पापा

पापा ,

बहुत सालों बाद ये “ पापा” शब्द आपसे मुखातिब होकर पुकार रही हूँ । कैसे हैं आप ??

ये प्रश्न पूछना आज मेरे लिये कितना असहनीय हो गया है , अब मैं केवल ये सोच सकती हूँ की कैसे होगें आप ? और ये प्रश्न अक्सर हिया को बेचैन कर देता है । कभी -कभी सोचती हूँ की काश एक बार मुझे कुछ समय के लिये उस दुनिया में आने की इजाजत मिल जाए जहाँ आप हो । मैं आपको सकुशल देखकर मनभर तसल्ली कर लूँ , आपके गले में बचपन की तरह झूल लूँ , आपको छूकर देख लूँ , आपकी आवाज़ सुन लूँ और आपसे ढेर सारी बातें करके अपनी आत्मा को हल्का कर लूँ तो शायद … शायद मैं चैन से सो पाऊं ।

पापा , मुझे आज भी यकीं नही होता की आप इस दुनिया में नही हैं । मुझे लगभग रोज रात आप सपने में दिखते हो ,अपना पुराना घर - सभी पुरानी चीजें और वही पुराना वक्त….वही आवाजें कानों में गूंजती हैं … एक टीस सी दिमाग में उठती है - शरीर में झुरझुरी सी होती है और स्वप्न टूट जाता है … और टूट कर नींद के रास्ते में यूँ बिखर जाता है जैसे इन आँखों को सिवाय सोचने के नींद लेने का इख़्तियार ही नहीं है ।

मुझे आपसे एक बात हमेशा पूछने का जी होता है की… क्या मैं आपकी अच्छी बेटी नही थी ? क्या आप मुझसे नाराज थे ? अगर नही तो फिर क्यों ऐसे बिन बताये अचानक चले गए और मुझे इतनी बड़ी सजा दे गए की मैं आपको आखिरी बार देख भी नही सकी ।

पापा मुझे तो बताया ही नही गया की आप चले गए हैं , वो कैसी दुर्दशा थी मेरी की एक तरफ मैं गर्भावस्था के प्रथम चरण में ही नाज़ुक हालात में थी … डाक्टर के मुताबिक़ मैं किसी भी सदमें को झेलने की हालत में नहीं थी ….एक बीज मेरे भीतर पनपने की जद्दोजहद कर रहा था और दूसरी तरफ आप जीवन मृत्यु से जूझ रहे थे । बीज जीत गया लेकिन मैं हार गयी , आप हार गए और मैं पूरी तरह हार गयी … अब अक्सर सोचती हूँ ,क्या बीज की उत्पत्ति के लिये जड़ ने अपना अस्तित्व न्यौछावर कर दिया था ? क्या बेटी और बेटी की सन्तान को बचाने के लिये आपने ईश्वर से अपनी जान का सौदा किया था ? फिर क्यूँकर ऐसा हुआ की जिस क्षण मेरी कोख खतरे की लाल सीमा को रौनधकर हरी हुई ,आपने जीवन के हर रंग से सम्बन्ध विच्छेद कर लिया … आपने उस बीज के पुष्प हो जाने की बाट क्यों नही जोहि ? क्यों पापा ? क्यों आपने उस फूल को अपने नेहजल से नही सींचा ? कितनी खाली हो गयी हूँ मैं और कितने खाली हो गए हैं मेरे बच्चे जिन्होंने कभी नानू का प्रेम तो दूर उनके अस्तित्व का स्पर्श भी नहीं पाया …जानते है जब वो मेरी ननदों के बच्चों को अपने दादा को नानू कहते सुनते हैं तो उदास हो जाते हैं । उनके चेहरे पर नानू के प्रेम को पाने की कसक साफ़ दिखाई देती है । बाबू कहता है की सभी बच्चों के बाबा और नाना दोनों हैं , मेरे नानू क्यों चले गए ? क्या बहुत बीमार थे ? वो कैसे दिखते थे ? क्या उन्हें मालूम था की मैं आने वाला हूँ ? मैं क्या जवाब दूँ पापा ??? बोलिये …. बोलिये मैं क्या कहूँ ??

उफ़्फ़ , मैं भी कितनी पागल हूँ , खत में भी आपसे झगड़ रही हूं जबकि मैं जानती हूँ आपका सबसे अधिक स्नेह मुझपर था और अंतिम क्षणों में मुझे ना पाकर आपको कितनी यातना हुई होगी ! पापा जिस दिन आप गए ,उस दिन आप मुझसे मिलने आए थे , है न ? मैं जानती हूँ वो स्वप्न नही था , वो कोई लहू से जुड़ी अनुभूति भी नही थी । वो आपकी आखिरी विदाई थी जो आप मुझे देने दिल्ली से गोरखपुर एक स्वप्न के माध्यम से आए थे या आपकी आत्मा ने शरीर छोड़ते ही पहला सफ़र मुझतक तय किया था । वो दो स्वप्न आज भी मेरी आँखों में जीवित है और उन दो स्वप्नों में आप आज भी मेरी आँखों में सांसे ले रहे हैं ।

