सत्ता का स्वाद चख चुके नेताओं को पक्का यकीन हो चुका था कि वे इस बार शायद ही चुनकर आएं ,सो उन्होंने एक नया रास्ता खोज निकला .समान विचारधारा वाली पार्टियों को साथ मिलाकर एक नया दल बनाया और उसे एक नाम दिया गया, और सभी ने मिलकर साथ चुनाव लडने का ऎलान कर दिया. वे जानते थे कि लोकसभा की सीढियाँ चढने के लिए दो तिहाई बहुमत का होना जरुरी है.उन्होंने यह भी तयकर रखा था कि जिस दल मे सदस्यों की संख्या ज्यादा है, उसी में से कोई एक प्रधानमंत्री बनेगा.

चुनाव हुये और गठजोड करने वाली पार्टी, चुनाव एक्सप्रेस में सवार होकर चुनाव जीत गई. जिस दल में संख्या बल ज्यादा था उसका व्यक्ति प्रधान मंत्री की कुर्सी पर आसीन हो गया और शे‍ष सदस्यॊं ने अपने-अपने दल-बल के आधार पर मंत्री पद हथिया लिए थे.


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