगह इतना अँधेरा होता है कि मोबाइल कैमरा काम नहीं करता'| प्रत्युष बोला|
'अब देखना ये है कि आज अपने हॉर्नी हिमांशु भईया क्या उठा कर लाए हैं'| विकास हिमांशु की दिशा में देखते हुए बोला जोकि अपनी गाड़ी की डिक्की खोलकर अन्दर झुका हुआ था|
'अबे...अबे...ये तो पूरी लड़की ही उठा लाया'!! शशांक चिहुंक उठा| रैना, प्रत्युष और विकास ने भी चौंक कर उस दिशा में देखा|
हिमांशु गाड़ी की डिक्की से एक लड़की को निकाल रहा था| लड़की के हाथ-पैर रस्सियों से बंधे हुए थे और मुंह में कपड़ा ठूसा हुआ था|
'ये निधि है| हिमांशु पर नज़र रखने के दौरान मैंने इसे देखा था और इसके डिटेल्स भी पता किए थे'| प्रत्युष लड़की को देखकर चौंका|
हिमांशु ने किसी आलू की बोरी की तरह निधि को उठा लिया। लड़की उसकी पकड़ से छूटने के भरसक प्रयास कर रही थी लेकिन सब व्यर्थ था। अपने बंधे हाथ-पैर इधर-उधर फेंक कर, हिमांशु पर वार करके निधि पूरा जोर लगा रही थी कि किसी तरह खुद को आज़ाद करा सके| इस प्रक्रिया में अपनी कोहनी का भरपूर वार वो हिमांशु की कनपट्टी पर करने में सफल हो गई|
हिमांशु दर्द से तिलमिला गया|
उसने पूरी बेरहमी से निधि को किसी बोरी के सामान ही नीचे पटक दिया| निधि के मुंह से घुटी हुई कराहें निकली जो उसके मुंह में ठुसे कपडे की वजह से काफी दब गई थी|
निधि नीचे धूल में गिरी हुई दर्द से तड़प रही थी, हिमांशु फिर अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ा| इस बार पैसेंजर्स सीट से कुछ निकाल रहा था वो|
‘कर क्या रहा है ये’?
‘जो भी कर रहा है हमें इसे रोकना होगा’| रैना की आवाज़ क्रोध से थर्राने लगी थी|
‘बस कुछ सैकेंड और रैना, इसका पूरा कारनामा मैंने रिकॉर्ड कर लिया है| निधि को हम बचा लेंगे और ये हॉर्नी हिमांशु काफी लम्बा अंदर जाने वाला है’| विकास रैना को रोकते हुए बोला|
हिमांशु लड़की के पास वापस आया, उसके एक हाथ में लम्बे फल का चाक़ू था और दूसरे में एक बंधा हुआ जिंदा मुर्गा फडफडा रहा था|
निधि पीठ के बल सरक कर उससे दूर हटने की कोशिश कर रही थी, लेकिन हिमांशु ऍन उसके ऊपर सवार हो गया|
हिमांशु ने फडफडाते हुए पक्षी का समूचा सर अपने मुंह में भर लिया और अगले ही पल किसी हिंसक जंगली जानवर की तरह उसका सर धड़ से अलग नोच डाला| अपने मुंह में भरा पक्षी का सर उसने थूक दिया, उसके हाथों में पक्षी का सरविहीन धड़ अभी भी फडफडा रहा था और खून के फौवारे छोड़ रहा था, उस खून के फौवारे से वो निधि को सराबोर करते हुए कोई मन्त्र बुदबुदाने लगा|

इससे आगे बर्दाश्त कर पाना रैना के वश में नहीं था, रैना उस घड़ी शायद अपने आप में नहीं रह गई थी| किसी आंधी की तरह उठी वो और तूफ़ान के जैसे दनदनाते हुए हिमांशु तक पहुँच गई|
हिमांशु इस अप्रत्याषित आगमन से दो पल के लिए आवाक रह गया|
रैना ने एक ज़ोरदार मुक्का सीधे हिमांशु की नाक पर जड़ दिया| उसे दिन में तारे नजर आ गए|
वो हडबडा कर पीछे गिरा, उसकी नाक से खून की धार फूट रही थी| उसके जेब से गाड़ी की चाभी निकल कर धूल में ना जाने कहाँ गुम हो गई|
रैना नीचे झुकी और निधि के मुंह में ठूसा हुआ कपड़ा निकालने लगी|
‘तुम ठीक तो हो निधि’?
