मिश्रा परिवार में आज सुबह से सभी लोग बहुत खुश और उत्साहित नजर आ रहे थे,कोई घर की सजावट में लगा हुआ था और किसी ने किचन का मोर्चा संभाला हुआ था! दरअसल आज मधुकर मिश्रा जी की एकलौती सुपुत्री प्रत्युषा मिश्रा को देखने लड़के वाले आ रहे थे,दो भाइयो समर्थ और जय की एकलौती और लाड़ली बहन हैं प्रत्युषा,मधुकर जी १ साल पहले ही एक कंपनी में अकाउंटेंट के पद से सेवानिवृत हुए थे,उनकी पत्नी स्वरा सरकारी स्कुल में शिक्षिका थी,बड़ा सुपुत्र समर्थ कॉलेज में प्रोफेसर और उसकी पत्नी अक्षरा घरेलु महिला थी,छोटा सुपुत्र जय पुणे की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में इंजीनियर था और उसकी पत्नी प्रिया भी उसी कंपनी में इंजीनियर थी,मिश्रा जी ने अपने दोनों बेटो की शादी बहुत ही सादगी पूर्ण और बिना दहेज़ लिए की थी,उनकी बेटी प्रत्युषा एक प्राइवेट हॉस्पिटल में डेंटिस्ट थी,पूरा परिवार बहुत ही खुशहाल था !

सभी लोग तिवारी परिवार के आने की राह देख रहे थे,मिश्रा जी की निगाहे बार-बार उनकी घड़ी पर जा रही थी तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई,मिश्रा जी ने जाकर दरवाज़ा खोला तो सामने श्री तिवारी सपरिवार वह उपस्थित थे,मिश्रा जी ने सपत्नीक उनका स्वागत किया,कुछ औपचारिकताओं के बाद दोनों परिवारों में बातचीत शुरू हुई-सभी लोग आपस में बात-चीत कर रहे थे,तिवारी जी के सुपुत्र अनुभव ने अपना परिचय दिया,भाभी अक्षरा ननद प्रत्युषा

को लेकर वहा आयी,प्रत्युषा बहुत ही सुन्दर लग रही थी,भाभी ने उसे सोफे पर बैठने का इशारा किया!

कुछ बातचीत के बाद दोनों परिवार की सहमति से प्रत्युषा और अनुभव अकेले में बात करने के लिए दूसरे बरामदे में बैठे थे.दोनों चुपचाप बैठे थे अचानक अनुभव ने पहल की और प्रत्युषा के बारे में उसके पसंद- नापसंद के बारे में बातचीत की.फिर प्रत्युषा ने पूछा-आप क्या करते हैं? अनुभव-दरअसल मैं एक इवेंट आर्गेनाइजर कंपनी में मैनेजर हूँ ! थोड़ी बहुत औपचारिक बाते होने के बाद दोनों वही आ चुके थे जहाँ परिवार के बाकी लोग मौजूद थे! सभी लोगो ने साथ में ही खाना खाया फिर तिवारीजी ने कहा-मिश्राजी हमे ये रिश्ता मंजूर है!

अब आप लोगो की इस बारे जो भी राय हैं वो हम लोग जानना चाहते हैं,मिश्रा जी ये सुनकर बहुत खुश हुए और उन्होंने भी इस रिश्ते के लिए अपनी रजामंदी दे दी तभी श्रीमती तिवारी जी ने किचन से मिश्रा जी को कुछ इशारा किया तब मिश्रा जी बोले-तिवारी जी,प्रत्युषा हमारी इकलौती बेटी हैं इसकी शादी हम बहुत ही धूमधाम से करना चाहते हैं बस आपकी राय क्या हैं दहेज़ इत्यादि को लेकर वही जानना चाहते हैं??? हम नहीं चाहते के हमारे वजह से कोई कमी रहे आदर-सत्कार में,तब तिवारी जी ने उत्तर दिया-नहीं मिश्रा जी हमे दहेज़ नहीं चाहिए हैं,हाँ लेकिन अगर आप अपनी बेटी के लिए कुछ देना चाहते हैं तो आप दे सकते हैं बाकि दहेज़ से हमारा कोई सरोकार नहीं हैं! वर पक्ष से यह उत्तर सुनकर पूरा मिश्रा परिवार बहुत खुश हुआ !

