मेरे महबूब़ ,हर गुनाह से,

आज तुम्हें हैं मैंने

आजाद़ किया !

तुमने मुझे जो भी दिया,

बहुत-बहुत शुक्रिया...!

अब कभी न मिलेंगे हम ,

ये दुखः मुझे तुझसे

मुहब्ब़त कर के मिला !

मेरे महबूब़ तेरा

बहुत-बहुत शुक्रिया..!

दूर कर दिया खुद़ से तुमने मुझे,

दर्द जी भर के दिया !

प्यार जो तुमने दिया,

अश्कों से दामन भींगा !

मेरे जज्ब़ातों को जमाने में

रुसवा किया,

तेरा शुक्रिया शुक्रिया....!

तुमने कितना कुछ मुझको दिया

तेरे एहसानों का मेरे पास

न हैं कोई सिला !

यही दुआ़ तुझको दूँ मैं,

खुश रहे तू सदा

और पास मेरे, तुझे देने को

कुछ तो न बाकी रहा !

शुक्रिया मेरे महबूब़

तेरा बहुत शुक्रिया...!

न तुझसे कोई शिकवा-गिला

प्यार तो सिर्फ हमनें ही

था किया , तुमने जो

दग़ा दिया, बहुत-बहुत

शुक्रिया...!

तुमनें मुझे हैं, बहुत कुछ

दिया....!!

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