ये 12 जुलाई 2009 की पानी से भींगती मुंबई की खुशगंवार शाम थी . होटल ओबराय के बगल में “मारिय- स्पर्श हॉस्पिटल “ का बोर्ड दूर से चमक रहा था .दूर से अस्पताल की इमारत को देख कर लगता था की ये कोई होटल हीं है . जो भारत जैसे गरीब मुल्क के अमीर होटल “ ओबराय “ से टक्कर ले रहा है . पर नहीं ये होटल नही ये तो अस्पताल था , गरीब , असहाय और सब जगहों से निराश और हताश हो चुके रोगियों की जिंदगी का आख़िरी सहारा .


पर हाँ यंहां होटल था , अबके 3 साल और 4 महीने पहले तक मुबई के चंद सबसे पुराने पांच सितारा होटलों में से एक “ The Paramount Hotel “ डेढ़ सदी से सर उठाये शान से इसी जगह खड़ा था . ना जाने कितने रंग ,हरम और खेल देख चुके जिस होटल के बिस्तरों में कितने जायज़ –नाजायज़ सबंध हर रात और दिन सैकड़ो सालो तक गुलजार थे अब वो रोगियों की पीड़ा भरी कराहों से गूंजने वाला था .और मैरिन ड्राइव के मटमैले संमदर की अथाह जलराशि न जाने युगों-युगों से क्या देख रही थी .


अस्पताल के भीतर शानदार ऑफिस में घुसते ही जिस चीज़ पर सबसे पहली नजर अटक जाती थी वो दीवाल पर टंगा एक खाली फोटो फ्रेम था . उस फ्रेम के ठीक नीचे बड़ी सी कुर्सी पर इस वक्त विराजमान थे अस्पताल के मालिक शंकर रंगराजन . अगर अंग्रेजी कैलेंडर को आधार माने तो अब तक शंकर रंगराजन की जिंदगी के 78 कैलेंडर भर चुके थे . सुदूर दक्षिण-भारत के किसी गाँव के पंडित परिवार में जन्मे शंकर के चेहरे के दागों और एक अधखुली आँख को अगर अनदेखा किया जा सके तो देखने भर से एक प्रभावशाली पुरुष की छवि बनती थी. रंगराजन के सामने शानदार कोट सूट पहने अब से कुछ साल तक इस जगह पर काबिज रहे होटल के बुजुर्ग मालिक महेश मलिक और उनके पुत्र तरुण मलिक विद्यमान थे और काफी पी रहे थे . मलिक परिवार के पूर्वजो ने “ The Paramount Hotel “ की नीवं रख कर मुंबई के धनकुबेरों और रसिकों को विलासता का नया स्थान दिया था .
महेश मलिक ने मंहगे फूलोँ से बना हुआ एक गुलदस्ता Mr. रंगराजन के हांथों में सौंपते हुए बोले “ मुबारक हो श्रीमान ! आख़िर आपका सपना पूरा हुआ और आपने मुंबई के हमारे सबसे खुबसूरत होटल को सबसे खुबसूरत अस्पताल में बदल दिया .”


“ जी , मेरे सपने को हकीकत में बदलने में आपका भी बहुत सहयोग रहा है “ शंकर ने हल्की सी मुस्कान के साथ बोला .
तरुण मलिक ने काफी दिन से अपने दिल में उठ रहे सवाल को शब्द देते हुए शंकर रंगराजन से पूछा “ सर , मुझे एक बात नहीं समझ आ रही है की अगर आपको ये चैरटी अस्पताल खोलना ही था तो देश के किसी सस्ते और पिछड़े स्थान पर खोलते ताकि वंहा के लोगों को सुविधा मिलती या फिर मुंबई के ही किसी सस्ते एरिया में अस्पताल खोलते ताकि आपका खर्च कम होता , आप यंहा शहर की सबसे महँगी जगह में ये खैराती अस्पताल क्यों खोल रहे है , इस से क्या फायदा होगा ..? “


शंकर रंगराजन ने खिड़की से बाहर देखा बारिश की बुँदे समंदर के पानी में गिर कर अपना वजूद खो कर खारे पानी में तब्दील हो रही थी . कुछ पल तक वो प्रकृति का ये खेल देखते रहे फिर धीमे से तरुण को देखते हुए बोले “ एक कहानी सुनोगे .? “


“ कहानी ..? “ तरुण ने चौकते हुआ पूछा और फिर सहमती में सर हिला दिया .