शीघ्र ही पंडित को बुला कर मुहूर्त निकलवाया गया दो महीने बाद शादी की तारीख पक्की हुई और अगले १५ दिन में सगाई....पूरे मिश्रा परिवार में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी,सभी लोग दिन-रात शादी की तैयारियों में जुटे थे,इधर प्रत्युषा और अनुभव की रोज कॉल पर बात होने लगी दोनों के बीच प्यार की भावना जन्म ले चुकी थी.सगाई होने में ७ दिन बाकि थे इसीलिए प्रत्युषा ने अपनी पक्की सहेली शालिनी को भी दिल्ली से बुलवा लिया था,शालिनी के आजाने से घर में ठहाके गूंजने लगे और ख़ुशी दुगुनी हो गयी,प्रत्युषा और अनुभव आपस में बहुत घुल मिल गए थे! एक दिन अनुभव की बहन रेखा और उनके पति राजेश मिश्रा जी के घर सगाई की अंगूठी का नाप लेने आये तभी शालिनी से उनका परिचय मिश्रा जी ने कराया,शालिनी और रेखा आपस में बात कर रही थी तब शालिनी ने कहा एकलौती बेटी है प्रत्युषा अंकल की इसलिए अंकल शादी में कोई कमी नहीं रखना चाहते अब देखिये न दीदी जब आप लोगों ने कहा हैं के आपको दहेज़ से कोई मतलब नहीं है फिर भी लगे हुए हैं किसी न किसी चीज़ को लेने खरीदने में.अब कल ही प्रत्युषा के लिए i20 कार बुक की हैं ,घर की जरुरत का सारा सामान खरीद रहे है,मैंने अंकल से कहा के इस ज़माने में दहेज़ नही चलता हैं तो कहते है की बेटी ये सब मैं अपनी बेटी की सुख- सुविधा के लिए ही कर रहा हूँ ना की दहेज़ को बढ़ावा देने के लिए,ये सब सुनकर रेखा बोली-हाँ सही कह रही हो तुम शालिनी वैसे प्रत्युषा भाभी हैं कहाँ?

तब शालिनी ने प्रत्युषा को बुलाया-रेखा ने जल्द ही अंगूठी का नाप लिया और वहां से चली गयी!

