घर में शादी का माहौल था । एक तरफ हलवाई मिठाइयाँ बना रहे थे, तो दूसरी तरफ गाँव भर में न्यौता दिया जा रहा था । आख़िर चै/ारी साहब की इकलौती बेटी का ब्याह था, तो ठाठ बाट से सभी आयोजन किए जाने थे । सरिता (चै/ारी साहब की बेटी) इस शादी से बहुत खुश थी । हो भी क्यों न ? राहुल के रूप में उसे उसके सपनों के राजकुमार–सा पति जो मिला था । सगाई पर राहुल ने सरिता को एक बहुत ही कीमती स्मार्ट फोन उपहार स्वरूप दिया था । जब दोनों की सगाई हो ही चुकी है तो चै/ारी साहब को भी इससे कोई एतराज नहीं था । फोन की सुवि/ाा होने पर जब भी मौका मिलता, सरिता राहुल से बात करने लगती । उसकी बातें खत्म ही होने का नाम नहीं लेती थीं । राहुल भी उसकी खनकदार आवाज़ का दीवाना हो होकर सुनता रहता । उसे ऐसा लगता, जैसे सत्तर के दशक के गाने गुनगुना रही हो सरिता ।

अगले दिन बारात आनी थी । फेरों के वक्त पहनने के लिए मामा जी सरिता के लिए बड़ा ही कीमती लहंगा लेकर आए थे । शाम को सरिता ने उसे पहन कर देखा, तो उसे लगा कि राहुल को भी दिखाया जाए कि यह लहंगा उस पर कितना खिल रहा है । यही सोचकर उसने राहुल को फोन मिलाया और चैबारे की छत पर चली गयी उससे बातें करने के लिए । अभी वह राहुल को भेजने के लिए सैल्फी लेने लगी कि मुंडेर पर से उसका पैर फिसल गया और वह /ाड़ाम से तीसरी मंजिल से नीचे आ गिरी । फोन उसके हाथ छुट गया था । राहुल को किसी अनहोनी की आशंका हुई । वह जल्दी से गाड़ी निकाल कर सरिता के घर की तरफ चल निकला । उ/ार सरिता के घर वालों ने सरिता को जल्दी से अस्पताल पहुँचाया । रास्ते में राहुल ने चै/ारी साहब को फोन किया तो उन्होंने बताया कि सरिता को अस्पताल ले जा रहे है । राहुल भी सीधे अस्पताल ही पहुँचा । सरिता को ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया ।

डॉक्टर साहब ने कहा सिर में ज्यादा चोट लगी है । ऑपरेशन करना होगा, जल्दी से खून का प्रबन्/ा करें । राहुल ने सबसे आगे बढ़ कर अपना खून देने की बात कही । राहुल के रक्त से कुछ जरूरी जाँचे की गयी । इत्फ़ाक से राहुल का खून सरिता के खून से मेल खा गया । समय पर राहुल के रक्तदान करने से सरिता की जान बच गयी । सभी सरिता की होश में आने की दुआ कर रहे थे । राहुल प्रार्थना कर रहा था और संकल्प कर रहा था कि वह अपने व सरिता के जन्मदिन पर और अपनी शादी की सालगिरह पर हमेशा रक्तदान किया करेगा ।

सरिता को होश आया, तो वह बड़बड़ा रही थी, ‘आज तो मेरी शादी है । राहुल मेरी माँग में लाल चुटकी सिंदूर भरेगा ।’

चै/ाराइन बोली, ‘बेटी! अब तो तेरी रगों में राहुल के रक्त की ही लाल चुटकी दौड़ रही है । लाल चुटकी सिंदूर भी वह भर देगा ।’

सभी के चेहरों पर एक हल्की–सी मुस्कान दौड़ गयी । सरिता लज्जा गयी और राहुल उसे आत्मविभोर हो निहारता रहा ।

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