शंकर रंगराजन ने सामने रखे काँफी के कप से एक सिप काफी अंदर खिची और तरुण से पूछा “ तरुण बेटा आज जिस जगह पर ये ऑफिस है , क्या तुम बता सकते हो यंहा पर जब तुम्हारा होटल था तब क्या था ..? “


“ सर इस जगह पर “ The Paramount Hotel “ की का दिल “ The Rass Baar ‘ था. जिसकी पंच लाईन थी ‘ यंहा आपकी हर प्यास का स्वागत है ‘ . पर आप तो कोई कहानी सुनाने वाले थे . आपकी कहानी का The Rass Baar से क्या ताल्लुक ..? “ तरुण ने कुछ न समझते हुए सवाल किया .
रंगनाथ ने धीमे शब्दों में कहना शुरू किया .


“ बात तब की है जब मुंबई बाँम्बे हुआ करती थी , सन 1956 के बारिश के यही दिन थे बाँम्बे के सारे अखबारों में एक विज्ञापन छपा “ बम्बई वासियों आपकी बदरंग दुनिया को अपने हुस्न से तरबतर करने आ रही है ‘ मलिका-ए- हुस्न ‘ मारिया ‘. आइये और लुफ्त उठाइए एक नये रोमांचक कैबरे डांस का सिर्फ “ The Paramount Hotel ‘ के ‘ The Rass Baar ‘ में . जंहा आपकी हर प्यास का स्वागत है ‘ सारे शहर में बड़े-बड़े पोस्टर लग गए . और शहर के रईसजादो के बदन में एक सनसनी सी मचल गयी .


बम्बई में ना रसिकों की कमी थी और न धनकुबेरों की और न उनकी विलासता की . और उनकी इस विलासता और रंगीनियत को पूरा करने के लिए बड़े-बड़े होटल और क्लब देश और विदेश से कान्ट्रेक्ट पर कैबरे डांसर और बार-गर्ल बुलाते थे . जो जितना ज्यादा अपने जिस्म का प्रदर्शन कर सकती थी और जिसके यौवन में जिनता ज्यादा निखार होता था उसका कान्ट्रेक्ट उतना मँहगा होता था . उन लडकियों को होटल के बाहर का सूरज देखना मना होता था ,डांस के बाद उनको उनके कमरे में ताला लगा कर रखा जाता था ताकि कोई बाहरी उन तक न पहुंच जाए . शबाब के सुरूर में शराब की अनगनित बोतले सफेदपोशों के पेट में जाती और उनकी हवस की प्यास के साथ साथ होटल की आमदनी में इजाफा होता जाता .


और इस बार ‘ The Paramount Hotel ‘ ने पूरे चालिस हज़ार रुपय में 3 महीने का कान्ट्रेक्ट किया था गोवा की 17 साला पुर्तगाली लड़की “ मारिया मिन्टो ‘ से . 17 साल की कोमल सी बला की खूबसूरत लड़की मारिया . कैब्रे के फ्लोर में मारिया के आते ही देखने वालो के अरमान मचल उठते थे . ढल गयी उम्र के धनिक भी मरिया के चंद पालो के साथ के लिए दोनों हाथ से पैसे उड़ाने को तैयार रहते थे . पर मरिया के लिए कैब्रे सिर्फ एक जरिया था अपने परिवार को चलाने के लिए . मारिया जितनी खूबसूरत थी उतनी ही मासूम और साफ़ दिल भी . काजल की कोठरी में रहते हुए भी कालिख की एक बूंद भी उसके दामन को छू नही पाई थी .


