बधाई हो , बेटी हुई है .. ऐसा कहते हुए डॉक्टर बाहर आई तो बेटी के पिता के चेहरे पर खुशी छा गयी । हो भी क्यों न , पहली संतान जो थी ।
उसका नाम उन्होंने खुशी रखा ।
खुशी के पापा की सारी खुशियाँ खुशी से ही जो थी ।
समय के साथ खुशी बड़ी होने लगी । खुशी को डांस करना बहुत अच्छा लगता था । टीवी पर गाना लगते ही ऐसे थिरकती थी जैसे कोई नही देख रहा । बस डांस ही खुशी की खुशी था ।
घरवालो को भी यह दिख गया कि खुशी कितना अच्छा कॉपी करती है ।
जो भी स्टेप देखती हु-ब-हु वही स्टेप कर देती थी ।

स्कूल में न जाने कितने इनाम जीते उसने , कोई भी फंक्शन हो , खुशी के डांस के बिना पूरा नही होता था ।
एक बार उसके स्कूल में एक नए डांस टीचर आये । उन्होंने जब खुशी का डांस देखा तो उसे देखते ही रह गए ।


बहुत अच्छा डांस करते हो बेटा , नाम क्या है आपका ? - सर ने पूछा।

थैंक्यू सर , मेरा नाम खुशी है ।

किससे सीखा बेटा आपने डांस ?-सर ने फिर प्रश्न किया ।

सर हमने सीखा नही है किसी से , बस टीवी पर देख कर ही करते हैं ।

फिर भी इतना अच्छा करते हो , कीप इट अप बेटा । मैं खुद डांस क्लास चलाता हूँ ।अगर आप चाहो तो वहां सीख सकते हो । आपमे बहुत काबिलियत है । इसको खाली ना जाने देना ।

जी सर , हम घर पूछ लेंगे आज ।

स्कूल की छुट्टी के बाद खुशी का घर -


मम्मी , आपको पता है नए डांस टीचर आये हैं, उन्होंने बहुत तारीफ की मेरी । और पता है , वो अलग से सिखाते भी हैं । मेरा बहुत मन है माँ , जॉइन कर लूँ क्या ? प्लीज़ प्लीज़ माँ , मेरी प्यारी माँ । - खुशी एक ही सांस में सब कह गयी ।

खुशी की मां- अरे सांस तो लो , और तुम्हे पता है ना तुम्हारी दादी को नही पसन्द तुम्हारा डांस करना , हम्म .. फिर क्यों पूछ रही हो ।

खुशी - माँ दादी को समझा लेंगे ना , आप तो हाँ बोलो , दादी को पापा सम्भाल लेंगे ।

अच्छा ठीक है ,चली जाना .. बस ।

अपनी मम्मी से ऐसा सुन कर खुशी के चेहरे पर रौनक आ गयी ।

शाम को जब पापा आये तो खुशी में उनसे भी पूछा ... थोड़ी न नुकर के बाद पापा ने ये कह कर अनुमति दी कि दादी को पता नही चलना चाहिए ।

अब खुशी स्कूल के बाद रोज डांस क्लास जाने लगी ... दादी ने पूछा तो ट्यूशन लगाई है ऐसा कह दिया ।


खुशी के सर ने उसे सिखाना शुरू किया ..हिप हॉप , ब्रेक डांस , कंटेम्पररी .. ये तीनो ही डांस फॉर्म खुशी को बहुत अच्छे लगते थे । मन लगा कर वो डांस सीखती रही और साथ साथ पढ़ाई भी करती रही ।

खुशी अब ग्यारहवीं क्लास में आ गई थी ।
एक रोज जब वो क्लास में डांस सीख रही थी तो उसकी गली के एक औरत ने उसे देख लिया ।
बस ... फिर क्या था । घर आते ही सबसे पहले उसने खुशी की दादी को सब बता दिया ।

जब शाम को खुशी घर आई तो उसकी दादी बाहर ही बैठी थी ।

तड़ाक .. एक थप्पड़ की आवाज़ के साथ खुशी का स्वागत हुआ ।

खुशी कुछ समझ पाती उससे पहले एक और थप्पड़ लगा उसे ।

पर दादी मैने किया क्या है ? बस इतना ही पूछ पाई खुशी ।


किया क्या है .. सारे खानदान की इज़्ज़त का तमाशा बनवा रही है और पूछती है किया क्या है । नही जानती तू .. हमारे घर की लड़कियां ये नाच गाना नही करती । फिर भी इतने दिन से ट्यूशन का बहाना बना कर वहाँ डांस सीखने जाती थी ।
अरे शर्म ना आई तुझे ज़रा सी भी ये करते हुए । खबरदार जो आज के बाद वहाँ गई । टांगे तोड़ दूंगी .. तेरे डांस के भूत को न उतारा तो कहना । जा अंदर ।


खुशी ने गुस्से से कहा - दादी .. अपने शौक को पूरा करने से इज़्ज़त चली जाती है क्या । मेरा प्यार है डांस करना .. मैं नही छोडूंगी इसे ।

जुबान लड़ाती है .. ठहर .. आने दे तेरे बाप को , उसका कहा तो मानेगी न .. अब वही तुझे रोकेगा ।

शाम को जब खुशी के पापा घर आये तो दादी ने कोहराम मचा दिया ।

हे भगवान .. मेरी तो इस घर मे इज़्ज़त ही नही है .. मेरा अपना बेटा मुझसे झूठ बोल कर इस लड़की को डांस सीखने भेजता रहा... उठाले भगवान अब तो .. इससे पहले गांव मोहल्ले के लोग आकर इस लड़की की वजह से हमे भला बुरा कहे .. उठाले ।- ऐसा कह दादी सर पकड़ बैठ गयी ..बीपी भी बढ़ा लिया ।


दादी को ऐसे देख कर खुशी के पापा ने उसे डांस करने और सीखने से मना कर ही दिया ।

अब खुशी गुमसुम सी रहने लगी । उसके पापा ने उसे समझाया .. बेटा दादी की बात भी ठीक है , हम जहां रहते है यहां डांस करने वाली लड़कियों को अच्छा नही समझा जाता ।उन्हें तुम्हारी और मेरी इज़्ज़त की परवाह है बस इसलिए इतना गुस्सा हुई । आप मेरे प्यारे बेटे हो ना .. तो ऐसे गुमसुम क्यों रहते हो , आप खुश नही हो इसलिए आपके पापा भी खुश नही है ।