‘म..मुझे बचाइए इस ह..हैवान से’|
‘अब ये तुम्हे कोई नुक्सान नहीं पहुंचा सकता’|

विकास, प्रत्युष और शशांक भी भागते हुए वहां पहुँच गए थे|
हिमांशु ने अबतक खुद को संभाल लिया था, चाभी उस अँधेरे में ढूंढ पाना संभव नहीं था| खुद को बचाने के लिए उसने बेतहाशा भागना शुरू किया|
रैना पर जैसे कोई भूत सवार हो गया था, वो अकेले ही हिमांशु के पीछे लपकी|
‘तुमलोग निधि को संभालो और कॉल करके पुलिस व एम्बुलेंस बुलाओ, मैं रैना के साथ जाता हूँ’| प्रत्युष ने असमंजस में पड़े विकास और शशांक से कहा और बगैर उनके उत्तर की प्रतीक्षा किए उस दिशा में लपक लिया जिधर हिमांशु और उसके पीछे रैना गए थे|

रैना बेतहाशा भाग रही थी, हिमांशु का पीछा करते हुए वो ना जाने कितनी दूर निकल आई थी|
उसे समझ नहीं आ रहा था कि हिमांशु इतनी जल्दी उसकी आखों के आगे से ओझल कैसे हो गया|
हिमांशु हाई-वे की तरफ नहीं भागा था, बल्कि प्लॉट्स को जोड़ते हुए कच्चे रास्ते पर भागा था, उस तरफ अँधेरा और ऊंचे झंखाड़ होने की वजह से वहां छुपना आसान था|
रैना को यकीन था कि हिमांशु वहीँ कहीं छुपा हुआ होगा|
अचानक पीछे से कोई रैना पर लपका, संभल पाने से पहले ही रैना पीठ के बल धूल भरी ज़मीन पर चित गिरी थी, ये हिमांशु ही था जो अँधेरे में उसके लिए घात लगाए बैठा था|
रैना के कुछ समझ पाने से पहले ही हिमांशु रैना के ऊपर सवार था| उसने चित रैना के दोनों हाथ अपने घुटनों के नीचे दबा लिए, रैना बेबस थी| वो चाह कर भी हिल नहीं पा रही थी|
हिमांशु के हाथ में कुछ चमक रहा था, ये वही लम्बे फल वाला खंजर था|
‘विकास!! प्रत्युष!!’ रैना चिल्लाई|
हिमांशु की आखों में शैतानियत नाच रही थी, उसके अधरों पर एक हिंसक मुस्कान तैर गई जैसे अपने चंगुल में फंसी रैना का यूं छटपटाना उसे असीम सुख प्रदान कर रहा हो|
हिमांशु ने खंजर की नोक रैना के सीने पर रख दी और उसपर हल्का सा दबाव डाला| रैना दर्द से तिलमिला उठी| खंजर की नोक पर रैना के लहू की बूंदे नजर आ रही थी, हिमांशु हौले से चाक़ू का फल अपने होठों के पास लाया और रैना के लहू का स्वाद चखने लगा| उसकी भाव भंगिमा देखकर ऐसा लगा जैसे उसने किसी तीव्र मादक पदार्थ का सेवन किया हो|
रैना खुद को छुडाने के लिए कसमसा रही थी|
हिमांशु अपना मुंह रैना के दाहिने कान के पास ले गया| रैना की सासें तेज़ चल रही थीं|
‘वो तुझे नहीं छोड़ेगी लड़की| इशानी जानती है कि तूने उसके साथ क्या किया है’| हिमांशु हौले से उसके कान में फुसफुसाया|
एक पल के लिए रैना जैसे जडवत हो गई| हिमांशु के मुंह से इशानी का नाम सुनने की उसने कल्पना भी नहीं की थी| वो इशानी के बारे में कैसे जान सकता था?
हिमांशु सीधा हुआ और उसका खंजर वाला हाथ दोबारा रैना के सीने की ओर बढ़ा, इस बार रैना ने किसी तरह उसके घुटने के नीचे से किसी तरह अपना दायाँ हाथ आज़ाद कर लिया था|
रैना ने हिमांशु की खंजर वाली कलाई थाम ली| उस पोजीशन में रैना अधिक बल लगा पाने में असमर्थ थी फिर भी उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर हिमांशु की कलाई पकडे रखी| हिमांशु का चेहरा जैसे किसी शैतान की तरह तमतमा रहा था, उसका खंजर वाला हाथ उठा, लेकिन उसका निशाना इसबार रैना नहीं थी| हिमांशु का खंजर वाला हाथ चला और उसमे थमा खंजर पूरी बेरहमी से हिमांशु की ही गर्दन में घुस गया| रैना बुरी तरह चिल्लाई|
‘व्..वो...तुझे नहीं छोड़ेगी रैना...इ...इशानी तुझे ...नहीं छोड़ेगी’| हिमांशु के मुंह से जैसे लहू में लिसड़े हुए निकले वो लफ्ज़|
रैना का हाथ अब भी हिमांशु की कलाई थामे हुए था लेकिन उसे कण्ट्रोल करने की शक्ति अब उसमे नहीं थी| हिमांशु का हाथ हिला और उसकी गर्दन में फंसा हुआ खंजर उसके गले के मांस और श्वास नली को एक कान से दूसरे कान तक खुद ही उधेड़ता चला गया|
रैना बेतहाशा चीखती रही, हिमांशु का सर उसके धड़ से अब सिर्फ गर्दन की खाल से ही जुड़ा हुआ था और घड़ी के पेंडुलम की तरह लटक कर इधर-उधर झूल रहा था| उसकी कटी गर्दन से भलभलाता खून रैना के पूरे चेहरे और ऊपरी जिस्म को सुर्ख लाल रंग रहा था|
भय और विभत्सता की पराकाष्ठा में रैना को लगा कि अब वो अपने होश खोने वाली है| उसकी धुंधली होती नज़रों के सामने दूर अँधेरे में उसे एक लडकी का साया नजर आया| इशानी! क्या वो इशानी थी!!
