4 फरवरी 2009
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश
आज ऑफिस का पहला दिन था| कल ही मुम्बई से शिफ्ट हुआ था, ऑफिस के तरफ से ही फ्लैट की व्यवस्था हो गयी थी तो रहने का टेंशन ख़तम हो गया। ठीक टाइम पर ऑफिस पहुच गया ।वहां के मैनेजर को मैंने रिपोर्ट किया, उन्होंने घंटी बजाकर चपरासी को बुलाया|
चपरासी दरवाजा खोलकर अंदर आया और बोला सर आपने बुलाया?
हाँ ये मिस्टर कुमार है और ये शर्मा जी के जगह पर आये हैं इनको केबिन दिखा दीजिये ।
चपरासी बोला चलिए सर
मैं उसके पीछे चल पड़ा मैंने उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम दिलीप बताया।
दिलीप ऑफिस से जुडी हर चीज़ को बताता चला गया, मैं बिना हस्तक्षेप करते सुनते चला गया।
और भी किसी चीज़ की जरुरत तो तो घंटी देकर बुला लीजिएगा!
मैंने कहा ओके
और वो चला गया
करीब एक घंटे तक मैं फाइलों के बीच खोया रहा।
मैंने बेल बजाया दिलीप दरवाजा खोला और कहा-बोलिए सर
मैंने कहा मैं सब लोगो से मिलना चाहता हूँ सबको केबिन में बुला लो।
दिलीप चला गया
कुछ देर बाद सब कर्मचारी केबिन में आ गए।
गुड मॉर्निंग मेरा नाम कुमार है और आज से आपका मैनेजर मैं ही हूँ आज से कोई भी दिक्कत होने पर सब मुझे रिपोर्ट करे । अब आप लोग अपना-अपना परिचय दें।
सब अपना परिचय देता गया और मैं चुपचाप सुनता गया उसके बाद सबको जाने के लिए बोल कर मैं अपने काम में जुट गया।
उन सब लोगों के बीच एक ऐसी लड़की थी जिसको देखकर मेरा नज़र उसी पर अटक गया। छोटी-छोटी आंखे,गुलाबी गाल,काले काले बाल मेकअप तो नही की थी लेकिन फिर भी बहुत सुंदर लग रही थी। निशा नाम था उसका और वो मेरे ऑफिस में डाटा एंट्री करती थी।

1 महीने बीत गए थे मैं अपने कर्मचारियों के बीच अच्छा मेल-भाव बैठा लिया था। सब मुझे आदर करते थे कोई भी समस्या मेरे साथ शेयर करते थे।
मैं निशा के पास जाने का हर एक मौका ढूंढता रहता। कभी कभी तो अपने केबिन में ही उसे बुला लेता। और ढेर सारी बाते किया करता।

पता नही क्यों लेकिन निशा से बात करके दिल को सुकून मिलता धीरे धीरे निशा से के बारे में सब कुछ जानने लगा। निशा के घर में मम्मी पापा के अलावा 2 भाई थे। निशा के पापा राईस मिल में काम करते थे।

कहते है अगर किसी की याद में नींद ना आये तो वो प्यार है
शायद मुझे भी हो गया था निशा से, और मैं गुमनाम सा कुछ कह नही पाता।

मैं प्यार कर बैठा था लेकिन डर था अपने इज़्ज़त की, कहीं अगर निशा माना कर दी तो तो क्या होगा। और अगर उसने ऑफिस में किसी को बता दी तो इज़्ज़त की धज्जियां उड़ जायेगी।

एक दिन उसको डिनर पर ले गया लेकिन ऐन मौके पर वो डर सामने आ जाता। मैं कुछ बोल ही नही पाया। ऐसे करते करते 2 साल बीत गए मैं और निशा दोनों दोस्त की तरह रहने लगे। एक साथ घूमते फिरते खाते पीते।

निशा लगातार 2 दिन ऑफिस नही आई मेरा दिल बैचैन होने लगा मैंने पता किया लेकिन कुछ पता नही चल पाया। मैंने उसके बायोडाटा से घर पर फ़ोन किया पता चला निशा पिछले 2 दिनों से लापता है।
मैंने पुलिस रिपोर्ट भी लिखवाया लेकिन कुछ पता नही चला-निशा के पापा ने कहा।

वक़्त बीतता गया मैं निशा की यादों में बिन पानी के मछली की तरह हो गया, कुछ अच्छा नही लग रहा था। मैं हर वक़्त उसकी यादों में खोया रहता था। निशा के नजदीकी मैं था लेकिन निशा निशा एक बार फ़ोन तक नही की।
2 साल गुजर गए मैं सबकुछ भूल कर नया जिन्दगी शुरू कर चुका था।

2013 में मेरी पोस्टिंग कोलकाता हो गयी। कोलकता की गलियों में ही मेरा बचपन बीता था इसलिए बहुत लगाव था कोलकाता से। कोलकाता में मेरे मामाजी थे। मामाजी बोले मेरे यहाँ ही रहो लेकिन मैंने मना कर दिया क्योंकि किसी के यह रहना मतलब किसी के सर का बोझ बनना।

