स्वदण्डित श्राप

🌷स्वदण्डित श्राप🌷
बयान न01
माली बैजनाथ
जाने कैसे डॉक साब थे साब ,जब से आये थे, घुप्प ही रहते थे ।हँसना मुस्कराना तो दूर की बात थी, बात तक तो करते देखा नही कभी था उन्हें। आँखों में क्रोध दिखता था । इंसपेक्टर साहब हमने पता किया था, कीरत जो डॉक साब का सब काम करता था , घर से लेकर बाहर तक का । शराब के नशे में...उसने बताया था, कि डॉक साब के चार लड़कियाँ ही लड़कियाँ थी , पर क्या करती थी, कहाँ रहती थी किसी को कुछ नही पता।हमे भी नही दिखी , ना बहु जी , न बच्चियां ,कभी आयी ही नही यहां । ।हम कभी कभी बागवानी करने चले जाते थे बंगले पर ।डॉक्टर साहब को बड़े बड़े पेड लगवाने के बहुत शौक था ।डाक साब हमेशा दो तीन साल पुराना पेड़ लगवाते रहते थे छोटे पौधे कभी नही लगवाए ।कहते थे पिछवाड़े के पेड़ आगे लगा दो । या आगे का पेड़ उखाड़ के पिछवाड़े में लगवाते थे ।जड़े न सूख जाए इसलिए ज़रा गहरा गड्ढा ही खुदवाते थे । कई बार तो खुद ही पेड़ लगाने लग जाते थे।
बयान न0 2
अर्दली न0 1 पुत्तू राम
साहब बहुत अच्छे थे। कभी हमे 7 बजे के बाद रोका नही। हमेशा जो खुद खाते थे वो हमें देते थे । भोजन अस्पताल से आकर तुरंत कर लेते थे। इसलिए सात आठ बजे तक सो जाते थे। तो हमारा क्या काम। हम भी चले जाते थे।उसके बाद का काम कीरत देखता था।कीरत भी हम लोगो के साथ कम बैठता था । लेकिन कीरत चाल में डगमग , मतलब में चौकस था साब।अपने मामले में बहुत चालाक।देखिए ना सारा माल बटोर के खुद ले गया।
बयान 03
अर्दली न0 2 भौवाल सिंह
सुबह का नाश्ता खाना हम बनाते थे साहब । साहब रोज़ एक ही तरह की( लौकी टमाटर की )सब्जी खाते थे। जब वो कहते "टमाटर "लौकी बना दो, मतलब लौकी की अपेक्षा टमाटर ज़्यादा होना चाहिए । कभी कभी "लौकी" टमाटर बनवाते थे , मतलब उसमे लौकी की मात्रा ज्यादा हो ।पहली बार खाना बनाने पर मुझे उन्होंने बहुत जोर से डाँटा था । उन्होंने "लौकी" टमाटर बनाने को कहा था और मैंने मारे खुशी के टमाटर ज़्यादा डाल दिये थे ।
तब कीरत ने समझाया। साहब की बात ध्यान से सुना करो।जब वो पहले "लौकी"कहे, बाद में "टमाटर" बोले, तो मतलब "लौकी" ज़्यादा डालनी है। यदि "टमाटर" पहले बोले तो मतलब "टमाटर" ज़्यादा डालना है ।
बयान न0 4,
अन्य डॉक्टर कृष्ण दयाल
पता नही क्यो लाल साहब ने आउट लाइन की पोस्टिंग ली। देवबंद बहुत छोटा सा टाउन है सहारनपुर का ।
एक साल पहले तक डॉक्टर लाल ,सफेद बुर्राक कपड़ो में अस्पताल आते थे । वो मेडिकली फिट थे । फिर ऐसा क्या हुआ कि वो दो तीन महीनों में ही खरहरी खटिया पर आ गए थे । अंत के दिनों में तो अपनी चारपाई से उतर भी नही पाते थे। काफी समय तक तो कीरत उन्हें गोद में उठा कर स्नान इत्यादि करा देता था । किंतु बाद में लाल साहब को उसमे भी दिक्कत होने लगी थी तो कीरत ने चारपाई में एक बड़ा छेद के दिया था । जिसमे लाल साहब अपनी नित्य क्रिया कर लेते थे । बोल भी बंद हो गया था ।
अर्दलियों को भी सरेंडर कर दिया था। बस बंगला नही खाली कर रहे थे। कही कीरत , लाल साहब की इस हालत का जिम्मेदार तो नही
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इंसपेक्टर प्राण सिंह,
दिमाग भन्ना रहा था । इतने केसेस देखे थे मगर ऐसा नही।इंस्पेक्टर की नौकरी करते हुए मुझे को लगभग 34 साल हो रहै थे ।ऐसा क्या हुआ कि डॉक्टर साहब ने अपनीअंचल संपत्ति अपने मुँह लगे नौकर के नाम कर दी। अपनी चारो बेटियों के नाम कुछ भी नही। डॉक्टर साहब लंबी छुट्टी पर चल रहे थे पिछले ग्यारह महीनों से , लेकिन इनको देखने ना तो उनकी पत्नी आई ना ही उनकी बेटियां ना ही डॉक्टर साहब शहर से बाहर गए।यहाँ तक कि उनका दाह संस्कार भी उनके नौकर कीरत ने किया।
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तीन दिन बाद कीरत पकड़ा गया। सूरत से तो बहुत भोला मालूम पड़ता था पर निकला इतना शातिर
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जो उसने कहानी बताई उससे तो सबकी आँखे फ़टी की फटी रह गयी।
उसने कहा डॉक्टर साहब की बीबी और बच्चे डॉक्टर साहब से कभी अलग नही हुए वे अभी भी उसी घर मे है। पेड़ों के नीचे??कितना डरावना सच।
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दो तीन डंडे उसके पुट्ठों पर पड़ते ही कीरत ने सब उगल दिया। वो जगह दिखाइ जहां तीन पीपल के और दो बरगद के पेड़ लगे थे ।पाचो पेड़ को उखड़ने पर सच सामने आ गया । वहां सच मे पाँच कंकाल मिले। पाँचो स्त्रियों के थे। बंगले की तलाशी लेने पर एक बक्से में से एक रिपोर्ट मिली जिसमे लिखा था डॉक्टर साहब कभी पिता नही बन सकते थे । जब तक उन्होंने सहा, सहते रहे। । जब बर्दाश नही हुआ। तो खुद से ही अपनी हड्डियां गलाने वाला इंजेक्शन लगाने लगे थे ।
केस सुलझ गया था।
माली को गड्ढा खोदने के एवज में डेढ़ साल की सज़ा मिली पर बाद में अपील में सबूत ना मिलने के आधार पर निर्दोष साबित हुआ।
जबकि कीरत को सबूत छुपाने और और सहायता करने के एवज में चार साल की सज़ा हुई।
शोभना श्रीवास्तव सक्सेना।

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