एक लडकी बसस्टोप पर खडी रहती है । तभी किसी का फोन आता है। ‘‘हैलो‘‘
‘‘यार अपने बालो को ठीक से बांधो । मुझे डिस्टर्ब कर रहे है ये । मै तुमहे ठीक से देख नही पा रहा हॅू। ‘‘फोन पर किसी लडके ने कहा।
‘‘कौन हो तुम‘‘लडकी ने गुस्से में कहा।
‘‘और अपना दुपट्टा ठीक करो। वो लडके जो तुम्हे घुर घुर कर देख रहे है । मुझे बिल्कुल अच्छा नही लग रहा। ‘‘
‘‘ हो कौन तुम?‘‘
‘‘तुम्हारा सिर्फ तुम्हारा ‘‘ दुसरी तरफ से उस लडके ने कहा।‘‘
‘‘भाड मे जा ।‘‘आरती ने गुस्से मे फोन काट दिया।
ऐसी ही ना जाने कितनी बार उसे फोन आते थे कभी उसकी ड््ेस की तारीफ तो कभी उसकी हेयर स्टाईल की । उसे समझ नही आ रहा था । आखिर ये लडका कौन है ?। ऐसा कई बार हो चुका था , की उसे अननोन न. से काॅल आती थी। वो कई सिम भी बदल चुकी है लेकिन हर बार पता नही कैसे ये न. उस लडके के पास चले जाते है । एक दिन आरती मंदिर से आई फिर काॅलेज के लिए निकली। तभी उसी न. से कालॅ आई।।
‘‘हैलो ‘‘
‘‘यार इस पिंक सूट मे गजब लग रही हो कसम से , और आज मंदिर किस लिए गये थे आप । सोलह सोमवार किए है क्या मेरे लिए? ‘‘
‘‘बकवास बन्द करो अपनी । हो कौन तुम?‘‘ आरती ने कहा।
‘‘यारा अच्छे पति के लिए सोलह सोमवार कर रही हो । यारा करने की जरूरत नही । मै तो पहले ही तुम्हारा हूॅ। और इतनी पतली पहले ही हो। व्रत करोगी तो क्या होगा आपका ‘‘
‘‘हो कौन तुम सामने क्यो नही आते?‘‘आरती ने गुस्से मे कहा।
‘‘हो यार इतनी जल्दी मुझसे मिलने के लिए ।‘‘
‘‘हा........ तु सामने तो आ। अच्छे से खातिर उतारती हू फिर तेरी‘‘
‘‘हा यार जरूर आपकी यह वीस तो जरूर पुरी करंेगें। बोलो कब मिलना है। ‘‘कल सामने आ बताती हू फिर तुझे । मैनें तेरे जैसे आशिक ही ठीक किये है ‘‘
‘‘पर मैम मै आशिक थोडा ढिट किस्म का हॅू । आपको अपना बना कर ही रहूंगा।‘‘
रात भर आरती बस यही सोचती रही क्या - क्या बोलना है उसको । कैसे उसको सबक सिखाना है । एक लम्बा लेक्चर उसके लिए सोच रखा था। तुम्हार े मम्मी पापा ने क्या यही सिखाया है ?। कोई तुम्हारी बहन को ऐसे परेशान करे तो। आगे से काॅल की तो सीधा पुलिस स्टेशन जाउंगी।
अगले दिन आरती काॅलेज से आ रही थी । बस से उतकर आॅटो मे बैठी थी घर आने के लिए। आॅटो मे एक वही थी । आॅटो के चलने का अभी टाईम नही हुआ था। तभी एक स्मार्ट सा लडका उसके सामने आकर बैठ गया।
‘‘ मैम बन्दा आपके सामने है , कर लिजिए खातिर‘‘ उस लडके ने कहा।
आरती तो जैसे सन थी उसे देखकर ये लडका तो उसके कालेज मे पढता है । और ये उसके फैं्ड का पडोसी है । वो तो कुछ बोल ही नही पा रही थी उसे देख। रात को लेक्चर उसने याद किया । उसे देख कर सब भूल चुकी थी। ‘‘हैलो मैम ..... बन्दा आपके सामने है । कुछ तो बोलिए। ‘‘ उस लडके ने चुटकी बजाते हुये कहा। आरती घबरा जरूर गई थी मगर उसने जो कहना था वो बोल दिया। उसने कहा‘‘ अपनी पागलपन की हरकतें बन्द करो। मैं उस टाईप की लडकी बिल्कुल नही जैसी तुम सोच रहे हो । तुम्हारे लिए अच्छा होगा । मेरा पीछा छोड किसी ओर को पटाओ। मै इन सब लफडो से कोशो दूर हू। बन्द करो मुझे परेशान करना । अब तक बस इसलिए चुप थी ,कि केश किया तो मेरी भी बदनामी होगी। लेकिन अब पानी सिर से उपर गया। अब परेशान किया तो जेल की हवा खाना समझ गये। ‘‘
