हर वक़्त बक-बक करने वाली अवनि आज चुप थी हमेशा आँखो में चाँद सी चमक की जगह आज आँसुओं ने ले ली थी
थोड़े अपने पापा थोड़ा माँ और सहेलियों के बाद बचे सारे आँसुओं पर राहुल का नाम लिखा था जाने का दुःख एक तरफ़ और स्टेशन पर राहुल के ना आने का दुःख एक तरफ़ लिए अवनि अपनी जींस की जेब से टिकट निकाल अपने और अपने शहर के बीच की दूरियों को नाप रही थी और बार बार आँखे राहुल को तलाश रही थी राहुल के ना दिखने के बाद गीली आँखो और भरे हुए गले से अपने घर वालों को बाय कर अवनि ट्रेन में चढ़ी ही थी उसकी आँखे ख़ुशी से बड़ी हो गयी
अंदर राहुल अपने एक हाथ में पानी की बोतल और दूसरे हाथ की उँगलियों में खाने की चीज़ों से भरा एक पॉलीबैग फँसाए था
चेहरे पर हल्की सी मुस्कान और और अवनि के जाने को लेकर अपने ग़ुस्से को दरकीनार कर आगे बढ़ गले से लग गया
राहुल अपनी धुन में रहने वाला एक मस्तमौला लड़का था जो बड़े समय के बाद किसी लड़की के साथ ख़ुश था
हालाँकि उसने अवनि के साथ कुछ भी सोचा नहीं बस जिया था उसे नही पता था की अवनि के जाने का उसे दुःख भी हो सकता है
अब जब राहुल का उस परिस्थिति से सामना हुआ तो राहुल नही चाहता था की अवनि उसे छोड़कर कहीं और जाए
लेकिन फिर भी राहुल का प्यार अवनि की ज़िद के आगे हल्का पड़ गया और वो उससे मिलने स्टेशन पर आ गया
समान ठीक से रखवा देने के बाद
ट्रेन में उलटा सीधा मत खाना जैसे डाइयलॉग्ज़ से अपने प्यार और फ़िकर का परिचय देते हुए राहुल नज़रें नही मिला पा रहा था
ये अवनि के जाने का ग़ुस्सा था या बेइंतहा मोहब्बत ये समझना मुश्किल था अवनि चाहती थी की राहुल उसकी तरफ़ देखे उससे पहले की तरह बात करे लेकिन राहुल बस सब ठीक करने में लगा हुआ था
ट्रेन का हॉर्न बजा ट्रेन हल्की हल्की गति से चलने लगी अवनि बेचैन होने लगी
और अचानक अवनि ने हाथ पकड़ कर पूछा
राहुल तुम अब भी मेरे साथ रहोगे.?
"अवनि तुम्हारी समझदारी अब हमारे प्यार की जड़ें कमज़ोर करने लगी हैं"
ये कहते हुए राहुल हाथ छुड़ा कर ट्रेन से उतर गया
अवनि ट्रेन में रुकी स्तब्ध थी ट्रेन चल चुकी थी उसका शहर उसे छोड़ पीछे जा रहा था या वो उसे छोड़आगे ये समझना मुश्किल था .......

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