12 जुलाई 1956 की वो भी एक बादलों से लिपटी शाम थी . मुल्क को आजाद हुए अभी चंद बरस ही हुए थे पर आज सूरज के ढलने के साथ साथ जो अमीरी का सूरज ‘ The Paramount Hotel ‘ में निकल रहा था उसे देख कर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता था की ये उसी शहर का एक हिस्सा है जंहाँ चंद फांसले पर ही पूरे एशिया के सबसे ज्यादा लोग झोपड़-पट्टी में रहते हैं . होटल के बाहर कारों का काफिला लगा था नई कारों से पुराने और पुरानी कारों से नये लोग निकल कर होटल में जा रहे थे . बाँम्बे शहर की पुरुष जनसंख्या के अधिकांश कुलीन आज ‘ The Paramount Hotel ‘ में खड़े थे . The Rass Baar में आज इंच भर जगह खाली न थी , सारी टेबलों की टिकट 4 दिन पहले बिक चुकी थी . कैबरे बाजार की सबसे कीमती चीज़ का नाम है – ‘ यौवन ‘. और इस तरल पदार्थ के ज्वार-भाटे के बहाव में बहने के लिए ही ये मजमा लगा था . आज मारिया का पहला शो था .


कुछ समय बाद बार के बीचो-बीचो बने स्टेज पर एक सूट में सजा सुंदर युवक हाथ में माइक ले कर खड़ा हो गया . मरिया का इंतजार करती 400 इंसानों की 800 आँखे और कान उस युवक से जा लगी . उस युवक की आवाज़ हाँल के हर कोने में फैलने लगी .


“ लेडीज़ एंड जेंटिलमैन ! ( हालाकिं उस पुरे हाल में एक भी लेडीज़ नही थी ) आप सबने आज तक जिंदगी में एक से एक हसीनों को देखा होगा , पर यकीं से कह सकता हूँ वो सब अधूरी हैं हमारी मारिया मिन्टो के सामने . यकीं नही होता तो खुद देख लीजिये ... “ उसके इतना कहते ही हाल की बत्तियां बुझ गयीं और कुछ पलो के बाद नीली रौशनी में लाल रेशमी लबादे में जो जिस्म स्टेज पर उभरा वो मारिया मिन्टो का था .


संगीत की तेज स्वर लहरियों ने इंसान की पशु-प्रवृतियों जगाना शुरू कर दिया . और कुछ ही पलो में उसने अपना लाल रेशमी लबादा उतार फेंका . मारिया का जिस्म तेज गति से नाचने लगा . वासना का नंगा नाच . एक-एक करके उसके कपडें अपने आप कम होने लगे . नारी मांस के शरीर का भूखा शहर बाँम्बे एक नई उतेज्जना से आंहे और सिस्कारियां भरने लगा . शराब और शबाब के दौर में लोग मदहोश होने लगे .


और इसी बीच मारिया की नजर आखरी सीट पर बैठे एक 23-24 साल के युवक पर पड़ी . वो इस तमाशे के बीच में हो कर भी नही था . वो चुपचाप शांत आँखों से हाथ में थमे शराब के पैग को देख रहा था . मारिया सहम गयी ये कौन है जिसके मुंह से एक बार भी हुस्न को देख कर आह तक न निकली . मारिया जिस टेबल के बगल से निकल जाती उस टेबल के लोग मरिया के बदन के इंच भर हिस्सा छू लेने के लिए बेताब हो जाते , पर ये कौन था जिसके बगल से मारिया इतने बार गुजरी पर उसके शरीर में हरकत तक न हुयी . और फिर ये तो रोज का तमाशा बन गया . युवक रोज आता और चुपचाप मारिया को देख कर चला जाता .


पर शायद वक्त को कुछ और मंजूर था . उस युवक और मारिया में आँखों ही आँखों एक रिश्ता बन गया . और 17 साल की वह नम्र स्वाभाव की कच्ची कैबरे नर्तकी और बम्बई की एक बड़ी कंपनी का वो मार्केटिंग अधिकारी शराबियों के शोरगुल , भद्दे इशारों आँहों और उन्माद के बीच मोहब्बत कर बैठे . और भी 24 कैरेट खरी :मोहब्बत .