खुशी ने पापा की बात समझते हुए कहा - पापा आप सही कह रहे हो । मुझे बहुत पसंद है डांस , पर आप लोगो की खुशी से ज्यादा नही ... अब से नही करूँगी मैं बाहर कहीं डांस .. प्रॉमिस ।

ऐसा कह कर खुशी पापा के गले लग गई .. पर अंदर ही अंदर बहुत दुखी थी वो ।

अक्सर वो ऊपर देख कर अपने दिल की बातें करती थी ...
भगवान जी से शिकायत करती थी ।

" क्या भगवान जी .. एक ही तो शौक है मेरा .. उससे ही दादी को दिक्कत है .. ऐसे थोड़े होता है पापा के लिए छोड़ रही हूँ हाँ मैं ... बाद में मत बोलना पापा की अच्छी बेटी नही हूँ "

इस सब से ध्यान हटाने का एक ही तरीका था उसके पास.. की वो पढ़ाई में सारा ध्यान लगाए ।

2 साल बीत गए ... जब बारहवीं का रिज़ल्ट आया तो खुशी ने पूरे जिले में टॉप किया ।

सब बहुत खुश हुए उसकी इस उपलब्धि से .. खासकर उसके पापा ।

उन्होंने खुशी से कहा- बेटा मैं बहुत खुश हूँ .. जो चाहो मांग लो आप ।

पक्का ना पापा ..मना तो नही करोगे ?-खुशी ने थोड़ा सोचते हुए कहा

हाँ बेटा.. आप मांगो तो ,मैं जरूर दूंगा आपको वो ।

तो पापा .. मैं यहां के कॉलेज में नही .. यूनिवर्सिटी में पढ़ना चाहती हूँ । - खुशी को पता था .. कि उसकी दादी उसे ये ऑल गर्ल्ज कॉलेज छोड़ कर को-एड में पढ़ने की इजाज़त नही देंगी ..फिर भी हिम्मत करके उसने यही मांग लिया ।


पापा ने थोड़ा सोच कर कहा .. ठीक है बेटा .. आपका जहां मन है वहीं पढ़ना ।

और दादी ? -खुशी ने डरते हुए कहा ।

उनको मना लूंगा मैं ।- खुशी के पापा ने कहा ।


अगले दिन --


दादी अपनी माला लेकर नाम जप कर रही थी । जैसे ही उनकी माला सिमरन पूरी हुई , खुशी के पापा ने बात छेड़ दी ।

माँ खुशी के काफी अच्छे नम्बर आये है ना ।

हम्म .. आये तो हैं । शुक्र है उस फालतू के डांस वांस को छोड़ कर पढ़ने लिखने लगी ये लड़की .. वर्ना तो खानदान की इज़्ज़त मिट्टी में मिला देती ये ।- खुशी की दादी ने मुँह बिचकाते हुए कहा ।

खुशी के पापा हिम्मत करके बोले- क्यों ना खुशी पढ़ने के लिए यूनिवर्सिटी जाए , इतने अच्छे नम्बर है .. आराम से दाखिला मिल जाएगा । थोड़ा बाहर की दुनिया भी देख लेगी ।

कोई जरूरत नही है दुनिया देखने की .. यहीं दाखिला कराओ इसका और घर के काम सिखाओ .. ससुराल में नम्बर काम नही आएंगे । -दादी ने जैसे हुक्म दिया हो ।

खुशी के पापा ने प्यार से कहा- माँ .. इतने दिनों से उसने हमारे लिए डांस छोड़ रखा है ..पढने में इतना ध्यान लगाया .. शादी वादी होती रहेगी .. काम भी सीख लेगी .. पर अगर अब 3 साल अच्छे से पढ़ ले तो क्या पता अपने पैरों पर खड़ी हो जाये । आगे किसी के सहारे की तो जरूरत ना रहेगी उसे .. क्या पता अगला घर कैसा हो
इतनी इज़ाज़त तो उसे मिलनी ही चाहिए ना ?

अब दादी थोड़ी पिघली .. ठीक है ठीक है ... भेज दो .. पर एक बात सुन लो ... अगर इसने वहाँ जाकर सोचा कि यहां कौन है देखने वाला .. ओर डांस वांस में भाग लिया .. तो कह देती हूं .. तभी वापस बुला लुंगी और शादी कर दूंगी ।

खुशी ये बातें सुन रही थी ..उसने मन ही मन चैन की सांस ली ... डांस तो यहां भी बंद था उसका .. कम से कम अब 3 साल अच्छी जगह तो पढ़ेगी ,यही सोच कर वो खुश थी ।

" थैंक्यू भगवान जी ... मेरे डांस छोड़ने के बदले कुछ तो मिला मुझे ... थैंक्यू सो सो मच " ऊपर पर देख कर खुशी ने कहा।


खैर यूनिवर्सिटी में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हुई .. और जैसी उम्मीद थी पहली ही लिस्ट में खुशी का दाखिला हो गया ।

खुशी को होस्टल फैसिलिटी भी मिल गयी .. उसे होस्टल छोड़ने उसकी माँ दादी पापा तीनो आये ।

उसकी दादी ने फिर हिदायत दी - देख लड़की .. बस पढ़ने के लिए छोड़ रहे हैं तुझे यहां ..कोई शिकायत न आये समझी । और डांस वांस का नाम भी नही लेना ।

जी दादी -खुशी ने नीचे देखते हुए कहा और मन ही मन सोचा.. कुछ नही करूँगी पर मस्ती तो बहुत करूँगी ।


उसे होस्टल छोड़ कर सब घर आगये ।खुशी होस्टल के अंदर अपना रूम ढूंढने लगी .. रूम नम्बर 143 , जो आने वाले एक साल के लिए उसका घर होने वाला था ।