आपके जाने के बाद मेरे भीतर बहुत कुछ बदल गया । जिंदगी और मौत का एक अलग रिश्ता मेरे भीतर विकसित हुआ । मुझे एहसास हुआ की एक ही आदमी किसी के लिए ख़ुशी का माध्यम होता है तो किसी के लिये दुःख का , किसी के लिये उसका अस्तित्व स्नेह और सुरक्षा का स्तम्भ होता है तो किसी के लिये मरण का , कोई उसके लिये सदैव दुआ में हाथ उठाए रखता है तो कोई दिन रात उसके जीवन के बचे दिनों को कोसता है …. जैसे आप हम सब के लिए प्रिय थे तो उन लोगो के अप्रिय रहे होंगे जो आपके जाने के बाद खुश नजर आ रहे थे । इसलिए मैं ईश्वर से चाहती हूँ की उन्हें प्रत्येक आदमी को उनके लिए छोड़ देना चाहिये जो उससे नेह के धागों में बंधे हैं । पापा , मैं अब बुरे से बुरे आदमी के भी मरने की बात सोचने से डरती हूँ … आपसे बिछड़कर जो दुःख मुझे मिला है वो किसी बुरे आदमी की सन्तान को पाते देखना भी मेरे लिये तकलीफ़ की बात है । आपने सही मायने में मुझे जीवन और मृत्यु से उपजने वाले संबंधो की परिभाषा को समझाया है ।

आपके जाने के बाद इन नौ सालों में मैं केवल चार पांच बार ही कुछ देर को घर गयी हूँ । उस घर में आपकी मौजूदगी की खुशबु मुझे खींचती है लेकिन आपको वहाँ ना पा पाने की कसक मेरे कदमों को जकड़ लेती है । मैं डरती हूँ की कहीं मेरा भ्रम टूट ना जाए , कहीं सच्चाई मुझे उस सपने से खीँच ना लाए जो आपने मेरी आँखों में भरे हैं । जहाँ चारो ओर बादलों के रास्ते , पहाड़ , घर और सीढ़ियाँ हैं ,, बादलों के किनारे स्वच्छ नीला जल अविरल बहता रहता है ,, घने हरे छायादार पेड़ पूरी बादल नगरी को ऐसे घेरें खड़े हैं जैसे किसी किले की सुरक्षा में तैयार की गयी हिमालय की दीवारें हो , नन्हे - नन्हे खुशबुओं से भरे सतरंगी फूल चारों दिशाओं में बिखरे पड़े हैं और वहीँ उस शांत वातावरण में आप गेरुआ वस्त्र में बैठे हैं ,, मैं दूर से ही आपको पहचान जाती हूँ और ख़ुशी से भरकर आपकी ओर दौड़ जाती हूँ । हर्ष से कूदने लगती हूँ की मैंने अपने पापा को ढूंढ लिया । तेजी से आपके पास पहुंचती हूँ , आपके चेहरे पर लंबी घनी काली दाढ़ी मूंछे हैं ,, लम्बे काले केश हैं और मैं आश्चार्य से भरी वहाँ खड़ी सोचती हूँ की जब मैं आखिरी बार आपसे मिली थी आपके लगभग सभी बाल सफेद थे , लंबे बाल तो कभी आपने रखे ही नही , इतना ओज - इतनी शांति आपके चेहरे पर मैंने कभी देखी ही नहीं थी….आप मुझे देखकर हमेशा की तरह हल्के से मुस्कुराए और मन खिल उठा , स्वप्न अगले चरण में पहुँचा....मैं आपसे वापिस चलने की जिद्द कर रही थी और आपने प्यार से मेरे सिर पर वैसे ही हाथ रख दिया जैसे हमेशा रखते थे ,,आपके होंठ खुले और कुछ शब्द हवा में तैर गए ..” मैं जल्द आऊँगा , जल्द , मैं तपस्या में हूँ , सकुशल हूँ , जीवित हूँ और तू फिर कभी मुझे ढूंढने के लिये इस रास्ते पर नही आएगी , ये रास्ता तुम्हारे लिये नहीं बना है … मैं थोड़े इन्तजार के बाद खुद लौट आऊँगा ...अब तू कभी नहीं आएगी…. कभी नहीं … कभी नहीं ….. शब्द गूंजते रहे .. गूंजते रहे .. मेरी नींद टूट गयी ..मैं अस्पताल में थी …. अल्ट्रासाउंड रूम था , स्कैनिंग चल रही थी और डाक्टर कह रही थी हैरानी की बात है की इस हैवी बिलिडिंग में भी बच्चा सेफ हैं , जिन्दा है , तेरह हफ्ते का है , मैं पूरी कोशिश करूंगी , जब इस हालत में भी बच्चा बचा हुआ है तो जरूर बचेगा …..उस क्षण मुझे दो बातों ने असीम शांति दी , एक की आप सकुशल हैं , लौट आएँगे और दूसरी की अब मेरे पिता का नाम खराब नही होगा ,अगर इस बच्चे को कुछ हो जाता तो सभी अप्रत्यक्ष रूप से आपको जिम्मेदार ठहराते ….मैं फिर बहुत दिन तक नही रोई , सच कहूँ तो आज तक भी खुलकर नहीं रोई ….लेकिन मैं रोना चाहती हूँ ..बहुत रोना चाहती हूँ ... आपके जाने का शोक कर लेना चाहती हूँ … मगर ऐसा हो नहीं पाता …. क्योंकि मेरी आँखों में वो दो स्वप्न आज भी जीवित हैं और उन दो स्वप्नों में आप आज भी मेरी आँखों में सांसे ले रहे हैं ….. पापा …. कभी आपसे नही कहा … आज इस पत्र के जरिये कह रही हूँ … आई लव यू एंड आई वेटिंग फॉर यू ….

तुम्हारी प्यारी

संजू

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