अधूरा बदला

रात अपनी पराकाष्ठा पर थी ,
पूर्णिमा का चांद किसी खूबसूरत परी की तरह अपनी खूबसूरती बिखेर रहा था ,
रात का सन्नाटा पूरे शहर को अपने आगोश में ले चुका था , कुछ कुत्ते भौंककर जरूर रात के सन्नाटे को भंग कर रहे थे ,

शहर से कुछ दूर एक शांत कॉलोनी में स्थित एक घर ,

घर के सभी लोग गहरी नींद के आगोश में ही थे लेकिन पता नहीं क्यों ?
अनामिका की आंखों से नींद आज कोसों दूर ओझल हो चुकी थी
करवटें बदल बदल कर थक चुकी थी अनामिका ।

खिड़की खुली थी , अनामिका एक-टक चांद को देख रही थी , लेकिन शाम की वह घटना रह रहकर उसे झकझोर रही थी ।
..........

दरअसल पिछले कुछ महीनों से उसकी जिंदगी बहुत रूखी सी होने लगी थी

अतुल, उसका पति जो बड़े अरमानों और सपने दिखाने के साथ उसे इस घर में ले आया था

वही अतुल आजकल जरा जरा सी बात पर उसके साथ झगड़ा करने लगता ,

कई कई दिनों तक दोनों में कुछ बात न हुई तो अनामिका खुद को बहुत अकेला महसूस करने लगी थी ,

अतुल का अपने ऑफिस की महिला कर्मियों के साथ देर देर तक घूमने जाना ,

हर दूसरे तीसरे दिन मीटिंग के बहाने डिनर घर में ना करना ,

अनामिका को ऐसा लग रहा था जैसे यही वजह है जो उसके और अतुल के बीच दीवार बनकर खड़ी हैं ।

पिछले कुछ दिनों से अनामिका अकेलापन दूर करने के लिए रोज शाम को बाहर घूमने जाया करती थी ,

रोज की तरह आज भी अनामिका शाम को टहलने निकली ,
घर से कुछ दूर स्थित पार्क में टहलना ,
फिर पास ही एक गन्ने के जूस की दुकान पर रूककर जूस पीना और लौटकर घर आ जाना

हर शाम की यही दिनचर्या थी ,
जो अनामिका को आने वाले कल के लिए बचाये हुए थी

लेकिन
आज कुछ स्पेशल हुआ था ,

स्पेशल यह कि , जब वह शाम को गन्ने की दुकान पर जूस पी रही थी ,
कि तभी जूस पैक करने के एक ऑर्डर पर दुकानदार ने कुछ अतिरिक्त जूस आर्डर के जूस में यह बोलकर मिलाया कि ,
भैया कुछ एक्स्ट्रा डाल दिया है .........
.......

एकदम अवाक रह गई थी तब अनामिका ,

बात तो सामान्य थी लेकिन एक्स्ट्रा शब्द उसे बहुत गहराई से जाकर चुभ गया था ।

जूस के पैसे चुकाकर अनामिका घर को चली गई लेकिन एक्स्ट्रा शब्द से उत्पन्न हुई ग्लानि शांत होने का नाम नहीं ले रही थी

आज उस घटना के बाद से उसका मन किसी भी काम में नहीं लग रहा था

अनामिका को ऐसा लग रहा था जैसे ना चाहते हुए भी उस का अतीत बार-बार उससे वो सारे जवाब मांग रहा है जिनके जवाब कभी समीर उससे मांगा करता और वह नजरे फेर कर तब समीर के सवालों को अनसुना कर दिया करती ।

लेकिन अब क्या ....
आज ना तो समीर था न हीं उसके वो ढेर सारे सवाल,
आखिर आज कैसे उसे वे सब सवाल याद आ रहे थे
.....
समीर
अनामिका का कॉलेज टाइम का क्लासमेट
एक ऐसा लड़का, जिसे दुनिया से कुछ खास मतलब नहीं रहता
या यूं कहें कि उसकी एक अपनी ही अलग दुनिया थी

फिर भी पता नहीं क्यों ,
तब समीर को देखकर अनामिका खुद की भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाती थी ।

