पहले मैं एक पत्रकार था

एक ही लहर में दल्ला हो गया

बिकाऊ कहा गया

भांड तो सुन सुन कर कान पक गए

अब खबर तो खबर है मेरे दोस्त

तुम्हारे हिसाब से नहीं लिखी जाएगी

ना ही मेरे हिसाब से लिख सकता हूँ

कोई राजनेता हमारे उसूल तय नहीं करेगा

कोई दल नहीं, कोई जाति धर्म नहीं

न तुम्हारे पैसो के पैड से

न्यूज़ का ऋतु स्राव ढका जाएगा

ये पेड न्यूज़ नहीं है मेरे दोस्त

अख़बार तो सच बोलेंगे

प्रेस्टीट्युट शब्द तुम्हें मुबारक हो

पत्रकारिता पर होने वाला हर हमला

कतार में खड़े उस आख़िरी शख़्स पर हमला हैं

जो तुम्हारी रैलियों से खाट ले गया

महज इस ख़ातिर की

उसके बच्चे जमीं पर सोते हैं

जो राशन के सड़े हुए गेहूँ पाने के लिये

मरने मारने पर आमादा है

हर उस गरीब की कसम

मुझसे झूठ नहीं लिखा जाएगा मेरे दोस्त

चाहे मेरा गला काट दो ।

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