रूम ढूंढते ढूंढते अचानक खुशी ने ऊपर देखा - " भगवान जी .. अच्छे दोस्त देना हाँ मुझे यहां पर , कभी गन्दे मन्दे दे दो .. रूममेट भी अच्छी देना .. और और ..हाँ .. टीचर्स भी अच्छे देना मस्त जाने चाहिए ये 3 साल .. ओके "

अपने रूम पहुंच उसने सामान रखा , अलमारी में कपड़े जचाये , खाने का जो भी सामान दिया था उसे टेबल पर रखा .. बेड पर चद्दर बिछाई और फ्रेश होने चली गयी .. जब वापस आयी तो उसकी रूममेट भी आ चुकी थी ।

हाय .. आई एम खुशी -कहते हुए खुशी ने हाथ बढ़ाया ।

हेलो ..आई एम सिमरन ।

औपचारिक बात के बाद दोनों मेस चली गयी ।

धीरे धीरे खुशी की दोस्ती काफी लड़कियों से हो गयी ।

एक बार क्लास के लिए लेट होने पर खुशी बाहर ही क्लास खत्म होने का इंतज़ार कर रही थी ..तभी उसकी क्लास के 2-3 लड़के भी आये और इंतज़ार करने लगे ।

उनमे से एक ने उससे बात शुरू की - आप तो हमेशा टाइम पर आते हो आज लेट कैसे .. बाय द वे आई एम सूरज .. सूरज शर्मा।
दिखने में बहुत अच्छा नही तो कम भी नही था ... ठीक ठाक दिखता था .. अच्छी हाइट , सांवला रंग ।

हाँ आज मेस में देर हो गयी ..खुशी .. खुशी चौधरी ।

बाकी दोनो लड़को ने भी परिचय दिया .
मेरा नाम संजय है पर सब संजू बुलाते हैं ।
और मैं दीपक .. दीपक के इतना बोलते क्लास खत्म हो गयी ..
अब वो चारो भी क्लास में चले गए ।

तभी क्लास में सीनियर्स आये .. फ्रेशर्स पार्टी का निमंत्रण लेकर ..

पूरी क्लास में खुसर फुसर शुरू हो गई ।

सूरज ने खुशी से पूछा- तुम आओगी ?

हाँ आउंगी यार ..और तुम तीनो ?

हम भी आएंगे यार .. पार्टी भी छोड़ने की चीज होती है क्या ..कहकर सब हसने लगे ।


फ्रेशर्स पार्टी --

सीनियर्स ने अच्छा इंतज़ाम किया था , पार्टी हॉटेल ब्लू मून में थी ।
धीरे धीरे सारे जूनियर्स पहुंचे ।
खुशी भी अपने दोस्तों .. सिमरन , अनु और जिया के साथ पहुंची ।
सूरज , दीपक और संजू भी आगये ।
खुशी को देख कर वो उसके पास आगये ।खुशी ने सबका परिचय आपस मे कराया ।पार्टी में वो सातों साथ ही रहे ।
अलग अलग गेम्स हुए .. खूब मस्ती हुई ।

खुशी और जिया सारे गेम्स के आखिर तक पहुंचे तो आखिरी टास्क था डांस फेस ऑफ ... खुशी को सबने इतना बोला .. पर वो यही कहती रही - मुझे डांस नही आता बिल्कुल भी । और वो स्टेज से नीचे आ गयी ।
सब होने के बाद मिस ओर मिस्टर फ्रेशर का खिताब जिया और सूरज को मिला ।


इस फ्रेशर्स का फायदा ये हुआ कि ये सातों अच्छे दोस्त बन गए ।
हमेशा साथ रहना.. खूब मस्ती करना । एग्जाम आते ही सब ऐसे जुट जाते थे बस पूछो मत .. पूरा दिन लाइब्रेरी में पड़े रहना..एक किसी काम से बाहर जाता था तो मतलब सबकी चाय और समोसा वही ले कर आयेगा।

ऐसे करते करते 2 साल निकल गए ।

फाइनल ईयर में इनकी दोस्ती और पक्की और मस्तियाँ और ज्यादा होगयी।

पर इस सब मे जो कमी थी वो थी कि चाहे जो भी हो ... खुशी डांस नही करती । होस्टल में जब सब रूम में मस्ती करते तब भी वो बस गाने बदलती ।

खैर देखते देखते 5 सेमेस्टर निकल गए ।

क्लास रूम --

सूरज- यार कितने दिन से क्लास लगा रहे हैं ..बंक करते हैं ना आज । पका देते हैं यार शाम तक सब ।

जिया - यार अटेंडेंस का पंगा हो जाता है फिर .. थोड़े दिन और लगा लेते हैं .. फिर किया करेंगे बंक ।

दीपक - रहन दे तू तो ... लास्ट सेमेस्टर है हमारा.. इसके बाद कौन बोलेगा तुझे बंक करने को । चुप चाप बैग उठाओ सब और निकलो इससे पहले सर आएं।

संजू- आहो ... ठाओ र बैग आपणे आपणे । चलो ।


असल मे सूरज को ये आखिरी टाइम खुशी के साथ बिताना था ।
लास्ट सेमेस्टर आ गया था पर अब तक वो अपने दिल की बात खूशी को बोल नही पाया था ।
आज उसने सोच रखा था कि मौका मिलते ही खुशी को अपने दिल की बात बोल देगा ।

सब क्लास से बाहर चले जाते हैं .. और अपने फेवरेट जगह चले जाते हैं .. यानी शहर का एकमात्र अच्छा पार्क ।
वहां यूनिवर्सिटी के बच्चे ही ज्यादातर मिलते थे ।सबका ही फेवरेट पार्क था वो ।

सब एक जगह देख कर बैठ गए .. बातें शुरू हुई ।

तुम्हे याद है हम सब कैसे दोस्त बन थे ? दीपक ने पूछा ।

यू ऑल शुड थैंक मी .. मेरी वजह से हम सब दोस्त बने ।मैं लेट हुई थी तभी तो मेरी बात तुम तीनो से हुई .. और फिर पार्टी में मैंने... खुशी दी ग्रेट ने तुम सबकी बात कराई । - खुशी ने अपने शर्ट के कॉलर को पकड़ के ऊपर करते हुए कहा ।