रैना को ऐसा लग रहा था जैसे वो कोई सपना देख रही है| उसकी आखें तो खुली हुई हैं लेकिन जो वो देख रही है वो हकीकत नहीं है|
‘रैना! रैना!!’ दूर से कोई उसे आवाज़ दे रहा था, झंकझोर रहा था लेकिन रैना जैसे अपनी इस नींद से खुद को जगा ही नहीं पा रही थी|
‘रैना’!! किसी ने पूरे जोर से रैना के जिस्म को झंकझोरा| रैना की तंत्रा भंग हुई, ये प्रत्युष था|
प्रत्युष ने रैना के ऊपर लुड़का हुआ हिमांशु का बेजान शरीर एक तरफ गिरा दिया|
‘प्रत्युष’!!
रैना डर से कांपती किसी छोटी बच्ची की तरह प्रत्युष से लिपट गई|
‘काम डाउन रैना, सब ठीक है| यू आर सेफ नाऊ’|
प्रत्युष ने रैना को संभालने की कोशिश की लेकिन रैना को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे उसे कोई पागलपन का दौरा पड़ा हो|
‘प्रत्युष...प्रत्युष!! व्...वो इशानी को जानता था’|
‘कौन? कौन जानता था इशानी को रैना’?
‘हि...हिमांशु| उसने मुझसे कहा कि...कि...इशानी मुझे छोड़ेगी नहीं’|
‘व्हाट? ऐसा कैसे को सकता है? हिमांशु इशानी को कैसे जान सकता है’?
‘म..मैं नहीं जानती प्रत्युष ले...लेकिन मैंने अभी इशानी को यहाँ देखा था’|
‘रैना, तुम्हे गहरा मेंटल शॉक लगा है| यू नीड टू काम डाउन फर्स्ट’| प्रत्युष के चेहरे पर अनगिनत भाव एकसाथ आ और जा रहे थे|
‘नो आई डोंट नीड टू काम डाउन बट रादर यू नीड टू लिसेन टू मी प्रत्युष, आई हैव सीन इशानी स्टैंडिंग राईट इनफ्रंट ऑफ़ माय आईज’|
‘दिस इज़ नॉट पॉसिबल रैना बिकॉज़ इशानी इज़ डेड!! मर चुकी है इशानी! हमलोगों ने अपनी आखों के सामने उसकी चिता को राख होते देखा था’| प्रत्युष अपनी भावनाओं पर अब और काबू ना रख पाया| उसके अन्दर उमड़ता हुआ दर्द और आक्रोश किसी लावे की तरह फूट कर बाहर निकला|
दो पलों के लिए वहां सन्नाटा पसर गया| दोनों ही बिलकुल शांत थे| वातावरण की शान्ति कई भागते हुए क़दमों की आहत से भंग हुई| विकास और शशांक पुलिस को लेकर वहां पहुँच गए थे|

प्रत्युष रैना और निधि के साथ ही एम्बुलेंस में सवार था जो उन्हें लेकर सिटी हॉस्पिटल जा रही थी|
‘आई एम सॉरी रैना, उस समय मैं कुछ ज्यादा ही ओवर रियेक्ट कर गया’| प्रत्युष ने हौले से रैना से कहा|
‘दैट्स ऑलराईट प्रत्युष| इवन आई नीड टू अपोलोजाईज़ टू यू, मैं उस समय शॉक में थी और ना जाना क्या-क्या बकती चली गई’|
फिर दोनों में से कोई कुछ ना बोला| रैना ने हेडरेस्ट से अपना सर टिका कर आखें बंद कर लीं| ठीक एकसाल पहले का समय किसी मूवी के फ्लैशबैक की तरफ उसकी बंद आखों के सामने से गुजरने लगा|

एक साल पहले तक रैना एक आम कॉलेज गोइंग लड़की थी जिसकी लाइफ फ्रेंड्स, चैटिंग, शॉपिंग, और सोशल नेटवर्क्स में बसती थी| इंस्टाग्राम पर हर एक घंटे में लेटेस्ट सेल्फी और ग्रुपि डालना, फेसबुक पर पोस्ट्स, स्टोरी अपडेट्स, ट्विटर पर ट्वीट्स उसकी दिनचर्या का अभिन्न अंग थे| रैना मास कॉम एंड जर्नलिज्म की सैकेंड इयर की स्टूडेंट थी| उसके ग्रुप में उसकी बेस्ट फ्रेंड इशानी, इशानी का बॉयफ्रेंड प्रत्युष और उनके फ्रेंड्स विकास और शशांक थे| विकास और शशांक दोनों ही रैना को लाइक करते थे लेकिन फिलहाल रैना किसी भी रिलेशनशिप के लिए कमिट नहीं करना चाहती थी|