‘‘ एक मिनट मेरी बात तो सुनो।‘‘
‘‘मुझे कुछ नही सुन ना ‘‘
तभी आॅटो के चलने का टाईम हो जाता है और लडका आॅटो से उतर जाता है । आरती अपने घर ना जाकर सीधे अपने फैन्डस के घर जाती है । ‘‘ अरे!....... आरती तुम्हारा यहा कैसे आना हुआ आज?‘‘ ज्योती ने हैरानी के साथ पुछा
‘‘ मै जो पुछने वाली हू उसका जवाब दो ‘‘ आरती ने गुस्से मे कहा
‘‘ अरे बाबा इतना गुस्सा.... हुआ क्या है ये बता‘‘
‘‘ तुमने उस लडके को मेरे न. दिये । जो तुम्हारे पडोस मे रहता है ‘‘
‘‘शान्ति से मेरी बात सुनो पहले‘‘
‘‘ हाॅ या ना तुम बस ये बात बताओ ‘‘आरती ने गुस्से मे कहा।
‘‘ हाॅ मैने ही दिये है ‘‘
‘‘ क्यो? क्या मै पुछ सकती हॅू?‘‘
‘‘ यार मेरा भाई लगता है वो और बहुत प्यार करता है तुमसे । यार बहुत ज्यादा । उसमे कोई बुराई नही है। तुम्हे बहुत खुश रखेगा। ‘‘
‘‘ बकवाश बन्द करो अपनी। मेरे मम्मी पापा मुझे पढने के लिए काॅलेज भेजते है । इन सब फालतु कामो के लिए नही । मेरे पापा को जो विश्वास मुझ पर है उसे मैं कभी नही तोड सकती । और जो लडकी मुझे नही समझती और मुझे गलत रस्ते पर चलने के लिए कहेगी, वो मेरी फैंडस नही हो सकती। ‘‘ ये सब कहकर आरती वहाॅ से चली जाती है । आरती ने उस दिन के बाद अपनी फैंडस से बात नही की । वो अकेली ही काॅलेज जाने लगी। पर उस लडके ने उसका पीछा नही छोडा । साये की तरह उसके साथ रहा। बस मे अगर ज्यादा भीड होती। कोई बन्दा धक्का मारता तो वो उसके पीछे रहता । ताकि आरती को धक्का ना लगे।बस मे अगर सीट नही होती तो वो कंडक्टर को बोल कर खाली करवा देता। और आरती को पता भी नही चलने देता। हाइवे रोड क्रास करते समय आरती को कोई परेशानी ना हो तो वो हाथ देकर आगे से रोड काॅस करता। । जब उसको पता चला आरती को फीस देने मे प्राब्लमस हो रही है तो अपने महोल्ले के 10-12 बच्चे भेज दिये उसके घर ताकि उसकी थोडी हेल्प हो सके और वो खुद उन बच्चो को रूपये देता ट्यूशन फीस भरने के लिए । जब तक आरती काॅलेज से घर नही पॅहुच जाती तब तक वो भी घर नही ंजाता था। लेकित आरती ने उसे पुरी तरह इग्नोर किया। वो लडका हमेशा उसकी मदद करता रहा, बिना कुछ कहे,और आरती को कभी पता तक नही लगने दिया। उसने पुरे 3 साल आरती को दिये। पागलो की तरह उसको चाहा। इन 3 सालो मे ना जाने कितने ही शादी के रिश्ते वो रिजेक्ट कर चुका था । कही ना कही वो आरती के दिल मे जगह बना चुका था। आज काॅलेज का अंतिम दिन था। अजय के मन मे बहुत उम्मीदे थी । शायद आरती कभी ना कभी तंो उसे समझेंगी और हुआ भी वो । आरती , अजय के पास आई ।
‘‘बहुत प्यार करते हो मुझसे ?आरती ने पुछा।
‘‘हाॅ बहुत ज्यादा अपनी जान भी दे सकता हॅू। ‘‘ अजय ने कहा।