ओहो ... बस बस ग्रेट खुशी जी ... अपनी तारीफ ज्यादा नही किया करते । - जिया ने कहा ।

अनु यार तू बता , मैंने ज्यादा तारीफ की है कोई ।

ना ना ..कहाँ ,और कर ले ..हम लपेट रहे हैं ..फेंक ले थोड़ा और ।- अनु ने अपने हाथ पर दूसरे हाथ से कुछ लपेटने का इशारा करते हुए कहा ।

सब इतनी जोर से हँसे .. आसपास वाले भी देखने लगे गए ।


" नॉट फेयर भगवान जी .. क्या गन्दे दोस्त दिए है मुझे.. देखो या तो इनको ठीक करदो ..नी तो मैं नए दोस्त ढूंढ रही " खुशी ने ऊपर देखते हुए कहा ।


अच्छा बच्चू ... हमसे परेशान हो गयी तू अब हाँ .. उठाओ यार इसको - सिमरन ने कहा ..उसके इतना कहते सबने उसको उठा लिया , किसी ने हाथ पकड़ लिए किसी ने पांव
.. और सबको उसको झुलाने लगे ..
एक ...दो ... तीन ।

क्या कर रहे हो यार .. गिर जाउंगी मैं ... देख रहे हैं सब ।
-खुशी ने कहा ।


उनकी इन हरकतों को कोई और भी देख रहा था .. पास में एक ग्रुप बैठा था ..सिर्फ लड़कों का .. किसी एक कि नज़रें बस खुशी की हरकते देख रही थी ।

सूरज - कुछ खाना है .. कुल्फी ले आऊं मैं ?
हाँ ले आ सबकी ..गर्मी भी बहुत है आज तो -सिमरन बोली ।

मैं अकेला कैसे लाऊंगा .. खुशी तू आजा साथ -सूरज ने खुशी को बुलाने के लिए जान बूझ कर कहा ।

चल पानी भी पीना है मुझे .. कहकर खुशी चली गयी ।


सूरज ने हिम्मत करके बात शुरू की -
बहुत जल्दी चला गया ना टाइम ...

हम्म..पर फिर भी यार ..ये 3 साल बेस्ट थे .. इससे अच्छा नही हो सकता था कुछ । - खुशी ने जवाब दिया ।

हम्म ... बस मै गर्लफ्रैंड नही बना सका .. हाहाहा - सूरज हँसते हुए बोला ।

तो अब बना ले ..अभी तो है टाइम , है कोई पसंद तो बोल ..बात करा दूंगी-खुशी ने भी हस कर कहा।

है तो ... पर .... सूरज ने आधी बात छोड़ दी ।

पर क्या ? - खुशी ने कहा ।

पर यार .. वो पता नही पसन्द करती होगी या नही । - सूरज ने कहा ।

अरे .. तुझे कौन ना करेगी पागल .. अच्छा खासा दिखता है .. कूल है .. स्मार्ट है .. सेंसिबल है .. और क्या चाहिए किसी को -खुशी ने उसे मानो समझाते हुए कहा ।

तो बोल दूं उसको आज ? सूरज ने खुशी आंखों में देख कर पूछा।

ऑफ कोर्स यार .. बोल दे ..क्या तू भी ... खुशी ने कहा ।

तो मिस खुशी चौधरी .. विल यु बी माई गर्ल फ्रेंड ?-सूरज ने घुटनो पर बैठ कर कहा ।

खुशी हैरान सी हो गयी ...' यार ..मैंने कभी सोचा ही नही ये सब ... बस दोस्त ही समझा तुझे .. आई एम सॉरी ... पर मैं रिलेशन शिप के चक्कर मे नही पड़ना चाहती .. हम दोस्त ही ठीक है ...है ना ? '

हाहाहा ..क्या शक्ल हो गयी तेरी ... खुशी चौधरी को मजाक भी समझ नही आता .. हाहाहा .. पागल है यार तू सच मे .. सूरज का दिल टूट चुका था .. फिर भी दोस्ती बचाने के लिए उसने इसे बस एक मजाक बता दिया ।

तू ना पिटेगा किसी दिन मुझसे ...- खुशी की नाक गुस्से से लाल हो गयी ।

अरे खुशी जी ..कुल्फी खाइये और ठंडी हो जाइए .. खुशी के हाथ मे कुल्फी पकड़ाते हुए सूरज ने कहा ।

सबके लिए कुल्फी लेकर दोनों चले गए ।

तुम कुल्फी लेने गए थे कि बनाने गए थे - संजू ने कुल्फी लगभग छीनते हुए पूछा।

हाँ इसको दे दो पहले .. ये मर गया बिना कुल्फी - कहकर दीपक ने और बाकी सबने भी कुल्फी ले ली ।

वो मजाक वाली बात मत बताना किसी को - खुशी ने धीरे से सूरज के कान में कहा।

नही बता रहा .. तू भी क्या याद रखेगी .. सूरज ने भीगी आंखे छुपा कर कहा ।


खैर .. शाम होने लगी तो ये सब यूनिवर्सिटी वापस आ गए ।

होस्टल चले क्या यार ? खुशी ने पूछा ।

चाय पी लें एक बार कैंटीन में .. फिर चलते हैं । -सिमरन ने कहा ।


सब कैंटीन जाकर चाय पीने लगे ।

गानों की आवाज़ आ रही है तुम्हे ? - दीपक ने पूछा ।

आ तो रही है यार ..कहाँ चल रहे होंगे इतने तेज़ आवाज़ में..ओये .. शादी तो नही आज किसी की यहां आस पास .. चले क्या ..खा पी लेंगे कुछ - संजू ने अपने अंदर का भुक्कड़ जगा कर कहा ।

सारा दिन खाना खाना ..भुककड़ .. चलो देखते हैं कहाँ चल रहे हैं ये - अनु बोली .. सब चल पड़े आवाज़ की तरफ ।