कुल मिलाकर रैना की लाइफ में सबकुछ लाइव और हैपनिंग था लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जिसने रैना की आने वाली जिंदगी के साथ-साथ खुद रैना को भी पूरी तरह बदल दिया|
रैना और उसकी बेस्ट फ्रेंड इशानी में किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया और दोनों में बोलचाल बंद हो गई| हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ था, इससे पहले भी उन दोनों का अनगिनत बार एक-दूसरे से किसी न किसी बात पर झगड़ा हो चुका था| कुछ दिनों तक दोनों एक-दूसरे का मुंह भी नहीं देखती फिर अचानक पहले की तरह यूं नॉर्मल हो जाती थीं जैसे कुछ हुआ ही ना हो| लेकिन इस बार झगड़े के एक हफ्ते बाद इशानी ने कॉलेज आना बंद कर दिया| धीरे-धीरे सोशल साइट्स पर से भी वो गायब रहने लगी| रैना, प्रत्युष या किसी भी फ्रेंड के कॉल वो नहीं लेती थी, फिर उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ रहने लगा| शुरू में रैना को लगा कि इशानी यूं ही फुटेज खा रही है लेकिन जब 15-20 दिन बीत गए और इशानी से किसी का कोई कॉन्टैक्ट नहीं हुआ तो रैना और प्रत्युष इशानी के अपार्टमेंट पहुंचे|

इशानी अपार्टमेंट बिल्डिंग के सिक्स्थ फ्लोर पर अपनी माँ और बड़े भाई के साथ रहती थी| रैना और प्रत्युष अभी अपनी टू व्हीलर्स पार्क ही कर रहे थे कि अपार्टमेंट बिल्डिंग से किसी के चीखने की आवाज़ आई|
‘रैना! प्रत्युष!! हेल्प’!!
रैना और प्रत्युष के आश्चर्य का ठिकाना ना रहा, चीखने वाली इशानी थी जो अपने रूम की खिड़की से उन दोनों को देखकर बेतहाशा पागलों की तरह चीख रही थी|
रैना और प्रत्युष हवा की तरह उड़ते हुए ऊपर पहुंचे| प्रत्युष ने अपार्टमेंट की डोरबेल बजाई| दरवाज़ा इशानी के भाई ने खोला|
‘भईया इशानी को क्या हुआ’| आवाक रैना ने इशानी के भाई के कंधे के पीछे अपार्टमेंट में झांकते हुए कहा|
‘क...कुछ नहीं| इशानी की तबियत ठीक नहीं है...त...तुमलोग जाओ अभी यहाँ से’| इशानी के भाई केवल ने ना ही उन दोनों को अंदर बुलाया और ना ही खुद दरवाज़े से हटने का उपक्रम किया|
‘रैना!! हेल्प मी रैना’!! ठीक उसी समय अंदर से अपनी माँ को धक्का देते हुए इशानी बाहर निकली|
‘रुक जा इशानी’!! केवल ने इशानी का रास्ता रोकने की कोशिश की|
लेकिन तबतक प्रत्युष केवल को धक्का दे चुका था| इशानी भाग कर अपार्टमेंट से बाहर निकली और प्रत्युष और रैना के पीछे छुप गई|
‘म...मुझे बचा लो रैना! इन लोगों ने मुझे ज़बरदस्ती यहाँ बंद करके रखा हुआ है| ना मुझे निकलने देते हैं ना किसी से बात करने दे रहे हैं| म..मेरा फोन भी छीन लिया है इन लोगों ने, मुझे दिन भर कमरे में बंद करके रखते हैं और मारते-पीटते हैं’| इशानी ने रोते-रोते कहा|
‘पर क्यों’? प्रत्युष और रैना की कुछ समझ में नहीं आ रहा था|
‘क्योंकि इसपर किसी चुडैल का साया है’| इशानी की माँ बाहर आते हुए बोली|
‘आंटी ये आप क्या बोल रही हैं! आज के ज़माने में भी आप इन दकियानूसी बातों पर विश्वास करती हैं’? रैना भौंचक थी|
‘तुमलोग बच्चे हो, कुछ भी नहीं समझते| इशानी ठीक नहीं है, वो अकेले में खुद में ही बडबडाती है| आधी रात को उठकर पूरे घर में बडबडाते हुए घूमती है’| इशानी की माँ बोली|