इशारो में बात होती , बैरे 1 रूपए के बदले दिल से निकल कर कागज पर उकेरे गये शब्दों को प्रेम-पत्रों के रूप एक-दूसरें तक पहुँचाने लगे . 3 महीने का मारिया का होटल से करार पूरा होते ही शादी कर लेने का निश्चय हो गया . धीरे- धीरे मोहब्बत की खुशबू फिजा में फैलने लगी और युवक के दोस्त उसको समझाने लगे की वो क्यों ये पागलपन कर रहा .


कहानी सुनाते-सुनाते शंकर रंगराजन रुके और समाने रखे ग्लास से कुछ घूँट पानी पिया , तरुण मलिक के लिए अपने होटल में जन्मी प्रेम कथा को सुनना एक अनोखा अनुभव था , और अभी जैसे कुछ याद करते हुए महेश मलिक ने कहना शुरू किया “ हाँ , मुझे याद है उस समय ‘ The Paramount Hotel ‘ का प्रबन्धन मेरे हाथ में ही था , और मैंने मारिया को समझाया भी था की वो ये बेवकूफी ना करे , मारिया की वजह से हमारे होटल की आमदनी बहुत बढ़ गयी थी, और मै इस लिए नही चाहता था की मरिया होटल छोड़ कर शादी करे , मैंने मरिया को भय दिखाया था की वो कुछ दिनों बाद तंग कपड़ो में किसी बदनाम गली में जिस्म बेचती नजर आएगी . मैं मरिया को समाज की हकीकत समझाना चाहता था कि जो लोग यंहां तुम्हारी एक एक अदा के लिए पलके बिछा कर रखते है , सड़क पर निकलते ही वो नैतिकता , धर्म और समाज सेवक का नकाब पहन लेते है . उस समाज में एक नर्तकी का कोई वजूद नही है , कोई इज्जत नही है . ये लोग अपने जूते तक सोने के कमरे में नही ले जाते , बाथरूम के लिए अलग स्लीपर रखते है तो तुम्हे कैसे अपने समाज में आने देगे .


मैंने मारिया को पैसे बढानें से लेकर कमीशन तक का लालच दिया पर सब बेकार . मरिया ने कांट्रेक्ट पूरा होते ही शादी कर ली , उसके बाद क्या हुआ मुझे नही पता .” महेश मलिक ने निराश स्वर में बोला .


शंकर रंगराजन ने एक फिर से खिड़की के बाहर देखा बारिश अब बहुत तेज हो चुकी थी , कुछ पलो की चुप्पी के बाद उन्होंने कहना शुरू किया , “ नहीं मलिक साहब आप कुछ भूल रहे है खैर आगे की कहानी सुनिए शायद याद आ जाये .


तो एक कैबरे डांसर को अपना जीवन-साथी और एक युवक को उसकी जीवन-संगनी मिल गये . दोनों के अनगिनत अरमान थे और वो बेपनाह खुश भी थे . उन दोनों के जीवन में था सिर्फ प्यार . मारिया हरदम उस युवक से कहा करती थी कि “ हमारा प्यार सोने सा खरा है , बिना मिलावट का हमारी मोहब्बत: 24 कैरेट शुद्ध है . उनके असीम प्यार से फिजाएं झूम उठी थी .
लेकिन अबके आधे सदी से पहले मुंबई आज का मुंबई नही तक का बाँम्बे था , हर तरह ये चर्चा थी की कैसे एक उच्च कुलीन युवक ने एक नग्न नाच करने वाली से ब्याह रचा लिया है . उन्होंने प्यार किया था और इसकी सजा तो उन्हें मिलनी ही थी . युवक को उसकी कम्पनी ने नौकरी से निकाल दिया . कम्पनी का कहना था युवक के इस कृत्य से कंपनी की साख गिरी है और अगर युवक को नही निकाला गया तो कंपनी के माल की बिक्री गिर जाएगी और नुकसान होगा . अजब संयोग था जिस दिन युवक को उसकी नौकरी से निकाला गया उस दिन ही उनकी शादी को एक माह ही पूरा हुआ था . और युवक मारिया को उसकी पसंद का पियानो उपहार में ना दे सका था .