‘‘ मै भी तुम्हे बहुत चाहती हू । ये कब और कैसे हुआ पता नही। बस हो गया। ‘‘आरती ने कहा।
‘‘ मुझसे शादी करोगी ?‘‘अजय ने बडे प्यार से पुछा।
‘‘ मै तुम से बहुत प्यार करती हू अजय, लेकिन शादी नही कर सकती। मुझे माफ करना। प्यार तो मै तुमसे बहुत पहले से करती हू। पर कभी कहा नही । मुझे लगा तुम पिछा छोड दोगे इग्नोर करने पर ऐसा नही हुआ। तुमने अपनी 3 साल मेरे पीछे गवा दिये। मजबुर होकर मुझे तुमसे बात करनी पडी। ऐसा मत करो तुम। मै तुम्हारी कभी नही हो सकती। ‘‘ आरती ने नम आॅखो से कहा।
‘‘लेकिन वजह क्या है? मै जान सकता हॅू जो प्यार करने के बावजूद तुम मुझे अपना नही सकती।
‘‘वजह है मेरी फैमिली । मै बहुत प्यार करती हॅू अपने मम्मी - पापा को । कभी उनके विश्वास को तोडना नही चाहती। तुम्हारी और हमारी कास्ट अलग है । मेरी फैमिली कभी नही मानेगी इसके लिए ।
‘‘ हम घर से भाग कर शादी कर सकते है ‘‘
‘‘ कितना आसान है ना ये कहना की भाग कर शादी कर ले। लेकिन उसका नतिजा क्या होगा ये सोचा कभी । जो लडकिया घर से भाग जाती है । उनकी परिवार पर क्या बितती है अनदाजा है तुम्हे। मैंने बहुत करीब से महसूस किया है उस दर्द को । पता है मेरी एक बैस्ट फैंड हुआ करती थी। जब मै बारहवीं मे पढती थी। उसका नाम संगीता था। मैंने कभी नही सोचा था की वो ऐसा कदम उठायेगी। वो एक लडके से प्यार करती थी । और घर से भाग कर शादी कर ली । उसको पता था। उसकी परिवार कभी नही मानेगा इस शादी के लिए। उसने चन दिनो के प्यार के खातिर अपने मा बाप के प्यार को भुला दिया। उसके मम्मी पापा का रो रो कर बुरा हाल था। सिर उठा कर घर से बाहर नही निकल सकते थे। स्कूल मे सभी बच्चे उसके बहन- भाई को चिढाते थे बोलते ओय उनकी बहन भाग गई घर से । उसके पापा ने फिर उसकी छोटी बहनो की शादी करा दी 3-4 महिनो के अंदर और उसके भाई का दुसरे स्कूल मे एडमिशन करा दिया। पता मेरे साथ कोई लडकी स्कूल नही जाती थी उनकी मम्मी ने मना कर दिया था। कभी मेरी संगत मे वो ना बिगड जाये। यहाॅ तक की मेरी मम्मी को भी काफी कुछ सुनाया पडोस की औरतो ने । बोला उन्होने की तेरी लडकी के साथ पढने वाली लडकी तो अपने घर वालो की नाक कटा गई। कभी तुम्हारी लडकी भी ऐसा कदम ना उठा ले । पढाई बन्द करवा कर शादी करा दो उसकी । लेकिन मेरी मम्मी ने कहा मुझे मेरी परवरिश और बेटी पर पुरा भरोसा है । वो चाहते तो मेरी भी पढाई बन्द करवाकर शादी करा सकते थे। लेकिन उनको मुझ पर भरोसा था। तो मै अब कैसे उनके भरोसे और प्यार पर चाटा लगा दू । मै तुमसे बहुत प्यार करती हॅू। अपनी जान भी दे सकती हू मांगो तो। लेेकिन अपने पैरेन्ट्स का विश्वास नही तोड सकती। ‘‘
‘‘मै समझ गया । जो तुम कहना चाहती हो। ‘‘
‘‘तुम बहुत प्यार करते हो ना मुझसे । तो मेरी एक बात मानोगे?‘‘
‘‘ हा , बोलो तुम ‘‘
‘‘मेरे पीछे यू अपनी लाईफ बरबाद मत करो। शादी कर लो तुम‘‘
‘‘ पागल हो तुम? अगर तुम नही तो कोई भी लडकी मेरी लाईफ मे नही आएगी। ‘‘
