आज पूरे दस साल हो गए गाँव छोड़े

जब निकला था तो गाँव में पहुँचने वाली सड़क़ मात्र एक पगडंडी थी.

इस बीच काम में व्यस्त रहा,घर का उद्धार करने की फिक्र में पाई पाई जोडता रहा. खबरों में पढ़ कर जाना, गाँव का विकास तेजी से हो रहा है.बिजली के खंभे लग रहे हैं,घर घर पानी के लिए नल लगाए जा रह,े सड़कें बन गई हैं.

मनआह्लादित हो उठा जैसे पंख उग आए हो ज़हन में विकसित गाँव, मय पक्की चिकनी सड़क उदीयमान हो उठा.

पहला काम दफ्तर पहुँचते ही एक हफ्ते की छुट्टी की अर्जी पास करवाई,बाज़ार जा कर चमचमाती नई साइकिल खरीदी और मन ही मन उस पर सवार होकर गाँव की सारी गलियाँ घूम डालीं

लो जी गाँव के मुहाने पर पहुँच कर क्या देखता हूँ?

पगडंडी खोद कर चौड़ी तो कर दी गई थी,

पर पक्की बाधा रहित साइकिल फ्रेन्डली

सडक .........

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