लौट आया मोगली

डिज्नी पिक्चर्स के द्वारा जंगल बुक पर बनी फिल्म की खबर देख कर मै अपने आप ही वर्षों पहले दूरदर्शन पर आने वाले जंगल बुक एनिमेटेड सीरिज के गाने “जंगल जंगल बात चली है पता चला है चड्डी पहन कर फूल खिला है फूल खिला है” गाने को गुनगुनाने लगा | यह वह समय था जब ९० के दशक का प्रारम्भ हो रहा था, और देश का समाज एक नई करवट लेने वाला था | रामायण टी वी सीरियल की लोकप्रियता के कारण टी वी घर घर देखा जाने लगा था और रविवार को टी वी देखना एक प्रकार की सामाजिक क्रान्ति बन चुकी थी | वहीँ सोवियत संघ के पतन, तथा दूसरे कारणो की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था बदतर हो चली थी | राजनैतिक रूप से श्रीराम मंदिर आन्दोलन और मण्डल आन्दोलन अपने जोरों पर था | पूरे समाज में एक प्रकार का खालीपन और बेचैनी थी | बड़े बुजुर्गों को उनके उम्मीदों के हीरो श्रीराम जी टी वी सीरियल के माध्यम से एक बार फिर मिल चुके थे, लेकिन बच्चो, किशोरों और युवाओं को उम्मीदों के एक हीरो की तलाश थी | इन्हीं दिनों दूरदर्शन पर जंगल बुक एनिमेटेड सीरिज का प्रसारण प्रारम्भ हुआ | यह धारावाहिक अपने माता-पिता से अलग हो कर जंगल में भटक चुके एक बहुत ही छोटे से अबोध बच्चे की कहानी थी जिसे भेड़ियों का एक परिवार पालता है | धीरे धीरे वह बड़ा होता है और उस जंगल के काले तेंदुए, भालू, बन्दर आदि उसके मित्र, सहायक और गुरु बन जाते हैं | नन्हा सा मोगली कई परेशानियों से लड़कर समस्याओं पर विजय प्राप्त करता है और जंगल के क्रूर राजा शेर खां से अपने भेड़िया पिता के क़त्ल का बदला लेने के लिए और जंगल के जानवरों को उसके जुल्म से बचाने के लिये लड़ जाता है | अनेक संघर्षों, जान को खतरे में डालने वाले कारनामों और अपनी भेड़िया माँ की प्रेरणा से अंततः मोगली जंगल को शेर खां से आजाद करा लेता है | मोगली में बच्चों को एक ऐसा हीरो मिला था जो जंगल में अकेले होते हुए भी कभी नहीं डरता था | पेडों पर बंदरों की भाँती कूद-फांद सकता था और तमाम ऐसे चीजें करता जो बच्चों को एक फेंटेसी की दुनिया में ले जाते था |

इतने वर्षों के बाद एक बार फिर से मोगली वापस आगया है लेकिन बड़े परदे पर नए तेवर और अलग तरह के प्रस्तुतिकरण के साथ | इस बार तकनीक की उन्नत्ति ने फिल्मकारों को इतनी आजादी दे दी है कि उन्हें अब मोगली की फेंटेसी भरी दुनिया को परदे पर उतारने के लिए एनीमेशन फिल्म बनाने की जरूरत नहीं पड़ी, जैसा कि पहले करना पड़ता था | स्पेशल इफेक्ट्स, ३डी ग्राफिक्स, साउंड इफेक्ट के साथ जंगल बुक सजीव रूप में परदे पर साकार हो चुका है | इस बार जंगल बुक में मोगली का किरदार निभा रहे कलाकार नितिन सेठी ही एक मात्र जीते जागते इंसान हैं, बाकी सभी चरित्र जो की जानवर हैं वे एनीमेशन की जगह ग्राफिक्स के कमाल का नतीजा हैं, जो बिलकुल असली लगते हैं |

अमेरिका और भारत दोनों जगहों पर इस फिल्म को जिस श्रेणी में रिलीज़ किया गया है उसका अर्थ है १२ वर्ष से कम उम्र के बच्चे अपने माता-पीता के मार्गदर्शन में ही इस फिल्म को देखें | अमेरिका में सेंसर बोर्ड ने इसे पी जी अर्थात पैरेन्ट्स गाइडेंस और भारत के सेंसर बोर्ड ने यू ऐ सर्टिफिकेट दिया है | इसकी मुख्य वजह है इस फिल्म के ३डी ग्राफिक्स एवं साउंड इफेक्ट्स | इस फिल्म को यू ऐ सर्टिफिकेट दिए जाने के कारण सेंसर बोर्ड अध्यक्ष पहलाज निहलानी की जोरदार खिंचाई सोशल मीडिया पर की जा रही है | फैन्स का गुस्सा मुख्य रूप से सेंसर बोर्ड से उस समय से है जब जेम्स बांड की फिल्म से कुछ दृश्यों को काट दिया गया था | पहलाज निहलानी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि जंगल बुक की इस फिल्म की कहानी में कुछ भी ऐसा डरावना नहीं है लेकिन ३डी ग्राफिक्स और साउंड इफेक्ट्स के कारण फिल्म के जानवर भयानक आवाज करते हुए परदे से बाहर आते हुए से लगते हैं | ऐसे कई सारे सीन १२ वर्ष से कम उम्र के बच्चों को डरा सकती है | वैसे इस फिल्म का पूरी दुनिया में काफी लम्बे समय से प्रमोशन हो रहा था तथा मोगली के फैन्स के द्वारा बेसब्री से इन्तेजार भी | ऐसे में इस फिल्म को अमेरिका में पी जी तथा भारत में यू ऐ सर्टिफिकेट मिल जाना इस फिल्म की कमाई को प्रभावित करेगा |

जंगल बुक फिल्म महान लेखक रुडयार्ड किपलिंग के उपन्यास जंगल बुक की कहानियों पर आधारित है | रुडयार्ड किपलिंग का जन्म मुम्बई में सन १८६५ ईसवी में हुआ था | उनके पिता मुंबई स्कूल ऑफ़ फाइन आर्ट में पढ़ाया करते थे | बाद में वे लाहौर के म्युजियम में क्यूरेटर बना दिये गए | किपलिंग के शुरूआती ६ वर्ष भारत में ही बीते | भारत में अच्छी प्रारम्भिक शिक्षा के अभाव के कारण उन्हें इंग्लैंड जाना पडा | लेकिन किपलिंग का दिल कभी वहां लगा नहीं वे हमेशा भारत के अपने छुटपन को मिस करते रहे | सन १८८२ में वे अपने पिता के पास वापस लाहौर आ गए | किपलिंग की शिक्षा अपने माता-पिता से अलग एक बोर्डिंग स्कूल में हुई थी जिसे वे निहायत ही नापसंद करते थे | बोर्डिंग के बड़े बच्चे उनके भावुक और कल्पनाशील स्वभाव के कारण उन्हें बहुत परेशान करते थे | बड़े होकर लाहौर वापस आने के बाद किपलिंग ने काफी समय तक भारतीय उपमहाद्वीप में ही पत्रकार के रूप में काम किया और कई महान उपन्यासों की रचना भी की | जंगल बुक का हीरो मोगली कहीं न कहीं किपलिंग खुद हैं, जो अपने माता पिता से मोगली की तरह बचपन में ही अलग हो गए थे, जिनके लिए उनका बोर्डिंग स्कूल एक जंगल था और शरारती बच्चे शेर खां के जैसे क्रूर और असंवेदनशील |

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