सगाई का दिन भी आगया,घर में बहुत रौनक थी बहुत से मेहमान भी आये हुए थे,तिवारी जी अपने पूरे परिवार सहित पहुंच चुके थे,कुछ समय बाद शालिनी प्रत्युषा को लेकर आयी-प्रत्युषा की खूबसूरती चारो तरफ बिखर रही थी,उसने नीले रंग का गाउन पहन रखा था,अनुभव की निगाहे कुछ देर के लिए प्रत्युषा पर थम सी गयी इसी बात को भांपते हुए शालिनी ने अनुभव के बहुत मजे लिए,फिर अंगूठी पहनाने की रस्म हुई दोनों लोग बहुत खुश हुए आखिर इस रिश्ते की बुनियादी नीव आज रखी जा चुकी थी कुछ देर के बाद सभी मेहमानो के जाने के बाद तिवारी परिवार भी जाने के लिए तैयार हुए और मिश्रा परिवार ने उनको विदा किया,धीरे धीरे तिलक का दिन भी आ पंहुचा,मिश्रा जी ने अनुभव का तिलक किया और बाकि औपचारिकताएं की उन्होंने एक i20,घर- गृहस्थी के सभी सामान, अनुभव को सोने की चेन,घडी,और भी बहुत कुछ दिया साथ ही नकद ८ लाख रूपये भी तिलक के तौर पर दिए.कार्यक्रम का समापन हुआ और बाकि प्रयोजनों के बाद सभी अपने घर चले गए! शादी को सिर्फ तीन दिन ही बाकी थे सभी अपने अपने कामो में मस्त थे तभी फ़ोन की बेल बजी समर्थ ने फ़ोन उठाया और सुनने के बाद उसके हाथ से रिसीवर छूट गया,सभी लोग बहुत परेशां थे के अचानक क्या होगया तभी प्रत्युषा भैया के पास आयी और बोली- भाई क्या हुआ बताओ न,अपनी बहन को गले लगाकर और रोते हुए बोलै उनलोगो ने शादी करने से मना कर दिया हैं उनके कोई गुरूजी ने कहा हैं के हमारी प्रत्युषा से शादी हुयी थी तो अनुभव ज्यादा दिन तक जिन्दा नहीं रह पायेगा,यह सुनकर प्रत्युषा के पैरो तले जमीन खिसक गयी और वो बेहोश हो गयी,सभी लोग बहुत परेशां हो गए प्रत्युषा को होश में लाया गया और फिर शालिनी बोली-तू फ़िक्र मत कर प्रत्युषा मैं और भैया जायेंगे अनुभव की फैमली से बात करने,और यह कहकर वोभैया को लेकर अनुभव के घर चल दी-घर पहुंचकर उन्होंने डोरबेल बजाई,घर की नौकरानी ने दरवाज़ा खोला,शालिनी ने पूछा-अनुभव कहा है?तब नौकरानी ने उत्तर दिया के घर के सभी लोग तो बाहर गए हुए हैं बस रेखा दीदी और आंटीजी घर पर हैं तो शालिनी बोली के ठीक हैं आप उनमे से ही किसीको बुला दो-तब वो बोली के ठीक है आप लोग बैठिये,वो दोनों वही सोफे पर बैठ गए एक घंटे से ऊपर हो चूका था लेकिन कोई बहार नहीं आया तब शालिनी बोली चलिए भैया हम ही अंदर चलते हैं जैसे ही वो लोग अंदर घुसने को हुए तभी उन्हें हसने की आवाज़ सुनाई दी शालिनी वही रुक गयी और अंदर हो रही बातो को सुनने लगी-बैठे रहने दो कुछ देर और तब समझ में आएगा के बेइज्जती का मतलब क्या होता है उस दिन तिलक में हमारे पूरे खानदान की नाक कटा दी,भला कोई इतना कम तिलक देता हैं क्या?सिर्फ कार,जरुरत के सामान और ९ लाख दिए तो पता नहीं खुद को क्या समझ रहे हैं अच्छा हुआ जो सही समय पर इनकी कंजूसी का भेद खुल गया गलती से भी ऐसे लोगो से रिश्ता जुड़ जाता तो पूरे समाज में हमारी कोई इज्जत नहीं रह जाती!श्रीमती तिवारी जी चाय की चुस्की लेते हुए बोली,तब रेखा हसते हुए बोली-माँ मेरा गुरूजी वाला आईडिया काम आगया,मुझे तो उसी दिन समझ जाना चाहिए था जिस दिन मैं अंगूठी का नाप लेने गयी थी पर फिर मैंने सोचा के शयद तिलक पर कुछ सर प्राइस होगा पर इन लोगो ने औकात दिखा दी,यह सब सुनकर शालिनी और समर्थ का चेहरा गुस्से से लाल हो गया,शालिनी अंदर जाकर उन्हें सुनाना चाहती थी पर समर्थ उसे वहा से वापिस ले आया,घर पहुंच कर ये सब बाते उन्होंने पूरे परिवार को बताई ,श्रीमती मिश्रा जी रोते हुए बोली-जब पूछा था तब उनलोगो ने मुँह नहीं खोला और अब ये कह रहे हैं तब मिश्रा जी ने कहा के मैं जाकर तिवारी जी से बात करूँगा के उनको जो कुछ भी चाहिए बताये हम लोग सब करने को तैयार हैं तब शालिनी ने कहा के नहीं अंकल हमे ये सब करने की नौबत नहीं आएगी,अनुभव प्रत्युषा को बहुत चाहता हैं मैं उससे बात करती हूँ और शालिनी अनुभव को कॉल करती है कुछ देर रिंग के बाद अनुभव कॉल रिसीव करता हैं और कहता हैं- हाँ शालिनी बोलो कैसी हो?तो शालिनी कहती है मैं तो ठीक हु पर ये सब जो हुआ हैं उसके बाद प्रत्युषा बिलकुल भी ठीक नहीं हैं,हाँ मुझे पता है लेकिन मैं मजबूर हूँ शालिनी मेरे घर वालो के खिलाफ जाकर मैं कुछ नहीं कर सकता और उसने फ़ोन काट दिया,कई बार फ़ोन लगाने पर भी अनुभव ने कॉल नहीं उठाया तब प्रत्युषा अपने पापा के पास आकर बोली-पापा आपकी इज्जत से ज्यादा बढ़कर मेरे लिए कुछ नहीं हैं और जो लोग आज आपको ऐसे बेइज्जत कर सकते हैं वो आगे भी कर सकते हैं,इसीलिए भूल जाओ सब कुछ आप सब लोग.इस अधूरे बंधन को यही ख़तम करते हैं,यह कह कर वो अपने पिता के गले लग गयी और दोंनो पिता-पुत्री रोने लगे!



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