सवाल ??

कहानी मेरे अजीज मित्र के जीवन की सत्य घटनाओं पर आधारित हैं।  निजता बनाए रखने के लिए पात्रो के नाम बदल दिए गए हैं ।


“तुम चले गए, और साथ में वो भी | वो साथ में मेरा प्यार भी ले गई |

ऐसा लगता हैं मानो किसी ने दिल में हजारो सुराख़ कर दिए हो | बस एक बात की ख़ुशी हैं | ये दर्द मुझे याद दिलाता हैं कि मुझे उससे प्यार था |”




दिनांक :- 28/12/2017

समय :- 01:46

मुझे कुछ समझ नही आ रहा हैं कि मैं क्या लिखूं | मगर कहते हैं कि अपने एहसासों को कोरे कागज़ पर उतार लेना चाहिए, चीख भी लेते हैं और आवाज भी नहीं होती |

रात के पौने दो बज चुके हैं और नींद आंखों से कोसों दूर हैं । मन ही मन एक गाना गुनगुना रहा हूँ "वक्त की कैद में जिंदगी हैं मगर, चंद घड़ियाँ यही हैं जो आज़ाद हैं ।"
मेरा तथाकथित प्रेम, मेरी मोहब्बत, मेरी हमसफर, मेरी दुनिया, इस वक्त मेरे पास लेटी नींद के आगोश में हैं । उसका एक हाथ मेरी गर्दन के नीचे से होते हुआ मेरी दाई और निकल रहा हैं और मेरा एक हाथ उसकी कमर पर | मेरे ठीक सामने हैं इस दुनिया का सबसे हसीन और मासूम चेहरा, “मेरे लिए |”

सच हैं । वक्त की कैद में ही तो हैं जिंदगी । जिसमे से ये कुछ पल मैंने चुराए हैं । और इन्ही पलो से मिलकर मिनट और उनसे बन जाती हैं घड़ियाँ । तथाकथित "आज़ाद" घड़ियाँ । शायद आप सोच रहे हैं कि ये वक्त मेरे लिए बेहद ख़ास हैं । मगर आप यहां चूक जाते हैं । यह वक्त मेरे जीवन का सबसे कष्टप्रद और पीड़ादायी वक्त है । ये वो लम्हे हैं मेरी बिखरी जिंदगी के जिनको मैं याद भी नही करना चाहता । ऐसा क्यों ?
कुछ ऐसा हैं जिसने मेरी आँखो से नींद ओझल कर दी हैं, आँखे भर आई हैं और अब मेरी क्षमता नही हैं कि इसके आगे कुछ लिख पाऊं । इस फ़ाइल को यहीं सेव कर रहा हूँ ।


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