बुआ की हालत बहुत खराब है अस्पताल में भर्ती हैं। जब से यह खबर मिली निधि बुआ से मिलने उन्हें देखने के लिये बैचैन हो गई। जब अस्पताल पहुंची बुआ अधबेहोशी की हालत में थीं। उनकी बहू पास की कुर्सी पर बैठी थी जैसे ही निधि को देखा तुरंत उठ खड़ी हुई।

"दीदी अच्छा हुआ आप आ गईं देखिये न मम्मी जी की क्या हालत हो गई है मुझसे तो देखी नहीं जा रही है।"

"हुआ क्या है बुआ को क्या बताया डाक्टर ने? "

" दीदी मम्मी ने खाना पीना ही छोड़ दिया है इतनी कमजोर हो गई कि चक्कर खा कर गिर पडीं। डॉ कहां कुछ बताते हैं उनको तो बस रुपया कमाना है। फिर कहने लगी आप अभी एकाध घंटे तो रुकोगी न तब तक मैं घर हो आऊं। दो दिन से अस्पताल में हूँ घर भी तो मुझे ही देखना है।"
निधि उसकी परेशानी समझ कर द्रवित हो गई "ठीक है तुम चली जाओ मैं हूँ यहाँ।"

बुआ के पास बैठी निधि उनके कमजोर पीले पडे चेहरे को देखती रही। फूफाजी के जाने के बाद कितनी अकेली हो गईं। शुक्र है बहू बहुत अच्छी मिली है जो उनका खूब ख्याल रखती है। बुआ से जब भी बात हुई उन्होंने बहू की तारीफ ही की। भैया नौकरी के सिलसिले में बाहर रहते हैं पर वह बेटी की तरह बुआ का ध्यान रखती है।

तभी बुआ अर्धचेतना की अवस्था में कुनमुनाईं तो निधि अपने विचारों से बाहर आई। उसने बुआ को पानी पिलाया और चादर ठीक करने लगी तभी उसके हाथ को जोर से झटका लगा और बुआ बेहोशी की हालत में बड़बड़ाने लगीं "चल हट बड़ी आई ध्यान रखने वाली पहले तो मुझे भूखा मार दिया मेरी बेटियों का मायका छुड़ा दिया अब झूठा ध्यान रखने का ढोंग न कर।"

निधि हैरान हो गई चैतन्य अवस्था में जो बातें छुपाई जाती रहीं थीं अचेत अवस्था में सब सामने आ गईं।

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