आखिर और कब तलक रूठी रहोगी तुम मुझ से,
पिछली दफा जब तुम मुझ से रूठ कर गई थी,
सूरज देर तलक रहता था आसमां मै,
चुभता था जो वो मुझे कभी,
तो तुम्हारा आँचल खींच के
ढाप लेता था मै खुद को।
मगर जब तुम रूठ कर गई थी,
उन दिनों चाँद का दबदबा
अधिक था आसमां मै।
शायद ठंड आमादा थी आने को,
दो तीन दफा तुम मुझे बाते करती दिखी,
अपनी चाँद बहन से!
शायद चुगली कर रही थी मेरी।
खेर अब तुम लौट आओ,
ठंड जाने लगी है,
सूरज ने अपना दबदबा कायम करना,
फिर शुरू कर दिया है आसमां मै,
चुभता है वह अब मुझे..

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