नौकरी जाने से दोनों को गम तो हुआ पर उन्होंने सोचा की इतने बड़े शहर में नौकरी की क्या कमी ? युवक को अपनी काबिलियत पर पर पूरा भरोसा था पर वो ये भूल गया था की उसकी काबिलियत के ऊपर मोहब्बत का कलंक हावी हो चुका है . वो हर दिन किसी न किसी दफ्तर में नौकरी की आस लिए पहुंचता और उसे जवाब मिलता “अरे तुम वहीं हो न जिसने ‘ The Paramount Hotel ‘ की कैबरे डांसर को उड़ा लिया .? “
युवक नाराजगी से जवाब देता “ नही हमने शादी की है और वो मेरी पत्नी है “
उधर से जवाब आता “ जो भी हो , हम ऐसे इंसान को अपने यंहा नौकरी पर नहीं रख सकते .“ नौकरी की आस टूटने लगी . जिंदगी अँधेरी का बंगला छोड़ कर धारावी की चाल मे चलने लगी. बैंक में बैलेंस भले ही कम होने लगा हो पर उनके प्यार और हौसलें में कोई कमी नही आई थी . और एक निश्चय भी वो इस बाँम्बे में जिसने उन्हें मिलाया हैं , उसी में वो अपना फिर से मुक़ाम पाएंगे और एक दिन ‘ The Paramount Hotel ‘ का सबसे मँहगा डिनर करेगें.
बड़ी कंपनी का मार्केटिंग वाला गेटवे ऑफ इंडिया के सामने छातें से लेकर चर्च गेट के सामने पेन तक बेचने लगा . ‘ The Paramount Hotel ‘ के राजप्रसाद की शान जोगन बन गयी नर्म कारपेट में पांव रख चलने वाली , मखमली बिस्तर में सोने वाली लड़की ने सीलन और उड़ चुके रंग की दिवालो के बीच में खुद को दफन कर लिया . जिसके एक इशारे पर वेटरों की कतारें लग जाती थी वो सुबह से शाम तक घर के काम निपटाती रहती . पर जिंदगी के अभाव बढ़ते जा रहे थे . सुंदरता और शरीर के ऊपर गरीबी ने अपना स्याहा साया डाल दिया था .


एक दिन मारिया युवक से छुपा के ‘ The Paramount Hotel ‘ के मालिक महेश मलिक से मिली और विनती की “ मुझे बार गर्ल के रूप में होटल में रख लीजिये , ग्राहकों को शाराब परोसने के बाद चली जाया करुँगी , होटल में खाना भी नही खाऊँगी ‘
और मलिक साहब ने मुस्कुरा के जवाब दिया था , “ मारिया यंहा कुंवारी लड़की रखी जाती है , ये कोई नारी निकेतन नहीं है जंहा मै शादीशुदा और विधवाओं को रखता फिरूँ . हाँ एक काम कर सकता हूँ होटल के कमरों में अक्सर लोग रात गुजारने के लिए जिस्म की मांग करते है , तो तुम आ जाया करो , और रात खत्म होते ही पैसे ले कर चली जाना . “ तब अपमान से जलती मारिया ने Mr. मलिक के मुंह में थूक दिया और हरदम के लिए ‘ The-Paramount Hotel ‘ से निकल गयी .
लज्जा से सर झुकायें महेश मलिक कुछ नही बोल सके
.
ऑफिस में पसर गये मौन को तोड़ते हुए शंकर रंगराजन ने फिर बोलना शुरू किया “ और जल्द ही मारिया को महसूस हुआ उनके प्यार की निशानी उसकी कोख में आकार ले रही है . युवक को पता लगा तो वो ख़ुशी से झूम उठा , उसने और मेहनत करनी शुरू कर दी .
पर अभी तो इस जोड़े को सिर्फ समाज ने उनकी मोहब्बत की सजा दी थी , अब कुदरत की बारी थी . शहर में चेचक ( चिकन पाक्स ) ने महामारी का रूप ले लिया था . और वो सजीला युवक कब इसकी गिरफ्त में आ गया वो खुद ना जान सका . और जब जाना तब तक बहुत वक्त बीत गया था . सारे बदन में फोड़ो ने अपना अधिकार जमा लिया था , बदन भट्टी की तरह तपने लगा , और कोख में 7 महीने की जान को सम्हाले मारिया हाँथ में दस्ताने पहने रुई के फाहों से कमरे की फिनायल की महक के बीच फफोलो की पस और मवाद साफ़ करती रही . पर मर्ज और बढ़ता गया तो पड़ोसियों में भी ये फ़ैल न जाए इस डर से पडोस वालो ने खैराती अस्पताल में युवक को भर्ती करवा दिया .


