सूर्यनन्दिनी एक रहस्य - पार्ट 1

कहानी के पात्र:

समर्थ - एक तीस साल का नौजवान जो की पेशे से एक आर्किटेक्ट होता है |

कुंवर अजीत सिंह - राजघराने के युवराज जिनकी शादी प्रियानन्दिनी से होने वाली है |

प्रियानन्दिनी - कुंवर अजीत की मंगेतर और होने वाली बीवी |

पंडित राम प्रसाद शास्त्री - कुंवर अजीत सिंह के पारिवारिक पंडित, उम्र में 60 साल |

किशोर - कुंवर अजीत का ड्राइवर |

सूर्यनन्दिनी - ????


समर्थ की नींद उसके फोन के अलार्म से खुली ही थी की उसके दरवाजे पर किसी की दस्तक होती है अचानक आयी आवाज़ से वो चौंक जाता है तुरंत ही दरवाजे की तरफ जाता है जहां उसे एक आदमी खड़ा मिलता है जो पूछता है क्या समर्थ आप ही हैं, किसी अजनबी द्वारा अपना नाम सुनके समर्थ एक बार तो चौंक जाता है यह देख वो आदमी समर्थ को बोलता है मैं कुंवर अजीत सिंह जी का ड्राइवर हूँ उन्होंने ने ही मुझे आपको लेने भेजा है | कुंवर अजीत सिंह नाम सुनकर समर्थ को याद आता है की उसे अजीत ने अपने पुश्तैनी महल की सज सज्जा के लिए बुलाया है, अब समर्थ ड्राइवर से अंदर आने को कहता है की आप थोड़ी देर यहां बैठिये वो नहा धो के आता है |

फिर समर्थ ड्राइवर के साथ उसी महल में दाखिल होता है जिसकी सज सज्जा उसे करनी होती है देखने में वो महल एक दम विशाल और भव्य होता है किन्तु अधिक पुराना होने के कारण मैला लगता है इतने में कुंवर अजीत सिंह वहां आगमन करते हैं और उनके साथ एक महिला जो की उनकी मंगेतर होती हैं महिला सांवले नैन नक्श वाली लेकिन सुन्दर और आकर्षक दिखने वाली होती है जिनका परिचय कुमारी प्रियनंदिनी नाम से करवाया जाता है | परिचय के बाद कुंवर अजीत समर्थ को महल के बारे में बताते हैं की आजकल की महंगाई के जमाने में महल में रहना काफी खर्चीला है इसलिए वो अपनी शादी के बाद महल के कुछ हिस्से में खुद रहेंगे और बाकी पुराने महल को एक फाइव स्टार होटल में बनवाना चाहते हैं लेकिन महल का इतिहास और उसकी धरोहर बरक़रार रहनी चाहिए और मुझे मेरे हिस्से का महल दो महीने में तैयार चाहिए बाकी होटल का काम चाहे आठ दस महीने में हो जाए और पैसों की चिंता बिलकुल मत करना, कहते हैं न की घर आयी लक्ष्मी को ठुकराते नहीं हैं तो समर्थ तुरंत हाँ बोल देता है लेकिन उसके मन में एक घबराहट भी होती है की इतना बड़ा काम वो और उसकी टीम कैसे करेगी इतने काम समय में.....तो मैं कॉन्ट्रैक्ट पक्का समझूँ कुंवर अजीत अपना हाथ समर की और बढ़ाते हैं पर जैसे ही दोनों के हाथ मिलते हैं एक अजीब सी बिजली चमकती है जैसे कोई करंट दौड़ा हो और समर्थ तुरंत अपना हाथ हटा लेता है लेकिन उसे डर लगने लगता है कुंवर अजीत ये देख लेते हैं और कहते हैं कोई नहीं स्टेटिक चार्ज के कारण ऐसा होता है, अब तुम जाओ और तैयारी करो महल को सजाने की |