कुछ लड़के डांस कर रहे थे .. और कुछ स्टूडेंट्स उन्हें देख रहे थे ।

काफी अच्छा डांस कर रहा था एक लड़का उनमे ।

खुशी खुद को रोक ना पाई और उसने चिल्ला कर कहा - यार सही जारहे हो .. पर तुम्हारे पैर की उंगलियां सीधी नही रहती .. उनको सीधा करो तो और अच्छा लगेगा ।


अपने काम से काम रखो समझी ... डांस है ये .. तुम्हारे जैसे लोगों से सीखूंगा अब मैं .. इतने बुरे दिन नही आये मेरे ... हाहाहा - उस लड़के ने कहा और हंसने लगा ।
उसके दोस्त .. और बाकी जो भी देख रहे थे वो भी हसने लगे।


खुशी को बहुत बुरा लगा .. सिमरन ने खुशी को धीरे से कहा - चल यहां से .. इन्सल्ट हो जाएगी नही तो ।


खुशी थोड़ी देर खड़ी रही ... फिर ऊपर देख कर बोली - सॉरी भगवान जी .. आज पहली बार वो प्रोमिस तोड़ रही हूँ

सुन ओये ... इतना ही बड़ा तीस मार खान है ना .. मेरे साथ एक डांस फेस ऑफ कर के देख - खुशी ने उसकी आँखों मे आंखे डाल के कहा ।

मैं तो कर लूंगा मैडम .. पर उसके बाद बेइज़्ज़ती होगी तो भाग ना जाना ..हाहाहा ।

देख लेंगे वो तो किसकी बेइज़्ज़ती होती है और कौन भागता है ...तभी अनु ने कहा - रहन दे खुशी .. देखा ना अभी इसका डांस .. क्यों ख़ामख़ा पंगे में पड़ रही है ।चल यहां से ।


मैं कहीं नही जा रही .. और तेरा स्टोल दे मुझे .. मुंह पर बाँधने के लिए .. और याद रखना .. कुछ भी हो .. कोई मेरा नाम नही लेगा ।ओके - इतना कह कर खुशी ने मुँह पर स्टोल बांध लिया और उस लड़के को इशारा किया डांस शुरू करने का ।


उस लड़के ने अपने एक दोस्त को बोला गाना शुरू करने को .. और डांस शुरू किया ,
शुरुआत में ही उसने अपसाइड डाउन जम्प किया , क्या डांस कर रहा था वो .. दोनो हाथ नीचे रख कर उल्टा हो कर अपनी टांगों से हवा में जम्प कर रहा था । एक के बाद एक स्टंट .. आधा गाना होने पर उसने खुशी को इशारा किया डांस करने का।

सिमरन ने खुशी के कान में कहा- खुशी अभी भी टाइम है यार .. ये बहोत फाड़ डांसर लग रहा है , निकल लेते हैं .. चल ।

ख़ुशी ने सिमरन को चुप रहने का इशारा करके कहा - कुछ भी हो जाये ... मेरा नाम नही लोगे तुम सब ... ओके ।


खुशी अब बीच मे थी .. उसने डांस शुरू किया ... आते ही एक हाथ नीचे रख उल्टा होकर हवा में अपनी टांगों से जम्प करना शुरू कर दिया ।
इसके बाद जो स्टंट उसने किये , सब लोग जो अब तक उस लड़के की तारीफे कर रहे थे मुँह बाए खुशी को देखने लगे ।

यहां तक कि खुशी के दोस्त भी ये देख कर हैरान थे कि जो लड़की पार्टी में हल्का फुल्का डांस नही करती थी ,यहां ऐसे स्टंट्स कर रही है ।


उसे देख कर दीपक बोलने को हुआ - कम ऑन खुशी लेकिन तभी सिमरन ने सबको चुप करा दिया और कहा कोई खुशी का नाम नही लेगा ।


इसके बाद अलग अलग गाने लगते रहे ... खुशी हर कहीं उस लड़के पर भारी पड़ रही थी ।


देखते देखते भीड़ बढ़ गयी । सब लोग ये डांस फेस ऑफ देखने आने लगे ।
एक गाने के आधे पर वो लड़का डांस करता ,बाकी पर खुशी ..खुशी जब भी रुकती तो उसे लगता कोई उसे ही देख रहा है । उसने सामने देखा ... एक लंबा ,पतला छरहरा सा लड़का ,बालो में तेल लगा था ,चश्मा पहने हुए था .. ओर उस लड़के का डांस देखने की जगह खुशी को देख रहा था ।


जब खुशी की नज़र उस पर पड़ी तो वो झेंप सा गया .. और नीचे देखने लगा ।
तब तक फिर से खुशी की बारी आगयी डांस करने की ...इसके बाद जितनी बार भी खुशी ने उसकी तरफ देखा वो उसे अपनी ही तरफ देखता मिला ।


ये डांस ऑफ लगभग 1:30 घण्टे तक चला ... आखिर में वो लड़का थक कर बहुत सिंपल स्टेप करने लगा ... पर खुशी थक ही नही रही थी , अब भी उसी जोश से डांस कर रही थी ।
शायद ये 5 साल जब उसने बिल्कुल डांस नही किया .. उसकी सारी कमी पूरी कर रही थी ।

वैसे भी जिससे आपको प्यार हो उससे आप थकते नही हो ...और ये प्यार तो 5 साल से दूर था ।

आखिर में जब खुशी डांस कर रही थी , तब वो रुकी ही नही ,सब लोग तालियां बजाने लगे ,जब खुशी रुकी तब तक सब लोग उसे तालियां बज कर प्रोत्साहित कर रहे थे.. वो लड़का उसके सामने आके झुक के सलाम करने लगा ।

यू डांस मच मच बेटर देन मी ... रियली , कैन आई नो यूअर नेम ? - उसने पूछा ।

नो - खुशी ने जवाब दिया और अपने दोस्तों को कहा जल्दी निकलो अब यहां से ।

वो सब चले जाते हैं ... आगे होस्टल के साथ वाले पार्क में जाकर खुशी कहती है .. थोड़ी देर यहां बैठ जाते हैं ..मैं ज़रा पानी पीकर आती हूँ ।