‘आंटी अगर ऐसा है तो इशानी को प्रोफेशनल हेल्प की ज़रूरत है, उसे किसी अच्छे साइकोथेरेपिस्ट के पास ले जाना चाहिए ना कि उसे किसी जानवर की तरह बंद कर के रखना चाहिए’| रैना अपने गुस्से पर बड़ी मुश्किल से काबू करते हुए बोली|
‘इसका इलाज किसी साइकोथेरेपिस्ट के पास नहीं है रैना| हमने अपने गुरूजी को बुलाया है| उनका ही आदेश है कि उनके आने तक इशानी को अकेले में बंद करके रखा जाए, ना किसी से मिलने दिया जाए और ना ही किसी से बात करने दी जाए| गुरूजी कल सुबह की फ्लाइट से अमेरिका से लौट रहे हैं जहां उनका बहुत बड़ा स्पिरिचुअल वर्कशॉप चल रहा था, कल इंडिया पहुँचते ही वो सीधे यहाँ आ जाएंगे’|
‘नहीं!! मुझे नहीं मिलना उस ढोंगी से| रैना वो गुरूजी बहुत ही गंदा आदमी है| जब मैं छोटी थी तब से ही वो मेरे साथ गलत हरकत करने की कोशिश करता आ रहा है| मैंने कई बार ये बात मम्मी और भईया को बताने की कोशिश की लेकिन ये दोनों उस गुरु के इतने अंधे भक्त हैं कि इनपर मेरी बात का कोई असर नहीं होता’| इशानी रैना से गिडगिडाते हुए बोली|
‘चुप कर लड़की! ये तू नहीं तेरे ऊपर कब्ज़ा किए हुए चुडैल का साया बोल रहा है’| इशानी की माँ गरजते हुए बोली|
‘माँ ठीक कह रही हैं| जब से हमलोग गुरूजी की शरण में आए हैं तबसे मेरे बिज़नस में सिर्फ प्रॉफिट ही प्रॉफिट हुआ है| ये गुरूजी के आशीर्वाद का ही चमत्कार है जिसने हमें फर्श से उठाकर अर्श पर पहुंचा दिया और ये लड़की गुरूजी पर ही लांछन लगा रही है!! अरे दुनिया भर में लाखों-करोड़ों भक्त हैं गुरूजी के, आजतक किसी ने गुरु जी पर एक ऊँगली तक नहीं उठाई’| केवल ने भी अपनी माँ का पक्ष लिया|
रैना ने एक नज़र उन दोनों माँ-बेटे पर डाली. केवल के हाथ की हर ऊँगली में सोने की रत्नजड़ित अंगूठी थी, लेटेस्ट आई-फोन था| कलाई पर रोलेक्स की डायमंड स्टडेड घड़ी थी और गले में खालिस सोने की मोटी सीकड़| उसकी माँ भी ऊपर से नीचे तक सोने से लदी हुई थी| ‘इतना पैसा, इतनी संभ्रान्ति लेकिन सोच ऐसी दो कौड़ी की’| रैना ने दोनों को देखते हुए सोचा, उसे उनसे ज़बरदस्त घृणा हो रही थी|
‘इशानी को उसकी मर्ज़ी के खिलाफ आपलोग ऐसे बंद करके नहीं रख सकते| इशानी हमारे साथ जाएगी’| प्रत्युष इशानी का हाथ पकड़ते हुए बोला|
‘खबरदार! इशानी कहीं नहीं जायेगी| यहाँ से कोई जाएगा तो सिर्फ तुमदोनो, वरना मैं पुलिस बुलाऊंगा’| केवल गरजते हुए बोला|
‘पुलिस को आप नहीं हम बुलाएंगे| मैंने कॉल कर दिया है पुलिस कुछ ही देर में आ रही है’| रैना सख्त भाव से बोली|
केवल और उसकी माँ एक-दूसरे का मुंह देख रहे थे|
रैना और प्रत्युष इशानी का हाथ पकड़ कर उसके साथ खड़े हुए थे, उन्हें यकीन था कि केवल और उसकी माँ अब इशानी का बाल भी बांका नहीं कर सकते लेकिन उनकी सोच को झटका तब लगा जब रैना की कॉल पर वहां पहुंचे पुलिस ऑफिसर ने इस मामले को पारिवारिक मसला बता कर अपना पल्ला झाड लिया और वहां से चलता बना|
‘इशानी हमारे साथ जाएगी, चलो इशानी’| प्रत्युष इशानी का हाथ खींचते हुए बोला|
‘इशानी कहीं नहीं जाएगी! अगर तुमलोगों ने इशानी को यहाँ से ले जाने की कोशिश की तो इस बार पुलिस को कॉल मैं करूँगा और मेरे बुलाने पर पुलिस खाली हाथ नहीं जाएगी| तुम दोनों पर इशानी के एबडक्शन चार्जेज़ लगाऊंगा मैं’| पुलिस के इस तरह वापस लौटने से केवल को शह मिल गई थी|