समर्थ के जाने के बाद कुंवर अजीत प्रियनंदिनी से कहते हैं की आज समर्थ से हाथ मिलाने के बाद मुझे ऐसा लगा की हमारे पिछले जनम का कुछ रिश्ता है उससे, ....क्या बकवास सी बातें करते हो प्रियनंदिनी कहतीं हैं तुम कबसे इन चीज़ों में मानने लगे इतने दिनों से होटल के चक्कर में ठीक से सो नहीं पाए हो इसलिए स्ट्रेस हो गया है चलो थोड़ा लॉन्ग ड्राइव पे चलते हैं तुम्हारा मूड फ्रेश हो जायेगा |

करीब पंद्रह - बीस दिन बाद कुंवर अजीत महल की और आते हैं की किस तरह से काम हो रहा है तो वो क्या देखते हैं की महल की दीवारें चमक सी रही हैं अंदर एक दम बढ़िया कालेन बीच हुआ है और दोनों तरफ इम्पोर्टेड ग्रीनरी से सजाया गया है काम को शानदार ढंग से होता देख कुंवर अजीत का मन संतुष्ट हो जाता है की...चलो अब महीने भर में महल तैयार हो जायेगा और वो वहां काम करने वाले लोगों से पूछते हैं की समर्थ कहाँ है और इतने में ही समर्थ खुद ही वहां आ जाता है उसे देखते ही अजीत बोलते हैं....वाह ! क्या सजावट की है महल की तुमने समर्थ सच में मान गए तुम्हे...लेकिन काम में इतना भी मत डूब जाना की मेरी शादी में ना आ पाओ कार्ड भिजवाया था तुम्हारे यहां मिल गया ना, समथ हाँ में सिर हिलाता है तो कुंवर अजीत बोलते हैं वैसे तो मैं आधी अधूरी चीज़ बीच में देखना पसंद नहीं करता लेकिन क्या है न अगले हफ्ते ही मेरी शादी है फिर उसके तुरंत बाद मैं और प्रियनंदिनी हनीमून के लिए यूरोप निकल जाएंगे तो सोचा की एक बार महल की तरफ हो ही आऊं | ओह थैंक यू सर आपको मेरा काम पसंद आया और शादी के लिए बहुत बहुत बधाई आपको और मैडम दोनों को...यह सुनके कुंवर अजीत हँसते हैं है और समर्थ को थैंक्स बोलते हैं और जाते हुए एक बार समर्थ से हाथ मिलाते हैं तो फिर अचानक से वही बिजली चमकती है और अजीत और समर्थ दोनों हाथ हटा लेते हैं और एक दुसरे को अजीब तरीके से देखते हैं |

....दोनो बार हाथ मिलाते हुए करंट लगना अब कुंवर अजीत को लगने लग जाता है की हो न हो ज़रूर उनका समर्थ से पिछले जनम का कुछ कनेक्शन है और यही बात वो प्रियनंदिनी को भी बताते हैं तो वो बोलती हैं क्या अजीत तुम फिर इन फ़ालतू की बातों में अपना टाइम गवां रहे हो, यह पिछले जनम जैसा कुछ नहीं होता और वैसे भी अगले हफ्ते हमारी शादी है...प्लीज उसमे हमे कोई नाटक नहीं चाहिए और तुम्हारा यह पिछले जनम वाला तो बिलकुल भी नहीं |

अब शादी वाले दिन शहर के बड़े होटल में पार्टी रखी जाती है उसमे दूसरे राजघराने के सदस्य और कुंवर अजीत और प्रियनंदिनी के दोस्त रिश्तेदार सहित कई जानी मानी हस्तियां शरीक होती हैं, पार्टी में शामिल हुए अधिकतर मेहमान अजीत और प्रियनंदिनी की तारीफ़े करते नहीं थकते.....तभी समर्थ की एंट्री होती है पार्टी में जो की गोल्डन कुर्ते पयजामे में आता है और पार्टी में आये सभी लोगों की नज़र समर्थ की और बढ़ जाती है और सब ऐसे देखते हैं जैसे की जैसे असली राजकुमार तो अब आया हो क्योंकि समर्थ वहां केवल कुंवर अजीत और प्रियनंदिनी को ही जानता होता है तो वोह सीधा ही स्टेज पे उन्हें गिफ्ट देने के लिए चला जाता है वहां समर्थ जैसे ही अजीत को बधाई देने के लिए हाथ आगे बढ़ाता है अजीत एक बार तो ठिठक जाते हैं पर इतने लोगों के सामने बदनाम होने के डर से वो हाथ आगे बढ़ाते हैं लेकिन ये क्या....इस बार ना कोई बिजली चमकती है और ना ही करेण्ट लगता है, ये देख प्रियनंदिनी कहती हैं मैंने कहा था ना ये तुम्हारे मन का वहम है और तीनो हँसने लगते हैं, शादी संपन्न होने के बाद कुंवर अजीत और प्रिया हनीमून के लिए निकल जाते हैं और समर्थ भी दो दिन की छुट्टी के बाद फिर से महल की साज सज्जा में लग जाता है |