वाटर कूलर के पास -

हाई .. - खुशी ने पलट कर देखा तो वही पतला सा चश्मे वाला लड़का सामने खड़ा था।

खुशी ने कोई जवाब नही दिया और पानी पीने लगी ।

आप बहुत अच्छा डांस करती हो । - उसने फिर से कहा।

थैंक्यू -खुशी ने जवाब दिया और जाने लगी ।

मैंने आपको आज पार्क में भी देखा था , आप आपके दोस्तों के साथ थी । - उसने फिर से कहा

तो ? - खुशी ने थोड़ा गुस्सा होकर कहा ।

आप गलत मत समझना प्लीज़ ... मैं 1st ईयर का स्टूडेंट हूँ .. आप का मैं जानता नही ..बस दोस्त बनना चाहता हूँ औऱ कुछ नही ,आप ये मत समझना आपका पीछा विछा कर रहा था मैं ,बस जब यूनिवर्सिटी वापस आया तो भीड़ देख कर रुक गया था ..और मैं ऐसा वैसा लड़का नही हूँ , आप मना करोगे तो कभी परेशान नही करूँगा , आपको ठीक लगे तो आप फेसबुक आई डी दे सकते हो क्या ? - सब कुछ एक सांस में कह गया वो ।

खुशी को उसका ऐसे साफ साफ बोलना अच्छा लगा .. फिर भी थोड़ा सीरियस होकर बोली -खुशी चौधरी , डीपी में एक लड़की है हैंड बैग के साथ ,बीएससी फाइनल की स्टूडेंट हूँ और रिक्वेस्ट एक्सेप्ट की कोई गारंटी नही है ।

मतलब 2 साल सीनियर हो आप .. ओके , वैसे रिकवेस्ट एक्सेप्ट में कोई दिक्कत है ?- उसने पूछा ।

आज दोस्त बनने का बोल रहा है , कल प्रपोज़ कर दिया जो तूने - खुशी ने उसकी तरफ न देख कर नीचे देखते हुए कहा ।


नही नही .. अरे यार ... कभी प्रपोज़ नही करूँगा मैं .. सच मे बस दोस्त बनना चाहता हूँ । चलो यार तुम्हारी मर्ज़ी ... मत करना - इतना कह कर वो जाने लगा ।

तुम्हारा नाम क्या है ? - खुशी ने पूछा।

क्यूँ ?- उसने पूछा ।

रिक्वेस्ट किस नाम से आएगी .. पता होगा तभी एक्सेप्ट करूँगी न .. आई डी थोड़ी चेक करूँगी । - खुशी ने मुस्करा के कहा।

प्रतीक राना - इतना कहते उसने फोन निकाला और फेसबुक पर खुशी को ढूंढ कर रिक्वेस्ट सेंड करदी ।
सेंड करदी है .. मैं वेट करूँगा , बाई ..इतना कह वो चला गया ।


खुशी भी वापस अपने दोस्तों के पास आगयी ।

कहां रह गयी थी.. इतनी देर लगती है पानी पीने में - सूरज ने पूछा ।

कहीं नही यार .. चलो लेट हो रहे हैं .. होस्टल निकलते है अपने अपने - खुशी इतना कह सिमरन ,अनु और जिया के साथ होस्टल निकल गयी ।
सूरज ,दीपक और संजू भी चले गए ।



होस्टल रूम-

खुशी - यार मैं सो रही हूँ , थक गई हूं ... जब मेस का टाइम हो जाये उठा लियो ।

सिमरन- ठीक है सो जा।

खुशी सो जाती है।

रात के 9 बजे सिमरन उसे मेस के लिए उठा रही है ।

खुशी उठ यार .. 9 बज रहे हैं , फिर खाना नही मिलेगा ।

खुशी नींद में बड़बड़ाते हुए - जा तू ,भूख नही है ।

रहने दे , मुझे पता है तेरी भूख का .. फिर रात को बोलेगी उठ के भूख लगी है ।- सिमरन ने एक बार और उठाते हए कहा ।

खुशी नींद में ही ना में गर्दन हिला देती है ।

ठीक है ..रात को बोलियो तू .- कह कर सिमरन अनु और जिया के साथ मेस चली जाती है ।


रात के 1:30 बजे -


खुशी जागते ही बोलती है .. भूख लगी है यार .. कुछ पड़ नही क्या खाने को ?

हाँ .. है ना ,चप्पल मेरी ..जब इतनी देर उठाया तब तो ना ना लगा रखी थी । रह अब भूखी सुबह तक । - सिमरन जो लैपटॉप में बिजी थी ने बिना देखे ही कहा।


यार ... चल मैं पड़ोसियों के रूम में देख कर आती हूँ , कुछ मिल जाये तो - खुशी उठ कर रूम से बाहर चली जाती है ।

पड़ोसियों ..जग रहे हो क्या ? -खुशी बोलते हुए अपने साथ वाले कमरे में गयी ।

हाँ आजा ,जाग रहे हैं ..

कुछ खाने को है क्या यार .. भूख लगी है


ना यार .. बिस्किट थे पर अभी खा लिए बस हमने ।

अच्छा .. चलो , मैं औरों से पूछ लेती हूँ ।


खुशी अपने सारे दोस्तों के रूम जाती है , एक बिस्किट का पैकेट मिल ही जाता है उसे , उसे लेकर वो रूम आती है ।

मिल गया यार कुछ तो ..कट जाएगी रात आज की- खुशी ने अंदर घुसते हुए कहा ।

बहुत अफसोस हुआ सुन कर - सिमरन ने थोड़ा सड़ा मुँह बना कर कहा ।

आहो ..ला लैपटॉप दे , बहुत देर हो गयी तुझे ।- खुशी सिमरन से लैपटॉप लेकर चलाने लगती है ।
फेसबुक खोलते ही उसे एक फ़्रेंड रिक्वेस्ट दिखाई देती है .. प्रतीक राना ।

ओ तेरी ... भूल ही गयी थी इसे तो , ऐसा कह कर वो। तभी रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर लेती है।

किसे भूल गयी ? - सिमरन ने पूछा ।

खुशी उसे सारा किस्सा सुनाती है ।

ओह ... तो कोई मैडम पर फिदा हो गया है - सिमरन ने आंख मारते हुए कहा ।

नही यार .. बस दोस्त बनना है उसे .. और कुछ नही - खुशी ने कहा ।
तभी प्रतीक का मैसेज आ गया ।

हलो

सोच क्या रही है .. रिप्लाई कर ना - सिमरन ने कोहनी मारते हुए कहा ।

खुशी- हलो ।

प्रतीक - बहुत देर लगा दी एक्सेप्ट करने में .. मन बदल गया था क्या 😶 ।

खुशी- अरे नही , सो गई थी मैं आकर .. अभी उठी हूँ बस😪 ।

प्रतीक - ओके .. तो खाना ?