‘लेकिन इशानी अपनी मर्जी से हमारे साथ जा रही है’| प्रत्युष दांत पीसता हुआ बोला|
‘ये बात हवालात में बंद होने पर उन पुलिस वालों को सुनाना जो मेरे दिए नोटों के बंडल गिनने में मशगूल होंगे’| केवल के चेहरे पर उस घड़ी बहुत ही घृणित भाव थे| प्रत्युष का दिल आया उसी समय वो केवल का मार-मार कर बुरा हाल कर दे, लेकिन वो जानता था कि उसके ऐसा करने से बात और बिगड़ जाएगी|
‘इस समय तो हमलोग जा रहे हैं, लेकिन जब हम वापस आयेंगे तो हमारे साथ पूरा कॉलेज होगा| सैकड़ों स्टूडेंट्स के सामने ना आप हमें इशानी को ले जाने से रोक पाओगे और ना ही सैकड़ों स्टूडेंट्स पर एबडक्शन चार्जेज लगा पाओगे’ रैना केवल और उसकी माँ को घूरते हुए बोली|
‘जो करते बन पड़े कर लो, फिलहाल चलते बनो यहाँ से’| इशानी की माँ ने उन दोनों को दुत्कारा|
‘नहीं रैना!! प्रत्युष!! म..मुझे इन जल्लादों के साथ अकेला छोड़कर मत जाओ, तुमलोग नहीं जानते कि ये मेरे साथ क्या करेंगे’| भय से कांपती हुई इशानी रैना से लिपट गई|
‘इशानी! बेब्स लिसेन टू मी, ये लोग तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते| हमलोग विकास, शशांक के साथ पूरे कॉलेज को लेकर यहाँ आयेंगे| कल सोशल मीडिया पर इनकी करतूत ट्रेंडिंग होगी आई प्रॉमिस यू| लेकिन उसके लिए हमें अभी यहाँ से जाना होगा’| रैना ने इशानी को समझाते हुए कहा|
इशानी रोती-गिडगिडाती रही, उसकी माँ और भाई उसे खींचते हुए वापस अन्दर ले गए|
‘कमऑन प्रत्युष| वी नीड टू हरीअप| हमें सबको इकठ्ठा करना होगा’| रैना लिफ्ट पर सवार होते हुए बोली|
‘मुझे अंदर से अच्छी फीलिंग नहीं आ रही रैना, हमें इशानी को वहां नहीं छोड़ना चाहिए था’ प्रत्युष काफी परेशान नजर आ रहा था|
‘कोई दूसरा रास्ता नहीं था प्रत्युष| हमने पुलिस को बुला कर भी देख लिया, इशानी को बचाना है तो हमें स्टूडेंट पॉवर का सहारा लेना होगा’| रैना उसे समझाती हुई बोली|
लिफ्ट के रुकते ही रैना और प्रत्युष बाहर निकले और बाहर की ओर दौड़ गए| लेकिन उनके बेतहाशा भागते कदमों को ब्रेक तब लग गया जब रैना के ठीक सामने ऊपर से कुछ आकर गिरा| ज़ोरदार आवाज़ हुई|
कुछ पलों के लिए प्रत्युष और रैना सन्न रह गए|
वो इशानी थी| इशानी ने रैना की आखों के सामने दम तोडा|
केवल ने फेक मेडिकल डॉक्यूमेंट्स से ये प्रूव कर दिया कि इशानी की दिमागी हालत ठीक नहीं थी, पुलिस ने इसे सुसाइड केस घोषित करके फाइल बंद कर दी|
रैना और प्रत्युष ने विकास और शशांक के साथ मिलकर ‘जस्टिस फॉर इशानी’ की ऑनलाइन मुहीम चलाई लेकिन नतीजा सिफर निकला|
केवल अपना सारा बिज़नस वाइंडअप कर के और सबकुछ बेचबाच के अपनी माँ के साथ कहीं चला गया और कभी किसी के ढूंढें दोनों माँ-बेटा ना मिले|
रैना इशानी की मौत के लिए खुद को इस हद तक ज़िम्मेदार मानती रही कि डीप डिप्रेशन का शिकार हो गई| इस दौरान ही रैना ने हैवी स्मोकिंग और ड्रिंकिंग शुरू कर दी थी|
रैना ने यह बात कभी किसी को नहीं बताई कि वो इशानी को अपने ज़हन से निकालने के लिए इतना हेविली स्मोक और ड्रिंक करती थी|
इशानी...जो उसे मरने के बाद भी हर जगह नजर आती थी|


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Date: 1st July 2017
Time: 11:00 a.m.