यह युवावस्था का प्रभाव ही रहा हो या
प्यार का अंदेशा ...
लेकिन एक अजीब सा आकर्षण अनामिका को समीर की ओर खींचता था तब ।

प्यार वास्तव में अंधा होता है , अनामिका खो बैठी थी तब अपना दिल उस मामूली से दिखने वाले समीर पर ।

मध्यमवर्गीय परिवार का लडका , ढीले ढाले से कपडे और आडे तिरछे मुडे बाल , हमेशा खुद में खोया रहना ,

बस इतना ही था उस व्यक्ति का परिचय
और शायद यह जवानी की उम्र का ही प्रभाव था कि अनामिका ,
बिना सोचे-समझे समीर को अपना मान बैठी थी ।

नहीं तो आखिर किस बात की कमी थी उसमें ,
अच्छे घर की लडकी, खूबसूरती किसी से कम नहीं ,
घरवालों के बड़े-बड़े सपनों को पूरा करने की राह पर चलती अनामिका ,
कोई ऐसा ऐब भी नहीं कि समीर जैसे आम लडके को दिल दे बैठना कोई मजबूरी रही हो ,

लेकिन फिर भी खो गई थी अनामिका तब समीर के साथ ।
दोस्ती के पहले ही दिन से समीर ने अपना सब कुछ अनामिका को समर्पित कर दिया था ,
बस सिवाय इसके कि वह अन्य बायफ्रेंड की तरह उसे कभी भी कहीं घुमाने नहीं ले जा पाएगा और ना ही कभी कोई गिफ्ट दे सकेगा , और न ही इन सब की चाहत रखेगा

अनामिका खुश थी
युवावस्था का प्रभाव अपने चरम पर था और समय के साथ-साथ अनामिका और समीर की दोस्ती भी गहरी होती गई ।

दोनों रोज वादा करते जन्मों-जन्मों तक साथ रहने का , दोनों एक दूसरे में खो चुके थे

सब कुछ अच्छा ही चल रहा था लेकिन समीर के साथ अन्धे प्यार के रास्ते पर चलते चलते अनामिका को महसूस होने लगा कि समीर वास्तव में उसके लायक लडका नहीं है
कहां तो वह कभी अपने लिए सपनों के राजकुमार की कल्पना किया करती थी और कहां यह मामूली सा दिखने वाला समीर ।

उसे लगने लगा कि जैसे वह खुद को धोखा दे रही है ,
समीर के साथ अपनी जिन्दगी की कल्पना करके।

समीर का आकर्षण अब धीरे-धीरे उसके दिल से हटने लगा था ,

उसे समीर का मामूली सा चेहरा अब साफ साफ दिखने लगा था ,
अनामिका को महसूस हुआ कि जिसे वह प्यार समझ कर दिल में छुपाए बैठी थी दरअसल वह तो केवल युवा अवस्था का आकर्षण था ,
और अब वह कुछ दिनों के बचपने के कारण पूरी जिन्दगी तो बरबाद नहीं कर सकती थी न ,

इसलिए अब वह अक्सर समीर से दूर रहने की कोशिश किया करती

वहीं दूसरी ओर, बेचारा समीर ..
जिसे लगता कि अनामिका बस उसकी सादगी को देख कर उसे प्यार करती है ,

समीर ने बचपन से यही सोचा था कि कोई तो लड़की होगी , जो उससे उसकी शक्ल से नहीं उसके दिल को देख कर प्यार करेगी
और जब से अनामिका समीर की जिंदगी में आई थी तब से समीर को जैसे मन मांगी मुराद मिल चुकी थी ।

वह दिल की सब बातें अनामिका को बताता और कोशिश करता कि अनामिका पर आने वाली हर समस्या से वह खुद निपटे ,

लेकिन अफसोस
समीर प्यार के मामले में इतना सीधा सादा निकला कि अनामिका के क्षणिक आकर्षण को समीर सच्चा प्यार समझने की भूल कर बैठा।

उसने तब सपने में तक नहीं सोचा था कि अनामिका के बिना उसकी जिंदगी कैसी होगी ,

अब अक्सर जब कभी अनामिका कॉलेज में समीर को देखती तो दूसरी ओर निकल जाया करती ,
कालेज में समीर के साथ रहना अनामिका को अब बिल्कुल अच्छा न लगता,
लेकिन दिक्कत यह थी कि अनामिका समीर से पीछा कैसे छुड़ाए,

