बचपन से ही श्रीकृष्ण के अनेक रूपों की कथा सुनते हुए कब सुमन कृष्ण-भक्त हो गयी वो खुद नही जान पायी।

अपने प्रभु श्रीकृष्ण से जुड़े तीर्थों पर जाना उसका एकमात्र सपना था।

शादी के बाद जब पहली बार उसके पति अमित ने पूछा- बोलो कहां घूमने चले, तो सुमन ने हिचकते हुए कहा- यहां से जगन्नाथ पुरी नजदीक है ना। वहीं चले?

अमित एक पल के लिए सोच में डूब गया कि लोग कश्मीर, शिमला, केरल की वादियों में घूमना चाहते है और उसकी पत्नी को तीर्थ जाना है, लेकिन उसने हाँ कह दिया।

सुमन की खुशी का कोई ठिकाना नही था। आज उसका एक सपना पूरा होने जा रहा था।

पुरी पहुंचकर जब अमित और सुमन जगन्नाथ प्रभु के दर्शन के लिए पहुंचे तो मंदिर में काफी भीड़ थी।

अमित किसी तरह रास्ता बनाते हुए सुमन को थोड़ा आगे ले गया, लेकिन तब भी सुमन दर्शन नही कर पा रही थी। उसकी आँखों से आंसू छलकने ही वाले थे कि अमित ने उसे गोद में उठाकर ऊंचा कर दिया और कहा- अब आराम से दर्शन करो।

अपने प्रभु की मूरत साक्षात अपने सामने देखकर सुमन की खुशी का कोई ठिकाना नही था।

वहां मौजूद सारे लोग इस अनूठे जोड़े को देखकर मुस्कुरा रहे थे।

और सुमन मन ही मन अपने ईश्वर को धन्यवाद दे रही थी अमित जैसा जीवनसाथी देने के लिए।










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