‘हाऊ आर यू फीलिंग टुडे रैना’?
‘एबसल्युटली फाइन डॉक्टर पोद्दार’|
डॉक्टर पोद्दार रैना के पर्सनल साइकोथेरेपिस्ट थे| इशानी की मौत के बाद जब रैना डिप्रेशन में चली गई थी तो उसे सिगरेट और शराब की गर्त से निकालने के लिए प्रत्युष ही उसे डॉक्टर पोद्दार के पास लाया था|
छे महीने की इंटेंस रिग्रेशन थेरेपी के बाद रैना फाइनली अपने डिप्रेशन से बाहर आई|
उस समय ही रैना ने ‘रैना एट मिडनाइट’ शुरू करने का फैसला कर लिया था ताकि आइन्दा किसी और इशानी के साथ अन्याय ना हो| विकास, शशांक और प्रत्युष ने भी इस मुहीम में उसका पूरा-पूरा साथ दिया था|
अबतक अपने चैनल के अवेयरनेस प्रोग्राम की बदौलत उन लोगों ने अनगिनत ढोंगी बाबाओं, सूफियों, फकीरों, संतो, तांत्रिकों और ओझाओं का पर्दाफाश किया था| लाखों लोगों की आखों पर पड़ा अंधविश्वास का पर्दा उठाया था और निधि जैसे कई बेक़सूर मासूमों को शिकार बनने से बचाया था|
‘प्रत्युष बता रहा था कि तुमने फिर से स्मोकिंग स्टार्ट कर दी है’| डॉक्टर पोद्दार ने रैना की फ़ाइल स्टडी करते हुए, बिना उसकी तरफ नजरें उठाए कहा|
रैना ने प्रत्युष को घूर कर देखा, प्रत्युष ने रैना से नज़रें ना मिलाई|
‘मैं आपसे अकेले में कुछ बात करना चाहती हूँ’| रैना डॉक्टर पोद्दार से बोली, वो अभी भी प्रत्युष को घूर रही थी|
डॉक्टर पोद्दार ने आखों से इशारा किया प्रत्युष, विकास और शशांक चुपचाप उठकर केबिन से बाहर चले गए|
‘वो मुझे दोबारा नज़र आ रही है डॉक्टर’|
‘इशानी’? डॉक्टर पोद्दार ने फाइल से नज़रें उठाई, अब वो रैना को देख रहे थे| उनके चेहरे पर गंभीर भाव थे|
डॉक्टर पोद्दार इकलौते ऐसे इंसान थे जो इस सच को जानते थे कि इशानी अपनी मौत के बाद भी रैना को नजर आती थी|
रिग्रेशन थेरेपी के दौरान जब उन्होंने रैना को हिप्नोटाईज़ किया था तब ये बात उनसे छुपी नहीं रह सकती थी|
छे महीने की ट्रीटमेंट के दौरान धीरे-धीरे इशानी रैना को नजर आना बिलकुल बंद हो गई थी|
‘लेट मी गेस, ये सब उस महाजन सिंह की वाइफ....व्हाट वॉज़ हर नेम? इमरती देवी...यस इमरती देवी की मौत के बाद से दोबारा शुरू हुआ है’? डॉक्टर पोद्दार रैना के बिलकुल करीब आकर बैठ गए|
रैना ने सहमती में सर हिलाया|
‘रौनकपुर से वापस लौटते वक्त मुझे वो दोबारा से दिखाई दी थी, जब हम वैनिटी में थे उस समय| दूर उस बाड़े के पास खड़ी हुई थी वो’|
‘लुक रैना, इमरती देवी के साथ तुमने ऑलमोस्ट वो ही सिमिलर सिचुएशन एक्सपीरियंस की जो तुमने इशानी के वक्त एक्सपीरियंस की थी| तुम उसे बचाना चाहती थी लेकिन हालात से मजबूर होकर तुम्हे उसे लिए बिना ही वापस लौटना पड़ा| इस घटना ने तुम्हारे सबकॉनशियस में दबे गिल्ट को फिर से ट्रिगर कर दिया| रही सही कसर तब पूरी हो गई जब अगली सुबह वो औरत बाड़े में मरी हुई पाई गई| तुम्हारे अंतर्मन ने इस घटना को सीधे-सीधे इशानी वाले इंसिडेंट से रिलेट कर दिया, नतीजतन तुम्हे इशानी फिर से नजर आने लगी’|
‘इट्स नॉट जस्ट दैट डॉक्टर| कल रात अपनी जान लेने से पहले मैंने हिमांशु को कहते सुना था कि इशानी मुझसे बदला लेने आ रही है| हिमांशु को इशानी के बारे में पता होना इम्पॉसिबल है’| रैना विचलित भाव से बोली|
डॉक्टर पोद्दार कुछ क्षण शान्ति से रैना को ऑब्जर्व करते रहे|
‘टेल मी समथिंग रैना, डू यू बिलीव इन पैरानॉर्मल्स’?
