कभी सुना था – रात गयी, बात गई । किन्‍तु 8 नवंबर की रात को ऐसा नहीं हुआ । रात बढ़ी तो बात बढ़ती चली गई । जी हां, 8 नवंबर की रात 8 बजे आकाशवाणी हुई – देखो .. देखो.. देशवासियों .. पूरे देश के गैस से भरा हुआ गुब्‍बारा आकाश में उड़ाया गया है । यह गुब्‍बारा आकाश में जायेगा और केवल 50 दिन में स्‍वर्ग को धरती पर उतार लायेगा ।

क्‍या ..? क्‍या ...?

चारों ओर जिज्ञासा ही जिज्ञासा । जिधर देखो, उधर अफरा-तफरी मच गई । लोग दुकानों की ओर ऐसे दौड़ने लगे जैसे कि चॉंद-रात हो । जिसे देखो, वही उस गुब्‍बारे को देखना चाहता था । हर कोई घर से निकल कर एक बार उस गुब्‍बारे को देख लेना चाहता था । लेकिन जो भी देखता, थोड़ा हैरान रह जाता कि उस गुब्‍बारे पर ‘स्‍वर्ग’ जैसा कोई शब्‍द नहीं लिखा हुआ था, बल्कि लिखा था – एन.एम. (नेशनल मान्‍सटर) लोग ठीक से न भी समझे हों, लेकिन उन्‍हें लगा कि जब आकाशवाणी हुई है कि केवल 50 दिन में स्‍वर्ग इस गुब्‍बारे के नीचे लटके हुए पिटारे में बैठा चला आयेगा , तो जरूर आयेगा । इसलिए हर रोज भीड़ बढ़ती गई और भीड़ में धक्‍का-मुक्‍की भी । दिन-रात लोग कतार में खड़े होने लगे ।

जैसा कि होता है, मेले में भगदड़ के दौरान प्राय: सौ-पच्‍चास लोग कुचल कर मर जाते हैं, ठीक वैसा ही इस गुब्‍बारा-आरोहण के समय हुआ । सौ से अधिक लोग मारे गए ।

पच्‍चासवें दिन पूरा देश अधीर होकर आसमान की ओर देख रहा था कि गुब्‍बारा स्‍वर्ग को लेकर धरती पर उतरेगा । लेकिन लोगों ने देखा कि गुब्‍बारा धीरे-धीरे पिचकता-गिरता चला आ रहा है और आते-आते अचानक समुद्र में समा गया ।

फिर से आकशवाणी हुई – चिंता न करें देशवासियों । गुब्‍बारा स्‍वर्ग सहित पाताल में समा गया है । हम पाताल में जाकर उस स्‍वर्ग को निकाल लायेगें । लोगों ने एक-दूसरे को देखा और फिर से सभी की निगाहें समुद्र में गड़ गई, जहां से पाताल लोक का एक नया रास्‍ता शुरू होने वाला था ।

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