खुशी- नही खाया .. अब बिस्किट खा रही हूँ 😅😅।

प्रतीक - 😂😂
खाओ खाओ ।

खुशी - हम्म .. तुम्हे देखा नही कभी 1st ईयर में मैंने ।

प्रतीक - मैं इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांच में हूँ ..

खुशी- ओह ..तभी , मैं मैथ्स में हूँ ।

प्रतीक - ओके .. कल आप फ्री हो ?

खुशी - क्यूँ ?

प्रतीक - कुछ नही ..ऐसे ही .. फ्री हो तो चाय पी लेंगे 😇

खुशी - अच्छा .. चाय तो अकेले भी पी जा सकती है ।

प्रतीक - हाँ पर .. नए दोस्तों के साथ पीने में और अच्छी लगती है 😉

खुशी - हम्म ... कल लाइब्रेरी ही रहने वाली हूँ मैं .. टेस्ट्स है मेरे ।

प्रतीक - मेरे भी .. मैं भी आऊँगा लाइब्रेरी तो ... आपको प्रॉब्लम ना हो तो आपके साथ पढ़ सकता हूँ ?

खुशी- उम्म ... ठीक ही , पर डिस्टर्ब नही करेगा तू मुझे ।

प्रतीक -हाँ पक्का .. तो मिलते हैं कल 😋 टाइम ?

खुशी -लंच के बाद आउंगी ,2 बजे के करीब ।

प्रतीक -ठीक है , मैं आ जाऊंगा ।

खुशी - ओके ..चल सो रही हूँ अब ..गुड़ नाइट ।

प्रतीक - हाँ सो जाओ.. गुड़ नाइट 😊



अगले दिन


खुशी- यार सिम्मू क्या पहन के जाऊं आज

पहन जा कुछ भी , लाइब्रेरी तो जाना है - सिमरन ने अपने आप को आईने में देखते हुए कहा ।

अरे ..वो कल बताया था न ..° राना ,उससे भी मिलने वाली हूँ आज मैं,अब बोल क्या पहनूँ - खुशी ने कहा ।

अच्छा , रात रात में बात मिलने तक आगयी .. ओहो , तू ना वो कुर्ती पहन जा वाइट वाली ..मस्त लगती है तुझपर - सिमरन ने आंख मारते हुए कहा ।

ठीक है .. मैं नहा के निकल रही हूँ फिर- खुशी बाल्टी उठा के बाथरूम चली जाती है ।

नहा के खुशी तैयार हुई और लंच करके लाइब्रेरी के लिए निकल गयी ।

फ़ेसबुक पर उसने प्रतीक को मैसेज किया
- बाहर ही मिलियो ,मैं निकल गयी हूँ होस्टल से!

प्रतीक का भी रिप्लाई आ गया - ओके .. वेटिंग ।


लाइब्रेरी के बाहर दोनो मिलते हैं -

हाई .. कैसा है तू

ठीक हूँ .. और तुम

मैं भी .. चले अंदर

हाँ ..चलो ।

दोनो लाइब्रेरी में शाम 5 बजे तक बैठे रहे ... पर बात किसी ने नही की ।

प्रतीक - पढ़ लिया तुमने ?

खुशी ने बुक से ध्यान हटा कर कहा- हाँ ऑलमोस्ट ..तूने ?

मेरा होगया ... चाय पीने चले .. बहोत देर हो गयी है ।फिर तुम्हारा होस्टल बन्द हो जाएगा ।- प्रतीक ने मासूम सी शक्ल बना कर कहा ।

खुशी सोचने लगी ..फिर बोली - यार थोड़ा रहता है मेरा .. पर चल कोई ना ..रूम में कर लुंगी । चलते हैं ।

दोनो अपना बैग लेकर बाहर आ गए और कैंटीन की तरफ चलने लगे ।

कैंटीन पहुंचने तक भी कोई नही बोला .. वहां पहुंच कर प्रतीक ने 2 चाय का ऑर्डर दिया और दोनों बैठ गए ।

तो अब ग्रेजुएशन के बाद क्या करोगी ? चुप्पी तोड़ते हुए प्रतीक बोला ।

पता नही यार ... कुछ सोचा नही ,घरवाले देखो क्या करते हैं - खुशी ने कहा ।

तुम क्या करना चाहती हो ? - प्रतीक ने फिर सवाल दागा ।

पता नही - खुशी ने नकली हँसी के साथ कहा ।
तब तक चाय आ गयी .. जब तक चाय खत्म हुइ कोई कुछ नही बोला।

चलो यार ..जाती हूँ मैं होस्टल -खुशी ने चाय का कप रखते हुए कहा ।

मै छोड़ दूं होस्टल तक ? - प्रतीक ने पूछा ।

ओके ..खुशी ने थोड़ा सोच कर हाँ कह दिया ।

होस्टल तक जाने में भी दोनो खामोश ही रहे ..और फिर बाई बोल कर अलग अलग हो गए ।


रूम पर जाते ही सिमरन ने सवालो की झड़ी लगा दी ।
कैसा है बात करने में ? ज्यादा चेप तो नही हुआ न ? कहाँ गए तुम फिर ?