‘‘ मैंने कभी तुम से कुछ नही माॅगा। अब माॅग रही हू , मेरी खुशी के लिए कर लो । तुम्हे मेरी कसम है । ‘‘आरती की आॅखो मे आॅसू थें दोनो एक - दुसरे के गले लगकर रोये। फिर अजय वहा से चला गया।
कुछ दिन बाद ज्योती का फोन आया आती को- ‘‘ हैलो आरती, अजय भैया की शादी है अगले रविवार को‘‘ ज्योती ने कहा।
पर आरती की कुछ हिम्मत नही हुई कुछ बोलने की और वो नीचे बैठ गई । उधर अजय की शादी हो गई । अजय ने शादी तो की आरती के कहने पर लेकिन अपनी वाइफ को वो अपना ना सका । उसके रूह मे तो आरती समा चुकी थी। उसकी पत्नी ने बहुत कोशिश की उसे अपना बनाने की । लेकिन वो आरती को नही भुला सका। उनके झगडे ज्यादा बढने लगे।
अजय अब हर समय नशे मे रहने लगा था। अन्दर ही अन्दर बहुत टुट चुका था । कोइ नही था उसे संभाल ने वाला ं।नशे की हालत मे दर्द भरी शायरी और गाने गुनगुनाता रहता। एक दिन ज्याती उसके घर गई ‘‘भाई ये हालत बना रखी है आपने‘‘ ज्योती ने कहा।
‘‘ ये इश्क कर सजा है की यू बर्बाद हुए है हम
न हाल है ना ही हालत है बस मर कर जी रहे है हम....... ‘‘ अजय ने कहा।
‘‘ भाई होश मे आओ । आरती को पता चला। वो कभी नही देख पायेगी आपको इस हालत मे‘‘
‘‘ ये तो बस जिस्म , यहा जो है ....
दिल और धडकन उधर ,जहा वो है............. ।

ज्योती ने घर जाकर आरती को बताया उसकी ये हालत है । आरती ने कहा ‘‘ मै उस से बात करूंगी । उसे समझाने की कोशिश करूंगी । ‘‘
एक दिन अजय और उसकी पत्नी के झगडे ज्यादा बढ गये । और अजय नशे की हालत मै बाईक लेकर घर से बाहर चला गया। ऐसा गया की फिर कभी वापस नही आया। हमेशा के लिए इस दुनिया को छोड कर चला गया।................
सुबह ज्योती ने आरती को फोन किया। ‘‘ हेलो आरती , अजय भाई अब इस दुनिया मे नही रहे। चले गये हम सब को छोड कर। ‘‘ आरती को अपने कानो पर विश्वाश नही था। ‘‘ क्या बोल रही हो ? होश मे तो हो तुम? मजाक बन्द करो । बहुत मारूंगी मै तुम्हे वही आकर‘‘ आरती नेे कहा।
‘‘ काश ये मजाक होता.....पर . ‘‘ ज्योती ने रोते हुये कहा आगे बोल नही सकी और फोन का रख दिया। आरती के अन्दर दर्द का समुन्दर उमड पडा था, जो बहा देना चाहता था सब कुछ। आरती वाशरूम गई और शावर चला जी भर कर रोई । ..आज इस बात को एक साल हो गया। वो आज भी खुद को उसकी मौत का कारण मानती है । अजय को याद करके उसकीे ये आंखे बरस पडती है ........।

ये स्टोरी उन प्यारी लडकीयो के नाम जो अपने प्यार को एकतरफा रखती है लेकिन अपने मम्मी पापा का सिर कभी नही झुकने देती। बहुत सी लडकिया ऐसी होती है जो खुन के आॅसू रोती है पर कभी अपने माॅ - बाप को नही रोने देती। खुद मुहब्बत मे बेवफा हो जाती है पर अपने मा ‘- बाप को शर्मिंदा नही करती। जिस तरह ये अपने प्यार को कुर्बान कर देती है क्या कभी ऐसा भी हो पायेगा की मा - बाप इन जाति और धर्म से उपर उठकर अपने बच्चो की खुशी के लिए लड सकेंगे। धीरे धीरे करके समाज बदल तो रहा है । .................

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