अपनी ट्रेनिंग के दौरान भूरेलाल को ज्ञात हुआ कि उसके विभाग से कुछ अफसर एक ट्रेनिंग कोर्स पर यूरोप भेजे जाएंगे.सुन के उसने अपने वरिष्ठ जनो की चापलूसी शुरू कर दी .
पहले बैच में उसे कोई स्थान नहीं दिया गया .इतने में उसका विवाह हो गया और वह एक पिता भी बन गया.
जब एक दूसरा अवसर मिला तो जैसे तैसे उस ने जुगाड़ कर के अपना नाम भिजवा लिया और उसे यूरोप के एक देश जाने का अवसर मिल गया
अपनी बचाऊ आदतों के कारण भूरेलाल अपने विभाग में बदनाम था..झूठे बिल,उलटे सीधे खर्च वो विभाग के नाम ही डाल देता था.उसने कोशिश की कि ट्रेनिंग में अपने
परिवार को भी ले जाय पर नाकाम रहा .
वहां जाकर उसे पता चला कि उसे होटल में अपने खर्च पर ही रहना होगा .उसे अब झूठे बिल बनाने का सुनेहरा अवसर मिलने वाला था पर उसकी दाल यहां भी न गली.
जैसे तैसे कम खर्च ,कम खा पी के अपना भत्ता अधिक वसूल कर के काम चला रहा था.
उसे पता चला कि यहां पर लोग अपने पुराने टीवी,रेडियो आदि सड़क पर फेंक देते हैं.
इसका उसने भरपूर फायदा उठाने की कोशिश की.रात को अपने जूनियर अफसर के साथ निकल जाता और पुराने सामान की कई खेप अपने कमरे में ले आता.
मुसीबत तो तब हुई जब वो वापस फ्लाइट लेने एयरपोर्ट पहुंचा.पता चला कि उसका सामान अधिकृत वज़न से ४० किलो अधिक है और इसे ग्रुप में एडजस्ट नहीं किया जायेगा.एक्स्ट्रा वज़न के ४०००० रूपये
देने होंगे..मरता क्या न करता.सारा उठाईगिरी का सामान एयरपोर्ट पर फेंक कर मायूस मन से वापसी वाली अपनी सीट पर बैठ गया.
भारत पहुंच के उसे एक सप्ताह ही हुआ था कि उसके विभाग को एक पत्र द्वारा सूचित किया गया कि भूरे लाल द्वारा फेंका गया पार्सल एयरपोर्ट सुरक्षा विभाग ने कूड़ाघर में भिजवाया,जबकि यह अवैध रूप से वहाँ फेंक दिया गया था।इसका डिलीवरी चार्ज और फाइन मिला कर 22000 रुपये का बिल भारतीय दूतावास को भेज दिया गया था।भूरेलाल को यह बिल भरना पड़ा, माथा पीट कर और वॉर्निंग लेटर ले कर ।

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