अरे मेरी माँ .. बैठ तो जाने दे मुझे - खुशी ने बैग रख के बैठते हुए कहा ।

बैठ गयी न ..बोल अब ..बोल भी जल्दी - सिमरन ने उसे लगभग झकझोरते हुए कहा ।

ठीक था यार .. चेप तो नही था , बात भी नही की हमने वैसे ज्यादा ।- खुशी ने लेटते हुए कहा।

तो ? -सिमरन ने पूछा।

बस पढ़ ही रहे थे हम .. वो भी नही बोला कुछ -खुशी ने कहा ।

हम्म ... चल फ्रेश हो जा फिर जिया के रूम चलते हैं।

जिया के रूम चारों ने थोड़ी बकवास बाज़ी करी .. खाना खाकर सब अपने अपने रूम आगये ..अगले दिन टेस्ट था तो पढ़ाई करने लगे ।


रात के 2बजे के लगभग खुशी ने फ़ेसबुक ऑन किया ।

प्रतीक का कोई मेसेज नही था .. खुशी मायूस होकर फ़ेसबुक लॉग आउट करने ही वाली थी तभी प्रतीक का मैसेज आ गया ।

प्रतीक-हाई ..हो गयी पढ़ाई

खुशी- हाँ यार .. बस अभी बुक्स बन्द करी ..दिमाग का दही करदिया 😐

प्रतीक- hehehe ..बुक्स ने किया दिमाग का दही या मैंने ☺

खुशी- तूने क्यों किया होगा .. कुछ बोला तो है नही तू 😞

प्रतीक- यार ..मैं जल्दी ओपन नही हो पाता हूँ किसी के साथ ..

खुशी- दिख रहा था 😂

प्रतीक- थोड़े दिन बाद देखना ..तुम चुप होने को बोलोगी तब भी नहीं होऊंगा 😅

खुशी- haha ..देखते हैं ।

प्रतीक - देख लेना ..

खुशी- चल यार सो रही हूँ .. टेस्ट है कल ..जल्दी जाना है ।

प्रतीक - ओके ..गुड़ नाइट 😊


इसके बाद रोज ही ये दोनों चैट करने लगे .. दोनो अच्छे दोस्त बन गए ..एक दिन फिर दोनों फ्री थे तो साथ चाय पीने चले गए ।

प्रतीक चाय की चुस्की लेते हुए बोला - यार कुछ खाया पिया करो ना ..कितनी पतली सी हो ,किसी दिन हवा तेज़ हुई तो उड़ जाओगी ।

खुशी- वेरी फनी .. तू ख़ुद तो बड़ा खली है ना ..

प्रतीक - तुमसे तो बहुत ठीक हूँ ..

खुशी- आहो ...रहन दे तू ..

प्रतीक- ले ..रहने क्या दे , आजा पंजा लगा कि देख मेरे साथ ..तेरे दोनो हाथ मेरा एक ..बोलो

खुशी- ठीक है... आजा

दोनो पंजा लड़ाने के लिए मेज़ पर हाथ रखते हैं ।

1 ..2..3 स्टार्ट

खुशी- वो मेज़ छोड़ तू ..बेईमानी कर रहा है खेल में भी

प्रतीक-पकड़ सकते हैं इसमें ..रूल्स तो पता नही है ..आ जाते हैं लोग कहीं कहीं से

खुशी- अबे ओ ..चीटिंग ना कर देख ..
मैं खेल ही नही रही जा
खुशी छोड़ कर जाने लगती है ..प्रतीक उसके पीछे पीछे जाता है ..

सुन ना खुशी... अच्छा ठीक है नही पकड़ सकते..रुक जा..

रुक जा भी -प्रतीक ने उसका हाथ पकड़ कर रोक ही लिया ।

अब क्यों रोक रहा है .. मैं नी बात कररही अब तेरे से

दोनो की नोक झोंक चलती रही .. आखिर खुशी में मान गयी और थोड़ी देर पार्क में बैठ कर दोनो अपने अपने होस्टल चले गए ।


पर जब इनकी नोंक झोंक चल रही थी ..सूरज भी वहीं था और उसने दोनो को देख लिया ।

खुशी ने जब रूम जाकर व्हाट्सप खोल तो उसमें सूरज के मैसेज थे ।

बड़े नए नए दोस्त बन रहे हैं ☺

खुशी- मतलब?

सूरज - आज कैंटीन में जिससे पंजा लड़ा रही थी आप

खुशी- आप ?क्या होगया तुझे ..

सूरज-बड़े लोग ..बताते भी नही दोस्तो के बारे में

खुशी- अरे यार ..ऐसा कुछ नही है .. बस .. मुझे लगा उतना जरूरी नही है बताना

सूरज -ओके , पर कम से कम एक बार पूछ तो लेती वो लड़का कैसा है ।

खुशी-मतलब?

सूरज - मुझपर विश्वास है ? दोस्त मानती है ?

खुशी-हाँ.. ऑफ कोर्स यार ..बता क्या बात है ।

सूरज-तो उस लड़के को अभी ब्लॉक कर दे ।

खुशी- पर हुआ क्या ..कुछ किया क्या उसने ।

सूरज - पहले ब्लॉक कर अगर दोस्त समझती है तो ।

खुशी- यार ....

खुशी अपना फ़ेसबुक खोलती है .. और प्रतीक को मैसेज टाइप करती है "क्या किया तुमने जो मेरा दोस्त तुम्हे ब्लॉक करने को बोल रहा है "

पर उसे डिलीट कर देती है और प्रतीक को ब्लॉक कर देती है ।

खुशी- कर दिया ,अब बोल

सूरज- उसने होस्टल में सबको बोला हुआ है कि तू उसकी गर्ल फ्रेंड है ।

खुशी- व्हाट ?

सूरज-जी हाँ ... किसी पर भी यकीन कर लेती है यार तू भी ।

खुशी- लगता नही था वो ऐसा होगा ..
छोड़ मैं मेस जा रही हूं ..बाए।

खुशी ये बोल कर ऑफलाइन तो हो गयी ..पर उसका दिल अब भी नही मान रहा था प्रतीक ऐसा कुछ भी बोल सकता है ।


***************************
खुशी और प्रतीक का क्या दोबारा सामना हुआ ?
क्या प्रतीक ने सच मे ऐसा किया था ?
इन सवालों का जवाब अगले भाग में दिया जाएगा ।
अब तक कि कहानी कैसी लगी अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें ।


इस कहानी का अंतिम भाग आप मेरे नाम पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं । 😊


© लेखा चौधरी

hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.