उस खैराती अस्पताल के संक्रामक रोग विभाग में जाने की इजाजत किसी को नही थी , मारिया हर सुबह शाम अपने भारी कदमों से चलती हुयी आती और वार्ड के बाहर एक खुद से बनाया हुआ फूलों का गुलदस्ता रख कर चली जाती . मारिया को अपने प्यार पर यकीन था उसे भरोसा था की उसके पति को कुछ नही होगा . अंदर बेड पर पड़ा युवक डॉक्टर से पूछता मेरी पत्नी आई थी और डॉक्टर बदले में मारिया का गुलदस्ता उसे थमा देता .
वो भी एक बारिश वाली रात थी , उन दोनों का प्रेम अंश शायद आज ही इस धरती पर आना चाहता था . उस दिन मारिया दर्द की वजह से अस्पताल ना जा सकी थी तो युवक का समाचार लेने के लिए बगल के लड़के को अस्पताल भेजा . और ..... खबर आई की युवक की आँखों को चेचक ने लील लिया है वो अब अपनी मारिया को कभी नही देख सकेगा .


“ मेरा ... अंधा हो गया ..? “ और इस शब्दों के साथ ही मारिया का संज्ञाहीन शरीर जमीन पर जा गिरा. और गिरते ही मारिया के शरीर के आंतरिक अंगो से खून की धार बह निकली . चाल वालो ने डाक्टर को बुलाया और डॉक्टर ने जांच के बाद मारिया की खूली आँखों को हरदम के लिए हाथ के स्पर्श से बंद कर दिया . कोख का बच्चा भी माँ के साथ-साथ दूसरी दुनियां में वापस चला गया . ‘ The Paramount Hotel का बार उस समय भी गुलजार था , शराब और शबाब के दौर के बीच कुछ माह पहले तक उस बार की शान का जिस्म सफेद चादर से ढका जा चुका था .
उधर अस्पताल में धीरे धीरे युवक सही होने लगा , हाँ बस उसकी एक आँख हरदम के लिए चली गयी थी . ( उस दिन चाल के लड़के ने डाक्टर की बात को सही से ना समझते हुए , गलत खबर दे दी थी ) पर मारिया के गुलदस्ते आने बंद हो जाने से वो बेचैन हो गया था. और बेचैनी सहन ना कर पाने के हालात में वो अस्पताल से चुपके से भाग कर अपने सपनों की कब्रगाह ( चाल ) पर पहुंचा . जिसे चाल के मालिक ने किसी और को भाड़े पर दे दिया था . अब वंहा कुछ नही था . उसने अपने और मारिया के लिखे चंद खत समेटे और बाँम्बे को अलविदा कह दिया .


उसी दिन उस युवक ने ‘ The Paramount Hotel ‘ के सामने से गुजरते हुए मारिया को हमेशा के लिए अमर कर देने का फैसला किया था . और वो जिंदा था तो सिर्फ उस सपने और खत में मारिया के लिखे चंद लफ्जो के खातिर “ शंकर हमारी मोहब्बत : 24 कैरेट है , ये कभी खत्म नही हो सकती “ और सालो-साल देश-विदेश में धक्के खाने के बाद वो वापस मुंबई आया , देखो उसने अपने सपने को पूरा कर लिया .


शंकर ने अपनी और मारिया की मोहब्बत को कभी मरने नही दिया . इतना कह कर रंगराजन खामोश हो गये . और आँसुओं से भीगी आँखों से महेश और तरुण मलिक ने देखा की तस्वीर के खाली फ्रेम से मारिया उन्हें निहार रही है . तरुण के होंठ हिले और उन से धीमे शब्दों में निकला “ सच में आपकी मोहब्बत 24 कैरेट है “

समाप्त

@ मृदुल ‘ कपिल ‘

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