‘एबसल्यूटली नॉट डॉक्टर| आई नो आई एम गोइंग कुकू...मैं पागल हो रही हूँ’|
‘इट्स नॉट लाइक दैट रैना’|
‘बट माय माइंड इज़ प्लेइंग ट्रिक्स ऑन मी’|
‘टर्निंग बैक टू योर नैस्टी हैबिट्स वोंट हेल्प यू फाइट इट’|
रैना जानती थी कि डॉक्टर पोद्दार का इशारा उसकी स्मोकिंग की तरफ है लेकिन उसे उस समय भी सिगरेट की तीव्र तलब लग रही थी|
‘पर मैं क्या करू’?
‘देखो रैना, तुम्हारे रैना एट मिडनाइट के आईडिया को मैंने सपोर्ट किया था क्योंकि तुम्हे तुम्हारे डिप्रेशन से उबारने और तुम्हारे जीवन को एक पॉजिटिव नोट पर लाने में ये काफी सहायक सिद्ध हुआ था और इससे सोसाइटी को भी फायदा हुआ है| लेकिन अब ये एक्सट्रीम फिजिकल, मेंटल एंड इमोशनल प्रेशर तुम्हारे लिए खतरनाक साबित हो रहा है| अपने सब्जेक्ट्स से इम्पेथाइज़ करना अच्छा है लेकिन उसके लिए भी हमें लाइन्स ड्रा करनी पड़ती है, सीमा तय करनी पड़ती है’|
‘आप कहना क्या चाहते हैं डॉक्टर’?
‘यही कि तुम्हे आराम की और एक छुट्टी की ज़रूरत है| कुछ दिन के लिए रैना एट मिडनाइट को विराम दो, एक छुट्टी ले लो’|
‘बट दैट्स नॉट पॉसिबल डॉक्टर’| रैना ने प्रतिवाद करने की कोशिश की लेकिन डॉक्टर पोद्दार ने उसे चुप करा दिया|
‘नो इफ एंड बट! अगर दुनिया की मदद करना चाहती हो तो सबसे पहले अपनी मदद करो रैना| टेक ए ब्रेक’|
रैना ने अनमने ढंग से सहमती में सर हिलाया|
जब वो डॉक्टर पोद्दार के केबिन से बाहर निकली उस समय प्रत्युष, विकास और शशांक बाहर ही खड़े थे|
शशांक के हाथ में कुछ था जिसे वो पंखे की तरह हिला रहा था|
‘ये क्या है’? रैना ने पूछा|
‘टिकेट्स हैं, मुन्नार के| ज़बरदस्त जगह है, दिल खुश हो जाता है’| शशांक बत्तीसी दिखाते हुए बोला|
‘मतलब तुम तीनो पहले ही छुट्टी की प्लानिंग कर चुके हो’| रैना चौंकते हुए बोली|
‘बिलकुल| डॉक्टर पोद्दार ने हमसे पहले ही कह दिया था कि हमारी कमांडिंग ऑफिसर को छुट्टी चाहिए, तो जवान ब्रेक पर जाने को तैयार हैं’| विकास फौजी जवान के अंदाज़ में बोला|
रैना मुस्कुराए बिना ना रह सकी|
तीनो लड़के रैना को लेकर हॉस्पिटल के कॉरिडोर से बाहर की तरफ बढ़ गए|
रैना ने भरसक कोशिश की कि वो कॉरिडोर में रखी विजिटर्स चेयर की तरफ ना देखे|
वहां बैठी इशानी उसे ही घूर रही थी|

कहानी जारी है.

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