अपना हनीमून यूरोप में मन रहे कुंवर अजीत एक दिन नींद में ही अचानक चिल्लाते हैं की "मुझे क्षमा कर दीजिये राजन" अजीत के इस तरह चिल्लाने की आवाज़ सुन कर प्रियनंदिनी की नींद खुल जाती हैं और वो पूछतीं हैं क्या हुआ कोई भयानक सपना देखा क्या? तो अजीत कहते हैं की पिछले जनम में वो किसी नगर के राजा थे और समर्थ भी कहीं का राजा था और दोनों मैं किसी बात को लेकर युद्ध हो जाता है तो समर्थ कुंवर अजीत की गर्दन पे तलवार रख देता और अजीत समर्थ के पैरो में गिरकर माफ़ी मांगने लगते हैं की "मुझे क्षमा कर दीजिये राजन"...हुंह यार अजीत तुम यहाँ भी समर्थ और पिछले जनम को लेकर हमारा हनीमून क्यों खराब कर रहे हो चुपचाप सो जाओ तुमने कोई भयानक सपना देखा होगा प्रिया कहतीं है .....लेकिन अगले दिन जब वो दोनों सोकर उठते हैं कुंवर अजीत की गर्दन पे सचमुच का घाव होता है जो की किसी नुकीले हथयार का ही लगता है घाव देखकर प्रियनंदिनी थोड़ा डर जाती है अब उन्हें भी यकीन होने लगता है की अजीत की बातों पे | अपने घाव को दिखाने वो लोग आसपास में ही किसी क्लिनिक में जाते हैं और जब डॉक्टर कुंवर अजीत से घाव दिखाने को कहता है तो अचरज की बात...वहां कोई घाव ही नहीं होता है अनजाने देश में ऐसी घटना होने के कारण दोनों बहुत डर जाते हैं और हनीमून खत्म होने के एक हफ्ते पहले ही वापस भारत आ जाते हैं |

भारत आने के बाद भी कुंवर अजीत को अपने पिछले जनम के दृश्य और भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगते हैं लेकिन उन्हें यह अभी भी पता नहीं चलता की समर्थ उन्हें क्यों मारना चाहता था लेकिन बदनामी का डर होने की वजह से वो यह बात अपने परिवार में भी किसी को नहीं बताना चाहते तो, प्रियनंदिनी उनसे कहती है की क्यों ना हम अपने पारिवारिक पंडितजी से तुम्हारी जनम कुंडली दिखाकर पूछे उन्हें इन सब बातों का बहुत ज्ञान है | अगले दिन जब अजीत और प्रियनंदिनी पंडित राम प्रसाद शास्त्री जी के पास जाकर उन्हें बताते हैं की कुंवर अजीत के साथ बार बार ऐसा क्यों हो रहा है यह सुन कर एकबार तो पंडितजी को आश्चर्य होता है फिर वो अपनी मंत्रविद्या से कुंवर अजीत की कुंडली देखते हैं तो उन्हें विश्वास नहीं होता की वाकई कुंवर अजीत पिछले जनम में राजा थे और एक बहुत ही सुन्दर रानी से उनका विवाह होने वाला था लेकिन समर्थ उस रानी के रूप पे मोहित था और उसे पाना चाहता था लेकिन रानी तो कुंवर अजीत से प्रेम करती थी तो समर्थ उसे पा न सका तो उसने छल से कुंवर अजीत का वध कर दिया....लेकिन अगर ऐसा है तो वो रानी क्या प्रियनंदिनी थी जिसे समर्थ पाना चाहता था, कुंवर अजीत ने पुछा? लेकिन अगर मैं वही रानी हूँ तो मुझे अभी तक कुछ याद क्यों नहीं आ रहा शास्त्रीजी? कुछ सोचते हुए शास्त्रीजी कहते हैं यह तो मैं नहीं बता सकता क्योंकि किसी को उसके पिछले जनम की बातें याद दिलाना यह सब तो.... भगवान के हाथ में हैं वो किसी से कब क्या करवाना चाहता है यह कोई नहीं जानता | अब आप बस यह बताइये शास्त्रीजी की क्या समर्थ को यह सब याद है या नहीं, शास्त्रीजी कहतें हैं याद हो भी सकता है और नहीं भी लेकिन इतना कह सकता हूँ आपको समर्थ से खतरा है और अगर उसे कुछ याद नहीं है तो इससे पहले की उसे उसके पिछले जनम का कुछ याद आये आप लोगों को सावधान रहना होगा |