समीर जो इन बातों से बिल्कुल वाकिफ नहीं था, अनामिका का उन दिनों बहुत परेशान सा दिखना, समीर के साथ बात न करना ,
समीर को ऐसा लगता कि जैसे अनामिका किसी बड़ी समस्या में है और उसे अनामिका की मदद करनी चाहिए ,

अनामिका का दिल बहलाने के लिये जब भी मौका मिलता , समीर उसे ख्यालों की मीठी सी दुनिया दिखाता , उसे क्या पता था कि , केवल ख्यालों में ही सपने दिखाने से अनामिका कभी खुश नहीं थी ,

और समीर तब इतना खुशनसीब था भी नहीं कि
अनामिका को वास्तव में वो सारी खुशियां दे पाता ,
जिनकी कल्पना वह अक्सर किया करता ।

और आखिर कब तक खुश रह पाती अनामिका ,
समीर की उस ख्याली दुनिया में ।

एक दिन अनामिका ने खुद को आजाद कर ही दिया ,

समीर बहुत परेशान था तब कि
कहीं उसने अनजाने में अनामिका के साथ कुछ गलत तो नहीं कर दिया ,
तभी जो अनामिका समीर के लिए अपना सब कुछ देने की बात किया करती थी ,
आखिर वह कैसे इतने आराम से यह बोल सकती थी कि मैं तुम्हे स्वीकार नहीं कर पा रही हूं ।

वो दिन समीर के लिये काले तूफान की तरह थे ,
जिनमें उलझने के बाद समीर को बाहर आने का रास्ता ही नहीं दिख रहा था ,

उसने अनामिका से जानने की बहुत कोशिश की ,
कि आखिर क्या वजह थी उसे छोड़ने की ।

अनामिका की तरफ से जब कोई जवाब नहीं मिलता तो बेचारा समीर यह सोचता कि
अनामिका यह सब अपने परिवार की खुशी के लिए कर रही है
उसे तब अनामिका पर खुद से भी ज्यादा यकीन था ,
पर बेचैनी भरे उन दिनों की वजह से समीर यह सब ज्यादा दिन नहीं झेल सका ,

और उस समीर ने , जिसके दिल में निश्छल अनामिका बहुत गहराई में बस चुकी थी

उसने इस दुनिया को अलविदा कह दिया ...................

उन दिनों जब अनामिका समीर के बंधन से मुक्त होकर आजादी की खुशियां मना रही थी ,
तब समीर कई बार उससे आंसू भरे निवेदन किया करता कि ,

" अनामिका, बस मुझे कुछ एक्स्ट्रा दिन दे दो ,
ताकि मैं अपने आप को जिंदा रख सकूं ।
तुम्हारे बिना मैं जी नहीं सकता "

लेकिन अनामिका ,

समीर की बातों को तब कुछ दिनों की समस्या मानकर यूं ही हवा में उडा दिया करती ।

आखिर आजादी किसे पसंद नहीं होती ...........

और आज जब दुकानदार के मुंह से उसने " एक्स्ट्रा" शब्द सुना ,
तो उसे समीर का वो आंसू भरा चेहरा दोबारा याद आ गया ।

उसका दिल बार बार उसे बस एक सवाल पूछ रहा था कि , क्या वो इतनी मतलबी थी ,कि समीर के आंसू भरे निवेदनों के बाद भी वह कुछ एक्स्ट्रा दिन नहीं दे सकी ।

आज शाम से बार बार समीर के वो अंतिम शब्द "गॉड ब्लेस यू " याद आ रहे थे

और उसे लग रहा था जैसे ईश्वर उसके अतुल को उससे छीनकर .........

समीर का बदला ले रहे हैं ।










क्या .....
अनामिका को उसकी गलती का अहसास कराने के लिये उससे बदला लेना चाहिये या ...
इसे अन्जाने में हुई गलती समझकर माफ करना चाहिये ....
????




कहानी पर आपके अमूल्य सुझावों की प्रतीक्षा रहेगी

hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.