चिलचिलाती धूप में वो कुते का पिल्ला मुकेश के घर के बाहर एक रोटी की आश में पुंछ हिला रहा था। उसे देख मुकेश घर से बाहर आया। मुकेश की उम्र आठ वर्ष होगी।उसे देख पिल्लै की आँखों में एक आशा की किरण आ गयी। पर मुकेश के मन में तो कुछ और ही चल रहा था।

उसने एक लकड़ी उठाई ही और पिल्लै के धनाधन मारने लगा। पिल्ला मार से बुरी तरह से जख्मी हो गया और वहां से जैसे तैसे रोता हुआ भाग गया।इसे देख मुकेश बहुत ही खुश हुआ।

पिल्लै के रोने की आवाज सुनके राज बाहर आया। राज उसी के मोहल्ले में रहता था और उसका हमउम्र भी था। राज ने पिल्लै की हालत देखते ही झट से डेटॉल और रुई ले आया और उसके घावों पर लगाई। फिर प्यार से पिल्लै को रोटी खिलायी।इससे पिल्ला अपना सारा दर्द भुलके ख़ुशी ख़ुशी पूँछ हिलाने लग गया। ये देख राज को तसल्ली हुई और बहुत खुश हुआ।

पर दोनों एक ही मोहल्ले में रहते थे,फिर भी उनकी खुशी के मायने अलग कैसे?

शायद यही ये उनकी परवरिश और संगति का अंतर जो उनकी ख़ुशी के मायने तक बदल देते हैं।।।

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