अब कुंवर अजीत और प्रियनंदिनी यही प्लानिंग करते है की कैसे समर्थ को मारने का प्लान बनाया जाए तो वो दोनों महल पे जाते हैं और देखते हैं की काम तो पूरा हो चूका है लेकिन समर्थ वहां नहीं है और ना ही उसकी टीम का कोई बन्दा तो कुंवर अजीत समर्थ को फ़ोन लगते हैं इतने दिनों बाद कुंवर अजीत का कॉल आते हुए देख कर समर्थ तुरंत फ़ोन उठा लेता है और पूछता है कैसे हैं सर, कब आये आप यूरोप से....? जवाब में अजीत कहते हैं मैं ठीक हूँ, तुम यह बताओ की महल का काम जब हो गया था तो तुमने बताया क्यों नहीं यार आज जब मैं वहां गया तो मुझे पता चला काम तो पूरा हो गया है, तो समर्थ कहता है "सर वैसे मैं दो दिन पहले ही आपके घर गया था लेकिन वहां मुझे पता चला की आप अपने घर पर नहीं हैं तो मैं वापिस आ गया और सोचा की शायद आप बिजी होंगे और दो तीन दिन बाद आपको कॉल करके खुद ही बता दूंगा की महल का काम पूरा हो गया है और अगले हफ्ते से ही मेरी टीम आपके होटल का काम शुरू कर देगी"

....नहीं नहीं !!! कुंवर अजीत बीच में बोलते हैं की होटल का काम शुरू करने से पहले मैं चाहता हूँ की हम वहां एक हवन करवा लें क्योंकि महल का वह हिस्सा कुछ एक हज़ार साल पुराना है...और मैं चाहता हूँ की तुम भी उस पूजा में आओ क्योंकि इतना बढ़िया काम तुमने किया है हमारे महल को एक शानदार आशियाना बना के अब तो तुम भी हमारे परिवार का एक हिस्सा ही हो यार, "जरूर आऊंगा सर" समर्थ की हाँ सुनकर कुंवर अजीत और प्रियनंदिनी बहुत खुश हो जाते हैं और हवन की तैयारियों में लग जाते हैं |