ऑफिस के तरफ से जो रूम मिला था उसी में रहने लगा और अपना जिंदगी गुजरने लगा।

कोलकाता आए एक साल हो चुके थे मैं अपने अतीत को भूल चुका था यहां मेरे बहुत सारे दोस्त भी बन चुके थे।

धर्मतल्ला: कोलकाता का मज़ेदार मार्केट जहाँ रोज हज़ारो की भीड़ लगी रहती है शॉपिंग के लिए।
उसी के ठीक बगल में रॉयल बार जहा मैं और मेरे दोस्त हमेशा दो चार पैग लागते थे।
मैं और मेरे दोस्त हमेशा की तरह उस बार में गये। खबर लगी कज कोई नया डांसर चांदनी आने वाली है।
चलो आज चांदनी का दीदार कर ही लेते हैं-अंकित ने कहा
मैंने कहा- हाँ बिलकुल
और सब अपना अपना पैग उठाया
मिनी स्कर्ट पहने एक लड़की आयी और कांटा लगा......पर डांस करने लगी।
सब एन्जॉय करने लगे मैं भी मज़े ले रहा था। सब उसपर 500 और हज़ार के नोट उड़ा रहे थे। कुछ तो भूखे शेर की तरह उसे देख रहे थे।

अचानक मेरा ध्यान उस लड़की पर गया उसे देखकर मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई वो लड़की कोई और नही निशा थी।
मैं पक्का यकीन के साथ कह सकता था वो निशा ही थी।
मैं स्टेज के सामने गया और निशा से बात करने की कोशिश की लेकिन वो ऐसे बर्ताब की जैसे मुझे वो जानती नही। मेरा अतीत मेरे मन में आने लगा

11 बजे डांस ख़त्म होने के बाद चार लोगों के साथ कार में बैठ कर निकल गयी। मैं कुछ दूर था गया लेकिन वो कार बहुत आगे निकल गया।

मैं घर आया पूरी रात सो ना सका आज मुझे निशा पर तरस आ रहा था।

अगले दिन फिर उसी बार में गया निशा के आने का वेट करने लगा लेकिन वो नहीं आयी। मैं बार के मैनेजर से पूछताछ किया तो बोला वो सिर्फ रविवार को ही आती है।

रविवार को मैं फिर बार में गया वो आयी लेकिन इस बार वो मुझे देखती जरूर लेकिन कुछ कह नही पाती।
मैंने अपने जेब से 500 का नोट निकाला और और उसको दिखा कर उसपर अपना नंबर लिख दिया और उसको थमा दिया।
डांस खत्म होने के बार फिर वो वहां से निकल पड़ी।

रात करीब दो बजे फोन के रिंगटोन ने मुझे जगा दिया मैंने फ़ोन रिसीव किया
हेल्लो मैं निशा बोल रही हूँ कुमार सर?
हाँ निशा बोलो कहा हो? कैसे हो ?
सर प्लीज एक बार मिलिए सब बता दूंगी।
ठीक है लेकिन मिलूंगा कैसे ??कहाँ रहती हो?
सोनागाछी में रहती हूँ रखती हूं बाद में कॉल करती हूँ इसपर कॉलबैक मत कीजिएगा
सोनागाछी??????????- मैं चौंककर बिस्तर पर बैठ गया।
सोनागाछी एशिया का सबसे बड़ा रेडलाइट एरिया जहाँ हजारो लोग रोज अपने हवस को मिटाते हैं। और उस एरिया में निशा को ढूँढना जैसे दूध में मिले पानी को ढूंढने के जैसा था।
मैं निशा के कॉल का इंतज़ार करने लगा। 2 दिन बाद निशा कॉल आया।
सर आपको एक नंबर दे रहा हूँ आप उसपर कॉल कर के अपोइंटमेंट ले लीजिए तब आप मुझसे मिल सकेंगे।
मैंने नंबर नोट किया उसपर कॉल किया फ़ोन भारी भड़कम आवाज वाला कोई मर्द उठाया। मैंने अपॉइंटमेंट फिक्स किया 7000 में बात तय हो गई निशा अब मेरे घर पर आ सकती थी।

बताये गए दिन ठीक 7 बजे निशा मेरे घर आई और आते ही रोने लगी। मैंने उसे चुप कराया और पूछा तुम्हारी ये हालात कैसे??
जब मैं आपके कंपनी में जॉब करती थी तब मुझे एक लड़का अमज़त से प्यार हुआ। हमदोनो एक साथ मिलने लगे।जीने मरने की कसमें खाने लगे। उसी बीच आप भी मुझसे प्यार करने लगे। लेकिन मैं सब जानते हुए भी आपके प्यार को समझ नही पायी अंधी जो हो गयी थी अमज़त के प्यार में।
फिर फिर क्या हुआ-मैंने पूछा
होना क्या था,उसने शादी के लिए बोला और मै मान गयी। हमलोग घर से भाग कर कोलकाता आ गए।
कोलकाता आने के बाद वो बोला कुछ दिन मौसी के यहां रहना पड़ेगा और सोनागाछी में ले जाकर 3 लाख में बेच दिया।
ना जाने कितने हवस के पुजारी रोज इस शरीर को मसलते हैं।
और वो रोने लगी।
मुझे भी सदमा लगा और निशा के हालात पर बहुत दुःख हुआ।
अगर तुम वापस न जाओ तो-मैंने कहा।
आपके घर के नीचे 2 पहलवान हैं जो हमेशा मुझपर नज़र टिकाये रहते हैं,वो लोग बहुत खतरनाक है।
मैं बोला कोई बात नही उस दलदल से निकालने की जिम्मेदारी मेरी।
वो मेरे गले से लग गयी।
मैंने 7000 रुपया देकर निशा को विदा किया। उसके जाते ही राकेश को फोन किया राकेश एक एन जी ओ चलता था।
मैंने राकेश को सब बात बताया राकेश ने कहा ये मेरे एन जी ओ का काम नही है लेकिन मै तुम्हारी मदद जरूर करूँगा। मेरी एक दोस्त है सुशीला जो सोनागाछी में सेक्स वर्कर के ऊपर एन जी ओ चलती है मैं उनसे बात करता हूँ। कहकर फ़ोन काट दिया।

आधे घंटे बाद फिर उसका फ़ोन आया और बोला कल 10 बजे सोनागाछी आ जाना मैं भी आ रहा हूँ।
मैंने थैंक्स कहा और उसके द्वारा बताए पता को नोट कर लिया।
अगले दिन सुबह दस बजे सोनागाछी गया राकेश से मिला। राकेश मुझे सुशीला जी के ऑफिस में ले गया मैं सुशीला जी को सारी कहानी सुना दिया।
हम्म ये तो बहुत मुश्किल है इतने लोगो के बीच एक निशा को ढूँढना। क्योंकि यहाँ 15000 से ज्यादा सेक्स वर्कर हैं।फिर भी अपने टीम के लोगो को लगा देती हूँ और पुलिस कंट्रोल रूम में बात कर लेती हूँ अभी आप जाइये।
मैं घर आ गया लेकिन बैचैन सा रहता था।
2 दिन बाद सुशीला जी का फ़ोन आया बोली एक काम कीजिए कल एक बार फिर आइए।
15 पुलिस के साथ सर्च अभियान शुरू हुआ लेकिन निशा का पता न चला। दरअसल उनलोगों को भनक लग चुकी थी की पुलिस निशा को ढूंढ रही है। निशा को वह से हटा दिया गया। अचानक मुझे वो नंबर याद आया जिससे निशा से बात हुई थी।
मैंने पुलिस को बताया उस नंबर को ट्रेस किया गया वो नंबर सोनागाछी में ही ऑन था।सिविल पुलिस की टीम उस आदमी को पकड़ा जिसका मोबाइल था। पकड़कर थाने ले गया उससे पूछताछ की गयी उसने अपना मुंह नही खोला। पुलिस रिमांड पर लिया और पीटना चालू किया तो उसने बताया मैं दलाल हूँ बॉस के कहने पर ही काम करता हूँ। मैं ही अपॉइंटमेंट फिक्स करता हूँ और बॉस को बताता हूँ।

बॉस को फोन कर और बोल निशा के लिए अपॉइंटमेंट फिक्स हुई है ग्रैंड होटल में आज 6 बजे और हां ख़बरदार इससे आगे कुछ बोला तो-पुलिस वाले ने एक तमाचा देते हुए कहा।

ग्रैंड होटल के अंदर और बाहर दोनों जगह सिविल पुलिस को लगा दिया गया।
जैसे ही निशा रूम के अंदर गयी पुलिस वालों ने निशा को सारा माज़रा कह दिया और होटल के बाहर खड़े आदमी को पुलिस ने धर दबोचा।
रात 8 बजे मेरे पास फोन आया और कहा अभी लालबाजार आ जाओ।
पुलिस मुख्यालय लाल बाजार
जब मैं पंहुचा तो निशा वही थी और लॉकअप में 3 पहलवान थे।सुशीला जी और राकेश पहले से मौजूद था। मैंने सबको थैंक यू कहा।
पुलिस के अधिकारी ने कहा अब तुम घर चली जाओ।
निशा ने कहा मैं अब घर नही जा सकती मेरे मम्मी पापा स्वीकार नही करेंगें,न ही समाज़ स्वीकार करेगा।
मैं स्वीकार करूँगा मुझसे शादी करोगी अगला आवाज मेरा था।
निशा गले से लग गयी उसी दिन शुशीला जी,राकेश और अन्य पुलिस वालों के सामने कालीघाट मंदिर में हमलोग परिणय सूत्र में बंध गए।

5 दिन बाद 12 बजे रात को फ़ोन आया पुलिस मुख्यालय से फोन था।
अमज़त और उसके बॉस को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया।
हम दोनों ने सुकून की सांस ली और अतीत को भूलकर नया दुनिया बसा लिया।

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