अब हवन के दिन शास्त्रीजी, कुंवर अजीत और प्रियनंदिनी वहां पहले से ही मौजूद होते हैं और समर्थ के आने का इंतज़ार कर रहे होते हैं और अचानक कुंवर अजीत के फ़ोन की घंटी बजती है तो वो देखते हैं तो समर्थ का फ़ोन आ रहा होता है तो उन्हें लगता की कहीं समर्थ ने इसलिए फ़ोन तो नहीं किया की वो आ नहीं पायेगा अगर ऐसा हुआ तो उनका सारा प्लान चौपट हो जायेगा...और उन्हें फ़ोन उठाते हुए डर लगता है लेकिन फिर भी वो फ़ोन उठा के हेल्लो बोलते हैं तो समर्थ कहता है सर मैं यह पुराने महल के बाहर ही खड़ा हूँ यह इतना बड़ा है मुझे पता नहीं चल रहा की कहाँ आना है...इतना कहते ही नेटवर्क प्रॉब्लम के कारण फ़ोन काट जाता है तो कुंवर अजीत भागते हुए नीचे समर्थ को लेने जाते हैं और महल में दाखिल होते हुए हर चीज़ से समर्थ का परिचय कराते हैं की यह जो तुम आँगन देख रहे यहां उस जमाने में नृत्य हुआ करते थे और राजा वहां बालकनी से उसे देखते थे उस सामने वाली बालकनी से रानी अपनी दासियों के साथ नृत्य का आनंद लेती थी... अब यह देखो यहां राजा का दरबार लगता था दरबार देखने से ही बहुत विशाल लग रहा था और उस ज़माने में साज सज्जा के साथ तो अत्यंत भव्य लग रहा होगा...यह सभी विचार समर्थ के मन में चल रहे थे की तभी कुंवर अजीत कहते हैं बस हमें यहीं रुकना हैं बाकी का महल हवन के बाद दिखा दूंगा तुम्हे और एक बड़े से कमरे के अंदर जाते हैं जहां शास्त्री जी हवन सामग्री के साथ हवन की तैयारी में लगे होते हैं और प्रियनंदिनी भी वहीँ बैठी होती हैं और कुंवर अजीत उनके बगल में बैठ जाते हैं और सामने समर्थ बैठ जाता है....शास्त्री जी मंत्रो उच्चारण के साथ हवन शुरू कर देते हैं और पांच मिनट के बाद एक धुंआ अचानक से हवन कुंड में से उठता है और सब की आँखें बंद हो जाती है और फिर जब सब वापस आँखें खोलते है तो देखते हैं की की हवन कुंड में कुछ नज़र आ रहा है उसमे "कुंवर अजीत एक राजा हैं और समर्थ भी कहीं का राजा है और समर्थ रानी जो की कुंवर अजीत की पत्नी हैं उन्हें पाना चाहता है और इसी बात पर दोनों में युद्ध हो जाता है और समर्थ कुंवर अजीत की गर्दन पे तलवार रख देता है !!" बस इतना ही दिखता और इसके बाद धुआं शांत हो जाता है जिसे देख प्रियनंदिनी कहती हैं लेकिन उस रानी की शक्ल मुझसे क्यों नहीं मिलती क्या यह मेरा दूसरा जनम नहीं है या मैं किसी दूसरी शक्ल के साथ जन्मी हूँ....कुछ भी हो बेटी लेकिन यह तो तय है की समर्थ ने ही कुंवर अजीत को मारा था पिछले जनम में और इस जनम में भी ये ही कुंवर सा की मौत का कारण बनेगा इसीलिए हमे समर्थ की बलि चढ़ानी होगी इस हवन कुंड में तभी य सब ख़त्म होगा |

इतना देखने और सुनने के बाद समर्थ कहता है - यह तो धोखा है तो आपने मुझे धोखे से यहां बुलाया है...ताकि आप हवन के बहाने मेरी बलि दे सको, मैं नहीं मानता इन बकवास बातों को यह पूर्ण जनम जैसा कुछ नहीं होता...और मैं आपको क्यों मारना चाहूंगा कुंवर अजीत!

कुंवर अजीत कहते हैं - लेकिन अभी तुमने देखा ना उस हवन कुंड में |

हाँ हाँ मैंने देखा समर्थ चिल्ला पड़ता है लेकिन पिछले जनम में जब मैंने आपको मार दिया था तो इस जनम में फिर से क्यों मारूँगा !

शास्त्री जी कहते हैं - क्योंकि तुम प्रियनंदिनी को पाना चाहते हो और कुंवर अजीत के जिन्दा होते हुए तुम ऐसा कर नहीं सकते इसीलिए |

अब समर्थ का गुस्सा बढ़ जाता है और वो कहता है - की अगर मैंने पिछले जनम में अजीत को मरकर प्रियनंदिनी को पा लिया था तो इस जनम में मैं ऐसा फिर से क्यों करूँगा |

मेरे हाथों मारने के लिए तूने यह जनम लिया है साले और एक जोरदार मुक्का समर्थ के मुह पे मारते हैं तो उसकी नाक से खून बहने लगता है....अचानक हुए इस हमले से समर्थ संभल नहीं पता और उसे चक्कर से आने लगते हैं तो शास्त्रीजी समर्थ को पकड़ लेते हैं और कुंवर अजीत वहीँ पास में पड़ी तलवार को उठा कर जैसे ही समर्थ पे प्रहार करते हैं तो वो अपने हाथों से नंगी तलवार को पकड़ लेता है और उसकी आँखों में एक ऐसा दृश्य दिखता है जैसे की वो पहले भी इसी तरह कुंवर अजीत की तलवार को पकड़ चुका है |

अब समर्थ एक धक्का मरता है जिससे की शास्त्री जी ज़मीन पे गिर जाते हैं और खींच के उसी तलवार से पहले कुंवर अजीत के कंधे पे मरता है तो कुंवर अजीत भी वहीँ जा के गिर जाते हैं, फिर वो शास्त्री जी को चिल्ला के बोलता है - तूने ही भड़काया है ना इसको यह सारी कहानी तूने ही गड़ी है ना, तो चल अब मैं तुझे ही ख़तम कर देता हूँ और तलवार शास्त्री के पेट में घुसा देता है | एक साठ साल के बुड्ढे के पेट में तलवार का वार होगा तो उसका क्या हाल होगा यह तो आप समझ ही सकते हैं, शास्त्री जी पर हुए इस वार से प्रियनंदिनी और अजीत डर जाते हैं और समर्थ का लहूलुहान गुस्से वाला चेहरा देख के तो उनके पसीने छूट जाते हैं और दूसरा समर्थ के हाथ में रक्त से सनी हुई तलवार भी होती है वो दोनों वहां से भाग जाते हैं और समर्थ भी उनके पीछे भागने लगता है और दोनों को तेज़ भागता देख समर्थ तलवार ही फ़ेंक देता है जो सीधा जा कर प्रियनंदिनी की पीठ में घुस जाती है और वो लहुलूहान होकर वहीँ गिर जाती हैं कुंवर अजीत बोलते भी हैं "प्रिया उठो...प्रिया प्लीज उठो.....नहीं.....!!! कुंवर अजीत समर्थ की तरफ चिल्लाते हुए देखते हैं...

ये देख समर्थ डर जाता है क्योंकि कुंवर अजीत उसी की तरफ भागते हुए आ रहे होते हैं और भागते हुए सीधे समर्थ को पकड़ने के लिए हाथ उठाते ही हैं के वो साइड में हो जाता है जिधर बालकनी होती है और बालकनी पुरानी होने के कारण समर्थ सीधे बीस फुट नीचे गिर जाता है और बेहोश हो जाता है, बैलेंस बिगड़ने के कारण कुंवर अजीत भी नीचे गिर जाते हैं उनके कानो में एक आवाज़ आती है "....नहीं सूर्यनन्दिनी" जिसे सुनकर कुंवर अजीत के दिमाग में तरह तरह के दृश्य आने लगते हैं और वह भी बेहोश हो जाते हैं |

....आप सब यह सोच रहे होंगे की यह सूर्यनन्दिनी कौन हैं कहीं यह प्रियनंदिनी ही तो नहीं, लेकिन प्रियनंदिनी तो मर चुकी है और तो फिर यह सूर्यनन्दिनी कहीं कुंवर अजीत के पिछले जनम की पत्नी तो नहीं अगर ऐसा है तो अभी तक समर्थ को कुछ भी याद क्यों नहीं आ रहा क्या समर्थ को कुछ याद आ पायेगा या वो बिना कुछ याद आये ही कुंवर अजीत को फिर से मार देगा ? और सबसे बड़ा सवाल ये सूर्यनंदिनी है कौन और कहाँ है ?

यह जानने के लिए पढ़िए सूर्यनंदिनी एक रहस्य - पार्ट 2 https://hindi.pratilipi.com/read?id=4701413002182656

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